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रायपुर में कलकत्ता-पुणे इंडिगो फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग, जानिए वजह…
रायपुर। छत्तीसगढ़ के रायपुर एयरपोर्ट पर आज कलकत्ता से पुणे जाने वाली इंडिगो फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। जानकारी के मुताबिक एक महिला यात्री की अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर मेडिकल इमरजेंसी के तहत फ्लाइट को उतारा गया।
विमान दोपहर लगभग 12 बजे रायपुर एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतरा। उड़ान के दौरान एक महिला यात्री अचानक बेहोश हो गईं, जिसके बाद विमान चालक दल ने तत्काल मेडिकल सहायता के लिए रायपुर एयरपोर्ट ATC से संपर्क साधा और रायपुर एयरपोर्ट पर लैंडिंग का निर्णय लिया।
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने विमान के लैंड होते ही महिला यात्री को प्राथमिक सहायता प्रदान की और एम्बुलेंस से आगे के उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। आवश्यक औपचारिकताएं एवं स्थिति सामान्य होने के बाद विमान ने लगभग एक बजे पुनः अपने गंतव्य के लिए उड़ान भरी। एयरपोर्ट प्रशासन ने पूरी प्रक्रिया को त्वरित एवं समन्वित तरीके से संपन्न कराई।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से ‘मिस इंडिया छत्तीसगढ़’ अनुष्का सोन ने की मुलाकात, सदन का ऐतिहासिक सत्र सुनने पहुंची थीं विधानसभा…
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज विधानसभा में मिस इंडिया छत्तीसगढ़ 2026 अनुष्का सोन ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर सुश्री अनुष्का ने मुख्यमंत्री को नारी सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों को लेकर विशेष सत्र आयोजित करना एक प्रेरणादायक पहल है। उन्होंने कहा कि इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा मिलती है।
सुश्री अनुष्का ने बताया कि वे आज विधानसभा की ऐतिहासिक कार्यवाही को सुनने विशेष रूप से पहुंची थीं और इस अनुभव को उन्होंने अत्यंत प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि नीति निर्माण की प्रक्रिया को करीब से देखना उनके लिए एक नई सीख रही, जिससे वे समाज में महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए और अधिक प्रोत्साहित कर सकेंगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह सुखद है कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों से महिलाएं आगे आकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रही हैं, जो एक सशक्त और जागरूक समाज की पहचान है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास जताया कि इस तरह की पहल महिलाओं के आत्मविश्वास को और मजबूत करेंगी तथा उन्हें नेतृत्व की भूमिका में आगे आने के लिए प्रेरित करेंगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नई पीढ़ी की बेटियां शिक्षा, कला, खेल और सामाजिक क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं, जो प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने अनुष्का सोन को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे समाज में सकारात्मक बदलाव की प्रेरक बनें। इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा उपस्थित थे।
राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा के नेतृत्व में महिला प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री साय से की भेंट, ‘नारी शक्ति वंदन’ के संकल्प के लिए जताया आभार…
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित कार्यालय में राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा के नेतृत्व में महिला प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।
इस अवसर पर महिला प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विधानसभा में आयोजित विशेष सत्र तथा इस संबंध में पारित शासकीय संकल्प के लिए विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक पहल महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और उनके अधिकारों की दिशा में एक मजबूत कदम है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होगा।
महिला प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में प्रदेश में महिलाओं के उत्थान हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि राज्य में महिला सशक्तिकरण को और अधिक गति मिलेगी तथा महिलाओं की भागीदारी सभी क्षेत्रों में सुदृढ़ होगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन जैसी ऐतिहासिक पहल समाज में समानता और न्याय के नए आयाम स्थापित करेंगे।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश की महिलाएं विकास यात्रा की सशक्त सहभागी हैं और उनके सशक्तिकरण के बिना समग्र विकास की परिकल्पना अधूरी है। मुख्यमंत्री ने महिला प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
रायपुर में पकड़ी गईं उज्बेकिस्तान की युवतियां पहुंची हाईकोर्ट, पुलिस हिरासत के खिलाफ दाखिल की याचिका
बिलासपुर। अवैध रूप से भारत में रह रही उज्बेकिस्तान की युवतियों ने हिरासत से मुक्त कराने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पेश की है। हाईकोर्ट ने केन्द्र एवं राज्य शासन से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है, साथ ही याचिकाकर्ता को प्रतिउत्तर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
बता दें कि रायपुर की तेलीबांधा पुलिस को मुखबिर से थाना क्षेत्र के एक होटल में अवैध रूप से उज्बेकिस्तान की दो युवतियों के रहने की सूचना मिली थी। सूचना पर पुलिस ने फरवरी 2026 को दोनों युवती को हिरासत में लिया एवं प्रकरण विदेशी नागरिकों का होने के कारण मामले में जांच के लिए आईबी को दिया गया है। इस मामले में युवती की ओर से हाईकोर्ट में बंदीप्रत्यक्षीकरण याचिका पेश की गई है।
याचिका में कहा गया है कि 14 जनवरी 2026 से याचिकाकर्ताओं को लगातार हिरासत में रखना पूरी तरह से गैर-कानूनी, मनमाना और उनके फंडामेंटल राइट्स का उल्लंघन है। पिटीशनर्स को बिना फॉर्मल अरेस्ट किए, बिना बताए रायपुर सेंट्रल जेल के एक डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। गिरफ्तारी के आधार पर, और किसी भी सक्षम कोर्ट, न्यायिक अधिकारी, या मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए बिना यह गैरकानूनी हिरासत के खिलाफ संवैधानिक सुरक्षा उपायों और आपराधिक न्यायशास्त्र के स्थापित सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन है।
प्रतिवादियों के अपने मामले के अनुसार भी एफआईआर नंबर 117/2026, 12 मार्च 2026 को दर्ज की गई थी, जबकि याचिकाकर्ताओं को 9 जनवरी 2026 को बहुत पहले हिरासत में ले लिया गया था। इस प्रकार, काफी समय तक, याचिकाकर्ताओं को बिना किसी पंजीकृत मामले के हिरासत में रखा गया, जिससे ऐसी हिरासत पूर्व दृष्टि में अवैध हो गई। गिरफ्तारी और हिरासत को नियंत्रित करने वाली अनिवार्य प्रक्रियागत आवश्यकताओं का पालन नहीं किया गया है।
वकील ने जोर दिया कि याचिकाकर्ताओं को न तो औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया है और न ही निर्धारित समय के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया है। 16 अप्रैल 2026 को रायपुर के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के उस ऑर्डर से भी साबित होती है, जो डिफ़ॉल्ट बेल, कंपाउंडिग और डिपोर्टेशन से जुड़ी कार्रवाई में दिया गया था। बिना किसी ज्यूडिशियल जांच के ऐसी हिरासत, पावर का बहुत बड़ा गलत इस्तेमाल है।
मामले में राज्य/ केन्द्र की ओर से पेश हुए डिप्टी एडवोकेट जनरल ने रिटर्न फाइल करने के लिए दो हफ़्ते का समय मांगा है। इस पर कोर्ट ने उन्हें यह समय दिया है और उसके बाद पिटीशनर वकील को जवाब दाखिल करने के लिए एक हफ़्ते का और समय दिया है।
पुनर्गणना और पुनर्मूल्यांकन का मौका, रिजल्ट से असंतुष्ट 10वीं-12वीं के छात्र इस तारीख तक कर सकेंगे आवेदन
रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी मुख्य परीक्षा 2026 के परिणाम जारी होने के बाद छात्रों के लिए अहम निर्देश जारी किए हैं। जो विद्यार्थी अपने प्राप्त अंकों से संतुष्ट नहीं हैं वे पुनर्गणना, पुनर्मूल्यांकन और उत्तर पुस्तिका की छाया प्रति के अवलोकन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
मंडल द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, छात्र 14 मई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। गौरतलब है कि हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल 2026 को घोषित किया गया। मंडल ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा परिणाम जारी होने की तिथि से 15 दिनों के भीतर ही आवेदन करना अनिवार्य होगा।
निर्धारित समय सीमा के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी करें, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।
दुर्ग के बाद बिलासपुर में भी ED की दबिश
बिलासपुर। दुर्ग के बाद बिलासपुर में भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने दबिश दी है. शहर के बड़े सराफा कारोबारी विवेक अग्रवाल के घर और दुकान पर सुबह से पहुंची ईडी की टीम दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है.
विवेक अग्रवाल की मध्यनगरी चौक में श्रीराम ज्वेलर्स के नाम से ज्वेलरी शॉप है. विवेक अग्रवाल के भाई विकास अग्रवाल को शराब घोटाले में आरोपी अनवर ढेबर का करीबी बताया जा रहा है. 2000 करोड़ के कथित घोटाले के सिंडिकेट का मेंबर विकास अग्रवाल फरारी काट रहा है.
बता दें कि आज सुबह ही ईडी की एक और टीम ने दुर्ग में भाजपा नेता और अमर इंफ्रा के संचालक चतुर्भुज राठी के दुर्ग के महेश कालोनी स्थित निवास पर छापा मारा है. बताया जा रहा है कि ईडी की कार्रवाई भारतमाला परियोजना जमीन घोटाले की जांच के सिलसिले में की जा रही है.
बंदूक छोड़ स्टार्टअप की राह पर युवा, बस्तर यूनिवर्सिटी में इनोवेशन महाकुंभ का आयोजन, हजारों युवाओं को विशेषज्ञ देंगे आत्मनिर्भर बनने का प्रशिक्षण
बस्तर। छत्तीसगढ़ का बस्तर जो कभी नक्सलवाद की वजह से सुर्खियों में रहता था, अब एक नई पहचान गढ़ने की ओर बढ़ रहा है। शिक्षा, नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। युवा अब बंदूक नहीं, बल्कि बिजनेस और स्टार्टअप की भाषा सीखने को तैयार हैं। इसी कड़ी में बस्तर यूनिवर्सिटी में इनोवेशन महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन 4 और 5 मई को होगा, जो बस्तर के भविष्य की नई इबारत लिख सकता है।
बेरोजगार युवाओं के लिए सुनहरा मंच
इस महाकुंभ में 1 हजार से अधिक पढ़े-लिखे बेरोजगार आदिवासी छात्र शामिल होंगे। इन युवाओं को रोजगार, स्टार्टअप और व्यवसाय की बारीकियां सिखाई जाएंगी। कार्यक्रम में 642 छात्राएं और 389 छात्र हिस्सा लेंगे। ये सभी प्रतिभागी बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों से आएंगे। कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर के युवा इसमें शामिल रहेंगे। यह मंच उन्हें नौकरी ढूंढने से आगे बढ़कर खुद रोजगार देने वाला बनाने की दिशा देगा।
पुनर्वासित माओवादी भी बनेंगे मुख्यधारा का हिस्सा
इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह है कि इसमें करीब 200 पुनर्वासित माओवादी भी शामिल होंगे। जो कभी बंदूक के रास्ते पर थे, अब वे विकास और रोजगार की राह चुन रहे हैं। उन्हें उद्योग, स्टार्टअप और आत्मनिर्भरता की शिक्षा दी जाएगी। यह पहल नक्सलवाद के खत्म होने और समाज में सकारात्मक बदलाव का मजबूत संकेत है। बस्तर अब हिंसा नहीं, बल्कि विकास की कहानी लिखने की ओर बढ़ रहा है।
देशभर के विशेषज्ञ देंगे मार्गदर्शन
इस महाकुंभ में पूरे देश से 50 से अधिक विशेषज्ञ शामिल होंगे। मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन, आईआईटी भिलाई, CGCOST, और अन्य संस्थानों के विशेषज्ञ युवाओं को प्रशिक्षित करेंगे। कॉमर्स, इंडस्ट्री, साइंस एंड टेक्नोलॉजी से जुड़े विभाग भी इसमें भाग लेंगे। स्वावलंबी भारत अभियान के सदस्य भी युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के गुर सिखाएंगे। यह आयोजन बस्तर को राष्ट्रीय स्तर से जोड़ने का काम करेगा।
हल्बी भाषा में ज्ञान – हर युवा तक पहुंच
कार्यक्रम की सभी सत्रों का अनुवाद बस्तर की स्थानीय हल्बी भाषा में भी किया जाएगा। ताकि हर वर्ग का युवा इसे आसानी से समझ सके और उससे लाभ उठा सके। करीब 7 हजार से अधिक छात्र इस कार्यक्रम को ऑनलाइन माध्यम से भी देखेंगे। यूट्यूब और सोशल मीडिया के जरिए यह ज्ञान दूर-दराज के गांवों तक पहुंचेगा। यह पहल शिक्षा को स्थानीय स्तर पर सुलभ बनाने का मजबूत उदाहरण है।
बड़े नेताओं की मौजूदगी से बढ़ेगा कार्यक्रम का महत्व
कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ के राज्यपाल और गृह मंत्री करेंगे। जबकि समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल होंगे। इससे कार्यक्रम की गंभीरता और महत्व और भी बढ़ जाता है। सरकार का सीधा फोकस अब बस्तर के युवाओं को आगे बढ़ाने पर है।
बस्तर के लिए नई उड़ान की शुरुआत

कुलपति मनोज श्रीवास्तव के मुताबिक यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन है। जो बस्तर के युवाओं को नई दिशा देने का काम करेगा। नक्सलवाद की छाया से निकलकर अब बस्तर विकास और नवाचार की राह पर बढ़ रहा है। इनोवेशन महाकुंभ इस बदलाव का प्रतीक बन सकता है। अगर यह प्रयास सफल रहा, तो बस्तर आने वाले समय में देश के उभरते स्टार्टअप हब के रूप में पहचान बना सकता है।
कुलपति मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि 4 और 5 मई को इनोवेशन महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बस्तर संभाग के 1038 छात्र शामिल होंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को रोजगार, स्टार्टअप और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रशिक्षित करना है, ताकि बस्तर का भविष्य मजबूत और विकसित बन सके।
भाजपा नेता चतुर्भुज राठी के ठिकाने पर पहुंची ED की दबिश
दुर्ग। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सक्रियता एक बार फिर प्रदेश में सक्रियता नजर आ रही है. अबकी बार ईडी की टीम ने भाजपा नेता और अमर इंफ्रा के संचालक चतुर्भुज राठी के दुर्ग के महेश कालोनी स्थित निवास पर छापा मारा है. बताया जा रहा है मामला भारतमाला परियोजना से जुड़ा हुआ है.
चतुर्भुज राठी एक बड़ी इंफ्रास्ट्र्क्चर कंपनी अमर इंफ्रा के संचालक हैं. इसके अलावा हाल ही इनके कोयला कारोबार में भी प्रवेश करने की बात कही जा रही है.
अमर बिल्डर्स के वेबसाइट में दी गई जानकारी के अनुसार, चतुर्भुज राठी ने सन् 1986 में अमर बिल्डर्स को एकल स्वामित्व के रूप में सफलतापूर्वक चलाने के बाद कंपनी की नींव रखी. उनके नेतृत्व में कंपनी ने कई उपलब्धियाँ हासिल कीं, अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार किया और देश भर में बड़ी परियोजनाओं को हाथ में लिया.
छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र: सीएम साय ने पेश किया महिला आरक्षण बिल पर चर्चा का प्रस्ताव
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में विपक्ष के हंगामे के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के लिए शासकीय संकल्प प्रस्ताव पेश किया. आंसदी ने चर्चा के लिए 4 घण्टे का समय निर्धारित किया.
मुख्यमंत्री साय के प्रस्ताव के बाद नेता-प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत अशासकीय संकल्प प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे आसंदी ने अग्राह्य कर दिया. इस पर डॉ. महंत ने कहा कि मुख्यमंत्री तो निंदा प्रस्ताव लाने वाले थे, लेकिन यह शासकीय संकल्प प्रस्ताव तो निंदा पर नहीं है.
इसके साथ ही विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया. विपक्ष ने आरोप लगाया कि सदन के बाहर और अंदर सत्ता पक्ष की ओर महिलाओं को गुमराह किया जा रहा है.
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विधायक लता उसेंडी ने कहा कि महिला आरक्षण पर रुकावट बनने का काम विपक्ष ने किया. महिला आरक्षण बिल को लोकसभा में गिराने का काम विपक्ष ने किया. महिलाओं की भावनाओं और सम्मान का ख्याल नहीं रखा गया.
देखिए सीधा प्रसारण –
जनसंपर्क में ‘सुशासन’: प्रिंटिंग माफियाओं पर शिकंजा, ‘प्रचार ऐप’ से आउटडोर मीडिया की रीयल-टाइम निगरानी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी प्रचार-प्रसार व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए व्यापक प्रशासनिक सुधार शुरू किए गए हैं। जनसंपर्क विभाग ने एक ओर प्रिंटिंग कार्यों में लंबे समय से चली आ रही अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई करते हुए कथित प्रिंटिंग माफिया पर लगाम कसने की पहल की है, वहीं दूसरी ओर आउटडोर मीडिया की निगरानी के लिए तकनीक आधारित “प्रचार ऐप” लागू कर दिया गया है। इन दोनों कदमों को शासन के खर्च में पारदर्शिता लाने और सिस्टम को आधुनिक बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
प्रिंटिंग व्यवस्था में वर्षों से अनियमितताएं
सूत्रों के अनुसार सरकारी विभागों में प्रिंटिंग कार्यों को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। आरोप थे कि पुराने टेंडरों के आधार पर सीमित निजी प्रिंटरों को लगातार काम दिया जा रहा था, जिससे प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई थी और भंडार क्रय नियमों का उल्लंघन हो रहा था। कई मामलों में शासकीय संस्थाओं को दरकिनार कर सीधे निजी एजेंसियों को काम सौंपा गया। बताया जाता है कि हर साल 50 से 60 करोड़ रुपये तक की प्रिंटिंग में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं होती थीं। इसमें गुणवत्ता नियंत्रण, कागज की आपूर्ति और भुगतान प्रक्रिया तक में पारदर्शिता की कमी की शिकायतें सामने आई थीं।
‘संवाद’ के माध्यम से ही होगी छपाई
इन अनियमितताओं को रोकने के लिए अब यह व्यवस्था लागू की गई है कि सभी शासकीय प्रिंटिंग कार्य “संवाद” के माध्यम से ही कराए जाएंगे। यदि किसी विभाग को अन्य एजेंसी से छपाई करानी है तो पहले “संवाद” से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होगा। बिना NOC के किसी भी प्रकार का भुगतान कोषालय से जारी नहीं किया जाएगा। इस निर्णय से प्रिंटिंग कार्यों में केंद्रीकरण के साथ-साथ निगरानी बढ़ने की उम्मीद है।
टेंडर प्रक्रिया निरस्त, नई पॉलिसी पर काम
प्रिंटिंग से जुड़ी लगातार शिकायतों को देखते हुए मौजूदा टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया है। विभाग अब एक नई और पारदर्शी प्रिंटिंग पॉलिसी तैयार कर रहा है। इसके लिए अन्य राज्यों की मुद्रण नीतियों का अध्ययन किया जा रहा है, ताकि एक बेहतर और जवाबदेह प्रणाली लागू की जा सके।
सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार में आउटडोर मीडिया की अहम भूमिका है। इसमें होर्डिंग्स, यूनिपोल्स, डिजिटल वॉल पेंटिंग्स, ब्रांडिंग और एलईडी वैन अभियान शामिल हैं। एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल और प्रमुख सड़कों जैसे स्थानों पर इनका प्रभाव व्यापक होता है। हालांकि, इस क्षेत्र में मॉनिटरिंग एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। कई शिकायतों में यह सामने आया कि वेंडर्स द्वारा विज्ञापन लगाने में देरी की जाती है या तय अवधि से पहले उन्हें हटाकर व्यावसायिक विज्ञापन लगा दिए जाते हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए जनसंपर्क विभाग ने तकनीक आधारित “प्रचार ऐप” विकसित किया है। यह एक एंड-टू-एंड मॉनिटरिंग सिस्टम है, जो तीन चरणों में काम करता है—
पहले चरण में विभाग प्रचार अभियान की योजना बनाता है और एजेंसियों को कार्य आवंटित करता है।
दूसरे चरण में वेंडर्स क्रियान्वयन की तैयारी करते हैं और एसेट्स को माउंटर्स को सौंपते हैं।
तीसरे चरण में माउंटर्स मैदानी स्तर पर निर्धारित स्थानों पर विज्ञापन सामग्री स्थापित करते हैं।
रीयल-टाइम निगरानी सुनिश्चित करने के लिए माउंटर्स को एंड्रॉइड ऐप के जरिए जियो-टैग्ड और टाइम-स्टैम्प्ड फोटो अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। उन्हें स्थापना से पहले, स्थापना के तुरंत बाद और अभियान अवधि के दौरान प्रतिदिन कम से कम एक फोटो अपलोड करना होगा।
इन तस्वीरों की पहले वेंडर एजेंसी और फिर विभाग द्वारा ऑनलाइन समीक्षा की जाएगी। इससे प्रत्येक आउटडोर एसेट की अलग-अलग ट्रैकिंग संभव होगी और किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी।
यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से होर्डिंग्स और यूनिपोल्स के लिए लागू कर दी गई है। विभाग की योजना है कि इसे जल्द ही एलईडी स्क्रीन, ब्रांडिंग और डिजिटल वॉल पेंटिंग्स जैसे अन्य माध्यमों तक भी विस्तारित किया जाए।
जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल ने 28 अप्रैल को पैनल में शामिल एजेंसियों के साथ कार्यशाला आयोजित कर इस नई प्रणाली को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक आधारित मॉनिटरिंग से ही पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकती है।
सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा अवसर, लेखा प्रशिक्षण सत्र 2026 के लिए 1 मई से शुरू होंगे आवेदन, जानें पात्रता और प्रक्रिया
रायपुर। संचालनालय कोष, लेखा एवं पेंशन, छत्तीसगढ़ द्वारा वर्ष 2026 के लेखा प्रशिक्षण सत्र (जुलाई 2026 से अक्टूबर 2026) के लिए आवेदन प्रक्रिया की घोषणा कर दी गई है। यह प्रशिक्षण विशेष रूप से लिपिक वर्गीय कर्मचारियों के लिए आयोजित किया जा रहा है, जिससे उन्हें वित्तीय एवं लेखा संबंधी कार्यों में दक्ष बनाया जा सके।
जारी आदेश के अनुसार, आगामी लेखा प्रशिक्षण सत्र के लिए आवेदन प्रक्रिया 1 मई 2026 से शुरू होगी। इच्छुक कर्मचारियों से 29 मई 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। निर्धारित अवधि के पूर्व या बाद में प्राप्त होने वाले आवेदन पत्रों पर विचार नहीं किया जाएगा। केवल निर्धारित प्रारूप में भरे गए आवेदन ही मान्य होंगे।
प्राचार्य, शासकीय लेखा प्रशिक्षण शाला से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस प्रशिक्षण के लिए वही लिपिक वर्गीय कर्मचारी आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने कम से कम 3 वर्ष की नियमित सेवा पूर्ण कर ली हो। आवेदन संबंधित कार्यालय प्रमुख के माध्यम से निर्धारित प्रपत्र में भेजना अनिवार्य होगा।
सभी आवेदन पत्र 29 मई 2026 तक कार्यालयीन समय में शासकीय लेखा प्रशिक्षण शाला, नगर घड़ी चौक, रायपुर में जमा हो जाना चाहिए। साथ ही आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज संलग्न करना भी जरूरी होगा।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आवेदन उसी प्रशिक्षण सत्र के लिए मान्य होगा, जिसके लिए वह जमा किया गया है। पुराने प्रारूप के आवेदन पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
आवेदन का निर्धारित प्रारूप और आवश्यक निर्देश रायपुर संभाग के सभी जिला कोषालयों के सूचना पटल पर उपलब्ध हैं, जहां से अभ्यर्थी विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
रायपुर मरीन ड्राइव में ठेकेदार की मनमानी, घंटों बंद रहा एंट्री गेट
रायपुर। राजधानी रायपुर के तेलीबांधा तालाब में ठेकेदार की मनमानी सामने आई है, जहां पाथवे के एंट्री एग्ज़िट द्वार में ताला जड़ने से मॉर्निंग वॉक के लिए आए लोगों को वापस लौटना पड़ा। वहीं कुछ लोगों ने इसका विराेध भी किया और गेट काे लांघकर ताला खोला। घंटों विवाद के बाद लोगों की एंट्री हो पाई। बता दें कि ठेकेदार के खिलाफ कई बार शिकायत हो चुकी है, लेकिन महापौर और नगर निगम के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
मॉर्निंग वॉक में पहुंचे लोगों ने महापौर और निगम प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा, ठेकेदारों की मनमानी आज का नहीं है, कई बार इसकी शिकायत हुई है, लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हो रही है। पूरे गार्डन को बर्बाद कर दिया गया, लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हुई। आज मरीन ड्राइव की गेट को बंद कर दिया गया। अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है। दूसरे राज्य से ठेकेदार आकर यहां कब्जा कर रहा है और यहां के महापौर और अधिकारी मौन हैं। मतलब सेटिंग का खेल है। अगर महापौर, अधिकारी नहीं बिके हैं तो कार्रवाई करें। ऐसे लोगों को तत्काल यहां से हटाना चाहिए। इनका टेंडर कैंसिल करना चाहिए।
दुकान लगाने काट दिए 200 से ज्यादा पेड़
मरीन ड्राइव में दुकान लगाने के लिए 200 से ज्यादा पेड़ों को काट दिया गया। गार्डन को पूरा उजाड़ दिया गया। टॉयलेट में कब्जा किया गया। पाथवे में रेलगाड़ी, बस और घूमने वाला जिप्सी चलाया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नियम विरुद्ध लगातार यहां काम चल रहा है, लेकिन देखने वाला कोई नहीं है।
ठेका कर्मियों को दो माह से नहीं मिला है वेतन
लोगों ने बताया, पाथवे में गड्ढा हो गया है। चलने में परेशानी होती है। दौड़ने वाले गिर भी जाते हैं। यहां ठेका सुविधा के लिए दिया गया था, लेकिन पूरी तरह असुविधा है। ठेकेदार की मनमानी जारी है। बताया जा रहा कि MS ECHT INTEGRATED RECREATION FACILITY प्राइवेट लिमिटेड अहमदाबाद के कर्मचारियों ने दो महीने की सैलरी न मिलने के कारण ताला लगाकर विरोध कर रहे थे। वहीं इस मामले में ठेकेदार प्रशांत श्रीवास्तव ने कहा, मैं बाहर हूं। मेरे को जानकारी नहीं है। पूछकर बताता हूं।
कार्रवाई की जाएगी : महापौर
इस मामले में महापौर मीनल चौबे ने कहा, ठेकेदार के कर्मचारियों का भुगतान नहीं हुआ है, इसके चलते गुस्से में आकर ठेकेदार के कर्मचारियों ने मरीन ड्राइव के गेट पर ताला लगाए थे। यहां कोई ठेकेदार व कर्मचारी ताला नहीं लगा सकते। ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 की तैयारियां तेज: जनगणना निदेशक ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर की तैयारियों की समीक्षा
रायपुर। राष्ट्रीय महत्व का व्यापक अभियान जनगणना 2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का फील्ड कार्य 1 मई से 30 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा। इस संबंध में तैयारियों, व्यवस्थाओं एवं क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला कलेक्टरों, नगर निगम आयुक्तों एवं प्रमुख जनगणना अधिकारियों के साथ की गई। इस बैठक में गृह विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने कहा कि जनगणना एक राष्ट्रीय महत्व का व्यापक अभियान है, जिसके माध्यम से देश की जनसंख्या, आवासीय स्थिति एवं सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों का सटीक आकलन किया जाता है, तथा मकान सूचीकरण एवं गणना इसकी आधारशिला है।
प्रशिक्षण एवं फील्ड कार्य पर विशेष जोर
जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने निर्देशित किया कि सभी जिलों में प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों का समुचित प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए। फील्ड कार्य के दौरान डेटा संग्रहण की विधि, डिजिटल उपकरणों के उपयोग तथा संभावित चुनौतियों के समाधान पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी क्षेत्र गणना कार्य से न छूटे और न ही किसी क्षेत्र का दोहराव हो।
पहचान-पत्र एवं स्थानीय सहयोग की व्यवस्था
बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को फोटोयुक्त पहचान-पत्र जारी किए जाएं, ताकि आम नागरिकों में किसी प्रकार का भ्रम न रहे। इसके अतिरिक्त नगरीय निकायों एवं उनसे सटे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित बड़ी आवासीय कॉलोनियों एवं अपार्टमेंट्स में जनगणना कार्य के सुचारू संचालन हेतु आवासीय कल्याण समितियों को आवश्यक निर्देश जारी करने पर भी बल दिया गया।
डिजिटल डेटा संग्रहण एवं गुणवत्ता पर जोर
जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने कहा कि इस बार जनगणना के आंकड़े मोबाइल ऐप के माध्यम से एकत्र किए जा रहे हैं, अतः प्रत्येक प्रविष्टि को अत्यंत सावधानीपूर्वक दर्ज किया जाए। किसी भी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही भविष्य की नीतियों एवं योजनाओं को प्रभावित कर सकती है, इसलिए इस कार्य में उच्च स्तर की जिम्मेदारी एवं सतर्कता आवश्यक है।
मॉनिटरिंग एवं त्वरित समस्या समाधान
कार्य की नियमित निगरानी हेतु प्रभावी मॉनिटरिंग तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए गए तथा यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या या बाधा उत्पन्न होने पर उसका त्वरित समाधान किया जाए।
जनजागरूकता एवं फेक न्यूज पर नियंत्रण
जनजागरूकता के महत्व पर बल देते हुए जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने निर्देशित किया कि स्थानीय मीडिया, सोशल मीडिया एवं जनसंपर्क गतिविधियों के माध्यम से आम नागरिकों को जनगणना के प्रति जागरूक किया जाए, ताकि वे स्वेच्छा से सही एवं पूर्ण जानकारी प्रदान करें। साथ ही सोशल मीडिया की सतत निगरानी कर किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना या फेक न्यूज का तत्काल खंडन किया जाए। नागरिकों की सुविधा के लिए टोलफ्री नंबर 1855 पर संपर्क की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है।
समर्पण के साथ कार्य पूर्ण करने का आह्वान
अंत में, जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने सभी अधिकारियों से अपेक्षा व्यक्त की कि वे पूर्ण समर्पण, समन्वय एवं उत्तरदायित्व के साथ इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व का निर्वहन करें तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण करें।
छत्तीसगढ़ कैडर के IPS डॉ. संतोष कुमार सिंह बने CISF दक्षिण जोन-II के DIG, हैदराबाद मुख्यालय में संभाला पदभार
रायपुर। आईपीएस अधिकारी डॉ. संतोष कुमार सिंह ने आज हैदराबाद स्थित मुख्यालय में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के दक्षिण जोन-II के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। इस जोन के अंतर्गत आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और उत्तरी कर्नाटक में स्थित CISF-सुरक्षित इकाइयों—खदानें, कारखाने, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम व अन्य इकाइयों की सुरक्षा के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कुछ प्रमुख बंदरगाहों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी शामिल है।
बता दें कि 16 मार्च 2026 को उनके केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की खबर सामने आई थी। छत्तीसगढ़ कैडर के 2011 बैच के आईपीएस संतोष सिंह को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में डीआईजी पद पर डेपुटेशन मिला है। इससे पहले वे पुलिस मुख्यालय में डीआईजी, सीसीटीएनएस/एससीआरबी के पद पर कार्यरत थे।
आईपीएस संतोष सिंह अपने ‘निजात अभियान’ के लिए भी चर्चित रहे हैं, जो अवैध नशे के खिलाफ चलाया गया था। इस अभियान के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ISCP अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
जानिए कौन हैं छत्तीसगढ़ कैडर के 2011 बैच के आईपीएस संतोष सिंह
- डॉ संतोष सिंह, आईपीएस 2011 बैच, गृह जिला- गाजीपुर, यूपी। पिता: अशोक सिंह, पत्रकार।
- पुलिस उप-महानिरीक्षक (डीआइजी) के रूप में जनवरी 2025 में पदोन्नति।
- बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू), वाराणसी से राजनीति-शास्त्र में बीए और एमए
- ग्रेजुएशन में यूनिवर्सिटी टॉपर और पीजी के दौरान गोल्ड-मेडलिस्ट
- यूजीसी नेट-जेआरएफ उत्तीर्ण
- अंतर्राष्ट्रीय संबंध विषय में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) नई दिल्ली से एम.फिल
- दुर्ग विश्वविद्यालय से संयुक्त राष्ट्र के शांति-निर्माण कार्यों पर पीएचडी।
- छत्तीसगढ़ के नौ विभिन्न जिलों- रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, राजनांदगांव, कोरिया, रायगढ़, महासमुंद, नारायणपुर व कोंडागांव जिलों में एसपी/एसएसपी के रूप में पदस्थ रहे।
- पूर्व में सुकमा में एएसपी और दुर्ग में सीएसपी के पद पर सेवाएं दीं।
- सामुदायिक पुलिसिंग में विशेष अभिरुचि और नक्सल जिलों में पदस्थापना दौरान नक्सलियों के आत्मसमर्पण, गिरफ्तारी और एनकाउंटर में योगदान रहा।
- महासमुंद जिले में बाल-हितैषी पुलिसिंग के लिए उपराष्ट्रपति द्वारा चैंपियंस ऑफ चेंज अवार्ड
- रायगढ़ जिले में संवेदना अभियान के लिए फिक्की स्मार्ट पुलिसिंग पुरस्कार और इंडिया पुलिस अवार्ड
- कई जिलों में चर्चित नशा-विरोधी कार्यवाही व जागरूकता अभियान, निजात चलाया।
- नशा विरोधी अभियान, निजात के लिए अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था, इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ चीफ्स ऑफ पुलिस से आईएसीपी अवार्ड
- निजात अभियान को बीपीआरएंडडी (BPR&D), गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 30 सर्वश्रेष्ठ स्मार्ट पुलिसिंग कार्यों में से एक के रूप में चुना गया है।
- रायगढ़ में एक दिन में सर्वाधिक मास्क, 12.37 लाख मास्क, वितरण का विश्व रिकॉर्ड।
- महासमुंद में सर्वाधिक बच्चों को सेल्फ-डिफेंस में प्रशिक्षित करने का विश्व रिकॉर्ड।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक सम्पन्न
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय, महानदी भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक में जनजातीय समुदाय के सर्वांगीण विकास को लेकर व्यापक चर्चा की गई और अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर, जो भौगोलिक रूप से केरल से भी बड़ा क्षेत्र है, दशकों तक विकास से वंचित रहा, लेकिन अब वहां योजनाओं का तीव्र विस्तार हो रहा है और विकास की नई धारा स्थापित हो रही है।

मुख्यमंत्री ने जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए देवगुड़ी और सरना स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही अवैध अतिक्रमण को रोकने के लिए प्रभावी और कड़े कदम उठाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि “धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना” के माध्यम से प्रदेश के 6600 गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं सुदृढ़ की जा रही हैं, जबकि पीएम जनमन योजना के अंतर्गत 32 हजार आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं।
बैठक में “नियद नेल्ला नार योजना” की उल्लेखनीय सफलता पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने इसके अगले चरण के रूप में “नियद नेल्ला नार 2.0” को शीघ्र लागू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस उन्नत पहल के माध्यम से सुदूर अंचलों में बिजली, पानी, सड़क और राशन जैसी मूलभूत सुविधाओं का और अधिक विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना” के तहत 36 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच का कार्य निरंतर प्रगति पर है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने जनजातीय भूमि के दीर्घकालीन लीज पर दोहन के मामलों की जांच के निर्देश दिए। साथ ही कोरवा और संसारी उरांव जातियों को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल किए जाने के प्रस्ताव को शीघ्र केंद्र सरकार को प्रेषित करने के निर्देश भी दिए।
शिक्षा और आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री साय ने छात्रावासों की सीट वृद्धि, उनके बेहतर रखरखाव तथा शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने नक्सल मुक्त क्षेत्रों में बच्चों के लिए त्वरित शिक्षण व्यवस्था विकसित करने और खुले में कक्षाएं संचालित न करने के स्पष्ट निर्देश दिए।
अम्बिकापुर नेशनल हाईवे के निर्माण में हो रही धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही बरसात के दौरान कटने वाले मार्गों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया।
आदिम जाति विकास विभाग के मंत्री एवं परिषद के उपाध्यक्ष रामविचार नेताम ने कहा कि बस्तर, सरगुजा सहित प्रदेश के दूरस्थ जनजातीय अंचलों में लंबे समय तक नक्सलवाद विकास की सबसे बड़ी बाधा बना रहा। बीते चार दशकों की इस चुनौती से मुक्ति मिलने के बाद अब इन क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी एवं तेज क्रियान्वयन संभव हो सका है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि अब जनजातीय समुदाय तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है और उन्हें आगे बढ़ने के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
श्री नेताम ने यह भी बताया कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद योजनाओं का जमीनी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ है। सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए स्वीकृत योजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से संवेदनशील मुद्दों का त्वरित एवं प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने पर विशेष बल दिया।
उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के बसाहटों तक अब बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच रही हैं। साथ ही नए छात्रावासों के निर्माण से दूरस्थ क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिल रहा है, जिससे उनके समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वनमंत्री केदार कश्यप, बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लता उसेंडी, सरगुजा क्षेत्र विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय, मध्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रणव मरपच्ची, विधायक रायमुनी भगत, विधायक चैतराम अटामी, विधायक विक्रम उसेंडी, विधायक उद्देश्वरी पैकरा, विधायक नीलकंठ टेकाम, विधायक आशाराम नेताम, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम सहित विभिन्न विभागों के सचिव एवं परिषद के सदस्य उपस्थित थे।
विशेष सत्र से पहले कांग्रेस विधायक दल की बैठक, सदन में सरकार को घेरने की तैयारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में विधानसभा के प्रस्तावित विशेष सत्र से पहले कांग्रेस ने अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक राजधानी रायपुर स्थित राजीव भवन में आयोजित की जा रही है।
बता दें कि बैठक की अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत कर रहे हैं। इस बैठक में पार्टी के सभी विधायक मौजूद हैं, वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज भी शामिल हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक विधानसभा के विशेष सत्र को ध्यान में रखते हुए बुलाई गई है। इसमें सरकार को घेरने के लिए विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जा रही है और विपक्ष की रणनीति तैयार की जा रही है।
महिला आरक्षण पर सत्र, निंदा प्रस्ताव की तैयारी
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने 30 अप्रैल को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया है। इस सत्र में महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा रही है। सत्र का फोकस नारी शक्ति वंदन अधिनियम और 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर रहेगा, जिस पर सदन में तीखी बहस के संकेत हैं।
सीएम ने पहले ही कर दी थी घोषणा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 20 अप्रैल को ‘जन आक्रोश पदयात्रा’ के दौरान विशेष सत्र बुलाने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष के रुख की निंदा करते हुए प्रस्ताव लाया जाएगा। इसी दिन भाजपा ने रायपुर में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के खिलाफ प्रदर्शन किया था। पार्टी का आरोप है कि विपक्षी दल महिलाओं को आरक्षण देने वाले कानून के क्रियान्वयन में बाधा डाल रहे हैं।
लोकसभा में नहीं पास हो पाया था विधेयक
गौरतलब है कि 17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका था। इस विधेयक का उद्देश्य 2029 से विधायिकाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना था।
सियासी टकराव के संकेत
मुख्यमंत्री साय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि यह विधेयक महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया था, लेकिन कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने इसे पारित नहीं होने दिया।
ऐसे में अब विधानसभा के विशेष सत्र में सत्ता और विपक्ष के बीच जोरदार टकराव के आसार नजर आ रहे हैं। एक ओर कांग्रेस सरकार को घेरने की तैयारी में है, तो वहीं भाजपा भी विपक्ष पर हमले को लेकर पूरी तरह तैयार दिख रही है।
धमतरी में बनेगा प्रदेश का सबसे बड़ा सैनिक स्कूल, 500 विद्यार्थियों को मिलेगी सैन्य शिक्षा की राह, रक्षा मंत्रालय को भेजा गया प्रस्ताव
रायपुर। छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक मानचित्र पर धमतरी जिला जल्द ही एक नई पहचान दर्ज कराने जा रहा है। जिले में 500 सीटों की क्षमता वाले एक विशाल सैनिक स्कूल की स्थापना की कवायद तेज हो गई है। राज्य सरकार द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्रस्ताव विधिवत अनुमोदित कर केंद्रीय रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) को प्रेषित कर दिया गया है। यह न केवल धमतरी बल्कि पूरे रायपुर संभाग के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।
युवाओं के लिए सुनहरा अवसर
प्रस्तावित सैनिक स्कूल का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को राष्ट्रीय स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ सैन्य करियर के लिए तैयार करना है। यहाँ पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अनुशासित वातावरण में न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता प्राप्त होगी, बल्कि उनके शारीरिक एवं नेतृत्व कौशल का भी सर्वांगीण विकास हो सकेगा। यह संस्थान विशेष रूप से उन मेधावी छात्रों के लिए वरदान साबित होगा, जो भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होकर देश की सेवा करने का सपना देखते हैं।
अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा परिसर
अधिकारियों के अनुसार, यह सैनिक स्कूल आधुनिक सुविधाओं और विश्वस्तरीय अधोसंरचना (Infrastructure) से सुसज्जित होगा। परिसर में डिजिटल शिक्षण माध्यमों से लैसअत्याधुनिक स्मार्ट कक्षाएं होंगी। शारीरिक फिटनेस और खेलों के लिए विस्तृत मैदान के साथ-साथ सुव्यवस्थित छात्रावास (Hostel) सुविधा तथा समृद्ध पुस्तकालय एवं विशेष रक्षा प्रशिक्षण केंद्र भी स्थापित किया जाएगा।
जिला प्रशासन की प्राथमिकता
धमतरी के कलेक्टर ने इस परियोजना को जिले के विकास के लिए मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन इस प्रोजेक्ट को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। रक्षा मंत्रालय की टीम जल्द ही संभावित स्थलों का निरीक्षण करेगी। हम भूमि चयन से लेकर बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता तक, सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर रहे हैं ताकि इस स्कूल को जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जा सके।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगी गति
सैनिक स्कूल की स्थापना से शिक्षा के साथ-साथ क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई ऊर्जा मिलेगी। इस संस्थान के संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही, यह स्कूल धमतरी को प्रदेश के एक प्रमुख शैक्षणिक केंद्र के रूप में स्थापित करेगा, जिससे छात्रों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश पाने के लिए एक सुदृढ़ आधार प्राप्त होगा। अब पूरे प्रदेश की निगाहें रक्षा मंत्रालय के आगामी निरीक्षण और स्वीकृति पर टिकी हैं, जिसके बाद निर्माण कार्य का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।