प्रदेश
हाईटेक नकल के बाद व्यापमं ने नियम में किया बदलाव
रायपुर। छत्तीसगढ़ व्यापमं की पीडब्ल्यूडी सब इंजीनियर भर्ती परीक्षा के लिए बिलासपुर के एक केंद्र में रविवार को हाईटेक तरीके से नकल का मामला सामने आया. जिसके बाद व्यापमं ने नियमों में बदलाव किया है. अब जूते, ज्वेलरी और फुल बांह के कपड़ो को बैन कर दिया है. जूते की जगह फुटवियर के रूप में चप्पल मान्य होगा. कान में पहनने वाली ज्वेलरी पर भी प्रतिबंध होगा. इसी नियम के तहत 20 जुलाई को सब इंजीनियर भर्ती परीक्षा होगी. व्यापमं की ओर से नोटिफिकेशन जारी किया गया है.
नियमों में बदलाव के बाद अब परीक्षा शुरू होने से 15 मिनट पहले गेट बंद कर दिए जाएंगे. इससे पहले व्यापमं परीक्षा में निर्धारित समय तक एंट्री दी जाती थी. साथ ही अभ्यर्थी हल्के रंग के कपड़े पहन सकेंगे. अभ्यर्थी को परीक्षा होने के पहले आधे घंटे में और अंतिम आधे घंटे तक कक्ष से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी. परीक्षा केंद्र के भौगोलिक स्थान से पूर्व परिचित होना परीक्षार्थी की जिम्मेदारी होगी, ताकि परीक्षा वाले दिन किसी प्रकार की देरी न हो.
इन इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर बैन
मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच, ब्लूटूथ, इयरफोन, कैलकुलेटर, या अन्य कोई संचार उपकरण लाना पूरी तरह से बैन कर दिया गया है.
एग्जाम हॉल में ये करना पड़ेगा भारी
नए नियमों के मुताबिक, अगर अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र में फुसफुसाना, चिल्लाना, बातें करना या हाव-भाव से इशारे करता पाया गया तो उसपर एक्शन लिया जाएगा. अधिकारी के निर्देशों का पालन न करना, दुर्व्यवहार करना या विवाद करने पर भी कार्रवाई होगी.

जल जीवन मिशन पर बड़ा सवाल: फर्जी दस्तावेज़, गलत भुगतान और टकराव, धरमलाल कौशिक के सवाल पर अरुण साव ने कहा…
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को जल जीवन मिशन को लेकर प्रश्नकाल में बड़ा हंगामा देखने को मिला। भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने योजना में गड़बड़ियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए और विभागीय मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री अरुण साव से कड़ी कार्रवाई की मांग की।
कौशिक ने आरोप लगाया कि फर्जी दस्तावेज़ के माध्यम से कुछ फर्मों ने अनुबंध लेकर कार्य किया है, लेकिन आज तक उन पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने पूछा,
“जब आरोप स्पष्ट हैं तो संबंधित फर्मों और दोषियों पर एफआईआर क्यों नहीं की गई?”
जवाब में डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि
“एक फर्म पर एफआईआर दर्ज की गई है, वहीं कुछ फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। ज्वाइंट वेंचर के मामले लंबित हैं। अफसरों की भूमिका की रिपोर्ट अभी आई नहीं है, रिपोर्ट आते ही दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।”
धरमलाल कौशिक ने यह भी सवाल उठाया कि विभाग पहले ही स्पष्ट कर चुका था कि जब तक काम पूरा न हो, 70 प्रतिशत से ज्यादा भुगतान नहीं किया जाएगा, लेकिन अब जानकारी सामने आई है कि कुछ ठेकेदारों को 80 प्रतिशत से ज्यादा भुगतान कर दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि क्या नियमविरुद्ध भुगतान करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी?
इस पर मंत्री अरुण साव ने जवाब दिया कि
“यदि जांच में पाया गया कि भुगतान नियमों के विरुद्ध किया गया है, तो संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।”
इस बीच कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव और भाजपा विधायक अजय चंद्राकर के बीच तीखी बहस छिड़ गई। देवेंद्र यादव द्वारा ऊंचे स्वर में बोलने और आक्रामक लहजे पर आपत्ति जताते हुए चंद्राकर ने टोक दिया, जिसके बाद सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को संभालते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सख्त लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा:”विधानसभा कोई सड़क नहीं है भाषण देने के लिए। सभी सदस्य अपनी बात रखें, लेकिन तरीका मर्यादित हो। आसंदी की ओर देखकर, शालीन भाषा में संवाद करें।” डॉ. रमन सिंह ने देवेंद्र यादव को व्यक्तिगत रूप से फटकार लगाते हुए सदन की गरिमा बनाए रखने की चेतावनी दी।
सदन में भिड़ गये देवेंद्र यादव और अजय चंद्राकर, असंसदीय भाषा पर विधानसभा अध्यक्ष ने लगायी फटकार
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को प्रश्नकाल के बीच सदन का माहौल अचानक गरमा गया। कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव और भाजपा विधायक अजय चंद्राकर के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो धीरे-धीरे तू-तू मैं-मैं और नारेबाजी तक पहुंच गई। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से सदन का अनुशासनिक वातावरण बिगड़ता देख विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा।
मामला उस समय शुरू हुआ जब भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने जल एवं स्वच्छता मिशन को लेकर उप मुख्यमंत्री अरुण साव से सवाल पूछा। जवाब के बीच में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव अपनी सीट से खड़े हो गए और एक दस्तावेज लहराते हुए जोरदार आवाज में बोले कि “यह विधानसभा का ही दस्तावेज है, जिसमें साफ लिखा है कि जब तक कार्य पूर्ण नहीं होता, तब तक 70 प्रतिशत से अधिक राशि का भुगतान नहीं किया जा सकता।”
यादव की तीखी भाषा और उच्च स्वर पर आपत्ति जताते हुए अजय चंद्राकर अपनी सीट से खड़े हो गए और सवाल किया कि “ये किस नियम के तहत इतनी ऊंची आवाज में बोल रहे हैं?” इसके बाद दोनों नेताओं के बीच शब्दों की तलवार चलने लगी और मामला असंसदीय भाषा तक पहुंच गया। देवेंद्र यादव अपनी सीट से आगे भी बढ़ने लगे, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
हालात को बिगड़ता देख विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने तत्काल हस्तक्षेप किया और दोनों नेताओं को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा,
“प्रश्नकाल जनता देखती है, देश देखता है। इस तरह की भाषा और आचरण छत्तीसगढ़ विधानसभा की गरिमा के खिलाफ है।”
उन्होंने विशेष रूप से देवेंद्र यादव को नसीहत देते हुए कहा कि वे दो बार के विधायक हैं और उन्हें संसदीय परंपराओं की समझ होनी चाहिए। बाद में दोनों पक्षों द्वारा प्रयोग किए गए असंसदीय शब्दों को सदन की कार्यवाही से विलोपित कर दिया गया। डॉ. रमन सिंह ने सदन को स्मरण दिलाया कि
“यह विधानसभा रजत जयंती मना रही है और पूरे देश में इसकी मर्यादा और परंपरा की मिसाल दी जाती है। हमें इसे कायम रखना है, नई मिसालें नहीं बनानी हैं।”
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस-भाजपा विधायकों के बीच तीखी बहस के बीच देवेंद्र यादव और अजय चंद्राकर के बीच असंसदीय भाषा का प्रयोग किया। विधानसभा अध्यक्ष का कड़ा हस्तक्षेप और फटकार, असंसदीय शब्द कार्यवाही से हटाए गए। सदन की गरिमा बनाए रखने की नसीहत दी गयी।
मानसून सत्र: CSR फंड का मुद्दा गरमाया, विपक्ष ने लगाए गोलमाल के आरोप, जांच की मांग तेज
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र दूसरे दिन खासा हंगामेदार रहा। प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक किरण देव सिंह ने बस्तर संभाग में औद्योगिक संस्थानों द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) मद में खर्च की गई राशि का ब्यौरा मांगा। उन्होंने यह भी पूछा कि जगदलपुर में अब तक किन कार्यों को CSR मद के तहत स्वीकृति मिली है।
विपक्ष ने पूरे प्रदेश में CSR फंड के उपयोग को लेकर गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा। विधायक किरण देव सिंह ने कहा, “मेरे क्षेत्र में अब तक कोई भी काम CSR फंड से स्वीकृत नहीं हुआ है।”
वहीं, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सवाल उठाया कि उद्योग CSR फंड का कितना प्रतिशत खर्च कर रहे हैं? जवाब में मंत्री ने बताया कि 2 प्रतिशत राशि खर्च की जा सकती है। चरणदास महंत ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय में उद्योगों के द्वारा कितनी राशि खर्च की जा रही थी और आज के वक्त में कितनी राशि खर्च की जा रहीहै, उसका भी आकलन करना जरूरी है।
इस पर नेता प्रतिपक्ष ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि राशि खर्च हो रही है तो उसका सही लेखा-जोखा क्यों नहीं है? उन्होंने CSR मद में खर्च की जा रही राशि की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।
विधानसभा में जल जीवन मिशन पर गरमाई सियासत: आंकड़ों की जंग में विपक्ष का वॉकआउट
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान जल जीवन मिशन को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने योजना के क्रियान्वयन को लेकर सरकार से तीखे सवाल पूछे और खर्च की गई राशि व लक्ष्यों की उपलब्धि पर संदेह जताया।
भूपेश बघेल ने पूछा कि वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के दौरान जल जीवन मिशन के तहत कितनी राशि खर्च की गई और कितने घरों तक वास्तव में नल से जल पहुंचाया गया? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई जिलों में योजना के तहत बहुत कम खर्च हुआ और अपेक्षाकृत कम घरों में पानी पहुंच पाया है।
इस पर जवाब देते हुए डिप्टी सीएम और जल संसाधन मंत्री अरुण साव ने कहा कि अब तक ₹15,045 करोड़, यानी कुल 57 प्रतिशत राशि खर्च की जा चुकी है। 31,16,398 घरों में नल कनेक्शन के माध्यम से जल आपूर्ति की जा रही है, जबकि 3,836 गांवों में पूर्ण रूप से नलजल सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि जिलों में राशि का वितरण कार्य प्रगति के अनुसार किया जाता है।
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट भूपेश बघेल ने कटाक्ष करते हुए कहा कि “डबल इंजन की सरकार” ने अब तक केवल 10 लाख घरों में ही नल से जल पहुंचाया है, जबकि केवल आंकड़े दिखाकर उपलब्धियों का भ्रम पैदा किया जा रहा है।
बघेल ने कहा, “21 लाख घरों में हमारी सरकार ने जल पहुंचाया था, और आप दो साल में केवल 10 लाख जोड़ पाए, क्या यही गति है?” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने बिना पानी के नल लगाकर कागजों में आंकड़े पूरे किए थे।
इस बहस के दौरान विपक्षी विधायकों ने सरकार पर “आंकड़ों की बाजीगरी” करने का आरोप लगाते हुए जोरदार हंगामा किया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 74 प्रतिशत कार्य पूरा किया गया था, जबकि वर्तमान सरकार ने 20 महीनों में केवल 7 प्रतिशत कार्य किया है।
विपक्ष ने मंत्री अरुण साव के जवाब को भ्रामक बताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जमीनी सच्चाई छुपाकर आंकड़ों के माध्यम से जनता को गुमराह कर रही है।
जल जीवन मिशन को लेकर विधानसभा में हुई इस बहस ने साफ कर दिया है कि पेयजल की योजना सिर्फ एक तकनीकी नहीं, बल्कि अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।
चार बच्चों की डूबने से मौत पर उच्च न्यायालय सख्त, घटना पर स्वत: संज्ञान लिया, मुख्य सचिव से मांगा जवाब
रायपुर/जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में भाई-बहन समेत चार मासूम बच्चों की तालाब में डूबने से हुई मौत के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। इस हृदयविदारक घटना को लेकर अदालत ने राज्य सरकार की जिम्मेदारी तय करते हुए मुख्य सचिव से व्यक्तिगत शपथ पत्र में जवाब तलब किया है।
गौरतलब है कि बीते शनिवार, जब बच्चे स्कूल से लौट रहे थे, वे पास के एक तालाब में नहाने चले गए और चारों की डूबने से मौत हो गई। यह मामला मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान सामने आया। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा,
“यह कितनी शर्मनाक बात है कि स्कूल से लौटते समय चार बच्चे पानी में डूब जाते हैं… क्या यह सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं?”
अदालत ने इस घटना के साथ-साथ मीडिया में छपी एक अन्य रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया, जिसमें स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर नाले को पार कर स्कूल जाते हुए दिखाया गया था। दोनों घटनाओं पर चिंता जताते हुए कोर्ट ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की गंभीर लापरवाही पर सवाल उठाए हैं।
मुख्य सचिव को आदेश दिया गया है कि वे व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल कर बताएं कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं।
मुख्यमंत्री की पहल से ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ हो रही साकार : कल रायपुर से अयोध्या धाम के लिए रवाना होगी विशेष ट्रेन, CM साय दिखाएंगे हरी झंडी
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के रजत जयंती वर्ष में प्रदेशवासियों को श्रीराम लला के दर्शन का सौभाग्य प्रदान करने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ जन जन के जीवन से जुड़ रही है।
इस योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली विशेष ट्रेन दिनांक 15 जुलाई 2025 को रायपुर रेलवे स्टेशन से अयोध्या धाम के लिए रवाना होगी। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं इस विशेष दर्शन यात्रा को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ करेंगे। रायपुर संभाग के श्रद्धालुओं को लेकर रवाना होने वाली इस ट्रेन के प्रस्थान अवसर पर मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा, प्रबंध संचालक विवेक आचार्य, वरिष्ठ अधिकारीगण एवं दक्षिण पूर्व-मध्य रेलवे रायपुर मंडल के डीआरएम दयानंद, सीनियर डीसीएम अवधेश त्रिवेदी तथा आईआरसीटीसी – साउथ सेंट्रल ज़ोन के ग्रुप महाप्रबंधक पी. राजकुमार भी उपस्थित रहेंगे।
उल्लेखनीय है कि प्रदेशवासियों को उनके जीवनकाल में एक बार प्रभु श्रीराम लला के अयोध्या धाम दर्शन का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से 23 फरवरी 2024 को छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड एवं इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) संपादित किया गया था।
उक्त एमओयू के क्रियान्वयन की श्रृंखला में योजना की विधिवत शुरुआत रायपुर संभाग के श्रद्धालुओं के साथ 5 मार्च 2024 को हुई थी, जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वरिष्ठ मंत्रीगणों एवं जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में रायपुर रेलवे स्टेशन से पहली विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
इसके पश्चात् 11 मार्च को बिलासपुर संभाग के श्रद्धालुओं के लिए विशेष ट्रेन को उपमुख्यमंत्री अरुण साव द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इसी क्रम में 19 जून को सरगुजा संभाग की विशेष ट्रेन को सांसद श्री चिंतामणि महाराज ने विधायकगण एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में शुभारंभ किया। 26 जून को दुर्ग एवं बस्तर (संयुक्त) संभाग की पहली विशेष ट्रेन, जिसमें 850 श्रद्धालु शामिल थे, दुर्ग रेलवे स्टेशन से अयोध्या के लिए रवाना हुई। इन सभी अवसरों पर श्रद्धालुओं में अत्यंत उत्साह और आस्था का भाव देखने को मिला। साथ ही मीडिया प्रतिनिधिगण, आम नागरिक, जिला प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड एवं आईआरसीटीसी के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि विगत वित्तीय वर्ष में ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ के अंतर्गत लगभग 22,100 श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम के दर्शन का अवसर प्राप्त हुआ। योजना के तहत विशेष साप्ताहिक ट्रेनें आगे भी रायपुर, बिलासपुर, सरगुजा और दुर्ग-बस्तर (संयुक्त) संभागों के श्रद्धालुओं को श्रीराम लला के दर्शन हेतु नियमित रूप से अयोध्या धाम ले जाती रहेंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की यह पहल न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती प्रदान कर रही है, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना को भी गौरवपूर्ण स्थान दिला रही है।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मलेरिया पर करारा प्रहार, मिशन मोड में सरकार का अभियान, ‘शून्य मलेरिया’ की ओर बढ़ते निर्णायक कदम
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और जनस्वास्थ्य के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ ने मलेरिया के स्थायी उन्मूलन की दिशा में एक निर्णायक अभियान फिर से प्रारंभ किया है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में, विभाग ने मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारी के खिलाफ एक अनुकरणीय रणनीतिक पहल करते हुए जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित किया है। ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’ के 12वें चरण ने न केवल अपने दायरे का विस्तार किया है, बल्कि अपने प्रभाव से यह स्पष्ट कर दिया है कि जब सरकार दृढ़ संकल्प और नीति आधारित कार्रवाई के साथ काम करती है, तो नतीजे ज़मीन पर दिखते हैं।
25 जून से जारी इस चरण के अंतर्गत राज्य के 10 जिलों में गहन जांच, उपचार और जनजागरूकता अभियान चलाया गया। अब तक 19,402 घरों का दौरा किया गया है और 98,594 लोगों की रक्त जांच की गई है। इनमें से 1,265 लोग मलेरिया पॉजिटिव पाए गए। सबसे अहम बात यह रही कि सभी संक्रमित व्यक्तियों को मौके पर ही दवा की पहली खुराक उपलब्ध कराई गई, वह भी पूरी सावधानी के साथ—पहले मरीजों को स्थानीय खाद्य पदार्थ खिलाया गया, ताकि दवा का प्रभाव सुरक्षित और प्रभावशाली रहे। प्रत्येक मरीज को उपचार कार्ड दिया गया है, ताकि फॉलोअप के जरिए पूरी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
इस अभियान का सकारात्मक असर सबसे अधिक बस्तर संभाग में देखा जा रहा है। 2015 की तुलना में यहां मलेरिया मामलों में 71 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। यह कोई सामान्य उपलब्धि नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित, सतत और वैज्ञानिक रणनीति का परिणाम है। राज्य का वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) भी 27.40 से घटकर 7.11 तक आ गया है, जो दर्शाता है कि मलेरिया पर राज्य ने प्रभावी नियंत्रण पाया है।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अभियान की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मलेरिया से जंग अब केवल इलाज की नहीं, यह रणनीति और जनसहभागिता की लड़ाई बन गई है। उनका मानना है कि सरकार ने जो लक्ष्य तय किया है—2027 तक ‘शून्य मलेरिया’ और 2030 तक ‘पूर्ण मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़’—उसे केवल दस्तावेज़ी नहीं, बल्कि यथार्थ के रूप में साकार किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की आयुक्त सह संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के प्रभाव से बस्तर संभाग में मलेरिया के मामलों में गिरावट आयी है। “हर संक्रमित व्यक्ति तक पहुंचना, उसका समय पर इलाज करना और भविष्य में संक्रमण की कोई गुंजाइश न रहे — यही हमारी प्राथमिकता है।” उन्होंने कहा कि हमारा फोकस लक्षणरहित मलेरिया मामलों पर है, ताकि बीमारी को जड़ से मिटाया जा सके।
इस अभियान की सफलता में मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, ग्राम पंचायतों और स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही है। यह केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि अब एक जनआंदोलन बन चुका है। जांच और इलाज के साथ-साथ लोगों को मच्छरदानी के नियमित उपयोग, जलजमाव की रोकथाम और साफ-सफाई जैसे व्यवहारिक उपायों के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ सरकार का यह ठोस और संवेदनशील प्रयास, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की दूरदर्शिता और राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम है, जो न केवल राज्य को मलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत और टिकाऊ कदम है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक प्रेरक मॉडल भी बन रहा है। आने वाले वर्षों में यह रणनीति अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय उदाहरण के रूप में स्थापित होगी।
शराब घोटाला मामला: 23 आरोपी आबकारी अधिकारियों ने EOW की विशेष कोर्ट में लगाई अग्रिम जमानत याचिका, मामले में 18 जुलाई को होगी सुनवाई
रायपुर। शराब घोटाला मामले में आबकारी विभाग ने बीते 10 जुलाई को बड़ा एक्शन लेते हुए आरोपी बनाए गए 29 आबकारी अधिकारियों में से 22 को निलंबित किया था। इस मामले में अब 23 आरोपी आबकारी अधिकारियों ने ACB/EOW की विशेष कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाई है। इस मामले में अब 18 जुलाई को सुनवाई होगी।
नोटिस के बाद भी पेश नहीं हुए आरोपी
बता दें कि शराब घोटाले के इस मामले में 29 आरोपियों को EOW की ओर से समन जारी किया गया था, लेकिन गिरफ्तारी के डर से कोई भी आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हुआ। अब अदालत ने इन सभी आरोपियों को 20 अगस्त तक पेश होने के लिए नोटिस भी जारी किया है।
ये 22 अधिकारी हुए निलंबित
- जनार्दन कौरव, पिता पंचम सिंह, उम्र 50 वर्ष, सहायक जिला आबकारी अधिकारी।
- अनिमेष नेताम, पिता आनंद नेताम, उम्र 49 वर्ष, उपायुक्त आबकारी।
- विजय सेन शर्मा, पिता पीसी सेन शर्मा, उम्र 48 वर्ष, उपायुक्त आबकारी।
- अरविंद कुमार पाटले, पिता नेवल सिंह पाटले, उम्र 49 वर्ष, उपायुक्त आबकारी।
- प्रमोद कुमार नेताम, पिता स्व. श्याम लाल नेताम उम्र 60 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।
- रामकृष्ण मिश्रा, पिता शैलेन्द्र मिश्रा, उम्र 36 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।
- विकास कुमार गोस्वामी, पिता विनोद गोस्वाम, उम्र 44 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।
- इकबाल खान, पिता महूम मोहम्मद स्माईल खान, उम्र 56 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी।
- नितिन खंडुजा, पिता रवीन्द्र खंडुजा, उम्र 53 वर्ष, सहायक जिला आबकारी अधिकारी।
- नवीन प्रताप सिंग तोमर, पिता भगवान सिंह तोमर, उम्र 43 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।
- मंजुश्री कसेर, पति रामचन्द्र सारस, उम्र 47 वर्ष, सहायक आबकारी अधिकारी।
- सौरभ बख्शी, पिता राजीव बख्शी, उम्र 41 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।
- दिनकर वासनिक, पिता डॉ पीएल वासनिक, उम्र 42 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।
- मोहित कुमार जायसवाल, पिता रामलाल जायसवाल, उम्र 46 वर्ष, अधिकारी जिला आबकारी।
- नीतू नोतानी ठाकुर, पति मोहन दास नोतानी, उम्र 45 वर्ष, उपायुक्त आबकारी।
- गरीबपाल सिंह दर्दी, पिता दिलबाग सिंह दर्दी, उम्र 59 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी।
- नोहर सिंह ठाकुर, पिता गौतम सिंह ठाकुर, उम्र 45 वर्ष, उपायुक्त आबकारी।
- सोनल नेताम, पिता एम. एस. नेताम, उम्र 36 वर्ष, सहायक आयुक्त, आबकारी।
- प्रकाश पाल, पिता सपन कुमार पाल, उम्र 44 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।
- अलेख राम सिदार, पिता मुरलीधर सिदार, उम्र 34 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।
- आशीष कोसम, पिता बृजलाल कोसम, उम्र 50 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी
- राजेश जायसवाल, पिता हरीप्रसाद जायसवाल, उम्र 42 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी।
इन 7 रिटायर अधिकारियों को भी बनाया गया आरोपी
- ए.के. सिंग, पिता अखिलेश्वर सिंह उम्र 62 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी (सेवानिवृत्त)
- जे.आर. मंडावी, पिता नंदलाल मंडावी, उम्र 64 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी (सेवानिवृत्त)
- जी.एस. नुरूटी, पिता दयाराम नुरूटी, उम्र 63 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी (सेवानिवृत्त)
- देवलाल वैष, पिता स्व गोवर्धन सिंह वैध, उम्र 63 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी (सेवानिवृत्त)
- ए.के. अनंत, पिता आशाराम अंनत, उम्र 65 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी (सेवानिवृत्त)
- वेदराम लहरे, पिता जगत राम लहरे, उम्र 66 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी (सेवानिवृत्त)
- एल.एल. ध्रुव, पिता मोतीसिंह ध्रुव, उम्र 66 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी (सेवानिवृत्त)
गौरतलब है कि राज्य में शासकीय शराब दुकानों के माध्यम से बी-पार्ट शराब की अवैध बिक्री के खुलासे के बाद आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (ACB) ने इस घोटाले की जांच में बड़ा कदम उठाते हुए चतुर्थ पूरक चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया है।
क्या है बी-पार्ट शराब घोटाला?
वर्ष 2019 से 2023 के बीच, राज्य के 15 बड़े जिलों में पदस्थ आबकारी अधिकारी और अन्य प्रशासनिक पदाधिकारियों द्वारा बिना ड्यूटी चुकाई गई देसी शराब (B-Part शराब) की शासकीय दुकानों में समानांतर अवैध बिक्री की गई। बस्तर और सरगुजा संभाग को छोड़कर चयनित जिलों में अधिक खपत वाली देसी शराब दुकानों को डिस्टलरी से सीधे अतिरिक्त अवैध शराब भेजी जाती थी, जिसे वैध शराब के साथ समानांतर बेचा जाता था।
इस पूरे नेटवर्क में डिस्टलरी, ट्रांसपोर्टर, सेल्समैन, सुपरवाइजर, आबकारी विभाग के जिला प्रभारी अधिकारी, मंडल व वृत्त प्रभारी, और मैन पावर एजेंसी के अधिकारी-कर्मचारी शामिल थे। अवैध शराब को “बी-पार्ट शराब” कहा जाता था, और इससे अर्जित रकम सीधे सिंडीकेट के पास पहुंचाई जाती थी।
2174 से बढ़कर 3200 करोड़ का हुआ घोटाला
EOW/ACB द्वारा अब तक की गई जांच और 200 से अधिक व्यक्तियों के बयान एवं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अनुमान है कि लगभग 60,50,950 पेटी बी-पार्ट शराब की अवैध बिक्री हुई है, जिसकी अनुमानित कीमत 2174 करोड़ रुपये से अधिक है। पहले इस घोटाले का अनुमान 2174 करोड़ रुपये था, लेकिन नवीनतम आंकड़ों के अनुसार घोटाले की कुल राशि 3200 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
अब तक हुई प्रमुख गिरफ्तारियां
इस प्रकरण में अब तक अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी, कवासी लखमा, विजय भाटिया सहित कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। FIR के अनुसार 70 आरोपी नामजद हैं। चतुर्थ पूरक चालान की प्रस्तुति हेतु न्यायालय ने आरोपियों को नोटिस जारी किए थे, लेकिन वे न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए।
जांच जारी
EOW/ACB द्वारा अब भी इस मामले की गहन जांच जारी है, जिसमें विदेशी शराब में लिये गये सिंडीकेट कमीशन, धन शोधन के नेटवर्क और राज्य स्तरीय समन्वय तंत्र की परतें खोली जा रही हैं।
पूर्व मंत्री को घोटाले में मिले 64 करोड़ रुपये
शराब घोटाला मामले की जांच में अब तक यह सामने आया है कि पूर्व मंत्री कवासी लखमा के संरक्षण में विभागीय अधिकारियों, सहयोगियों और ठेकेदारों के माध्यम से यह सुनियोजित घोटाला किया गया। इस घोटाले से प्राप्त रकम को व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों में खर्च किया गया, जिससे उन्हें अनुचित आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ। अब तक तीन पूरक अभियोग पत्रों सहित कुल चार अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। इस मामले में अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच जारी है।
राहुल गांधी से आदिवासी नेताओं की मुलाकात पर मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस को घेरा
रायपुर। राहुल गांधी की ओर से आज ही में दिल्ली में आयोजित आदिवासी नेताओं के साथ विशेष बैठक को लेकर वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस को सवालों में घेर दिया है. उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए पूछा है कि क्या इस मुलाकात के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के वास्तविक मुद्दों पर कोई ठोस बात रखी, या यह बैठक भी सिर्फ परंपरागत चरणवंदना और औपचारिकता बनकर रह गई?
राज्यसभा में आदिवासी प्रतिनिधित्व को लेकर उठाए सवाल
मंत्री कश्यप ने कांग्रेस नेतृत्व पर आरोप लगाते हुए कहा कि भूपेश सरकार के कार्यकाल में कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए तीन सदस्य भेजे, लेकिन उनमें से एक भी छत्तीसगढ़ का आदिवासी नहीं था. दीपक बैज ने वहां सवाल उठाया कि क्या दीपक बैज ने राहुल गांधी से यह पूछने की हिम्मत की कि आदिवासी नेताओं को कांग्रेस ने राज्यसभा भेजने लायक क्यों नहीं समझा? उन्होंने कहा, “तीनों राज्यसभा सीटें बाहरी नेताओं को दे दी गईं, क्या यह छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के साथ अन्याय नहीं है?”
पिछली सरकार पर भी लगाए गंभीर आरोप
केदार कश्यप ने कहा कि भूपेश सरकार के दौरान तेन्दूपत्ता संग्राहकों, वन अधिकारों और डीएमएफ फंड जैसे मामलों में आदिवासियों के हक को नजरअंदाज किया गया, लेकिन तब कांग्रेस के आदिवासी नेता मौन रहे. उन्होंने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम और वर्तमान अध्यक्ष दीपक बैज पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने ना तब कुछ कहा और ना ही अब कुछ कर पा रहे हैं.
धर्मांतरण और सुरक्षा मुद्दों पर भी साधा निशाना
भाजपा नेता ने बस्तर और सरगुजा में कथित धर्मांतरण के मुद्दे को भी उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि भूपेश सरकार के समय इस विषय पर आई प्रशासनिक रिपोर्ट्स को नजरअंदाज किया गया. “बस्तर के कमिश्नर और सुकमा एसपी की चिट्ठियों में खतरनाक हालात की बात थी, लेकिन उनपर कार्रवाई के बजाय धूल जमने दी गई,” मंत्री कश्यप ने कहा.
आदिवासी नेताओं की चुप्पी पर उठाए सवाल
केदार कश्यप ने पूछा कि अगर कांग्रेस के ये आदिवासी नेता अपने ही शासनकाल में जनहित के मुद्दे नहीं उठा सके, तो अब राहुल गांधी के सामने बोलने की अपेक्षा करना हास्यास्पद है. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “बैज दिल्ली जाकर ‘सर नमस्ते’ करके ही लौट आए होंगे.”
उल्लेखनीय है कि आज राहुल गांधी ने दिल्ली में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के आदिवासी कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक की थी. बैठक में जल, जंगल, जमीन, धर्मांतरण, शिक्षा, और आदिवासी धर्म कोड जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी. कांग्रेस नेताओं ने आदिवासी नेतृत्व को सशक्त करने, और सरगुजा-बस्तर जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में विशेष ट्रेनिंग कार्यक्रम चलाने की मांग भी रखी थी.
अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा को फिर कोर्ट में किया गया पेश, 21 जुलाई तक बढ़ी रिमांड
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कस्टम मिलिंग घोटाला मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने आज मुख्य आरोपियों अनवर ढेबर और पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को पुलिस रिमांड की मियाद पूरी होने पर कोर्ट में पेश किया। ACB/EOW की विशेष कोर्ट ने सुनवाई के बाद दोनों को एक बार फिर 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। अब यह रिमांड 21 जुलाई 2025 तक प्रभावी रहेगी।
बता दें कि इससे पहले दोनों आरोपियों को 9 जुलाई को कोर्ट में पेश कर पहली बार 5 दिन की रिमांड पर लिया गया था। रिमांड अवधि के दौरान हुई पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर EOW ने अदालत से रिमांड बढ़ाने का अनुरोध किया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
ईओडब्ल्यू ने इस प्रकरण में अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 11, 13(1)(क), 13(2), भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 384 (जबरन वसूली) एवं 409 (लोकसेवक द्वारा आपराधिक विश्वासभंग) के तहत मामला दर्ज किया है।
पूछताछ का दायरा होगा और बड़ा
सूत्रों के अनुसार, रिमांड के नए चरण में EOW उन आर्थिक चैनलों, लेनदेन की कड़ियों और संभावित लाभार्थियों की गहन पड़ताल करेगी जिनके माध्यम से करोड़ों रुपये का अवैध लेनदेन किया गया। पूछताछ में कई और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
पहले से जेल में बंद थे दोनों आरोपी
गौरतलब है कि अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर पहले से शराब घोटाला मामले में जेल में बंद हैं, लेकिन इस कस्टम मिलिंग घोटाले में ईओडब्ल्यू की जांच के बाद इनकी संलिप्तता स्पष्ट होने पर विधिवत गिरफ्तारी की गई। जांच में सामने आया है कि दोनों ने मिलकर राज्य में चावल मिलर्स से करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की सुनियोजित साजिश रची और उसे अंजाम तक पहुंचाया।
ईओडब्ल्यू की जांच तेज
ईओडब्ल्यू इस पूरे प्रकरण की जांच तेजी से कर रही है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासों की संभावना है। जांच एजेंसी अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
यह घोटाला वर्ष 2021–22 के दौरान रचा गया था, जब धान की कस्टम मिलिंग के लिए केंद्र सरकार से 62 लाख मीट्रिक टन की मंजूरी मिली थी। इसके बाद प्रदेश सरकार के भीतर कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों ने मिलर्स से दो किस्तों में अवैध वसूली का तंत्र खड़ा किया।
रिपोर्टों के अनुसार, इस योजना में राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश रुंगटा, कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर, रामगोपाल अग्रवाल और सिद्धार्थ सिंघानिया जैसे नाम भी शामिल हैं। रोशन चंद्राकर द्वारा अलग-अलग जिलों से वसूली की गई राशि सिद्धार्थ सिंघानिया के माध्यम से अनवर ढेबर और फिर अनिल टुटेजा तक पहुंचाई गई।
"जैसी करनी वैसी भरनी" कांग्रेस के भ्रष्टाचार की कलई खुल रही है : सांसद बृजमोहन अग्रवाल
रायपुर/नई दिल्ली। रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रॉबर्ट वाड्रा की प्रवर्तन निदेशालय (ED) में पेशी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि "जैसी करनी वैसी भरनी", यह कथनी कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं पर बिल्कुल सटीक बैठती है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी देश के इतिहास की सबसे भ्रष्ट पार्टी रही है। केवल नेता ही नहीं, उनके रिश्तेदार और नजदीकी भी भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में लिप्त पाए जा रहे हैं। रॉबर्ट वाड्रा का मामला इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। कांग्रेस की राजनीति सिर्फ और सिर्फ सत्ता में रहकर देश को लूटने और अपने स्वार्थ सिद्ध करने तक सीमित रही है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि आज देश की जनता सब देख रही है और समझ रही है कि किस प्रकार एक परिवार ने पूरे देश की राजनीति को अपनी निजी संपत्ति बनाने का माध्यम बना लिया था। उन्होंने कहा कि जब कानून अपना काम करता है तो कांग्रेस उसे राजनीतिक प्रतिशोध बताने लगती है, जबकि सच्चाई यह है कि कानून के शिकंजे में वे लोग आ रहे हैं जिन्होंने देश की संपत्ति को लूटा है।
सांसद बृजमोहन ने दो टूक कहा कि भाजपा की सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और चाहे कोई कितना भी बड़ा क्यों न हो, भ्रष्टाचार करने वालों को कानून का सामना करना ही पड़ेगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से जैन समाज के प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा परिसर में दुर्ग जिले से आए जैन समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को जैन समाज द्वारा मानव सेवा एवं सामाजिक उत्थान के लिए संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने विधानसभा परिसर के भ्रमण और सदन की कार्यवाही के अवलोकन के अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि यह उनके लिए एक प्रेरणादायक अवसर रहा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली को निकट से देखने का अवसर मिलना गौरवपूर्ण अनुभव है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने जैन समाज की सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि समाज की सकारात्मक गतिविधियाँ प्रदेश के समावेशी विकास में सहायक सिद्ध हो रही हैं। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को उनके सामाजिक कार्यों के लिए शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर दुर्ग विधायक गजेंद्र यादव भी उपस्थित रहे।
फूड पॉइजनिंग से युवती की मौत, तीन की हालत गंभीर
बिलासपुर। एक प्राइवेट मार्केटिंग कंपनी का एनुअल फंक्शन के बाद हुई रहस्यमयी घटना ने शहर को झकझोर कर रख दिया है। सिरगिट्टी थाना क्षेत्र स्थित गैलवे लीड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में काम करने वाली चार युवतियों की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिनमें से प्रियंका मरावी नामक युवती की मौत हो गई। बाकी तीन—ज्योति सिंह, अंजली और संतोषी—गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, कंपनी का एनुअल फंक्शन हाल ही में आयोजित किया गया था। फंक्शन के बाद सभी युवतियां अपने किराए के कमरे में लौटी थीं। देर रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी—उल्टी, दस्त, तेज बुखार और पेट दर्द जैसी शिकायतें सामने आईं। सहकर्मियों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन प्रियंका मरावी की रास्ते में ही मौत हो गई।
घटना के बाद ज्योति, अंजली और संतोषी को जिला अस्पताल और सिम्स में भर्ती कराया गया है। प्रारंभिक जांच में फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर युवतियों के बयान दर्ज किए हैं और मृतका के परिजनों को सूचना दे दी गई है।
प्रियंका के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, और पुलिस का कहना है कि असली कारण का खुलासा पीएम रिपोर्ट के बाद ही होगा। फिलहाल पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।यह दुखद घटना एक बार फिर खाद्य सुरक्षा और सामूहिक आयोजनों में सावधानी की आवश्यकता को उजागर करती है।
नवा रायपुर में वेटलैण्ड एवं जैव विविधता संरक्षण पर उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन
रायपुर। जैव विविधता एवं आर्द्रभूमियों (वेटलैण्ड्स) के संरक्षण के उद्देश्य से आज नवा रायपुर स्थित दण्डकारण्य अरण्य भवन में एक उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उपमुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव एवं विजय शर्मा सहित कैबिनेट के सभी मंत्री एवं विधायकगण उपस्थित थे।
