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नक्सल विरोधी अभियान को ऐतिहासिक सफलता, 2025 में 272 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
दंतेवाड़ा। जिले में नक्सल विरोधी अभियान के तहत वर्ष 2025 में पुलिस को ऐतिहासिक सफलता मिली है। साल 2025 में कुल 272 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया, जिन पर शासन ने 2 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था, जबकि वर्ष 2024 में 234 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था, जिन पर मात्र 90 लाख रुपए का इनाम घोषित था। इससे स्पष्ट है कि वर्ष 2025 में न केवल आत्मसमर्पण करने वालों की संख्या बढ़ी है, बल्कि बड़े कैडर के नक्सलियों ने भी मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के बैंक खाते खुलवाए गए हैं। उन्हें कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही राशन कार्ड एवं बस पास जारी कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल की जा रही है। दंतेवाड़ा एसपी गौरव राय ने बताया कि वर्ष 2025 में UAPA एवं अन्य प्रकरणों में कुल 35 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया, जिन पर शासन से 17 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वहीं बीते वर्ष दंतेवाड़ा पुलिस ने नक्सल मुठभेड़ों में 4 नक्सलियों को मार गिराया, जिन पर कुल 54 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
DRG का सराहनीय योगदान
एसपी गौरव राय ने बताया कि DRG दंतेवाड़ा ने नक्सल विरोधी अभियानों में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। वर्ष 2025 में 03 स्वतंत्र DRG अभियान, DRG–CRPF के 10 संयुक्त अभियान एवं दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, बीजापुर और बस्तर के साथ 40 संयुक्त अभियानों को अंजाम दिया गया। इन अभियानों में उत्कृष्ट कार्य के लिए 04 जवानों को पुलिस पदक (PMG), 51 अधिकारी-कर्मचारियों को केंद्रीय गृह मंत्री दक्षता पदक, 08 जवानों को छत्तीसगढ़ शौर्य पदक एवं 40 जवानों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन से नवाजा गया। DRG दंतेवाड़ा ने ऑपरेशन ब्लैकफॉरेस्ट एवं अन्य अभियानों में भाग लेकर प्रतिबंधित CPI (माओवादी) के जनरल सेक्रेटरी बसवराजू, गौतम सहित CCM, PLGA, DVCM, ACM जैसे कई बड़े कैडरों को न्यूट्रलाइज करने में अहम भूमिका निभाई।
अपराध दर में आई गिरावट
दंतेवाड़ा जिले में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होने से गंभीर अपराधों में लगभग 7 प्रतिशत, अन्य अपराधों में 8.8 प्रतिशत तथा चोरी के मामलों में 14 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में जिला पुलिस दंतेवाड़ा ने कुल 397 अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
पुलिस प्रशिक्षण से बढ़ी कार्यकुशलता, साइबर अपराध पर सख्ती
नए आपराधिक कानूनों, iGOT कर्मयोगी एवं रिफ्रेशर कोर्स के माध्यम से 1759 पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया, जिससे अपराध अनुसंधान में दक्षता और कार्यकुशलता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2025 में 13 साइबर फ्रॉड के प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें 24 आरोपियों को पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु एवं केरल से गिरफ्तार किया गया। वर्ष 2024 की तुलना में इस वर्ष लगभग 5 गुना अधिक गिरफ्तारियां की गई है। गिरफ्तार आरोपियों के फिंगरप्रिंट NAFIS डाटाबेस में दर्ज किए गए हैं।
दंतेवाड़ा पुलिस ने वर्ष 2026 के तय किए ये लक्ष्य
जिला पुलिस दंतेवाड़ा ने वर्ष 2026 के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए हैं।
मार्च 2026 तक जिले से सशस्त्र माओवाद का पूर्ण उन्मूलन।
सड़क दुर्घटनाओं एवं दुर्घटना से होने वाली मौतों में कमी।
साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाकर त्वरित कार्रवाई।
वर्ष 2026 में DIAL 112 सेवा का क्रियान्वयन, जिससे जिले में आपातकालीन सेवाएं शुरू की जा सकेंगी
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में लंबित मामलों में ऐतिहासिक कमी, 2025 में न्यायिक दक्षता ने रचा नया कीर्तिमान
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (बिलासपुर हाईकोर्ट) की ओर से न्यायिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, संवेदनशील एवं समयबद्ध बनाने की दिशा में किए जा रहे सतत एवं समन्वित प्रयासों के परिणाम स्वरूप वर्ष 2025 में लंबित प्रकरणों की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। यह उपलब्धि त्वरित, पारदर्शी एवं सुलभ न्याय के प्रति उच्च न्यायालय की दृढ़ प्रतिबद्धता को प्रतिध्वनित करती है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की प्रेरणा, दूरदर्शी नेतृत्व एवं निरंतर मार्गदर्शन में उच्च न्यायालय ने “न्याय में देरी, न्याय से वंचना की भावना को आत्मसात करते हुए प्रकरणों के शीघ्र एवं प्रभावी निराकरण पर विशेष बल दिया है। उनके कुशल नेतृत्व में न्यायिक दक्षता, उत्तरदायित्व एवं संस्थागत उत्कृष्टता को सुदृढ करने के लिए ठोस नीतिगत दिशा-निर्देश, सतत निगरानी एवं न्याय वितरण प्रणाली से जुड़े सभी हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित किया गया।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एक जनवरी 2025 को उच्च न्यायालय में कुल 84,305 प्रकरण लंबित थे। वर्ष 2025 के दौरान 55,416 नवीन प्रकरण संस्थित हुए, जबकि इसी अवधि में 64,054 प्रकरणों का निराकरण किया गया। परिणाम स्वरूप वर्ष के अंत तक लंबित प्रकरणों की संख्या में 8,638 की कमी दर्ज की गई, जो लगभग 10.25 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट को दर्शाती है। विशेष रूप से यह तथ्य उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में निराकरण दर संस्थापन की तुलना में 115.59 प्रतिशत रही, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नए प्रकरणों की अपेक्षा अधिक पुराने प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया।
यह महत्वपूर्ण उपलब्धि मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की प्रेरणादायी सोच, न्यायाधीशों की अटूट प्रतिबद्धता, न्यायिक अधिकारियों एवं न्यायालयीन स्टाफ के समर्पित एवं समन्वित प्रयासों का नतीजा है। इन सामूहिक प्रयासों से न केवल न्यायिक प्रणाली की दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, बल्कि आम नागरिकों को शीघ्र एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में भी यह एक सशक्त और सार्थक कदम सिद्ध हुआ है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय भविष्य में भी लंबित प्रकरणों में निरंतर कमी लाने न्यायिक सुधारों को और अधिक सुदृढ करने तथा जनता द्वारा उस पर प्रदत्त विश्वा अक्षुण्ण बनाए रखने के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
आईएएस अफसरों को मिली पदोन्नति, शहला निगार बनाई गईं प्रमुख सचिव, 2017 बैच के 5 IAS अफसर बनाए गए संयुक्त सचिव
रायपुर। छत्तीसगढ़ में लंबे इंतज़ार के बाद आईएएस अधिकारियों का प्रमोशन हुआ है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी किया है। जारी आदेश के अनुसार 6 आईएएस अधिकारियों को पदोन्नति दी गई है। 2001 बैच की आईएएस अधिकारी शहला निगार को प्रमुख सचिव बनाया गया है. वहीं 2017 बैच के आईएएस आकाश छिकारा, रोहित व्यास, मयंक चतुर्वेदी, कुणाल दुदावत और चंद्रकांत वर्मा को संयुक्त सचिव बनाया गया है।
शहला निगार बनीं प्रमुख सचिव
2001 बैच की आईएएस अधिकारी शहला निगार को प्रमुख सचिव बनाया गया है। उन्हें कृषि उत्पादन आयुक्त के पद पर पदस्थ करते हुए प्रमुख सचिव, कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी, उद्यानिकी, मछलीपालन, पशुधन विकास विभाग, गन्ना आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
संयुक्त सचिव के पद पर 5 आईएएस
2017 बैच के आईएएस अधिकारियों आकाश छिकारा, रोहित व्यास (जशपुर), मयंक चतुर्वेदी (रायगढ़), कुणाल दुदावत (कोरबा) और चंद्रकांत वर्मा को संयुक्त सचिव बनाया गया है।


भारत माला परियोजना मुआवजा घोटाला: ईडी की रायपुर–महासमुंद में 10 ठिकानों पर छापेमारी, ₹40 लाख नकद जब्त
रायपुर। भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर–विशाखापट्टनम हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण में हुए कथित मुआवजा घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के रायपुर जोनल कार्यालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि इस मामले की जांच के सिलसिले में रायपुर और महासमुंद जिलों में 10 ठिकानों पर 29 दिसंबर 2025 को छापेमारी की गई।
ईडी की यह कार्रवाई हरमीत सिंह खनूजा सहित अन्य आरोपियों के आवासीय और शासकीय परिसरों पर की गई। जांच की शुरुआत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो/आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ACB/EOW), रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई है। एफआईआर में अभनपुर (रायपुर) के तत्कालीन एसडीओ (राजस्व) निर्भय साहू समेत अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
ईडी के अनुसार, आरोप है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान सरकारी अधिकारियों से मिलीभगत कर राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया। जांच में सामने आया कि आपराधिक षड्यंत्र के तहत बड़े भू-खंडों को जानबूझकर परिवार के सदस्यों के नाम पर पीछे की तारीखों में विभाजित दिखाया गया, ताकि यह प्रतीत हो कि अधिग्रहण से पहले ही जमीन छोटे-छोटे हिस्सों में बंटी हुई थी।
इस कथित फर्जी विभाजन के जरिए मुआवजा नीति का दुरुपयोग किया गया और अलग-अलग भू-स्वामियों के नाम पर अधिक मुआवजा हासिल किया गया। राजस्व अभिलेखों में बैकडेटेड प्रविष्टियां दिखाकर उन्हें स्वीकृत कराया गया, जिसके आधार पर अत्यधिक और अवैध मुआवजा राशि का भुगतान हुआ।
ईडी ने स्पष्ट किया कि इस तरीके से प्राप्त अतिरिक्त मुआवजा “अपराध से अर्जित आय” की श्रेणी में आता है, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ और आरोपियों को अवैध आर्थिक लाभ मिला।
छापेमारी के दौरान ईडी ने करीब 40 लाख रुपये नकद, कई डिजिटल उपकरण और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि अपराध से अर्जित धन से आरोपियों ने कई चल-अचल संपत्तियां खरीदी हैं, जिन्हें अपने या संबंधित व्यक्तियों के नाम पर दर्ज कराया गया।
प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है। धन के लेन-देन की पूरी श्रृंखला, अन्य लाभार्थियों की पहचान और कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।
खड़े ट्रेलर में भीषण आग, जिंदा जलकर 3 साल के मासूम की मौत
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में आज एक बड़ा हादसा हुआ, जहां खड़े ट्रेलर में आग लगने से 3 साल के मासूम की जलकर मौत हो गई। घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची है और मर्ग कायम कर घटना की जांच शुरू कर दी है। यह मामला रतनपुर के सांधी पारा का है। घटना के बाद परिवार में मातम पसर गया है।
जानकारी के मुताबिक खड़े ट्रेलर CG10 BJ 9291 की सीट पर बालक अनमोल यादव सो रहा था। इस दौरान ट्रेलर के इंजन में आग लग गई। इस हादसे में मासूम अनमोल की मौके पर ही जलकर मौत हो गई। बताया जा रहा कि पिता संजय यादव पेशे से ड्राइवर है। शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
नववर्ष स्वागत को लेकर धमतरी में सुरक्षा चाक-चौबंद, शहर में निकला फ्लैग मार्च
धमतरी। नववर्ष 2026 के आगमन पर शांति, कानून-व्यवस्था एवं जन-सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कलेक्टर धमतरी अविनाश मिश्रा और पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार के नेतृत्व में धमतरी शहर में फ्लैग मार्च निकाला गया.
शहर के प्रमुख मार्गों व भीड़भाड़ वाले इलाकों से फ्लैग मार्च होकर गुजरा. इसका उद्देश्य नागरिकों में सुरक्षा व विश्वास की भावना बढ़ाना, असामाजिक तत्वों पर कानून का प्रभाव स्थापित करना, नववर्ष का शांतिपूर्ण स्वागत सुनिश्चित करना था.
फ्लैग मार्च के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मणिशंकर चन्द्रा, डीएसपी सुमीना साहू, डीएसपी यशकरण दीप ध्रुव, एसडीएम पीयूष तिवारी, रक्षित निरीक्षक दीपक शर्मा, थाना प्रभारी सहित प्रशासन एवं पुलिस अमला शामिल रहा.
शहर में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था
ज़िले में 200 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं. नववर्ष के अवसर पर संभावित भीड़भाड़ और उत्सव को देखते हुए नाकेबंदी प्वाइंट लगाए गए हैं. सार्वजनिक एवं भीड़भाड़ वाले इलाकों में फिक्स पिकेट, लगातार मोबाइल पेट्रोलिंग टीमें, सक्रिय संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी होटल, रिसॉर्ट, वाटिका, गार्डन आदि कार्यक्रम स्थलों पर भी पुलिस बल की मौजूदगी सुनिश्चित की गई है.
बताया गया कि यातायात पर विशेष नियंत्रण रखा जाएगा. इसके लिए नशे में वाहन चलाने वालों पर ब्रिथ एनालाइजर से जांच के अलावा ओवरस्पीड, स्टंट व रेसिंग पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है. बिना हेलमेट व सीट बेल्ट वाहन चलाने वालों के साथ ट्रिपलिंग करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी. यही नहीं जाम से बचने हेतु यातायात मार्ग व्यवस्थित किए गए हैं.
डीजे व ध्वनि नियंत्रण नियम सख्ती से लागू
इसके अलावा निर्धारित समय सीमा के बाद डीजे प्रतिबंधित किया गया है. ध्वनि का स्तर नियमों के अनुरूप रहना अनिवार्य किया गया है. वाहनों में डीजे लादकर चलाना भी पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है. उल्लंघन पर जप्ती के साथ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
असामाजिक तत्वों एवं गुंडा बदमाशों पर कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार ने बताया कि धमतरी पुलिस द्वारा जिले के सभी थाना क्षेत्रों में असामाजिक तत्वों एवं गुंडा-बदमाशों को चिन्हित करते हुए उनके विरुद्ध निरंतर प्रतिबंधात्मक एवं कानूनी कार्रवाई की जा रही है, ताकि शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके.
कलेक्टर-एसपी ने दी नववर्ष की शुभकामनाएँ
नव वर्ष के अवसर पर कलेक्टर अविनाश मिश्रा एवं एसपी सूरज सिंह परिहार ने जिलेवासियों को नववर्ष 2026 की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि “हम कामना करते हैं कि नया वर्ष सभी के जीवन में स्वास्थ्य, खुशहाली और सुरक्षा लेकर आए. प्रशासन एवं पुलिस सदैव नागरिकों की सुरक्षा और शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तत्पर हैं. हम सभी नागरिकों से अपेक्षा करते हैं कि नियमों का पालन करते हुए संयमित व सुरक्षित तरीके से नववर्ष का स्वागत करें.
शिक्षक भर्ती को लेकर हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला, महिला अभ्यर्थी को मिली राहत
बिलासपुर। शिक्षक भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण और लंबे समय से चले आ रहे विवाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला अभ्यर्थी को राहत देते हुए दायर अवमानना याचिका को निराकृत कर दिया है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि उसके पूर्व आदेश का पालन राज्य सरकार द्वारा कर लिया गया है, क्योंकि संबंधित अभ्यर्थी की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। ऐसे में अवमानना कार्यवाही आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं बचता।
यह पूरा मामला वर्ष 2019 में बस्तर जिले के जगदलपुर में जारी शिक्षक भर्ती विज्ञापन से जुड़ा हुआ है। इस भर्ती प्रक्रिया में जगदलपुर निवासी जगजीत कौर भाटिया ने आवेदन किया था। उनके पास हिंदी विषय में स्नातक (बीए) की डिग्री थी और इसके साथ ही उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में भी स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी। इसके अतिरिक्त उन्होंने बीएड की योग्यता भी प्राप्त की थी, जो शिक्षक भर्ती के लिए अनिवार्य मानी जाती है।
चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने जगजीत कौर भाटिया का आवेदन यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि उन्होंने बीएड की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद स्नातक की डिग्री हासिल की है, इसलिए वे भर्ती की पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करतीं। इसी आधार पर उन्हें अंतिम चयन सूची से बाहर कर दिया गया। विभाग के इस निर्णय से असहमत होकर जगजीत कौर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट में दायर याचिका में जगजीत कौर भाटिया ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने बीएड करने से पहले ही स्नातक की डिग्री पूरी कर ली थी। बाद में उन्होंने केवल अपने अंग्रेजी साहित्य विषय के अंकों में सुधार के उद्देश्य से एक और स्नातक डिग्री प्राप्त की थी। उनका तर्क था कि शिक्षा विभाग ने तथ्यों को सही ढंग से समझे बिना और रिकॉर्ड की ठीक से जांच किए बिना उनका आवेदन गलत आधार पर खारिज कर दिया, जिससे उनके साथ अन्याय हुआ।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने महिला अभ्यर्थी के तर्कों को स्वीकार करते हुए उनके पक्ष में फैसला सुनाया था और राज्य सरकार को नियुक्ति देने का निर्देश दिया था। हालांकि, आदेश के पालन में देरी को लेकर बाद में अवमानना याचिका दायर की गई। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित आदेश के अनुपालन में नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
राज्य सरकार की ओर से दिए गए इस आश्वासन और प्रस्तुत तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने यह माना कि उसके आदेश का पालन हो चुका है। इसके बाद अदालत ने अवमानना याचिका को समाप्त करते हुए प्रकरण का पटाक्षेप कर दिया।
यह फैसला न केवल संबंधित महिला अभ्यर्थी के लिए राहत भरा साबित हुआ है, बल्कि उन अभ्यर्थियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल है, जिनके शैक्षणिक योग्यता से जुड़े मामलों में विभागीय स्तर पर तकनीकी आधार पर आवेदन निरस्त कर दिए जाते हैं। अदालत का यह निर्णय यह संदेश देता है कि पात्रता के मामलों में तथ्यों की गहराई से जांच जरूरी है और किसी भी अभ्यर्थी के साथ मनमाना व्यवहार नहीं किया जा सकता।
औद्योगिक विकास नीति 2024–30 में संशोधन : छत्तीसगढ़ को और अधिक निवेश-अनुकूल एवं प्रतिस्पर्धी बनाने की बड़ी पहल
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024–30 में महत्वपूर्ण संशोधनों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इन संशोधनों के माध्यम से नीति को अन्य राज्यों की तुलना में और अधिक प्रतिस्पर्धात्मक, स्पष्ट एवं निवेश-अनुकूल बनाया गया है। इससे राज्य में औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्र के साथ-साथ रोजगार के नए अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावनाएँ सुदृढ़ हुई हैं।
मंत्रिपरिषद द्वारा लिए गए निर्णयों का मुख्य उद्देश्य राज्य के मूल निवासियों के लिए स्थायी एवं गुणवत्तापूर्ण रोजगार का सृजन सुनिश्चित करना है। इसी दृष्टि से ईपीएफ प्रतिपूर्ति तथा रोजगार सृजन अनुदान से संबंधित नए प्रावधान जोड़े गए हैं। अब 50 से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाले विशेष सेक्टर के उद्यम — जैसे फार्मा, टेक्सटाइल, खाद्य प्रसंस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई, आईटी आदि के एमएसएमई इकाइयों को भी छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को दिए जाने वाले वेतन पर अनुदान प्राप्त होगा।
सेवा क्षेत्र के दायरे का विस्तार करते हुए, मंत्रिमंडल ने कंप्यूटर-आधारित टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ई-कॉमर्स एवं ऐप-आधारित एग्रीगेटर, तथा NABL मान्यता प्राप्त डायग्नोस्टिक लैब को भी नीति के अंतर्गत सम्मिलित किया है। इन संस्थाओं को अब औद्योगिक विकास नीति के तहत निर्धारित प्रोत्साहन एवं अनुदान का लाभ मिलेगा।
पर्यटन एवं स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास को गति देने के उद्देश्य से रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में पाँच सितारा होटलों तथा अन्य जिलों में तीन सितारा होटलों की स्थापना के लिए प्रोत्साहनात्मक संशोधन किए गए हैं। इसी प्रकार राज्य में बड़े निजी मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की स्थापना को भी बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता संवर्धन के लिए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है कि NIRF Ranking में शीर्ष 100 में शामिल शिक्षण संस्थानों द्वारा राज्य में परिसर स्थापित किए जाने पर उन्हें नीति के अंतर्गत विशेष अनुदान प्रदान किया जाएगा। इससे छत्तीसगढ़ में उच्च स्तरीय शिक्षण संस्थानों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा और राज्य के युवाओं को विश्व-स्तरीय शिक्षा एवं बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत ये संशोधन छत्तीसगढ़ को उद्योग एवं सेवा क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ निवेश गंतव्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इन निर्णयों से राज्य में निवेश बढ़ने, व्यापक रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास की गति को और अधिक तेज एवं संतुलित बनाने में सहायता मिलेगी।
बिलासपुर नगर निगम की MIC बैठक में हंगामा, सभापति की मौजूदगी पर छिड़ी बहस
बिलासपुर। बिलासपुर नगर निगम में मेयर इन काउंसिल (MIC) की बैठक उस समय विवादों में घिर गई, जब पार्षदों की बैठक व्यवस्था और सभापति की मौजूदगी को लेकर तीखी बहस छिड़ गई। बैठक के दौरान एक एमआईसी सदस्य ने सभापति की उपस्थिति पर आपत्ति जताते हुए उनके बैठक में शामिल होने के अधिकार पर सवाल खड़े कर दिए। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान महापौर और नगर निगम आयुक्त भी बैठक में मौजूद रहे।
नगर निगम की एमआईसी बैठक में सभापति विनोद सोनी की मौजूदगी को लेकर जमकर हंगामा हुआ। दरअसल, तीन महीने पहले हुई सामान्य सभा की बैठक में सभापति विनोद सोनी ने एमआईसी सदस्य विजय ताम्रकार को प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए पीछे बैठने के निर्देश दिए थे। उसी बात को लेकर मंगलवार को जब सोनी एमआईसी की बैठक में पहुंचे, तो विजय ताम्रकार ने उनकी उपस्थिति पर आपत्ति जताई और स्पष्ट रूप से कहा कि सभापति को एमआईसी की बैठक में बैठने का अधिकार नहीं है।
बताया जा रहा है कि महापौर पूजा विधानी, नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे और सभी एमआईसी सदस्यों की मौजूदगी में दोनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। सभापति विनोद सोनी ने तर्क दिया कि पूर्व में भी सभापति एमआईसी बैठकों में शामिल होते रहे हैं, तब कभी आपत्ति नहीं उठाई गई। बहस बढ़ने पर नगर निगम सचिव राजेंद्र अवस्थी से नियमों की जानकारी ली गई।
सचिव राजेंद्र अवस्थी ने बताया कि नियमों के अनुसार एमआईसी की बैठक में केवल महापौर और एमआईसी सदस्य ही बैठ सकते हैं। इसके बाद एमआईसी सदस्य विजय ताम्रकार ने अपनी आपत्ति दोहराते हुए सभापति को बैठक में शामिल न किए जाने पर जोर दिया।
हालांकि इस तीखी बहस के बावजूद बैठक का एजेंडा पूरा किया गया। शहर के विकास सहित कुल 52 मुद्दों पर चर्चा के बाद सभी प्रस्तावों पर सर्वसम्मति से एमआईसी की मंजूरी दे दी गई।
दूरस्थ आदिवासी अंचलों को स्वास्थ्य की नई राह — मुख्यमंत्री साय ने 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट वाहनों को दिखाई हरी झंडी
रायपुर। दूरस्थ और घने वनांचल वाले आदिवासी क्षेत्रों में अब स्वास्थ्य सेवाएँ लोगों के दरवाज़े तक पहुँचेंगी। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान “पीएम जनमन” के तहत बुधवार को नवा रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल सहित मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
मोबाइल मेडिकल यूनिटों के संचालन से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) तक नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। सरकार का मानना है कि दुर्गम अंचलों में रहने वाले समुदायों को अस्पताल तक पहुँचने में आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए यह व्यवस्था स्वास्थ्य सुविधाओं को सीधे उनके गाँवों व बसाहटों तक पहुँचाएगी।
मोबाइल मेडिकल यूनिटों की तैनाती से प्रदेश के 18 जिलों के 2100 से अधिक गाँवों और बसाहटों तक नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाई जाएँगी। इससे दो लाख से अधिक विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए अब इलाज और जाँच की सुविधा गाँव में ही उपलब्ध होगी। उन्होंने इस पहल को आदिवासी समुदायों की “सर्वांगीण भागीदारी और स्वास्थ्य सुरक्षा का ठोस आधार” बताया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह गौरव का दिन है। समाज में आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक प्रत्येक दृष्टिकोण से पिछड़े लोग विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग हैं। छत्तीसगढ़ में निवासरत 3 करोड़ की आबादी में विशेष पिछड़ी जनजाति के 2 लाख 30 हजार लोग 18 जिलों के 21 सौ बसाहटों में निवासरत हैं। यह मोबाइल मेडिकल यूनिट उनके लिए वरदान साबित होगा। इन सर्वसुविधा-संपन्न 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से यह कार्य आसान होगा। इस यूनिट में डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्निशियन और स्थानीय वालंटियर उपस्थित होंगे। इस यूनिट में 25 तरह की जाँच सुविधाएँ तथा 106 तरह की दवाइयाँ निःशुल्क उपलब्ध होंगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस नवीन योजना के लिए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के सहित सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।


इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि विशेष पिछड़ी जाति के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय प्रयासरत हैं। यह मोबाइल मेडिकल यूनिट ऐसे सुदूर वनांचलों के लिए हैं जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच कम है। आज 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट पूरे प्रदेश के लिए समर्पित कर रहे हैं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को पूर्ण करेगा। मंत्री श्री जायसवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने इस पुनीत कार्य में छत्तीसगढ़ को सहभागी बनकर योगदान देने का अवसर प्रदान किया।
स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 नवंबर 2023 को विशेष पिछड़ी जनजातियों के सामाजिक, आर्थिक उत्थान के लिए पीएम जनमन योजना की शुरुआत की। इसका उद्देश्य बुनियादी सुविधाओं को सीधे बसाहटों तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि आपातकालीन स्थिति में मरीज को इन यूनिट के माध्यम से निकट स्वास्थ्य केंद्रों में पहुँचाना आसान होगा। हमारा उद्देश्य सिर्फ मशीनें ही नहीं, अपितु कुशल एवं संवेदनशील कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है। प्रत्येक मोबाइल मेडिकल यूनिट में चिकित्सक, नर्स, लैब तकनीशियन, फार्मासिस्ट और स्थानीय स्वास्थ्य स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं। ये यूनिटें हर 15 दिन में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करेंगी, जिनमें 25 से अधिक प्रकार की जाँच और रोगों का उपचार किया जाएगा और आवश्यक दवाइयों का वितरण किया जाएगा। गंभीर मरीजों को आवश्यकता अनुसार निकटतम स्वास्थ्य संस्थानों में भेजा जाएगा।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में संसाधनों की कमी के कारण दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ नियमित रूप से नहीं पहुँच पाती थीं। अब नए वाहन और प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता के साथ यह व्यवस्था लगातार संचालित की जा सकेगी। इस पहल से टीबी, मलेरिया, एनीमिया और कुपोषण जैसी समस्याओं की समय पर पहचान व रोकथाम में मदद मिलेगी।
23 जनवरी से लागू होगा रायपुर में कमिश्नरेट प्रणाली, जानें साय कैबिनेट की बैठक में लिये 10 बड़े निर्णयों के बारे में
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में तेंदूपत्ता संग्रहण, पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू करने जैसे अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए -
1. मंत्रिपरिषद की बैठक में तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों से 5500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से तेंदूपत्ता खरीदने के लिए वर्ष 2026 हेतु ऋण लेने के लिए राज्य शासन की गारंटी देने की अनुमति दी गई।
2. मंत्रिपरिषद ने कोदो, कुटकी और रागी की खरीद, प्रसंस्करण और बिक्री के लिए छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ को कार्यशील पूंजी प्रदाय किये जाने की अनुमति दी गई।
3. मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ को अराष्ट्रीयकृत लघु वनोपज के क्रय, भंडारण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन के लिए एक बार के लिए 30 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण देने का निर्णय लिया है।
4. मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम द्वारा राज्य शासन की प्रत्याभूति (गारंटी) पर लिए गए ऋणों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इसके अंतर्गत राज्य शासन द्वारा 55.69 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान कर पांच राष्ट्रीय निगमों से लिए गए ऋणों की पूर्ण राशि वापस करने का अनुमोदन किया गया। ये राष्ट्रीय निगम हैं- राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम, पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम, अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम और दिव्यांग वित्त एवं विकास निगम।
वर्तमान में इन ऋणों पर राज्य शासन द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 2.40 करोड़ रुपये ब्याज का भुगतान किया जा रहा है। ऋण की पूरी अदायगी होने पर यह ब्याज व्यय पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। साथ ही राष्ट्रीय निगमों से एनओसी (अदेय प्रमाण पत्र) प्राप्त होने पर शासन की ओर से दी गई 229.91 करोड़ रुपये की लंबित गारंटी देनदारी भी समाप्त हो जाएगी। इस निर्णय से राज्य शासन पर वित्तीय बोझ कम होगा और भविष्य में होने वाले अनावश्यक व्यय से बचत सुनिश्चित होगी।
5. मंत्रिपरिषद ने निर्णय लिया है कि - उसना मिलिंग पर प्रोत्साहन राशि 20 रू. प्रति क्विंटल से बढ़ाकर की गई 40 रू. प्रति क्विंटल
सभी मिलरों के लिए प्रोत्साहन राशि की पात्रता हेतु अब न्यूनतम 03 माह की जगह न्यूनतम 02 माह की मिलिंग करनी होगी
6. मंत्रिपरिषद ने औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में संशोधन का निर्णय लिया। इससे नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रचार-प्रसार, विशेषज्ञों की नियुक्ति और सेवा गतिविधि प्रमाणपत्र जारी करने के संबंध में विसंगतियां दूर होंगी। इन संशोधनों से राज्य में निवेश की गुणवत्ता बढ़ेगी, स्थायी रोजगार सृजन होगा और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
7. मंत्रिपरिषद ने राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में 20 जनवरी से 5 फरवरी तक आयोजित 9वें ऑटो एक्सपो के दौरान बिकने वाले वाहनों पर लाइफ टाइम रोड टैक्स में 50 प्रतिशत छूट प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह छूट एक्सपो में वाहन बिक्री के बाद पंजीकरण के समय लागू होगी, जिससे मोटरयान कर में एकमुश्त 50 प्रतिशत की राहत मिलेगी। पूरे प्रदेश के वाहन विक्रेताओं को इसका लाभ मिलेगा, इस संबंध में निर्देशित किया गया है।
8. मंत्रिपरिषद द्वारा प्रदेश में कस्टम मिलिंग के लिए धान उपार्जन एवं परिवहन से संबंधित गतिविधियों के लिए राइस मिलर्स द्वारा दी जाने वाली बैंक गारंटी पर देय स्टाम्प शुल्क को 0.25 से घटाकर 0.05 प्रतिशत करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।
9. मंत्रिपरिषद द्वारा पुलिस मुख्यालय छत्तीसगढ़ नवा रायपुर अटल नगर में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी का एक नवीन पद वेतन मेट्रिक्स लेवल-14 एक वर्ष की अवधि के लिए स्थायी रूप से निर्मित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है।
10. मंत्रिपरिषद द्वारा रायपुर महानगरीय पुलिस जिला में पुलिस आयुक्त प्रणाली को 23 जनवरी से लागू किए जाने के संबंध में निर्णय लिया गया है।
राज्य सरकार के अधिकारी-कर्मचारियों को 31 जनवरी तक देनी होगी अचल संपत्ति की जानकारी, आदेश जारी
रायपुर। राज्य सरकार के तमाम अधिकारी-कर्मचारी को 31 जनवरी तक अनिवार्य रूप से अपनी अचल सम्पत्ति का वार्षिक विवरण प्रस्तुत करना होगा. इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से तमाम अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विशेष सचिव को तीन बिंदुओं में निर्देश जारी किया गया है.
सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी पत्र में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-19(1) के तहत प्रत्येक शासकीय सेवकों को अपने अचल संपत्ति के संबंध में वार्षिक विवरण 31 जनवरी तक प्रस्तुत करना अनिवार्य बताया है.
जनवरी 2026 से समस्त सचिवालय सेवा के अधिकारियों-कर्मचारियों के कैलेण्डर वर्ष 1.1.2025 से 31.12.2025 तक की स्थिति में धारित किए वार्षिक अचल संपत्ति का विवरण एनआईसी द्वारा संचालित SPARROW (epar.cg.gov.in) पोर्टल के माध्यम से प्रस्तुत करना होगा.

मुख्यमंत्री की अनुशंसा पर पुलिस महकमे में प्रमोशन, 16 अधिकारियों को मिला तोहफा
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अनुशंसा और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की विशेष पहल पर राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को वर्ष के अंतिम दिन बड़ी सौगात दी गई है। छत्तीसगढ़ शासन के गृह (पुलिस) विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत अधिकारियों के हित में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है, जिसे पुलिस महकमे में उत्साह बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।
16 अधिकारियों को मिला नए साल का तोहफा
गृह (पुलिस) विभाग ने विभागीय पदोन्नति एवं छानबीन समिति की अनुशंसा के आधार पर राज्य पुलिस सेवा संवर्ग के वरिष्ठ श्रेणी वेतनमान प्राप्त 16 अधिकारियों को उप पुलिस अधीक्षक/सहायक सेनानी अथवा समकक्ष पद से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक/उप सेनानी अथवा समकक्ष पद पर स्थानापन्न रूप से पदोन्नत किया है।
पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों में रितेश चौधरी, जितेन्द्र कुमार खूंटे, मति अंजली नाग (गुप्ता), कर्ण कुमार उके, मनोज कुमार ध्रुव, पुष्पेन्द्र नायक, मनोज तिर्की, मति सारिका वैद्य, सु निधि नाग, कपिल चन्द्रा, अविनाश कुमार मिश्रा, ईश्वर प्रसाद त्रिवेदी, योगेश कुमार साहू, मयंक तिवारी, रश्मीत कौर चांवला और अनिल कुमार विश्वकर्मा शामिल हैं।
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रायपुर जिले में पुलिस प्रशासनिक फेरबदल, टीआई से एएसआई स्तर तक तबादले
रायपुर। वर्ष के अंतिम दिन रायपुर जिले के पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। टीआई से लेकर एएसआई स्तर के कुल 119 पुलिस अधिकारियों का तबादला करते हुए उन्हें नई पदस्थापना दी गई है। इस दौरान रायपुर के तीन थानों के प्रभारियों में भी बदलाव किया गया है। तबादलों से संबंधित आदेश रायपुर एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने जारी किए हैं।
जारी सूची के अनुसार तबादलों में 4 टीआई, 18 एसआई और 37 एएसआई समेत बड़ी संख्या में अधिकारी शामिल हैं। फेरबदल के तहत जिले के तीन थानों के प्रभारी बदले गए हैं। सतीश सिंह गहरवार को कोतवाली थाना प्रभारी, एस.एन. सिंह को कबीर नगर थाना प्रभारी और सुनील दास को गंज थाना प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं भावेश गौतम को ट्रैफिक टीआई के पद पर नियुक्त किया गया है।
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समर्थन मूल्य में खपाने की कोशिश नाकाम, गरियाबंद पुलिस ने पकड़ी 20 लाख की धान तस्करी
गरियाबंद। समर्थन मूल्य में ओडिसा का धान खपाना इस बार आसान नहीं हो रहा है. पुलिस की मुस्तैदी के बाद जागी अन्य प्रशासनिक अफसरों भी सजगता दिखाने पुलिस की प्वाइंट पर कार्रवाई करते नजर आ रहे हैं. मंगलवार रात ओडिसा के तीन सीमाओं में अलग अलग टीम ने 6 वाहनों में 1470 बोरी धान जप्त कर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. आधी रात निकली टीम ने यह कार्रवाई 12 घंटे के भीतर अंजाम दिया है. जप्त धान की कीमत 20 लाख से ज्यादा आंकी गई है. जिसे मंडी अधिनियम के तहत जप्त कर लिया गया है.
कार्रवाई में सबसे आगे गरियाबंद पुलिस
कार्रवाई में सबसे आगे चल रही देवभोग पुलिस की टीम ने नए एसपी के निर्देश में बीती रात बधियामाल चेक पोस्ट से ट्रक क्रमांक सीजी 08 एल 3919 से 400 बोरी, पिटापारा सीमा से मेटाडोर से 100 बोरी और झिरीपानी सीमा से ट्रेक्टर में लोड कर लाए जा रहे 60 बोरी के साथ कुल 560 बोरी धान तीन वाहन समेत जप्त किया है. देवभोग पुलिस ने अब तक 35 से ज्यादा वाहनों की धर पकड़ कर कार्रवाई में सबसे आगे चल रही है.
सेफ जोन मान कर रायगढ़ से दो ट्रक धान पार करने की हुई थी कोशिश
नवरंगपुर जिले का रायगढ़ ब्लॉक से शोभा गोना के रास्ते धान निकालना सबसे सुरक्षित माना जाता था. लेकिन इसकी इनपुट गरियाबंद पुलिस को मिलते ही अमलीपदर थाना प्रभारी को एलर्ट किया. जिसके बाद संयुक्त टीम ने दो ट्रक में भरे 810 पेकेट धान को जप्त कर तस्करों का रूट मैप बिगाड़ दिया. जप्त दोनों ट्रक को इंदागांव पुलिस के हवाले किया गया है. इसी तरह बीती रात सोल्ड मेटाडोर मण्डी,फूड और सहकारिता टीम के हत्थे चढ़ गई. भारी आमदनी को देखते हुए अवैध धान की सप्लाई के लिए नए वाहन की खरीदी करना सप्लायरों को भारी पड़ गया. बीती रात मगर रोड़ा चेक पोस्ट से पार करके धोराकोट तक पहुंचा था और रास्ते पकड़ा गया.
राजस्व के अधीन चेक पोस्ट से कैसे पार कर रहे हैं गाड़िया
बीती रात पकड़े गए ज्यादातर वाहन बनाए गए अस्थाई चेक पोस्ट से निकल कर आई थी. चेक पोस्ट का कंट्रोल राजस्व अफसरों के कमांड पर है. ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि आखिरकार राजस्व विभाग कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है. अमलीपदर तहसील क्षेत्र में लगी चेक पोस्ट में सबसे ज्यादा बड़ी गाड़िया पार हो रही है. ज्यादातर कार्रवाई पुलिस की प्वाइंट पर हो रही या पुलिस मौजूद रही तब राजस्व अफसर पहुंच रहे. ऐसे में अवैध परिवहन को रोकने तय किए गए मुख्य जवाबदारों के भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं. अब तक हुई कार्रवाई की सूक्ष्म समीक्षा कर कमजोर कड़ी को दुरुस्त करने की आवश्यकता है.
कांग्रेस संगठन: AICC ने राष्ट्रीय महिला पदाधिकारियों के नामों का ऐलान किया
रायपुर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने राष्ट्रीय महिला पदाधिकारियों की नियुक्ति की है, जिसमें छत्तीसगढ़ से पूर्व विधायक ममता चंद्राकर को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं मयूरी सिंह, तुलिका कर्मा को राष्ट्रीय सचिव एवं प्रीति उपाध्याय, राशि त्रिभुवन को राष्ट्रीय समन्वयक नियुक्त की गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नवनियुक्त सभी राष्ट्रीय पदाधिकारियों को नव दायित्व के लिए शुभकामनाएं दी है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि सभी नव नियुक्त पदाधिकारी नई ऊर्जा के साथ अपनी भूमिका सफलतापूर्वक निभाएंगी, ऐसा हम सबको विश्वास है।
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केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू के प्रयास से बिलासपुर संसदीय क्षेत्र को मिली बड़ी सौगात
रायपुर। छत्तीसगढ़ की जल-संपदा और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में केंद्र सरकार ने एक मील का पत्थर स्थापित किया है। भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत बिलासपुर संसदीय क्षेत्र के 5 प्रमुख तालाबों के कायाकल्प के लिए ₹28.05 करोड़ की भारी-भरकम राशि को आधिकारिक मंजूरी प्रदान कर दी है।
छत्तीसगढ़ के विकास को मिली नई गति
इस मंजूरी के साथ छत्तीसगढ़ में अमृत 2.0 के तीसरे चरण के तहत कुल 37 परियोजनाएँ संचालित होंगी। केंद्र सरकार ने राज्य के शहरी विकास हेतु कुल ₹1303 करोड़ की सहायता राशि स्वीकृत की है, जो प्रदेश के भविष्य को जल-समृद्ध बनाने में सहायक होगी।
गौरतलब है कि केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू ने स्वयं रतनपुर के तालाबों में उतरकर श्रमदान किया था और जल संरक्षण का संदेश दिया था। उनके उस व्यक्तिगत जुड़ाव और ‘भागीरथी प्रयास’ का ही परिणाम है कि आज इन तालाबों के पुनर्जीवन और सौंदर्यीकरण के लिए इतनी बड़ी राशि स्वीकृत हुई है। साहू के सक्रिय हस्तक्षेप के कारण ही केंद्र की एपेक्स कमेटी ने राज्य जल कार्य योजना (SWAP) के तीसरे चरण में इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को प्राथमिकता दी।
परियोजनाओं का विवरण और बजट
स्वीकृत ₹28.05 करोड़ की राशि से इन 5 तालाबों की सूरत बदलेगी—
रतनपुर क्षेत्र
• रत्नेश्वर तालाब – ₹9.5 करोड़ (पुनर्जीवन एवं सौंदर्यीकरण)
• कृष्णार्जुनी तालाब – ₹7.5 करोड़ (कायाकल्प)
बिलासपुर शहर
• हरसागर तालाब – ₹5 करोड़
• माँ महामाया तालाब – ₹3.5 करोड़
• माँ शारदा तालाब – ₹2.55 करोड़
पुनर्जीवन और सौंदर्यीकरण
इन ऐतिहासिक तालाबों की गाद निकाली जाएगी, तटबंधों को मजबूत किया जाएगा और चारों ओर लाइटिंग व पाथवे बनाकर इनका सौंदर्यीकरण किया जाएगा। तोखन साहू के श्रमदान अभियान को आगे बढ़ाते हुए, इन जलाशयों के संरक्षण से क्षेत्र के भूजल स्तर में भारी सुधार होगा। रतनपुर की ऐतिहासिक पहचान को इन तालाबों के सजने से नई मजबूती मिलेगी।