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शराब घोटाले में चेतन्य बघेल को मिले थे 16.70 करोड़, ईडी ने पूर्व सीएम के बेटे की गिरफ्तारी को लेकर जारी किया बयान
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को 18 जुलाई 2025 को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है। ईडी ने उन्हें विशेष न्यायालय (PMLA), रायपुर में पेश किया, जहां से उन्हें 22 जुलाई 2025 तक ईडी की रिमांड पर भेज दिया गया है। चेतन्य बघेल की गिरफ्तारी को लेकर ईडी ने एक अधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है।
प्रेस को जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि ईडी की यह जांच ACB/EOW रायपुर द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस और ईडी की जांच में यह सामने आया है कि 2019 से 2022 के बीच हुए इस शराब घोटाले से राज्य सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ और करीब 2500 करोड़ रुपये की अवैध आय (Proceeds of Crime – POC) अर्जित की गई।
चैतन्य बघेल के खिलाफ आरोप क्या हैं?
ईडी के अनुसार, चैतन्य बघेल ने 16.70 करोड़ रुपये की अवैध कमाई को अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में खपाया। उन्होंने यह पैसा नकद में ठेकेदारों को भुगतान, फर्जी बैंक एंट्री और फ्लैट खरीद के बहाने से उपयोग किया। वह त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ मिलकर एक ‘विठ्ठलपुरम’ नामक परियोजना में फर्जी फ्लैट खरीद की योजना बनाकर 5 करोड़ रुपये प्राप्त करने के आरोप में भी घिरे हैं। इन फ्लैटों को ढिल्लन के कर्मचारियों के नाम पर खरीदा गया था, लेकिन असल लाभार्थी चैतन्य ही थे।
जांच में यह भी पाया गया कि चैतन्य ने इस घोटाले से जुड़े 1000 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध धनराशि को हैंडल किया और इसे अनवर ढेबर एवं अन्य के माध्यम से छत्तीसगढ़ कांग्रेस के तत्कालीन कोषाध्यक्ष तक पहुंचाया गया। यह राशि बघेल परिवार के करीबी लोगों द्वारा आगे निवेश के लिए प्रयोग की गई।
अब तक कौन-कौन फंसे हैं?
इस मामले में अब तक ईडी द्वारा जिन प्रमुख लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें शामिल हैं:अनिल टुटेजा (पूर्व आईएएस),अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लन,अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी कवासी लखमा (तत्कालीन आबकारी मंत्री और वर्तमान विधायक)ईडी ने बताया कि यह घोटाला सिर्फ शराब बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे अर्जित धन का उपयोग राजनीतिक और निजी निवेशों में किया गया है। मामले में धन की अंतिम उपयोगिता की जांच अभी चल रही है और आने वाले समय में और भी खुलासे संभव हैं।
रईसजादों के हाईवे जाम मामले में हाईकोर्ट सख्त, कहा– महंगी गाड़ियां जब्त क्यों नहीं की?
बिलासपुर। लग्जरी कारों के काफिले के साथ नेशनल हाईवे को जाम कर रील बनाने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा ने इस कृत्य पर कड़ी नाराजगी जताते हुए राज्य शासन और पुलिस से सवाल पूछा है कि इन युवकों की महंगी गाड़ियां जब्त क्यों नहीं की गईं, और अब तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई? कोर्ट ने मामले में शपथपत्र सहित जवाब तलब किया है।
दरअसल NH-130 पर रईसजादों की मनमानी का मामला अब अदालत की चौखट तक पहुंच चुका है। कुछ दिन पूर्व, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कुछ युवक लग्जरी कारों के काफिले के साथ हाईवे को जाम कर रील बना रहे थे। यह वीडियो इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें कई महंगी गाड़ियों जैसे BMW, Audi, Mercedes को देखा गया।
इस वायरल वीडियो को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJ) रमेश कुमार सिन्हा ने स्वतः संज्ञान लिया। उन्होंने कोर्ट में राज्य शासन और पुलिस प्रशासन से जवाब तलब किया है कि इस मामले में सिर्फ ट्रैफिक चालान क्यों किया गया, एफआईआर और वाहन जब्ती की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
मुख्य न्यायाधीश ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा:
“अगर आम नागरिक ट्रैफिक नियम तोड़े तो कार्रवाई होती है, फिर इन रसूखदार युवकों को क्यों बख्शा गया? सिर्फ जुर्माना काफी नहीं, यह कानून व्यवस्था की खुली अवहेलना है।”
नाम और नंबर छिपाने पर नाराजगी:
हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि पुलिस ने इस मामले में दोषी युवकों के नाम और गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर सार्वजनिक नहीं किए हैं। कोर्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह सीधा-सीधा रसूखदारों को बचाने की कोशिश है। पुलिस रिकॉर्ड में जिन युवकों के नाम सामने आए हैं, उनमें वेदांश, सिद्धार्थ, यशवंत, दुर्गेश, विपिन और अभिनव शामिल हैं।हाईकोर्ट ने इस मामले में पुलिस और राज्य शासन को शपथपत्र के साथ विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि इन युवकों के खिलाफ अब तक क्या आपराधिक या प्रशासनिक कार्रवाई की गई है?
पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे की गिरफ्तारी पर कांग्रेस ने फूंका ED का पुतला, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा- चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, न्याय सबके साथ होगा…
राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य की गिरफ्तारी के खिलाफ कांग्रेस लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है. ईडी का पुतला दहन कर रही है. कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को लेकर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमनसिंह ने बयान दिया है. उन्होंने कहा कि “ईडी अपना काम कर रही है और कांग्रेस अपना काम कर रही है. दोनों के काम में कोई बाधा नहीं है. कांग्रेस को अपना प्रदर्शन करना चाहिए और ईडी को अपना काम. कांग्रेस को क्यों दिक्क्त हो रही है, जब मामला इतना प्रभावित हो चुका है ? ईडी का अपना कर्तव्य है. उन्होंने कहा कि किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है न्याय सबके साथ होगा.”
बता दें, छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ईडी ने 18 जुलाई को पूर्व सीएम भूपेश बघेल के घर पर छापेमार कार्रवाई के साथ ही शराब घोटाले से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में उनके बेटे चैतन्य को गिरफ्तार किया है. ईडी की इस कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है, जिसे लेकर आज श्रावन मास के दूसरे सोमवार पर डॉ. रमन सिंह ने एक आयोजन के दौरान मीडिया में बयान जारी किया है.
कांवड़ यात्रा में शामिल हुए डॉ. रमन सिंह
पवित्र सावन मास के दूसरे सोमवार को शिवभक्ति का अनोखा नजारा राजनांदगांव शहर में देखने को मिला. विधानसभा अध्यक्ष और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह नंदई चौक पहुंचे और विशाल कांवड़ यात्रा में शामिल हुए. उन्होंने पुष्पवर्षा कर कांवड़ियों का स्वागत किया और बोल बम के नारों के साथ शिव की भक्ति में डूबते हुए यात्रा में पैदल शामिल हो गए.
शिव के बिना सब शव है : विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह
कांवड़ यात्रा समिति ने डॉ. रमन सिंह का भी गर्मजोशी से स्वागत किया. इस अवसर पर महापौर मधुसूदन यादव सहित भाजपा कार्यकर्ता भी मौजूद रहे. डॉ. सिंह ने कहा, “शिव है तो दुनिया चलायमान है, शिव के बिना सब शव है. सावन के सोमवार का महत्व देश ही नहीं, पूरी दुनिया जानती है कि शिव जी पर जल चढ़ाना कितना सुखदायी है.”
तहसील कार्यालय में ACB का छापा, 25000 की रिश्वत लेते तहसीलदार का बाबू रंगेहाथ गिरफ्तार
रायपुर। रिश्वतखोरों के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई हुई है। 25000 रुपये घूस लेते बाबू को गिरफ्तार किया गया है। मामला सूरजपुर जिले का है, जहां तहसीलदार के बाबू को एसीबी ने रंगे हाथों पकड़ा है। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने ये बड़ी कार्रवाई की है। तहसील कार्यालय सूरजपुर में पदस्थ तहसीलदार के बाबू जुगेश्वर राजवाड़े को एक किसान से नामांतरण के एवज में 25 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई ACB की रायपुर टीम द्वारा सोमवार को सूरजपुर तहसील कार्यालय परिसर में की गई, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है।
पकड़े गए कर्मचारी की पहचान जुगेश्वर राजवाड़े के रूप में हुई है, जो तहसीलदार कार्यालय में राजस्व संबंधित मामलों की प्रक्रिया में सहायक के रूप में कार्यरत है। वह एक किसान से भूमि नामांतरण (mutation) प्रक्रिया के नाम पर 25 हजार रुपये की मांग कर रहा था। परेशान होकर किसान ने इस संबंध में ACB कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। जब एसीबी ने इस मामले में अपनी जांच आगे बढ़ायी, तो शिकायत सही मिली। जिसके बाद एसीबी की टीम ने इस मामले में अपनी कार्रवाई आगे बढ़ायी।
शिकायत की पुष्टि के बाद ACB की टीम ने ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई और सोमवार को तयशुदा राशि लेते समय जुगेश्वर राजवाड़े को तहसील परिसर में ही रंगेहाथ पकड़ लिया। उसके हाथों से रिश्वत की राशि बरामद की गई, जिसकी पुष्टि मौके पर की गई।ACB अधिकारियों ने आरोपी कर्मचारी को तुरंत हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और पूरे घटनाक्रम की विडियोग्राफी भी की गई है। अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इस भ्रष्टाचार में अन्य कर्मचारी या तहसीलदार की भी संलिप्तता है।
पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारी भी मिली है, जिसके बाद कार्यालय के अन्य लोगों की संलिप्तता का भी खुलासा हो सकता है।
शराब घोटाला मामले में EOW की बड़ी कार्रवाई, तीन आरोपियों को हिरासत में लिया
रायपुर। शराब घोटाला मामले में EOW ने बड़ी कार्रवाई की है. EOW ने मनीष मिश्रा, संजय कुमार मिश्रा और अभिषेक सिंह को गिरफ्तार किया है. बताया जा रहा कि संजय और मनीष नेक्सजेन पॉवर कंपनी बनाकर FL 10 लाइसेंस लेकर प्रदेश में महंगी ब्रांडेड अंग्रेजी शराब की सप्लाई करते थे.
बता दें कि मनीष और संजय कुमार आपस में सगे भाई हैं. संजय कुमार पेशे से चार्टड अकाउंटेंट हैं. अभिषेक सिंह पूर्व में आबकारी घोटाले के आरोपी अरविंद सिंह का भतीजा है. तीनों आरोपियों को EOW की विशेष कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां से तीनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा सकती है. बता दें कि हाल ही में ईडी ने शराब घोटाला मामले में पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था. उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है.
क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामला
वर्ष 2019 से 2023 के बीच, राज्य के 15 बड़े जिलों में पदस्थ आबकारी अधिकारी और अन्य प्रशासनिक पदाधिकारियों द्वारा बिना ड्यूटी चुकाई गई देसी शराब (B-Part शराब) की शासकीय दुकानों में समानांतर अवैध बिक्री की गई. बस्तर और सरगुजा संभाग को छोड़कर चयनित जिलों में अधिक खपत वाली देसी शराब दुकानों को डिस्टलरी से सीधे अतिरिक्त अवैध शराब भेजी जाती थी, जिसे वैध शराब के साथ समानांतर बेचा जाता था.
इस पूरे नेटवर्क में डिस्टलरी, ट्रांसपोर्टर, सेल्समैन, सुपरवाइजर, आबकारी विभाग के जिला प्रभारी अधिकारी, मंडल व वृत्त प्रभारी, और मैन पावर एजेंसी के अधिकारी-कर्मचारी शामिल थे. अवैध शराब को “बी-पार्ट शराब” कहा जाता था, और इससे अर्जित रकम सीधे सिंडीकेट के पास पहुंचाई जाती थी.
2174 से बढ़कर 3200 करोड़ का हुआ घोटाला
EOW/ACB द्वारा अब तक की गई जांच और 200 से अधिक व्यक्तियों के बयान एवं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अनुमान है कि लगभग 60,50,950 पेटी बी-पार्ट शराब की अवैध बिक्री हुई है, जिसकी अनुमानित कीमत 2174 करोड़ रुपये से अधिक है. पहले इस घोटाले का अनुमान 2174 करोड़ रुपये था, लेकिन नवीनतम आंकड़ों के अनुसार घोटाले की कुल राशि 3200 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है.
अब तक हुई प्रमुख गिरफ्तारियां
इस प्रकरण में अब तक अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी, कवासी लखमा, विजय भाटिया सहित कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. FIR के अनुसार 70 आरोपी नामजद हैं. चतुर्थ पूरक चालान की प्रस्तुति हेतु न्यायालय ने आरोपियों को नोटिस जारी किए थे, लेकिन वे न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए.
EOW/ACB की जांच जारी
EOW/ACB द्वारा अब भी इस मामले की गहन जांच जारी है, जिसमें विदेशी शराब में लिये गये सिंडीकेट कमीशन, धन शोधन के नेटवर्क और राज्य स्तरीय समन्वय तंत्र की परतें खोली जा रही हैं.
पूर्व मंत्री को घोटाले में मिले 64 करोड़ रुपये
शराब घोटाला मामले की जांच में अब तक यह सामने आया है कि पूर्व मंत्री कवासी लखमा के संरक्षण में विभागीय अधिकारियों, सहयोगियों और ठेकेदारों के माध्यम से यह सुनियोजित घोटाला किया गया. इस घोटाले से प्राप्त रकम को व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों में खर्च किया गया, जिससे उन्हें अनुचित आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ. अब तक तीन पूरक अभियोग पत्रों सहित कुल चार अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किए जा चुके हैं. इस मामले में अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. जांच जारी है.
शराब घोटाला मामले में 22 अफसर निलंबित
बीती 11 जुलाई को छत्तीसगढ़ सरकार ने शराब घोटाला मामले में कुल 22 अधिकारियों को निलंबित किया था. यह कार्रवाई पूर्ववर्ती भूपेश सरकार के दौरान हुए 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले की जांच के आधार पर की गई है. वर्ष 2019 से 2023 के बीच हुए इस घोटाले में आबकारी विभाग के इन अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई थी, जिन्होंने अवैध रूप से अर्जित धन से संपत्तियां बनाई थी.
राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में जिले के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को कैबिनेट मंत्री व सांसद ने किया सम्मानित
बलौदाबाजार। 68 वीं राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में जिले के खिलाड़ियों ने कुराश एवं नेट बॉल में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीते। इन विजेता खिलाड़ियों को कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, जांजगीर -चाम्पा सांसद कमलेश जांगड़े ने शनिवार क़ो संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में गुलदस्ता देकर सम्मानित किया।
इसके पूर्व कलेक्टर दीपक सोनी ने राज्य सरकार की ओर दी गई पुरस्कार राशि का चेक खिलाड़ियों क़ो प्रदान किया। इस दौरान स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ी को 21 हजार रुपये, रजत पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ी को 15 हजार रुपये और कांस्य पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ी को 10 हजार रुपये का चेक दिया गया।
घर में चल रहा था धर्मांतरण का खेल, शिक्षिका और उसके बेटे पर FIR, गिरफ्तारी की लटकी तलवार
बिलासपुर। बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र अंतर्गत गीतांजलि सिटी फेस-2 में एक घर में चल रही प्रार्थना सभा ने उस वक्त राजनीतिक और सामाजिक तूल पकड़ लिया, जब स्थानीय नागरिक सूरज ताम्रकार ने लिखित शिकायत में आरोप लगाया कि वहाँ अवैध रूप से धर्मांतरण कराया जा रहा है। इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आत्मानंद स्कूल की शिक्षिका अरुंधति साहू और उनके बेटे साकेत साहू के खिलाफ धारा 299 BNS के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अरुंधति साहू के घर पर हर रविवार प्रार्थना सभा आयोजित की जाती थी, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल होते थे। लेकिन हाल ही में इसमें धर्मांतरण के उद्देश्य से प्रभाव डालने और धार्मिक पहचान बदलने के लिए प्रेरित करने की बात सामने आई है। जब हिंदू संगठनों को इसकी जानकारी मिली, तो वे भारी संख्या में वहाँ पहुँचे और विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद स्थानीय माहौल तनावपूर्ण हो गया।
घटना की जानकारी मिलते ही सरकंडा थाना पुलिस मौके पर पहुँची और स्थिति को संभाला। फिलहाल पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और यह भी जांच की जा रही है कि कहीं बड़ी साजिश या नेटवर्क तो इसके पीछे नहीं है।
इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण साव ने कड़ा रुख अपनाते हुए बयान दिया है। उन्होंने कहा,
“कांग्रेस सरकार के समय एक भी धर्मांतरण मामले में कार्रवाई नहीं होती थी। अब हमारी सरकार में ऐसे लोग पकड़े जा रहे हैं, क्योंकि हम सख्ती से कार्यवाही कर रहे हैं। धर्मांतरण करने वालों के खिलाफ कानून है और अब उस पर अमल हो रहा है। यही वजह है कि अब इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि पिछली सरकार के समय धर्मांतरण करने वालों को राजनीतिक संरक्षण मिलता था, जिससे ये गतिविधियाँ बेखौफ होकर चलती थीं।
DMF की राशि का जनहित में हो अधिकतम उपयोग, खनिज चोरी रोकने पर ध्यान दें अधिकारी: सांसद बृजमोहन अग्रवाल
रायपुर। सांसद एवं वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल ने बलौदाबाजार-भाटापारा में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में खनिज संसाधनों से मिलने वाली निधि के जनहित में पारदर्शी और प्रभावी उपयोग को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
खनिज चोरी पर अंकुश और पारदर्शिता
सांसद श्री अग्रवाल ने सभी खदानों में वे-ब्रिज (Weigh Bridge) को अनिवार्य करने के निर्देश दिए, जिससे निकासी के अनुसार रॉयल्टी की पर्ची कटे और राजस्व की हानि न हो। 19 प्रमुख खदानों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने का भी निर्णय लिया गया।
उन्होंने कहा कि फंड की चोरी रोकना और DMF राशि में वृद्धि लाना हमारी प्राथमिकता है। अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि सरकारी संसाधन निजी कंपनियों के हित में नहीं, बल्कि जनहित में उपयोग हों।
दिशा निर्देश के अनुसार 15 किलोमीटर क़ी परिधि में स्थित गांव क़ो खनन से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित गांव में तथा 25 किलोमीटर क़ी परिधि वाले गांव क़ो अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित गांव क़ी श्रेणी में शामिल करने गठित टीम से सर्वे कराने कहा गया। बैठक में उद्योगों से सीएसआर एवं खनिज रायल्टी क़ी राशि सुनिश्चित रूप से मिलने पर जोर दिया गया ताकि राशि का उपयोग जिले में विकास कार्यो के लिए किया जा सके।
बताया गया कि नवीन मार्गदर्शिका अनुसार 70 प्रतिशत प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र एवं 30 प्रतिशत अप्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र में राशि व्यय किया जाएगा। वर्ष 2016 -17 से 2024-25 तक 500 करोड़ के 5804 कार्य स्वीकृत किये गए हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य में प्राथमिकता
बैठक में तय किया गया कि अगले तीन वर्षों में प्राथमिकता के आधार पर सभी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, प्रार्थना शेड, शौचालय और खेल मैदान विकसित किए जाएंगे।
-जरूरत पड़ने पर संविदा शिक्षकों की नियुक्ति पंचायत और ब्लॉक स्तर पर की जाएगी।
-PCMB, अंग्रेज़ी और कॉमर्स जैसे विषयों की कक्षाएं प्रारंभ करने के लिए विषय-विशेषज्ञ एवं रिटायर्ड शिक्षकों को नियुक्त करने की छूट दी जाएगी।
-DMF मद से शिक्षा में ₹20 करोड़ और स्वास्थ्य में ₹15 करोड़ खर्च करने का निर्णय लिया गया।
स्वास्थ्य सेवाएं और अधूरी योजनाएं
-सभी CHC व PHC का अपग्रेडेशन और एम्बुलेंस सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
-872 अपूर्ण कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने हेतु अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
-ग्राम स्वराज घोषणाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।
CSR की निगरानी और स्थानीय उपयोग
सांसद श्री अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि कंपनियां CSR कार्य शुरू करने से पहले जिला प्रशासन से अनुमति लेंगी। CSR की राशि सीधे जिले को दी जाए, ताकि उसका उपयोग सही दिशा में, जनहित के कार्यों में किया जा सके।
हर सरकारी कार्यालय में पौधारोपण अभियान:
‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत हर सरकारी कार्यालय में कर्मचारियों द्वारा पौधारोपण सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही तालाब, नदी, स्कूल व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर फलदार पौधों का रोपण किया जाएगा।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि, जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप योजनाओं का क्रियान्वयन और संसाधनों का पारदर्शी उपयोग हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में मंत्री टंक राम वर्मा, सांसद कमलेश जांगड़े, कलेक्टर दीपक सोनी, जिला पंचायत CEO दिव्या अग्रवाल समेत जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ में रजिस्ट्री प्रक्रिया हुई पूरी तरह डिजिटल
रायपुर। छत्तीसगढ़ में रजिस्ट्री प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए 10 जुलाई से सभी रजिस्ट्री कार्यालयों में ‘माय डीड’ ऑनलाइन सिस्टम लागू कर दिया गया है. इस सिस्टम की शुरुआत पहले पायलट प्रोजेक्ट के तहत रायपुर, नवागढ़, डौंडीलोहारा, नगरी और पथरिया जैसे कुछ शहरों में की गई थी, जहां इसकी सफलता के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया गया.
नए सिस्टम के तहत अब बटांकन और नामांतरण की प्रक्रिया भी रजिस्ट्री कार्यालयों से ही ऑनलाइन हो सकेगी, जिससे लोगों को तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यह सिस्टम रजिस्ट्री प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है. इसके जरिए दस्तावेजों की जांच, स्वीकृति और रजिस्ट्री घर बैठे की जा सकेगी. साथ ही, यह सिस्टम राजस्व विभाग से जुड़ा होने के कारण जमीन के रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध होंगे, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका खत्म हो जाएगी.
हालांकि, कुछ जिलों में इंटरनेट नेटवर्क और तकनीकी समस्याओं के कारण इस सिस्टम को लागू करने में चुनौतियां आ रही हैं. रायपुर पंजीयन कार्यालय के पंजीयक विनोज कोचे ने बताया कि मुख्यालय से 10 जुलाई को आदेश जारी होने के बाद यह सिस्टम बालोद, बलौदाबाजार, बिलासपुर, दुर्ग, रायपुर, नवा रायपुर सहित कई अन्य जिलों के रजिस्ट्री कार्यालयों में लागू हो चुका है.
‘माय डीड’ सिस्टम से रजिस्ट्री कार्यालयों में भीड़ कम होने और कर्मचारियों के काम के बोझ में कमी आने की उम्मीद है. यह कदम छत्तीसगढ़ में डिजिटल प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
26 साल बाद मिला इंसाफ: TI की मौत के बाद पत्नी ने लड़ी कानूनी लड़ाई, हाईकोर्ट ने किया बरी
बिलासपुर। न्याय में देर भले हो, लेकिन अंधेर नहीं — इस कहावत को सच कर दिखाया एक महिला ने, जिसने अपने दिवंगत पति की बेगुनाही साबित करने के लिए 26 वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी। यह मामला महासमुंद जिले के बसना थाना में पदस्थ तत्कालीन थाना प्रभारी (TI) गणेशराम शेंडे का है, जिन पर 1990 में रिश्वत मांगने का आरोप लगा था।
10 अप्रैल 1990 को गणेशराम शेंडे के खिलाफ एक व्यक्ति ने लोकायुक्त और एसपी से शिकायत की थी कि उन्होंने जमानत के एवज में 1,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त ने जांच कर उन्हें दोषी ठहराते हुए 3 साल की सजा और 2,000 रुपये जुर्माने की सज़ा सुनाई थी।
हालांकि, इस मामले में पीड़ित ने आरोप लगाया था कि रिश्वत की मांग जमानत मिलने के बाद की गई थी। इसी बिंदु को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया और कहा कि “जब जमानत पहले ही मिल चुकी थी, तो उसके एवज में रिश्वत मांगने का कोई औचित्य नहीं बनता।” इस आधार पर हाईकोर्ट ने दिवंगत TI गणेशराम शेंडे को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
TI गणेशराम शेंडे का देहांत पहले ही हो चुका था, लेकिन उनकी पत्नी ने न्याय की उम्मीद नहीं छोड़ी और हाईकोर्ट में मामले की पैरवी जारी रखी। अंततः उन्हें अपने पति की बेगुनाही का प्रमाण मिला।
यह मामला न केवल एक लंबी कानूनी लड़ाई का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सच्चाई के लिए डटे रहना आखिरकार इंसाफ दिला सकता है — भले ही उसमें सालों लग जाएं।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने बिल्हा में आधुनिक सुविधाओं से युक्त नवीन सिविल कोर्ट भवन का किया लोकार्पण
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में न्यायिक अधोसंरचना में वृद्धि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रकट करते हुए एवं आमजन के लिए बेहतर कार्य वातावरण प्रदान करने के उद्देश्य से मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा के द्वारा आज बिलासपुर जिला के बिल्हा तहसील में नवीन सिविल कोर्ट भवन लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी पोर्टफोलियो न्यायाधीश जिला बिलासपुर, न्यायामूर्ति नरेन्द्र कुमार व्यास, न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा न्यायाधीश छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की गरिमामय उपस्थिति रही है।
इस अवसर पर अपने प्रभावशाली उद्धबोधन में मुख्य न्यायाधिपति ने न्याय की प्रभावी पहुंच आमजन तक स्थापित किये जाने में न्यायिक अधोसंरचना के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सशक्त अंधोसंरचना ही प्रभावी न्यायप्रणाली की आधारशिला होती है, छत्तीसगढ़ के समस्त जिलो में बुनियादी न्यायिक अधोसंरचना स्थापित होने से न्यायिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों की दक्षता बढ़ने के साथ-साथ आमजन को निष्पक्ष एवं कुशल न्याय शीघ्र, सरल एवं सुलभ हो सकेगा।
मुख्य न्यायाधिपति के द्वारा नवीन सिविल न्यायालय भवन बिल्हा की हरियाली, वातावरण एवं स्वच्छता के साथ-साथ न्यायालय कक्ष, सुविधाजनक प्रतिक्षालय, शिशु देखभाल कक्ष अभियोजन कार्यालय, सुरक्षित बंदीगृह एवं उपलब्ध सुविधाएं की प्रंशसा करते हुए कहा गया कि यह भवन छत्तीसगढ़ के अन्य जिला न्यायालयों के लिए मिसाल साबित होगा।
इस अवसर पर मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के द्वारा न्यायिक संस्थाओं मे बुनयादी एवं आधारभूत सुविधा उपलब्ध किये जाने पर जोर दिया जाता रहा है और उनकी प्राथमिकता ऐसी व्यवस्था किये जाने की है कि छत्तीसगढ़ के सभी न्यायिक संस्थाओं में सर्वसुविधायुक्त भवन हो, जिससे आधारभूत संसाधन उपलब्ध रहे। बिल्हा में नवीन सिविल कोर्ट भवन, समय की जरुरत थी। बिल्हा में नवीन न्यायालय भवन निर्माण से स्थानीय नागरिकों को न्याय तक त्वरित पहुंच सुनिश्चित होगी। यह भवन न केवल भौतिक रूप से सुसजित है, बल्कि इसमें डिजिटल कोर्ट, वकीलों के लिए आधुनिक कक्ष, अस्पताल, ए.टी.एम. तथा प्रतीक्षालय जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। इस अवसर पर मुख्य न्यायाधिपति द्वारा उपस्थित न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी और अधिवक्तागण को दिशानिर्देश दिया गया कि सुविधायुक्त अधोसंरचना व आधुनिक तकनीकी का उपयोग पक्षकारों को सुविधापूर्ण वातावरण में शीघ्र एवं गुणवत्तायुक्त न्याय प्रदान किये जाने के लिए किया जाए , न्याय की आशा के साथ उपस्थित पक्षकारों की समस्याओं को सुविधापूर्ण वातावरण में शीघ्रता से निराकृत किया जाए।
यह उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा मुख्य न्यायाधिपति महोदय द्वारा पद भार ग्रहण करने के पश्चात् सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य के दूरस्थ जिला मुख्यालय एवं बाह्य न्यायलयों का भ्रमण कर न्यायिक अधोसंरचना एवं आवश्यक सुविधाओं का अभाव होने से पक्षकारों, अधिवक्तागण, न्यायिक कर्मचारी एवं अधिकारियों को होने वाली असुविधा को दृष्टिगत रखते हुये दूरदर्शिता पूर्ण एवं सकारात्मक सोच के भागीरथ प्रयास किये जा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में न्यायिक अधोसंरचना से अभूतपूर्ण विकास का कार्य हो रहा है। जिससे अधिकारी एवं कर्मचारियों की दक्षता में वृद्धि होने के साथ पक्षकारों को सुविधायुक्त वातावरण शीघ्र न्याय प्राप्त करने की परिकल्पना साकार हो रही है एवं बिल्हा का नवीन न्यायालय भवन का निर्माण कार्य समयबद्ध एवं गुणवत्ता के उच्चतम मानको के अनुरूप पूर्ण हो सका है।
उपरोक्त लोकार्पण, कार्यक्रम की शुरूआत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बिलासपुर के स्वागत भाषण से हुई और समापन मुख्य न्यायिक मजिस्टेट धन्यवाद ज्ञापन से हुआ, कार्यक्रम के पश्चात न्यायालय भवन प्रांगण में वृक्षारोपण किया गया।
खाद दुकानों पर छापा: कृषि केंद्रों में मिली अनियमितताएं, एक का लाइसेंस निलंबित, कई दुकानों को नोटिस जारी
बिलासपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर किसानों को गुणवत्ता युक्त खाद उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल के आदेश पर गठित विशेष उड़नदस्ता टीम ने विकासखंड कोटा और बिल्हा में आधा दर्जन कृषि केंद्रों पर छापामार कार्रवाई की।
उप संचालक कृषि ने बताया कि मेसर्स उन्नत कृषि केंद्र रतनपुर में क्रेताओं को बिना बिल दिये उर्वरक का व्यवसाय किये जाने के कारण नोटिस जारी किया गया। मेसर्स शेखर कृषि केंद्र कोनचरा को बिना आई.एफ.एम.एस, आई.डी के उर्वरक का व्यवसाय करते पाये जाने पर विक्रय प्रतिबंध कर उपलब्ध स्टॉक को जब्ती की कार्रवाई कर नोटिस जारी किया गया। ग्राम कोनचरा स्थित अतुल कृषि केंद्र में अनियमितता पाये जाने के कारण गोदाम को सील की कार्रवाई किया गया। ग्राम मदनपुर विकास खण्ड बिल्हा अन्तर्गत मेसर्स राघवेन्द्र देवांगन के यहां मूल्य एवं स्कंध सूची का प्रदर्शन नहीं करने, भंडारण वितरण की प्रतिवेदन नहीं भेजने, स्कंध एवं बिल संधारण नहीं करने के कारण विक्रय पर प्रतिबंध लगाकर स्पष्टीकरण जारी किया गया है। वहीं औचक निरीक्षण के दौरान मेंसर्स किसान सेवा केंद्र तखतपुर के फर्म में कमी एवं अनियमितताओं के कारण नोटिस जारी कर जवाब चाहा गया था, संबंधित के द्वारा प्रस्तुत जवाब संतोषजनक प्राप्त नहीं होने के फलस्वरूप उनके लाइसेंस को 15 दिवस के लिए निलबंन की कार्रवाई किया गया है। उक्त कृषि केंद्रों को स्पष्टीकरण तामिल के लिए सात दिवस के भीतर पालन प्रतिवेदन एवं जवाब प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया गया समय सीमा एवं संतोषप्रद जवाब प्रस्तुत नहीं किये जाने पर अनुज्ञप्ति निलंबन/निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण दल में पी.डी. हथेश्वर, उप संचालक कृषि, अनिल कुमार शुक्ला सहायक संचालक कृषि, खेमराज शर्मा ग्रा.कृ.वि.अ., विजय धीरज ग्रा.कृ.वि.अ., कार्यालयीन एवं विकासखण्ड कोटा से दिलीप रात्रे कृ.वि.अ.एवं उर्वरक निरीक्षक मारू ग्रा.कृ.वि.अधि. आर.जी. भानू ग्रा.कृ.वि.अधि. उपस्थित रहें। जिले में संचालित समस्त उर्वरक विक्रेताओं को बिना पॉस मशीन के उर्वरकों का विक्रय नही किये जाने के निर्देश प्रसारित है एवं संबंधित निरीक्षकों से उनके कार्य क्षेत्र अन्तर्गत संचालित उर्वरक विक्रेताओं से पॉस मशीन की मांग के लिए निर्देश दिये गये है। उर्वरक विक्रेता पॉस मशीन के लिए अपने कार्यालय वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, संबंधित उर्वरक निरीक्षक एवं कार्यालय उप संचालक कृषि बिलासपुर में सम्पर्क कर सकते है।
हेल्थ कमिश्नर डॉ प्रियंका शुक्ला ने मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़, सिकल सेल रोग नियंत्रण और टीबी उन्मूलन जैसे विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा की
रायपुर। स्वास्थ्य सेवाओं की आयुक्त एवं सह-संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने संयुक्त जिला कार्यालय, दंतेवाड़ा में स्वास्थ्य विभाग की बैठक लेकर यहां मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़, सिकल सेल रोग नियंत्रण और टीबी उन्मूलन जैसे विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा की।
डॉ. शुक्ला ने स्वास्थ्य अधिकारियों से स्पष्ट लहजों में कहा कि शासन का उद्देश्य मलेरिया को पूरी तरह समाप्त करने का है। यह तभी संभव है जब जिला, विकासखंड और ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य अमला पूरी सक्रियता के साथ कार्य करें। उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और खंड चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे स्वयं फील्ड में जाकर मलेरिया अभियान की निगरानी करें।
डॉ. शुक्ला ने कहा कि आरडी किट से जांच के दौरान यदि कोई व्यक्ति मलेरिया पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसे दवा की पूरी खुराक दी जाए। मितानिनों द्वारा दी गई दवाओं का रैफर जमा किया जाए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि मरीज ने दवा पूरी कर ली है। इस अभियान में एपीआई दर को 2 प्रतिशत से नीचे लाने का भी लक्ष्य तय किया गया है।
सभी आश्रम शालाओं में नियमित रूप से मलेरिया की जांच हो
बैठक में आश्रम शालाओं की स्वास्थ्य व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। डॉ. शुक्ला ने कहा कि सभी आश्रम शालाओं में नियमित रूप से मलेरिया की जांच सुनिश्चित की जाए। यदि एक भी छात्र को मलेरिया पॉजिटिव पाया जाता है, तो सभी छात्रों की तत्काल स्क्रीनिंग की जाए।उन्होंने सिकल सेल से पीड़ित सभी मरीजों का आभा हेल्थ आईडी बनाने को कहा जिससे उनके इलाज में किसी तरह की बाधा न आए।डॉ. शुक्ला ने टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की भी समीक्षा करते हुए कहा कि सभी पंचायतों में ‘टीबी मित्र’ बनाए जाएं।
स्वास्थ्य संबधी जागरूकता स्थानीय बोली और भाषा से बढाए
उन्होंने कहा कि अगर स्वास्थ्य संबधी जागरूकता स्थानीय बोली और भाषा में होगी, तब लोग अधिक बेहतर समझ पाएंगे और इलाज के लिए आगे आएंगे। उन्होंने कहा कि “हमारा कार्य केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि रोगों की रोकथाम, जागरूकता और जन विश्वास बनाना भी हमारी जिम्मेदारी है।
डॉ. शुक्ला ने जिले में संचालित अन्य स्वास्थ्य योजनाओं जैसे जननी सुरक्षा योजना, मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लिनिक, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, टीकाकरण अभियान और कृमि मुक्ति अभियान की भी गहन समीक्षा की। उन्होंने कहा कि गर्भवती माताओं का प्रथम तिमाही में पंजीयन करना आवश्यक है, क्यूंकि उनकी चार बार जांच होंगी जिससे उच्च जोखिम वाली माताओं का पता चलेगा जिससे होने वाली मातृ मृत्यु को कमी की जा सके।
उच्च जोखिम वाली माताओं का प्रसव उच्च संस्था में ही करवाएं
प्रत्येक माह 9 एवं 24 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में पंजीकृत गर्भवती माताओं की जाँच आवश्यक रूप से करवाए। उच्च जोखिम वाली माताओं की प्रसव पूर्व फॉलोअप करना अति आवश्यक है और प्रसव उच्च संस्था में ही करें, ताकि जच्चा और बच्चा दोनों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है।
बैठक में कलेक्टर कुणाल दुदावत, जिला पंचायत सीईओ जयंत नाहटा, अपर कलेक्टर राजेश पात्रे, जिला स्वास्थ्य अधिकारी, खंड चिकित्सा अधिकारी, सभी सीएचसी-पीएचसी प्रभारी, मलेरिया, टीबी और सिकल सेल प्रभारी तथा अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
कांग्रेस की नाकेबंदी-चक्का जाम कल, पीसीसी ने प्रभारी की नियुक्ति की, इन्हें दी गयी जिम्मेदारी
रायपुर। चेतन्य बघेल की गिरफ्तारी के विरोध 22 जुलाई को नाकेबंदी का ऐलान कांग्रेस पार्टी ने कियाहै। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने नाकेबंदी को लेकर वरीष्ठ नेताओं को प्रभारी नियुक्त किया गयाहै। रायपुर में शिवकुमार डहरिया को प्रभारी बनाया गया है।

“घोटालों की गठरी लेकर अब नैतिकता की बातें कर रहे भूपेश” केदार कश्यप, कोल ब्लॉक से बिजली तक, कांग्रेस की दोहरी नीति का खुलासा
रायपुर। छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप ने भाजपा जिला कार्यालय ‘एकात्म परिसर’ में प्रेसवार्ता कर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल लगातार भारतीय जनता पार्टी की सरकार के ऊपर निराधार आरोप लगाते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि कांग्रेस पार्टी, भूपेश कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं। इनका डबल स्टैंडर्ड जनता के सामने आ चुका है। जनता समझ चुकी है कि यह चोरी और सीनाजोरी दोनों कर रहे हैं। भूपेश की सरकार ने पिछले 5 वर्ष में छत्तीसगढ़ को 10 जनपद का चरागाह बना दिया था। शराब घोटाला, कोयला घोटाला, चावल घोटाला, कोयला घोटाला, गौठान घोटाला हो या फिर पीएससी का घोटाला हो, प्रदेश के संसाधनों का जिस तरह उन्होंने दुरुपयोग किया, प्रदेश को लूटने का काम किया, इसी का परिणाम है कि उनके आधे से ज्यादा लोग जेल के रास्ते जा रहे हैं।
श्री कश्यप ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी और भूपेश बघेल ने कॉल ब्लॉक आवंटन और पेड़ कटाई को लेकर सवाल उठाए थे, उस समय जब 10 जनपद से जैसे ही सरकार के ऊपर दबाव आता है, तो आप शरणागत हो गए, यह आपने अपने पत्रों के माध्यम से यहां पर स्पष्ट कर दिया। भूपेश बघेल ने ही अपने बयान में कहा कि कोल आबंटन नहीं होगा, छत्तीसगढ़ के लोग ऐसी चलाना बंद कर दें, बिजली बंद कर दें। क्या आज आपने जो बयान दिया था उसके आधार पर राजीव भवन का ऐसी बंद किया, बिजली काट दी। इसका जवाब भी आपको देना चाहिए।
केदार कश्यप ने भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री रहते निजी स्वार्थ के लिए किए गए कोल आबंटन का उल्लेख करते हुए कहा कि आपने छत्तीसगढ़ का कोल ब्लॉक राजस्थान में अशोक गहलोत को आबंटित कर दिया था। इससे पहले जब मनमोहन सिंह जी, कांग्रेस पार्टी के यूपीए की सरकार थी तब भी आपके ही नेताओं ने कॉल ब्लॉक आवंटन करने के लिए जो रास्ता आसान किया था यह भी सबको पता है।2010 में जब केंद्र में यूपीए की सरकार थी, तब कोयला मंत्रालय और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने हसदेव अरण्य को पूरी तरह से नो जोन एरिया घोषित किया था, उस पर भी उस समय के पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने पूरे एरिया को कोर एरिया घोषित किया। इसका पूरा पत्रक भी है। जयराम रमेश ने सरकार में रहते जिस दबंगई के साथ एरिया घोषित किया, वह वास्तविक प्रमाण है। आज यही लोग बड़ी बड़ी बातें करते हैं जंगल को लेकर।
श्री कश्यप ने कहा कि कांग्रेस के लोग बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, जंगल को लेकर इनका यह वास्तविक चेहरा है। 23 जून 2011 को केंद्र में कांग्रेस की जो सरकार रही उसने तारा प्रसाद को कॉल ब्लॉक खोलने का प्रस्ताव दिया जब राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी तब भी दो बड़ी खदानें गारे पेलमा सेक्टर -2 और राजस्थान में केके एक्सटेंशन प्लांट का ऑपरेटर भी अडानी को बनाया था। मुख्यमंत्री के रूप में भूपेश बघेल थे तो 16 अक्टूबर 2019 को राज्य सरकार ने पर्यावरण स्वीकृति के लिए सिफारिश भेजी। यदि भूपेश बघेल गजनी हो गए हैं तो मैं उन्हें तारीखों के साथ उनकी सिफारिश उपलब्ध करा दूंगा। 31 मार्च 2021 को ओपन कास्ट गारे पेलमा सेक्टर-2 माट समझौता भी सबके सामने है। इसी क्रम में 19 अप्रैल 2022 को भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री रहते हुए कांग्रेस की सरकार द्वारा वन स्वीकृति स्टेज 1 और 23 जनवरी 2023 को फॉरेस्ट की जो स्टेट टू स्वीकृत की सिफारिश भी इसमें स्पष्ट है।
उन्होंने आगे कहा कि कोलफील्ड की स्वीकृति में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की संलिप्तता पूरे समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ, वह सबके सामने हैं। कांग्रेस ने अपने लोगों को सुरक्षित करने के लिए प्रदेश को और देश को झोंकने का काम किया है। एक और कांग्रेस कोल माइंस आबंटित करती है, दूसरे और नियम विरुद्ध जाकर स्वीकृत करने का काम करती है और जब विपक्ष में रहती है तब अपने हितों की पूर्ति के लिए आज राज्य में जो आर्थिक नाकेबंदी का प्रस्ताव लाती है जो छत्तीसगढ़ के जनता के हितों के खिलाफ है और इससे हमारे राज्य की अर्थव्यवस्था, यहां का व्यापार, यहां के रोजगार को नुकसान पहुंचेगा।
कांग्रेस और भूपेश बघेल के गैरजिम्मेदाराना रवैये पर कहा कि इन सब से भूपेश बघेल और कांग्रेस पार्टी को कोई सरोकार नहीं है। वह चाहते हैं आर्थिक नाकेबंदी से पूरी व्यवस्था ठप्प रहे और अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो, हिंसा की स्थिति उत्पन्न हो। क्या मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते हुए कांग्रेस ने जो निर्णय लिए भूपेश बघेल उन सबके लिए माफी मांगेंगे। क्या भूपेश बघेल घोषणा करेंगे कि वह बिजली और ऐसी का उपयोग नहीं करेंगे और कांग्रेस नेता अपने घरों में बिजली आपूर्ति बंद कराएंगे। कांग्रेस पार्टी अपने आपको बचाने के लिए प्रदेश की जनता और प्रदेश को जिस तरह झोंकने की कोशिश कर रही है उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि आपका धोखा लोगों को साफ हो चुका है।
श्री कश्यप ने भूपेश बघेल के दावों को चुनौती देते हुए कहा कि आपके मुख्यमंत्री रहते, आपके पास राजस्थान के मंत्री वी डी कल्ला ने आपको पत्र लिखा, उनके अनेकों पत्र हमारे पास हैं, उस समय के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का एक हफ्ते के भीतर आठ आठ पत्र लिखे वह भी उपलब्ध है। किस तरीके से 10 जनपद के दबाव में आकर अपनी राजनीति चमकाने के लिए, भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं। छत्तीसगढ़ और पूरे देश की जनता ने आपको देखा है कि किस तरह से आप आरोप की राजनीति करते हैं। इसलिए जनता ने आपको 5 साल के भीतर हटाकर जनहितकारी विचार वाले सहज, सरल विष्णु देव साय को छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री बनाया है।
मुख्यमंत्री साय वाको इंडिया राष्ट्रीय किक बॉक्सिंग चैम्पियनशिप 2025 के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में हुए शामिल
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज देर शाम राजधानी रायपुर स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित वाको इंडिया राष्ट्रीय किक बॉक्सिंग चैम्पियनशिप 2025 के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में सम्मिलित हुए।

