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दिल्ली में संवैधानिक विधेयकों पर व्यापक मंथन: बृजमोहन अग्रवाल ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव, दिल्ली सरकार ने जताया समर्थन

नई दिल्ली। रायपुर के सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने बुधवार को संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 तथा संघ राज्य क्षेत्र (संशोधन) विधेयक, 2025 के अध्ययन हेतु गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के स्टडी टूर के अंतर्गत दिल्ली सचिवालय में आयोजित विभिन्न बैठकों और विचार-विमर्श कार्यक्रमों में भाग लिया।

इस दौरान बृजमोहन अग्रवाल ने समिति अध्यक्ष अपराजिता सारंगी समेत समिति सदस्यगण सांसद अनुराग सिंह ठाकुर जी, सांसद बृजलाल, सांसद मनन कुमार मिश्रा, सांसद उज्ज्वल देवराव निकम, सांसद असदुद्दीन ओवैसी, सांसद डॉ के लक्ष्मण, इंद्र हंग सुब्बा, अरुणा के साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार, गृह मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय तथा विधि कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों के साथ अनौपचारिक चर्चा कर प्रस्तावित विधेयकों से जुड़े विभिन्न संवैधानिक, प्रशासनिक एवं विधिक पहलुओं पर विचार-विमर्श किया और अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

अध्ययन दौरे के तहत राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों (NLUs), बार एसोसिएशनों, न्यायिक अकादमियों, नागरिक समाज संगठनों, पूर्व नीति निर्माताओं, नीति थिंक टैंकों, अनुसंधान संस्थानों तथा अन्य हितधारकों के प्रतिनिधियों के साथ भी व्यापक संवाद आयोजित किया गया। विभिन्न विशेषज्ञों ने विधेयकों के संभावित प्रभाव, प्रशासनिक संरचना, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और सुशासन से जुड़े विषयों पर अपने सुझाव एवं विचार साझा किए।

दिल्ली सरकार का मिला सकारात्मक समर्थन

दिल्ली सचिवालय में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सांसद बृजमोहन अग्रवाल, समिति अध्यक्ष अपराजिता सारंगी एवं सदस्यों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।

बैठक में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित ऐतिहासिक विधेयकों की गहन समीक्षा करते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता एवं उनकी सरकार के अधीन विभिन्न मंत्रालयों के कार्यकारी अधिकारी गण प्रतिनिधियों सहित विधि विशेषज्ञों के साथ विधेयक के सकारात्मक पहलुओं पर मंथन कर अपने महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।

श्री अग्रवाल ने बताया कि चर्चा अत्यंत सकारात्मक रही। दिल्ली सरकार ने गृह मंत्रालय की मंशा और बिल के उद्देश्यों की मुक्त कंठ से सराहना की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इन विधेयकों का समर्थन करते हुए कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए हैं, जिन्हें समिति ने सम्मानपूर्वक ग्रहण किया है और उन्हें रिपोर्ट में शामिल करने का आश्वासन दिया है।

समिति की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने कहा कि हमने विधेयक के सभी पहलुओं पर 11 बैठकों में गंभीरता से चर्चा करते हुए अब विधेयक को लोकसभाध्यक्ष ओम बिड़ला के समक्ष प्रस्तुत कर देंगे ताकि आगे इस पर सदन में चर्चा की जा सके।

राजनीति का अपराधीकरण रोकना मुख्य उद्देश्य

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने बिलों के उद्देश्यों पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में पेश किए गए ये विधेयक भारतीय राजनीति में एक “युगांतकारी कदम” हैं। इसका स्पष्ट उद्देश्य राजनीति का अपराधीकरण रोकना, शासन (Governance) से भ्रष्टाचार को पूरी तरह समाप्त करना और संवैधानिक नैतिकता के सिद्धांतों को सुदृढ़ करना है।

पारदर्शी और समावेशी प्रक्रिया

सांसद ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित इस संयुक्त संसदीय समिति का जनादेश अत्यंत पारदर्शी है। समिति अब तक 9 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों, नोडल मंत्रालयों तथा 30 से अधिक संस्थानों व नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति का उद्देश्य हर आवाज को सुनना और हितधारकों के सुझावों को शामिल करना है।

विधेयक का सार: “हिरासत में रहने पर पद छोड़ना अनिवार्य”

सांसद ने विधेयक के मुख्य प्रावधान को रेखांकित करते हुए कहा कि यदि देश के प्रधानमंत्री, किसी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री या कोई मंत्री 30 दिनों से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे 31वें दिन अपना पद छोड़ना होगा। यह प्रावधान भ्रष्टाचार और आपराधिकता के विरुद्ध एक कड़ा संदेश है।

बैठक में समिति ने एनसीटी दिल्ली सरकार के अतिरिक्त राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय और ‘कॉमन कॉज’ एनजीओ के प्रतिनिधियों से भी संवाद किया। श्री अग्रवाल ने कहा कि देश भर से इन विधेयकों के लिए भारी समर्थन मिल रहा है और लोग राजनीति में शुद्धिकरण के इस प्रयास को सराह रहे हैं।

समिति का अगला लक्ष्य विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ संवाद जारी रखना है, ताकि लोकसभा को सौंपी जाने वाली अंतिम रिपोर्ट में देश के हर वर्ग के विचारों का प्रतिनिधित्व हो सके।