प्रदेश
राजिम-रायपुर नई मेमू रेल सेवा का मुख्यमंत्री साय ने किया शुभारंभ
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजिम में नई रेल सेवा का शुभारंभ किया। उन्होंने क्षेत्र के लोगों की आवागमन सुविधा में वृद्धि करते हुए राजिम से रायपुर के लिए नई मेमू ट्रेन सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने राजिम-रायपुर-राजिम मेमू नई ट्रेन सेवा तथा रायपुर-अभनपुर 2 मेमू रेल सेवा का राजिम तक विस्तार भी प्रारंभ किया। भारी संख्या में यात्री इस अवसर पर ट्रेन में सवार हुए और उत्साहपूर्वक रायपुर की ओर रवाना हुए। सस्ती एवं सुलभ नई रेल सुविधा मिलने से पूरे क्षेत्र में हर्ष और उल्लास का वातावरण रहा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस नई रेल सेवा से राजिम सहित गरियाबंद एवं देवभोग क्षेत्र के लोगों को भी राजधानी रायपुर तक सस्ती और किफायती यात्रा का विकल्प प्राप्त होगा। विद्यार्थी, नौकरीपेशा वर्ग और व्यापारी वर्ग सहित सभी के लिए यह ट्रेन अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का प्रयाग, राजिम अब रेल नेटवर्क से जुड़ गया है। ग्रामीण अंचलों से राजधानी रायपुर का आवागमन अब और अधिक सुगम, सुविधाजनक और किफायती बन गया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद से लगातार 19 महीनों से विकास की गति निरंतर अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से हो रहा निवेश आने वाली पीढ़ियों के लिए नया भविष्य गढ़ेगा। उन्होंने बताया कि लगभग आठ वर्ष पूर्व धमतरी से रायपुर तक नैरोगेज ट्रेन चलती थी और अब आठ वर्षों के अंतराल के बाद यहां ब्रॉडगेज ट्रेन सुविधा उपलब्ध हुई है। इसके लिए उन्होंने पूरे छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ में रेलवे की लगभग 45,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में लगभग 7,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे प्रदेश में रेल सेवाओं का तीव्र विस्तार और विकास सुनिश्चित हो रहा है।





इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, लोकसभा सांसद रायपुर बृजमोहन अग्रवाल, महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी, अभनपुर विधायक इन्द्रकुमार साहू, राजिम विधायक रोहित साहू, छत्तीसगढ़ राज्य भंडार गृह निगम के अध्यक्ष चंदूलाल साहू, नगर पालिका गोबरा नवापारा अध्यक्ष ओमकुमारी संजय साहू, नगर पंचायत राजिम अध्यक्ष महेश यादव सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश, रेलवे अधिकारी-कर्मचारी एवं भारी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
वन मंत्री एवं रायपुर जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि इस नई सेवा से छत्तीसगढ़ के प्रयाग राजिम तक सीधी रेल पहुँच सुनिश्चित हो गई है, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि 22 मई को ‘निर्मल भारत रेलवे स्टेशन’ के नाम से देश के 103 रेलवे स्टेशनों को मॉडिफाई करने के लिए चयनित किया गया, जिनमें से छत्तीसगढ़ के पाँच रेलवे स्टेशन शामिल हैं और 32 स्टेशन भी इस योजना में जोड़े गए हैं। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया और मुख्यमंत्री श्री साय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 45,000 करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाएँ चालू हैं, जिनसे रेल कनेक्टिविटी में तेजी आएगी। बस्तर को भी इससे लाभ हो रहा है और रावघाट प्रोजेक्ट के अंतर्गत 140 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन का कार्य प्रगति पर है।
रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के प्रयागराज राजिम में बाहर से साधु-संत एवं पर्यटक भारी संख्या में आते हैं। अब उन्हें सीधे रायपुर से राजिम आने की सुविधा मिलेगी, जिससे पर्यटन एवं क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी और विश्व पटल पर राजिम का नाम और अधिक रोशन होगा।
महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी ने नई रेल सेवा के लिए लोगों को बधाई देते हुए कहा कि अब राजिम से रायपुर आना बहुत आसान हो गया है। श्रद्धालु एवं पर्यटक यात्री अब राजिम से सीधे डोंगरगढ़ तक भी यात्रा कर सकेंगे।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर रेल मंडल से प्राप्त जानकारी के अनुसार रायपुर-अभनपुर-रायपुर मेमू पैसेंजर ट्रेन का परिचालन अब राजिम तक किया जाएगा। 19 सितम्बर 2025 से नियमित समय-सारणी के अनुसार गाड़ी संख्या 68766/68767 राजिम-अभनपुर-रायपुर मेमू पैसेंजर प्रतिदिन दोनों छोरों—राजिम और रायपुर—से संचालित होगी। इस ट्रेन में 06 सामान्य श्रेणी के डिब्बे तथा 02 पावरकार सहित कुल 08 कोच होंगे।
शिक्षा सचिव को हाईकोर्ट ने किया तलब, 17 अक्टूबर को होना होगा पेश
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव को तलब किया है। अगली सुनवाई में सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। दरअसल हाईकोर्ट ने प्रदेश में चल रहे गैर-मान्यता प्राप्त नर्सरी और प्राइमरी स्कूलों पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि अब तक ऐसे स्कूलों पर क्या कार्रवाई हुई है। पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि नर्सरी स्कूल ऐसे खुल रहे हैं जैसे गली-मोहल्लों में पान की दुकान। कोर्ट ने शिक्षा सचिव को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होकर कार्रवाई की स्थिति बताने का आदेश दिया है।
शिक्षा के अधिकार और गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान बुधवार को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सख्त सवाल किए। मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने पूछा कि प्रदेश में चल रहे अवैध और गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों के खिलाफ अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि पिछली सुनवाई में जो दिशा-निर्देश दिए गए थे, उनका पालन हुआ या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।
चीफ जस्टिस की तीखी टिप्पणी
पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था,
“गली-मोहल्लों में बिना मान्यता के नर्सरी स्कूल ऐसे खोले जा रहे हैं जैसे पान की दुकान हो। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है और स्कूल मालिक मर्सिडीज में घूम रहे हैं।”
कोर्ट ने यह भी कहा था कि 2013 से नर्सरी स्कूलों के लिए मान्यता लेने का प्रावधान है। इसके बावजूद यदि आज भी ऐसे स्कूल बिना अनुमति चल रहे हैं, तो यह सीधे-सीधे अपराध की श्रेणी में आता है।
जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दे
यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता भगवंत राव ने एडवोकेट देवर्षि ठाकुर के माध्यम से दायर की है। याचिका में दो अहम मुद्दों पर कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है –
निजी स्कूलों में RTE का उल्लंघन: याचिका में कहा गया है कि निजी स्कूल शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून के तहत दस प्रतिशत कमजोर वर्ग के बच्चों को प्रवेश नहीं दे रहे।
गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों का संचालन: बड़ी संख्या में नर्सरी और प्राइमरी स्कूल बिना किसी सरकारी अनुमति के चल रहे हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों की सुरक्षा पर प्रश्न खड़े होते हैं।
सरकार का जवाब असंतोषजनक
बुधवार को हुई सुनवाई में शासन की ओर से पेश जवाब को कोर्ट ने असंतोषजनक पाया। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट कहा कि केवल कागजों पर कार्रवाई का दावा करना पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने शिक्षा सचिव को अगली सुनवाई में स्वयं उपस्थित होकर बताने का आदेश दिया कि अब तक क्या कार्रवाई की गई है और आगे क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।
अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को
इस मामले की अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को तय की गई है। तब तक सरकार को अपनी कार्ययोजना और कार्रवाई रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करनी होगी। माना जा रहा है कि इस सुनवाई में प्रदेश के सभी गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों पर बड़ी कार्रवाई की दिशा तय हो सकती है।
पक्का आशियाना मिलने से खिले चेहरे, भवन अनुज्ञा और वय वंदन कार्ड सहित कई योजनाओं का लाभ
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित सेवा पखवाड़े में हितग्राहियों को राज्य एवं केंद्र सरकार की योजनाओं का भरपूर लाभ मिल रहा है। अपनी जरूरते पूरी होने और परेशानियों से मुक्ति मिलने से हितग्राहियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। बिलासपुर में हुए कार्यक्रम में जरूरतमंद परिवारों को पक्के आशियाने की चाबी, भवन अनुज्ञा, पहले किश्त की राशि और वय वंदन कार्ड प्रदान किए गए। इसके साथ ही लखपति दीदियों को सम्मानित किया गया।

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी से लाभान्वित कुदुदन निवासी ममता दुबे को आवास स्वीकृत हुआ और भवन का नक्शा मिलने पर उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब उन्हें किराए के घर से निजात मिल गई है। इसी तरह हेमूनगर की गोटीवाड़ा विजया और बिजौर निवासी ओम साहू को घर की चाबी मिलने पर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। विजय ने बताया कि पति ड्राइविंग का काम करते हैं आमदनी इतनी नहीं कि खुद का घर बना सकें पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आवास योजना से अब उनका पक्के घर का सपना साकार हो गया है और कच्चे घर से निजात मिल गई। इसी तरह अशोक नगर निवासी संतोषी श्रीवास व पूनम टंडन लिंगियाडीह निवासी को खमतराई, और बहतराई में मकान आवंटित हुआ और उन्हें पहले किश्त का चेक प्राप्त हुआ। उन्होंने खुशी से बताया कि अब उनका अपने खुद के घर में रहने का सपना साकार होने जा रहा है। वहीं रानी यादव सरकंडा थाना के सामने बेजा कब्जा कर परिवार के साथ रह रही थी जिसके कभी टूटने की आशंका है उन्होंने बताया कि घर तोड़े जाने का उन्हें नोटिस भी जारी किया गया है पर अब आवास स्वीकृत होने से उनकी एक बड़ी चिंता दूर हो गई है बहुत से हितग्राहियों को इस अवसर पर जहां गृह प्रवेश के लिए आवास की चाबी सौंपी गई वहीं लखपति दीदीयों का सम्मान भी किया गया। तालापारा, ख्वाजा नगर निवासी अब्दुल नईम को आवास स्वीकृत हुआ। मैकेनिक का कार्य करने वाले नईम ने बताया कि अब उनके परिवार को सुरक्षित छत मिल सकेगी।
बिलासपुर के ही हरनारायण पटेल, शांति देवी और विद्या परिहार को वय वंदन कार्ड के अंतर्गत पाँच लाख रुपये की स्वास्थ्य सहायता का लाभ मिला। सभी हितग्राहियों ने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन योजनाओं से उनके जीवन को एक नई उम्मीद और संबल मिला है।
कस्टम मिलिंग स्कैम में ईडी ने भिलाई में सुधाकर रावटे के घर मारा छापा
भिलाई। बहुचर्चित 140 करोड़ रुपये के कस्टम मिलिंग घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। गुरुवार सुबह करीब 6 बजे ED की चार सदस्यीय टीम ने भिलाई के हुडको इलाके में स्थित एक निजी निवास पर दबिश दी। टीम ने घर को चारों ओर से घेरकर महत्वपूर्ण दस्तावेजों और लेन-देन से जुड़े कागजों की छानबीन शुरू कर दी। इस दौरान टीम ने कई संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई के बाद घोटाले में और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।
इससे पहले आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने इस घोटाले में मुख्य आरोपी रिटायर्ड IAS अधिकारी अनिल टुटेजा और रायपुर के होटल कारोबारी अनवर ढेबर को गिरफ्तार किया था। दोनों से पूछताछ में मिले इनपुट्स के आधार पर ही ED ने भिलाई में छापा मारा है। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में कई अधिकारियों और मिलर्स की मिलीभगत के अहम सुराग मिले हैं, जिनके चलते यह रेड की गई। छत्तीसगढ़ सरकार हर साल किसानों से धान की खरीदी करती है और उसे चावल में बदलने के लिए मिलर्स को देती है।
तय शर्तों के मुताबिक, धान की मिलिंग करने पर मिलर्स को भुगतान किया जाता है। आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ। कई जगहों पर धान की मिलिंग कागजों पर ही दिखाकर भुगतान उठा लिया गया। इसके अलावा अधिकारियों और मिलर्स की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस घोटाले का पैमाना 140 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है।
IG दीपक कुमार झा ने नोडल अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के दिए निर्देश
सरगुजा। सरगुजा रेंज में लंबित शिकायतों को लेकर पुलिस महानिरीक्षक दीपक कुमार झा (भापुसे.) ने आज रेंज कार्यालय में नोडल अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित कर व्यापक चर्चा की। बैठक में आवेदकों से प्राप्त स्थानीय शिकायतें, जनता विरुद्ध शिकायतें और पुलिस मुख्यालय से प्रेषित शिकायत पत्रों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। आईजी ने लंबित मामलों को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को समय सीमा में जांच कर निराकरण करने के निर्देश दिए ताकि आम जनता में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़े।
बैठक में बताया गया कि लोकल स्तर पर प्राप्त शिकायतों की संख्या अधिक है और कई शिकायतें लंबित पड़ी हैं। इस पर आईजी ने अधिकारियों से कहा कि कोई भी पीड़ित व्यक्ति शिकायत लेकर आए तो उसके आवेदन पर तत्परता से जांच कर निराकरण किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतों के लंबित रहने से पुलिस की कार्यशैली पर असर पड़ता है और जनता में असंतोष बढ़ता है। इसलिए हर आवेदन पर गहराई से जांच कर उसका समाधान सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसके अलावा उन्होंने वरिष्ठ कार्यालयों द्वारा भेजे गए शिकायत पत्रों पर भी ध्यान देने की बात कही। कई जिलों में समय पर प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किए जा रहे हैं, जिससे गंभीर और अनसुलझे प्रकरणों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। आईजी ने निर्देश दिया कि सभी नोडल अधिकारी शिकायतों का निराकरण समय सीमा में करें और लंबित मामलों को प्राथमिकता देकर सुलझाएं। उन्होंने कहा कि पुलिस की जवाबदेही बढ़े और जनता को राहत मिल सके।
बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमोलक सिंह ढिल्लों (सरगुजा), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विश्व दीप त्रिपाठी (बलरामपुर), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल (कोरिया), उप पुलिस अधीक्षक मंजू लता बाज (जशपुर), उप पुलिस अधीक्षक महालक्ष्मी कुलदीप (सूरजपुर), उप पुलिस अधीक्षक तरसीला टोप्पो (एमसीबी) सहित कार्यालय की शिकायत शाखा प्रभारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों को लंबित मामलों की सूची सौंपते हुए उनका निराकरण कराने की जिम्मेदारी दी गई। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि शिकायतों का समय पर समाधान होने से न केवल पुलिस पर जनता का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि अपराध और असंतोष की घटनाओं में भी कमी आएगी। आईजी ने निर्देश दिया कि नोडल अधिकारी अपने-अपने जिलों में लंबित शिकायतों की समीक्षा कर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करें और हर मामले का समाधान सुनिश्चित करें।
पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि आईजी द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन किया जाएगा और शिकायतों का निपटारा तेजी से किया जाएगा। आईजी ने कहा कि पुलिस की कार्यप्रणाली पारदर्शी और संवेदनशील होनी चाहिए ताकि जनता किसी भी प्रकार की समस्या के समाधान के लिए सीधे पुलिस के पास आए और उन्हें न्याय मिल सके। इस समीक्षा बैठक से यह स्पष्ट हुआ कि सरगुजा रेंज में पुलिस प्रशासन अब शिकायतों को गंभीरता से लेकर समय पर कार्रवाई करने की दिशा में कदम उठा रहा है। आने वाले दिनों में नोडल अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर लंबित मामलों के समाधान की स्थिति का पुनः मूल्यांकन किया जाएगा। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ेगी, बल्कि जनता के बीच पुलिस की सकारात्मक छवि भी मजबूत होगी।
शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में स्कूल शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण बैठक आज, वेतन-पेंशन सहित इन एजेंडों पर होगी चर्चा
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग की बैठक स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की अध्यक्षता में कल 18 सितम्बर को सुबह 11: 00 बजे से मंत्रालय, महानदी भवन में आयोजित की जाएगी।
बैठक में विभागीय कार्यों की समीक्षा एवं विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भवन विहीन एवं डिस्मेन्टल योग्य शालाओं की स्थिति, लघु मरम्मत कार्य, शौचालयों की मरम्मत, निःशुल्क पाठ्यपुस्तक, गणवेश एवं सायकल वितरण, लंबित पेंशन और वेतन निर्धारण, सेवानिवृत्त एवं मृतक कर्मचारियों को हितलाभ भुगतान, न्यायालयीन प्रकरण की अद्यतन स्थिति पर चर्चा की जाएगी। इसी प्रकार छात्रवृत्ति योजनाएं, मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता कार्यक्रम, रजत जयंती कार्यक्रम तथा सेजेस भर्ती की अद्यतन स्थिति पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया जाएगा।
इसके साथ ही स्थापना, वित्त, लेखा शाखा में लंबे समय से पदस्थ क्लेरिकल स्टाफ की जानकारी, आगामी 03 वर्षों की कार्ययोजना, पी.एम. ई-विद्या चौनल एवं दीक्षा पोर्टल के प्रचार-प्रसार, नवीन डाइट सूरजपुर एवं गरियाबंद में पदस्थापना की कार्यवाही तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत किये जा रहे कार्यों की सतत मॉनिटरिंग जैसे विषय भी एजेंडा में शामिल हैं।
बैठक में लोक शिक्षण संचालनालय, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के वरिष्ठ अधिकारी, सभी संभागीय संयुक्त संचालक, समस्त जिला शिक्षा अधिकारी एवं समस्त जिला मिशन समन्वयक सहित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहेंगे। विभागीय कार्यों की समीक्षा के साथ ही आगामी वर्षों के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने पर विशेष जोर रहेगा।
छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन हेमंत वर्मा ने दिया इस्तीफा
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन हेमंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है, लेकिन अभी तक ऊर्जा विभाग से प्रभार सौंपने का आदेश जारी नहीं हुआ है। जल्द ही नए चेयरमैन की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इस पद के लिए मुख्य सचिव अमिताभ जैन सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम चर्चा में हैं। हेमंत वर्मा ने जुलाई 2021 में छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था। उनका कार्यकाल जुलाई 2026 तक होना था, लेकिन एक साल पहले ही उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया है। उन्हें त्रिपुरा बिजली विनियामक आयोग में चयनित किया गया है और वे 19 सितंबर 2025 को छत्तीसगढ़ से रिलीव हो जाएंगे। इसके बाद चेयरमैन का पद खाली हो जाएगा।
बताया जा रहा है कि नए चेयरमैन की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी। इसके लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय चयन समिति नियुक्ति प्रक्रिया का संचालन करेगी। चेयरमैन का कार्यकाल पांच वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है। यह पद एक संवैधानिक पद है, जो सरकार बदलने के बावजूद बना रहता है और बिना उचित प्रक्रिया के चेयरमैन को हटाया नहीं जा सकता। नाम की चर्चा में शामिल मुख्य सचिव अमिताभ जैन का 30 सितंबर 2025 को एक्सटेंशन अवधि समाप्त हो रही है। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें बिजली विनियामक आयोग का चेयरमैन बनाए जाने की संभावनाएँ जताई जा रही हैं। हालांकि अभी तक औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। चयन समिति इस नियुक्ति के लिए योग्य और अनुभवी अधिकारियों पर विचार कर रही है।
हेमंत वर्मा का त्रिपुरा में चयन छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय बना हुआ है। उनके कार्यकाल में बिजली क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे। अब उनकी जगह नए चेयरमैन को नियुक्त कर आयोग की कार्यप्रणाली को सुचारु बनाए रखने की कोशिश की जाएगी। ऊर्जा विभाग ने अभी तक नए चेयरमैन के प्रभार से जुड़ा आदेश जारी नहीं किया है। वहीं, आयोग के कामकाज को सुचारु रूप से चलाने के लिए कार्यवाहक व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। आयोग में चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर बिजली क्षेत्र से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी भी उत्सुक हैं। आगे आने वाले दिनों में नियुक्ति प्रक्रिया तेज होगी और नए चेयरमैन के चयन से बिजली नियमन, दर निर्धारण, उपभोक्ता हित और नीति निर्माण से जुड़े कार्यों को नई दिशा मिलने की संभावना है। प्रशासन की नजर चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर है।
मुख्यमंत्री साय खारुन मईया समरसता भव्य महाआरती में हुए शामिल : महाआरती में मंत्रोच्चार से गूंजा खारुन नदी का महादेव घाट
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज शाम महादेव घाट, रायपुर में आयोजित खारुन मईया समरसता भव्य महाआरती में शामिल हुए। इस भव्य आयोजन का संयुक्त रूप से आयोजन सनातन ध्वज वाहिनी एवं महिला मोर्चा द्वारा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में किया गया। इस अवसर पर खारुन नदी तट पर 21 सौ दीपों का दीपदान भी किया गया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में देश का गौरव पूरी दुनिया में बढ़ा है। वे आज आधुनिक भारत के शिल्पकार हैं और विकसित भारत के निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। इसका लाभ देश की 140 करोड़ जनता को मिल रहा है। उन्होंने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। उसके अनुरूप छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य का दर्जा दिलाने के लिए हमारी डबल इंजन की सरकार दृढ़ता और प्रतिबद्धता के साथ हर मोर्चे पर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने आगे कहा कि साध्वी प्रज्ञा भारती के नेतृत्व में चंद्रपुर स्थित महानदी तट पर गंगा आरती की शुरुआत हुई थी, जो आज भी निरंतर जारी है। उस आरती में वे स्वयं उपस्थित रहे। इसके बाद रायगढ़ की केलो नदी में भी गंगा आरती प्रारंभ हुई, जो नदी संरक्षण की दिशा में एक उत्कृष्ट पहल है। उन्होंने खारुन नदी में भी समय-समय पर गंगा आरती आयोजित करने की अपील की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं। साथ ही उन्होंने पूरे प्रदेशवासियों को विश्वकर्मा जयंती की भी शुभकामनाएँ दी तथा इस भव्य आयोजन के लिए सनातन ध्वज वाहिनी एवं महिला मोर्चा के सदस्यों की सराहना की।
रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि नदियों की आरती हमारी आस्था का प्रतीक है। इसके माध्यम से हम नदियों से जुड़ते हैं और उनके संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी निभाते हैं। यह परंपरा नई नहीं, बल्कि सदियों से हमारे सनातन धर्म का अभिन्न हिस्सा रही है। नदियाँ आदि काल से ही हमारी आस्था और संस्कृति का प्रमुख केंद्र रही हैं। सांसद श्री अग्रवाल ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की बधाई और शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर पूज्य साध्वी प्रज्ञा भारती, रायपुर ग्रामीण विधायक मोती लाल साहू, महापौर मीनल चौबे, अपेक्स अध्यक्ष केदार गुप्ता, नॉन अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित थे।
रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज रिश्वत मामला : उच्च न्यायालय में आरोपियों की याचिका पर हुई सुनवाई
बिलासपुर। रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज रायपुर को रिश्वत के बदले अनुकूल निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करने में कथित रूप से मदद करने के आरोप में सीबीआई के गिरफ्त में आए निरीक्षक दल में शामिल 3 सदस्यों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। जेल में बंद डॉक्टर चैत्रा श्रीधर, रविचंद्रन के और मयूर महेंद्र भाई रावल ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से याचिका लगाई है। इस मामले में आज चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा की सिंगल बैंच में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने 28 अगस्त 2025 के न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए जवाब पेश किया। इसके प्रत्युत्तर के लिए याचिकाकर्ताओं को 2 सप्ताह का समय दिया गया है।
जमानत याचिका की सुनवाई में अधिवक्ता मनोज परांजपे, अर्पण वर्मा, अधिवक्ता हर्षवर्धन परघानिया ने पक्ष रखा। वहीं सीबीआई की ओर से बी. गोपा कुमार और हिमांशु पांडे ने अपना पक्ष रखा। 25 अगस्त 2025 को हाइकोर्ट ने सीबीआई के अधिवक्ता को रिटर्न दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था, जिसे बुधवार को दाखिल किया गया।
दरअसल सीबीआई ने “श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च, नवा रायपुर, छत्तीसगढ़ के पदाधिकारियों, निरीक्षण करने वाले डॉक्टरों और अन्य बिचौलियों के खिलाफ रिश्वत के बदले मेडिकल कॉलेज की मान्यता के लिए आयोजित वैधानिक निरीक्षण प्रक्रिया में कथित रूप से हेरफेर करने के आरोप में मामला दर्ज किया था। वहीं कथित तौर पर नामित मूल्यांकनकर्ताओं ने अवैध रिश्वत के बदले विभिन्न मेडिकल कॉलेजों को अनुकूल रिपोर्ट दी। श्री रावतपुरा सरकार संस्थान के अधिकारियों द्वारा निरीक्षण के लिए नियुक्त मूल्यांकनकर्ताओं को कथित तौर पर प्रभावित करने की सूचना पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने जाल बिछाया था।
मुख्यमंत्री 18 सितम्बर को करेंगे रायपुर-राजिम-रायपुर मेमू पैसेंजर नई सेवा का शुभारंभ
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 18 सितम्बर को रायपुर-राजिम-रायपुर मेमू पैसेंजर नई सेवा का शुभारंभ राजिम रेलवे स्टेशन से प्रातः 10:30 बजे करेंगे। इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल एवं रूपकुमारी चौधरी, विधायक इन्द्रकुमार साहू और रोहित साहू की गरिमामय उपस्थिति रहेगी।
रायपुर-राजिम-रायपुर मेमू पैसेंजर नई सेवा से यात्रियों को सुगम, सुलभ और किफायती यात्रा का विकल्प उपलब्ध होगा। ग्रामीण अंचलों से राजधानी रायपुर का आवागमन अधिक सुविधाजनक बनेगा। राजधानी आने वाले विद्यार्थी, नौकरीपेशा वर्ग और व्यापारी वर्ग के लिए यह ट्रेन विशेष रूप से उपयोगी होगी। इसके साथ ही इस नई सेवा से छत्तीसगढ़ के प्रयाग—राजिम तक सीधी रेल पहुँच सुनिश्चित होगी, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर रेल मंडल से प्राप्त जानकारी के अनुसार रायपुर और अभनपुर के मध्य संचालित रायपुर-अभनपुर-रायपुर मेमू पैसेंजर ट्रेन का परिचालन अब राजिम तक विस्तार किया जा रहा है। 19 सितम्बर 2025 से नियमित समय-सारणी के अनुसार गाड़ी संख्या 68766/68767 रायपुर-राजिम-रायपुर मेमू पैसेंजर प्रतिदिन दोनों छोर से—राजिम और रायपुर से—संचालित होगी। इस ट्रेन में 06 सामान्य श्रेणी के डिब्बे तथा 02 पावरकार सहित कुल 08 कोच होंगे।
आदि कर्मयोगी लाएंगे जनजातीय गांवों में जमीनी बदलाव : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर स्थित सड्डू के प्रयास आवासीय विद्यालय में आदि सेवा पखवाड़ा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आदि कर्मयोगी अभियान जनजातीय गांवों के जमीनी बदलाव की दिशा में ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश की 3 करोड़ जनता की ओर से प्रधानमंत्री श्री मोदी को जन्मदिन की बधाई दी और उनके शतायु एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। कार्यक्रम में अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक मोतीलाल साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।





मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी जनजातीय गांवों का ट्राइबल विजन डाक्यूमेंट 2030 तैयार किया जाएगा, जो दीर्घकालीन विकास का रोडमैप बनेगा। आगामी 2 अक्टूबर को आयोजित ग्राम सभाओं में इसका अनुमोदन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मध्यप्रदेश के धार से इस अभियान का राष्ट्रव्यापी शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आदि कर्मयोगी अभियान का उद्देश्य जनजातीय गांवों में नेतृत्व क्षमता का विकास करना है। इसके तहत ऐसे वालंटियर चिन्हांकित किए जाएंगे जो गांव की बेहतरी के लिए विजन रखते हों और उसे जमीनी स्तर पर लागू कर सकें। देशभर में 20 लाख वालंटियर तैयार करने का लक्ष्य है, जिनमें से छत्तीसगढ़ के 6,650 गांवों में 1 लाख 33 हजार वालंटियर तैयार किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सरकार ने आदि सेवा केंद्रों की स्थापना भी की है, जहां ग्रामीण शासन की सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे और अपनी शिकायतें भी दर्ज कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे देश की जनजातीय विरासत गौरवशाली रही है। राज्य सरकार शहीद वीरनारायण सिंह और गुंडाधुर जैसे जनजातीय नायकों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ रही है। नवा रायपुर में जनजातीय नायकों की स्मृतियों को सहेजने के लिए म्यूजियम का निर्माण किया जा रहा है। वहीं ट्राइबल म्यूजियम में छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा जनजातीय गांवों के लिए पीएम जनमन योजना तथा धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष ग्राम अभियान के अंतर्गत दिए गए बजट के अनुरूप तेजी से कार्य हो रहा है। जिन क्षेत्रों तक विकास की गति अभी पूर्ण रूप से नहीं पहुँची है, वहाँ अब आदि कर्मयोगी अभियान के माध्यम से प्रत्येक घर तक विकास पहुँचाया जाएगा और समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।
आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि आदि कर्मयोगी अभियान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि का परिणाम है। इसके माध्यम से देश के 11 करोड़ से अधिक आदिवासियों के विकास को नई दिशा और गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में लोकप्रिय नेता और नए भारत के निर्माता प्रधानमंत्री श्री मोदी के प्रयास से ही 2047 तक विकसित भारत का संकल्प अवश्य पूरा होगा। हमारी सरकार सेवा, समर्पण और मिशन मोड पर आदि कर्मयोगी अभियान को आगे बढ़ा रही है। रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी सबका साथ-सबका विकास के सिद्धांत पर कार्य कर रहे हैं और आदि कर्मयोगी अभियान से जनजातीय समाज का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होगा।
आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणी बोरा ने विभागीय प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रदेश के 6,650 गांवों में 1 लाख 33 हजार आदि साथी व आदि सहयोगी तैयार किए जा रहे हैं। ये सहयोगी आदिवासी परिवारों से उनकी भाषा में संवाद कर उनकी समस्याओं व अपेक्षाओं को समझेंगे और विकास की दिशा तय करने में सहभागी बनेंगे। उन्होंने कहा कि आगामी राज्योत्सव तक 50 हजार आदि कर्मयोगी तैयार करने का लक्ष्य है। साथ ही, शिष्यवृत्ति प्रदाय की समय-सीमा तय कर दी गई है ताकि विद्यार्थियों को राशि समय पर उनके खातों में प्राप्त हो सके।
शिष्यवृत्ति और भोजन सहायता के तहत 6.2 करोड़ की राशि अंतरित
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आदि सेवा पखवाड़ा के शुभारंभ अवसर पर आदिम जाति विकास, अनुसूचित जाति विकास तथा पिछड़ा वर्ग विभाग की योजनाओं के तहत प्रदेश के आश्रम-छात्रावासों में निवासरत 8,370 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति एवं भोजन सहायता योजना की राशि 6 करोड़ 2 लाख 19 हजार 270 रुपये का ऑनलाइन अंतरण उनके खातों में किया।
एक पेड़ मां के नाम 2.0 के तहत पौधरोपण
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रयास आदर्श आवासीय विद्यालय परिसर में एक पेड़ मां के नाम 2.0 के अंतर्गत जामुन का पौधा रोपा। इस अवसर पर विद्यालय के विद्यार्थियों ने पेंटिंग व रंगोली प्रदर्शित की, जिनका मुख्यमंत्री ने अवलोकन किया और बच्चों की रचनात्मकता की सराहना की। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री को उनके चित्र की पेंटिंग भेंट की।
मुख्यमंत्री ने विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों के साथ किया भोजन
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रयास आवासीय विद्यालय सड्डू में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के छात्र किशन बैगा और छात्रा अंजुला बैगा को अपने बगल में बैठाकर विद्यार्थियों के साथ भोजन किया। मुख्यमंत्री ने बच्चों के साथ मुनगा की सब्जी, पूड़ी और दाल-भात का स्वाद लेते हुए उनसे आत्मीय बातचीत की। किशन ने बताया कि वह मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के लाखनटोला गांव का निवासी है और प्रयास विद्यालय सड्डू में कक्षा 11वीं में अध्ययनरत है। मुख्यमंत्री ने उससे गांव में प्रधानमंत्री जनमन योजना के कार्यों के बारे में पूछा। कक्षा 12वीं की छात्रा अंजुला ने बताया कि वह देवगढ़ गांव (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) की रहने वाली है और जीव विज्ञान विषय लेकर पढ़ाई कर रही है। मुख्यमंत्री ने दोनों को मन लगाकर पढ़ाई करने की प्रेरणा दी और उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया।

मुख्यमंत्री साय ने किया श्रम विभाग द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज रायपुर के इंडोर स्टेडियम में श्रम विभाग द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। छत्तीसगढ़ की रजत जयंती और विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर श्रम विभाग द्वारा 12 से 19 सितम्बर तक प्रदेश के सभी जिलों में 55 स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, निःशुल्क दवा वितरण, श्रमिक पंजीयन और नवीनीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। निर्माण श्रमिकों के कौशल उन्नयन के लिए महासमुंद, बिलासपुर और राजनांदगांव जिलों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं। अन्य जिलों में भी श्रमिकों को प्रशिक्षण देने की तैयारी की जा रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महासम्मेलन स्थल पर श्रमिकों के लिए सुरक्षा संबंधी सामग्री और विभागीय योजनाओं पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कर्मचारी राज्य बीमा सेवाओं द्वारा रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। वहीं श्रम कल्याण मंडल द्वारा श्रमिकों को निःशुल्क चश्मों का वितरण किया गया।

श्रमिक महासम्मेलन में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत श्रमिकों को करोड़ों रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई। भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के तहत 1.77 लाख से अधिक श्रमिकों को 58.32 करोड़ रुपये, असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के तहत 3,839 श्रमिकों को 4.77 करोड़ रुपये तथा श्रम कल्याण मंडल के तहत 3,332 श्रमिकों को 2.06 करोड़ रुपये की सहायता राशि हितग्राहियों के खातों में सीधे अंतरित की गई। इसमें दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना, मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तीकरण योजना, मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, श्रमिक औजार सहायता योजना, सिलाई मशीन सहायता योजना और सायकल सहायता योजना सहित कई कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत राशि सीधे श्रमिकों के खातों में जमा की गई।
श्रमवीर समाज की रीढ़ हैं, उनके योगदान से ही विकसित छत्तीसगढ़ का सपना होगा साकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर राजधानी रायपुर के इंडोर स्टेडियम में आयोजित श्रमिक महासम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के निर्माण और विकास में श्रमवीरों की भूमिका अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि श्रमवीर समाज की रीढ़ हैं और उनके योगदान से ही विकसित छत्तीसगढ़ तथा विकसित भारत का सपना साकार होगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रमिकों के परिश्रम और योगदान की सराहना करते हुए कहा कि श्रमवीरों के उत्साह और भागीदारी से प्रदेशवासियों के सपने पूरे होंगे। इस अवसर पर उन्होंने भगवान विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएँ दीं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।



मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशभर के मेहनतकश श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदान किया। उन्होंने घोषणा की कि दीदी ई-रिक्शा योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये की जाएगी। इसी प्रकार मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक सहायता योजना के अंतर्गत श्रमिकों को मकान निर्माण के लिए दी जाने वाली सहायता राशि 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये की जाएगी। साथ ही, पंजीकृत श्रमिकों की नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच और इलाज का संपूर्ण खर्च अब श्रम विभाग द्वारा किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया और बीते 11 वर्षों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जनहितैषी कार्यों से प्रदेश के विकास को नई गति दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ की रजत जयंती पर हम सभी श्रमवीरों के परिश्रम को नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार श्रमिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है—चाहे वह स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा हो या आवास और औजारों की सुविधा, सरकार हर कदम पर श्रमिकों के साथ खड़ी है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि आज 1 लाख 84 हजार 220 श्रमिकों के खातों में श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं—दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना, मिनीमाता महतारी जतन योजना, निर्माण श्रमिक मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना, छात्रवृत्ति योजना आदि के अंतर्गत 65 करोड़ 16 लाख 61 हजार रुपये से अधिक की राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित की गई है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता हमारी सरकार की पहचान है। किसानों और श्रमिकों का पैसा सीधे उनके खातों में पहुँच रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए ई-श्रम पोर्टल से श्रमिकों को बड़ी राहत मिली है। अब अपंजीकृत श्रमिक की कार्यस्थल पर मृत्यु होने पर भी एक लाख रुपये की सहायता राशि का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘श्रमेव जयते’ वेबसाइट और हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से शिकायतों का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। उन्होंने शिक्षा पर जोर देते हुए ‘‘अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना’’ और श्रमिकों के बच्चों के लिए आईआईटी, जेईई, नीट एवं सीए जैसी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए ‘ट्राइबल हॉस्टल’ की सीटें 50 से बढ़ाकर 185 कर दी गई हैं।
इस अवसर पर श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि श्रमिकों की देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि आज श्रमिक महासम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा प्रदेश के 1.84 लाख श्रमिकों के खातों में 65.16 करोड़ रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित की गई है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से विकास की ओर अग्रसर है और राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री मोदी की गारंटी को पूरी निष्ठा से पूरा कर रही है। श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से 72 योजनाएँ संचालित हो रही हैं, जिनका लाभ लगातार श्रमिक भाई-बहनों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में मुख्यमंत्री श्री साय ने अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना में चयनित बच्चों से भेंट की थी और घोषणा की थी कि अगले शैक्षणिक सत्र से इस योजना में सीटें 100 से बढ़ाकर 200 कर दी जाएँगी।
समारोह में कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, वन मंत्री केदार कश्यप, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायकगण राजेश मुणत, मोतीलाल साहू, अनुज शर्मा, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. राम प्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त चौबे, छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति आयोग के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा, जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, श्रम विभाग के सचिव हिम शिखर गुप्ता, संयुक्त सचिव फरिहा आलम, अपर आयुक्त श्रम एस.एल. जांगड़े, सविता मिश्रा, छत्तीसगढ़ भवन निर्माण एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के सचिव गिरीश रामटेके सहित अनेक जनप्रतिनिधिगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री साय रक्तदान अमृतोत्सव 2.0 कार्यक्रम में हुए शामिल
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर स्थित पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में आयोजित रक्तदान अमृतोत्सव 2.0 कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा अनिवार्य है। शिक्षा केवल डिग्री या नौकरी प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता का मूल आधार है।
इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना राज्य प्रकोष्ठ, उच्च शिक्षा विभाग एवं पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय द्वारा सेवा पखवाड़े का शुभारंभ किया गया। 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में प्रदेशभर के महाविद्यालयों में रक्तदान सहित विविध गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने रक्तदान कर रहे युवाओं से मुलाकात कर उन्हें शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि रक्तदान न केवल जीवन रक्षा का माध्यम है, बल्कि रक्तदाता के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। यह सबसे बड़ा दान है, जिसे बार-बार किया जा सकता है।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रही है और विद्यार्थियों को उपलब्ध सुविधाओं का पूरा लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज और वन संपदा सहित अनेक क्षेत्रों में समृद्ध है। ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ की पहचान पूरे देश में है। नक्सलवाद जैसी बाधाओं को सुरक्षा बलों के साहस और निरंतर अभियानों से समाप्त किया जा रहा है। जल्द ही बस्तर में विकास की गंगा बहेगी और एक विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण होगा।
उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि युवाओं का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उच्च शिक्षा विभाग में 700 पदों पर भर्ती की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने एनएसएस को समाज को जोड़ने वाला सशक्त विचार बताया।
कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि भारतीय संस्कृति में सेवा का भाव निहित है और रक्तदान सबसे बड़ा दान है। सरकार का लक्ष्य युवाओं को शिक्षा और रोजगार उपलब्ध कराते हुए उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि सेवा जीवन का सार है। रक्तदान या शिक्षा—किसी भी माध्यम से सेवा जीवन को यशस्वी बनाती है।


कार्यक्रम में आयुक्त उच्च शिक्षा संतोष देवांगन, कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ल, राज्य एनएसएस अधिकारी डॉ. नीता बाजपेयी, कुलसचिव प्रो. अम्बर व्यास सहित बड़ी संख्या में एनएसएस स्वयंसेवक विद्यार्थी उपस्थित थे।
गुजरात दौरे से लौटे शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव के दिए संकेत
रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की तैयारी है। छत्तीसगढ़ में गुजरात के शिक्षा मॉडल को अपनाने की तैयारी है। गुजरात के शैक्षिक संस्थानों का दौरा कर लौटे छत्तीसगढ़ के मंत्री गजेंद्र यादव ने इस बात के संकेत दिये हैं। उन्होंने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलावों का संकेत दिया है। यादव ने कहा कि नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विज़न है कि शिक्षा को अंतरिक्ष ज्ञान से जोड़ा जाए, और गुजरात इसका जीवंत उदाहरण है।
मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि गुजरात दौरे के दौरान उन्होंने कई शैक्षिक परिसरों का निरीक्षण किया। विशेष रूप से गांधीनगर स्थित विद्या समीक्षा केंद्र का निरीक्षण किया गया, जहां स्कूलों के प्रदर्शन, बच्चों की उपस्थिति और सीखने की गुणवत्ता को डिजिटल तरीके से मॉनिटर किया जाता है। यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी ऐसी प्रणाली लागू करने की योजना है ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में और सुधार हो सके।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में 11 जगहों पर नालंदा परिसर बनाने की योजना है। इन परिसरों का उद्देश्य शिक्षकों के प्रशिक्षण, नई तकनीकों के प्रयोग और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि गुजरात के पुंद्राशन प्राथमिक शाला का दौरा किया गया, जहां स्मार्ट क्लास और डिजिटल टूल्स का प्रयोग कर बच्चों को पढ़ाया जा रहा था।
मॉडल स्कूल और स्मार्ट क्लास की योजना
मॉडल स्कूल बनाने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल मॉडल स्कूल बनाने का नहीं है बल्कि सभी स्कूलों को बेहतर बनाना है। उन्होंने बताया कि पहले सत्र में ही 1000 से ज्यादा स्कूलों को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा चुका है। इनमें ई-लर्निंग, कंप्यूटर आधारित शिक्षा और डिजिटल सिस्टम को जोड़ा जा रहा है।गुजरात में सैटेलाइट सिस्टम के जरिए कक्षाओं में चैनल चलाए जा रहे हैं, जिससे बच्चे सीधे राज्य स्तरीय शिक्षकों और विशेषज्ञों से सीख सकते हैं। गजेंद्र यादव ने कहा कि इस मॉडल को छत्तीसगढ़ में भी लागू करने की योजना है।
भविष्य की दिशा
मंत्री ने यह भी कहा कि शिक्षा मंत्रालय में जल्द ही शिक्षकों और छात्रों के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा। इससे शिक्षा की गुणवत्ता की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकेगी। गुजरात दौरे के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि वहां की व्यवस्था ने यह साबित कर दिया है कि तकनीक के जरिए बच्चों को बेहतर शिक्षा दी जा सकती है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था और अधिक आधुनिक और सुलभ होगी।
"प्रोजेक्ट संस्कृति" के ज़रिए उभरेगी रायपुर की सांस्कृतिक पहचान
रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोक कला, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से "प्रोजेक्ट संस्कृति" की शुरुआत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर की गई है। इस दिशा में कलेक्टर डॉ गौरव सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया।
बैठक की शुरुआत कलेक्टर डॉ. सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उम्मेद सिंह को काव्य संग्रह पुस्तक भेंट कर की गई। यह भेंट संस्कृति और साहित्य के प्रति सम्मान का प्रतीक रही। बैठक में "प्रोजेक्ट संस्कृति" को और प्रभावशाली बनाने को लेकर व्यापक चर्चा की गई।
कलेक्टर डॉ. सिंह ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि जिले के ऐसे विद्यार्थी और नागरिक, जिन्हें लेखन, पठन, गायन एवं नृत्य में रुचि है, उन्हें इस सांस्कृतिक अभियान से जोड़ा जाए। इसके तहत एक विशेष टीम गठित की जाएगी जो "प्रोजेक्ट संस्कृति" के सुचारू क्रियान्वयन सुनिश्चित करेगी।
बैठक में स्वदेशी जागरण मंच और छत्तीसगढ़ हार्मोनिका क्लब के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया और इस अभिनव पहल को सफल बनाने के लिए अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए।
इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन, जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारती समेत संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

स्वास्थ्य सचिव के अल्टीमेटम का भी नही हुआ असर, हड़ताल पर डटे एनएचएम कर्मचारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य सचिव के अल्टीमेटम के बाद भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारियों हड़ताल पर डटे हुए है। 16 सितंबर की शाम 5 बजें तक काम पर नही लौटने के बाद अब कलेक्टर के निर्देश पर हड़ताली कर्मचारियों को बर्खास्तगी का नोटिस जारी किया जाने लगा है। कोरबा में 21 कर्मचारियों को सेवा समाप्ति की नोटिस जारी की है। वहीं दूसरी तरफ हड़ताली कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगो के साथ ही पूर्व में बर्खास्त हुए 25 कर्मचारियों की बहाली की मांग को लेकर अड़े हुए है।
छत्तीसगढ़ में एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल से स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गया है। इस हड़ताल का व्यापक असर ग्रामीण क्षेत्र पर देखा जा रहा है, जहां के संचालित अधिकांश स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों का उपचार पूरी तरह से ठप्प हो गया है। उधर 18 अगस्त से जारी इस बेमियादी हड़ताल को लेकर 15 सितंबर को स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने अल्टीमेटम जारी किया था। पत्र में उन्होने स्पष्ट किया था कि यदि 16 सितंबर को कार्यालयीन समय में हड़ताली कर्मचारी वापस नही आते है, तो उन्होने एक माह का नोटिस जारी कर तत्काल सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जाये।
इसके साथ ही विभाग में रिक्त पदों पर नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने का भी उल्लेख किया था। स्वास्थ्य सचिव के इस पत्र के जारी होने के बाद शासन-प्रशासन को जहां हड़ताल खत्म होने की उम्मींद थी। वहीं इस पत्र ने हड़ताली संविदा कर्मियों का गुस्सा और भड़का दिया है। एनएचएम के प्रदेश संगठन ने साफ किया है कि सरकार हड़ताली कर्मचारियों की मांगो को लेकर गंभीर नही है। वहीं पूर्व में 25 साथियों की बर्खास्तगी भी समाप्त नही किया गया। इसके बाद अब अन्य हड़तालियों पर सेवा समाप्ति का भय बनाया जा रहा है। पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन सारे दबावों से वे पीछे नही हटेंगे।
वहीं स्वास्थ्य सचिव के पत्र जारी होने के बाद अब अलग-अलग जिलों में हड़ताली कर्मचारियों को सेवा समाप्ति की नोटिस जारी किया जाने लगा है। सचिव के पत्र के बाद भी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग एक साथ सभी हड़ताली कर्मचारियों को नोटिस जारी करने के बजाये किश्तों में नोटिस जारी कर रहा है, ताकि उन पर दबाव बनाया जा सके। कोरबा जिले में सीएमएचओं ने 21 हड़ताली कर्मचारियों को सेवा समाप्ति से पूर्व नोटिस जारी किया है। वहीं बताया जा रहा है कि इस नोटिस के बाद कोरबा में हड़ताल में शामिल 9 कर्मचारी काम पर वापस लौट आये है। ऐसे में अब ये देखने वाली बात होगी कि सरकार हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उनकी सेवा समाप्ति पर मुहर लगाती है, या फिर उनकी जायज मांगो को मान लिया जाता है, ये तो आने वाला वक्त ही बतायेगा।

