प्रदेश
सरहुल उत्सव जनजातीय संस्कृति की विशिष्ट धरोहर, इसे संजोकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जशपुर के दीपू बगीचा में आयोजित पारंपरिक सरहुल महोत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने धरती माता, सूर्य देव एवं साल वृक्ष की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, उत्तम वर्षा और समृद्ध फसल की कामना की। सरहुल की पारंपरिक रस्म के तहत पूजा कराने वाले बैगा द्वारा मुख्यमंत्री के कान में सरई (साल) फूल खोंचकर शुभ आशीष प्रदान किया गया।


- मुख्यमंत्री श्री साय ने जिलेवासियों को सरहुल उत्सव एवं हिंदू नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरहुल महोत्सव सदियों से प्रकृति, धरती और जीवन के संतुलन का प्रतीक रहा है। बैगा, पाहन एवं पुजारी द्वारा की जाने वाली पूजा-अर्चना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामूहिक जीवन मूल्यों की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि यह पर्व जनजातीय समाज की समृद्ध सभ्यता और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है, जिसे सहेजकर रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की जनता से किए गए वादों को तेजी से पूरा कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाखों परिवारों को आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं। महतारी वंदन योजना के तहत अब तक 25 किश्तों में 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी किए जा चुके हैं, जिससे महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। वहीं 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी कर किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा में प्रस्तुत धर्म स्वातंत्र्य विधेयक भी सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करेगा।
उल्लेखनीय है कि सरहुल परब चैत्र माह में मनाया जाने वाला उरांव समुदाय का प्रमुख पर्व है, जो प्रकृति के नवजीवन और ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है। इस पर्व में धरती माता और सूर्य देव के प्रतीकात्मक विवाह के साथ सामूहिक पूजा की जाती है। सरना स्थल पर पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना, प्रसाद वितरण और लोकनृत्य-गीतों के माध्यम से सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ किया जाता है। घर-घर सरई फूल और पवित्र जल का वितरण कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक वेशभूषा में सजी 100 से अधिक महिलाओं एवं युवतियों की टोली ने मनमोहक सरहुल नृत्य प्रस्तुत किया। मांदर की गूंजती थाप और उत्साह से भरे वातावरण ने पूरे परिसर को जनजातीय संस्कृति के रंग में रंग दिया, जहां जनसैलाब उमड़ पड़ा और उत्सव का उल्लास चरम पर रहा।
इस अवसर पर अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री योगेश बापट, विधायक गोमती साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव सहित अनेक जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।
जशपुर को विकास की नई सौगात: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 19.51 करोड़ के 6 विकास कार्यों का किया भूमिपूजन
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जशपुरनगर में पुलिस लाइन हेलीपैड के समीप कुल 19 करोड़ 51 लाख 78 हजार रुपए की लागत से 6 महत्वपूर्ण विकास कार्यों का भूमिपूजन कर क्षेत्र को विकास की नई सौगात दी। इस अवसर पर उन्होंने शहरी एवं ग्रामीण बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने नगर पालिका जशपुर के वार्ड क्रमांक 18 भागलपुर में 35.46 लाख रुपए की लागत से मुक्तिधाम निर्माण कार्य तथा वार्ड क्रमांक 16 में 6.76 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक ऑडिटोरियम निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। इन परियोजनाओं से शहरवासियों को बेहतर सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने जशपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को सुगम एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से चार प्रमुख सड़कों के निर्माण कार्यों का भी भूमिपूजन किया। इनमें 2.89 करोड़ रुपए लागत से चटकपुर-रेंगारबहार मार्ग, 3.01 करोड़ रुपए लागत से कुनकुरी-औंरीजोर-मतलूटोली-पटेल पारा मार्ग, 3.29 करोड़ रुपए लागत से रानीबंध-चिड़ाटांगर-उपरकछार मार्ग तथा 3.18 करोड़ रुपए लागत से धुरीअम्बा-कटुखोसा मार्ग का निर्माण शामिल है। इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के समग्र और संतुलित विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार और ग्रामीण अंचलों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को नई दिशा और गति मिलेगी।
इस अवसर पर विधायक गोमती साय, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
IAS रवि मित्तल की PMO में डिप्टी सेक्रेटरी पद पर नियुक्ति, ACC ने दी मंजूरी
रायपुर। छत्तीसगढ़ कैडर के 2016 बैच के आईएएस अधिकारी रवि मित्तल को केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर तैनात किया है। यह नियुक्ति कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) की स्वीकृति के बाद की गई है।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मित्तल का कार्यकाल पदभार संभालने की तिथि से चार वर्ष तक रहेगा या फिर अगली अधिसूचना तक प्रभावी रहेगा।
प्रशासनिक दृष्टि से इस नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि PMO में डिप्टी सेक्रेटरी का पद नीतियों के समन्वय और उच्चस्तरीय निर्णय प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है। वर्तमान में रवि मित्तल जनसंपर्क आयुक्त के रूप में कार्यरत हैं और इससे पहले वे जशपुर जिले के कलेक्टर रह चुके हैं।

मतदाता सूची विवाद पर विधानसभा में हंगामा, स्थगन खारिज होने पर विपक्ष का वॉकआउट
रायपुर। विधानसभा में शून्यकाल के दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में लोगों के काटे गए नाम पर चर्चा के लिए विपक्ष स्थगन लाया. मुद्दे पर पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई. आसंदी के इसे भारत निर्वाचन आयोग का विषय बताते हुए स्थगन को अस्वीकार करने पर नाराज विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट किया.
नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने एसआईआर पर स्थगन की सूचना देते हुए कहा कि 19 लाख 13 हजार से ज्यादा लोगों के नाम कटे हैं. ये जो प्रदेश के नागरिक थे, वो लापता हैं. इस मुद्दे पर स्थगन के जरिए चर्चा की मांग है. इस पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि ये जनहित का, राज्यहित का मुद्दा नहीं है, इसे यहां नहीं उठाया जा सकता. इसे रिकॉर्ड में भी नहीं शामिल किया जाना चाहिए. ये राज्य का मुद्दा ही नहीं है.
भाजपा विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि प्रदेश में सब ठीक चल रहा है. विपक्ष के पास मुद्दा नहीं है, इसलिए ऐसे मुद्दे ला रहे हैं. कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने भाजपा का नाम लिया. भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने भाजपा का नाम लेने पर आपत्ति जताई. इसके साथ ही सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया. पक्ष-विपक्ष में तीखी बहस होने लगी.
कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने कहा कि एक पार्टी के लोगों ने दूसरे बूथों के भी मतदाताओं का नाम कटवाया. इसपर चर्चा जरूरी जरूरी है. आसंदी ने भारत निर्वाचन आयोग का विषय बताते हुए स्थगन को अस्वीकार किया. इससे नाराज विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट किया.
सफाई कर्मियों की मौत पर जांच तेज, आयोग के उपाध्यक्ष ने परिजनों से की मुलाकात
रायपुर। राजधानी के रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में हुए दर्दनाक हादसे में तीन सफाई कर्मचारियों की मौत के मामले में पुलिस ने घटना के 24 घंटे बाद एफआईआर दर्ज की। टिकरापारा थाना क्षेत्र में दर्ज की गई FIR में सफाई ठेकेदार किशन सोनी के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की धारा के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस बीच राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल बीती रात रायपुर पहुंचे और आज सुबह उन्होंने पीड़ित परिजनों से मुलाकात की।
बता दें कि हरदीप सिंह गिल ने राजधानी रायपुर के संतोषी नगर स्थित BSUP कॉलोनी, सिमरन सिटी में मृतक कर्मचारियों के परिवारजनों से बातचीत की और घटना की पीड़ा को समझा। उन्होंने कहा, “परिवार के साथ आज मुलाकात की है। यह बहुत दुख की घड़ी है। मैंने उनकी पूरी बातें सुनी कि आखिर यह हादसा कैसे हुआ।”
घटना स्थल का भी जायजा लिया गया और अस्पताल के डॉक्टरों से मुलाकात कर आवश्यक जानकारी एकत्र की गई। हरदीप सिंह ने कहा, “घटना स्थल पर हमने जांच की और पाया कि वहां कई खामियां हैं। रात में अस्पताल ने सफाई की अनुमति क्यों दी, यह जांच का विषय है। यदि इन कर्मचारियों को काम करवाना था तो नगर निगम को सूचित किया जाना चाहिए था। जो भी इसमें दोषी ठहराया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
हरदीप सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, हादसे में मृत कर्मचारियों के परिवार को तुरंत 30 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया है। इसके अलावा, मृतक कर्मचारियों की नौकरी और पुनर्वास के लिए जो भी सरकारी जिम्मेदारी होगी, उसे पूरी तरह निर्वहन किया जाएगा। हरदीप सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस मामले में और कोई शिकायत सामने आती है, तो राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग निष्पक्ष जांच और कार्रवाई करेगा।
आयुष्मान योजना पर सवाल: बड़े अस्पतालों ने इलाज से किया इंकार, सरकार ने जारी किए नोटिस
रायपुर। एक तरफ सरकार आयुष्मान योजना की सफलता की कहानी कह रही है, वहीं दूसरी ओर राजधानी रायपुर स्थित नामचीन अस्पताल योजना के तहत मरीजों का उपचार करने से इंकार कर रहे हैं. विधानसभा में योजना को लेकर पूछे गए सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल, श्री नारायणा हॉस्पिटल, बालगोपाल हॉस्पिटल सहित अन्य अस्पतालों के खिलाफ शिकायत मिली है, जिस पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.
विधानसभा में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने आयुष्मान योजना को लेकर सवाल किया. उन्होंने पूछा कि प्रदेश में आयुष्मान योजना में कितने कार्डधारी हैं, और एक अप्रैल 25 से 15 फरवरी 26 तक कितने हितग्राहियों का आयुष्मान योजनांतर्गत उपचार हुआ? कितनी राशि का भुगतान हुआ? कितनी बची है? राज्यांश और केंद्रांश कितना है? भुगतान लम्बित होने पर कितने लोगों का इलाज नहीं हुआ? कितनी शिकायत आई? कितनी जाँच हुई?
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि प्रदेश में 2.47 करोड़ आयुष्मान योजना के कार्डधारी हैं. 2024 से 2026 तक योजनांतर्गत 22,59,995 लोगों का उपचार हुआ. योजना में केंद्र का 60% और राज्य का हिस्सा 40% है. वहीं योजना में शामिल अस्पतालों को लेकर 31 शिकायतें प्राप्त हुई, जिन पर कार्यवाही हुई है. इसके साथ कार्ड से इलाज करने पर मना करने वाले अनेक अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है, और कई अस्पतालों के खिलाफ जांच जारी है.
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पर विधानसभा में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट
रायपुर। विधानसभा में गुरुवार को गृह मंत्री विजय शर्मा ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पेश किया गया. विपक्ष ने ऐसी ही मामलों के सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने का हवाला देते हुए विधेयक को सदन की प्रवर समिति को सौंपने की बात कही. आसंदी के प्रस्ताव को खारिज करने पर विपक्ष ने चर्चा में भाग लेने इंकार करते हुए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया.
गृह मंत्री विजय शर्मा ने विधानसभा में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पेश किया. नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने विधेयक पर आपत्ति उठाते हुए कहा कि 11 राज्यों के ऐसे ही मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, ऐसे में इस पर चर्चा नही होनी चाहिए. विधेयक को विधानसभा की प्रवर समिति को सौंपना चाहिए.
इस पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि कहीं कोई दिक्कत नहीं है, विधि सम्मत विधेयक लाया गया है.
गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से कहीं कोई स्टे नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं कहा है कि इस पर नये कानून न बनाये जाए. राज्य सरकार चाहे तो कानून बना सकती है. प्रवर समिति को दिए जाने के लिए फीडबैक लिए गए हैं. हम सब को विधेयक पर सहमत होकर आगे बढ़ना चाहिए.
आसंदी ने नेता प्रतिपक्ष के आपत्ति को खारिज किया, जिससे नाराज विपक्ष ने आज दिनभर की सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया. इस पर विजय शर्मा ने कहा कि जब भी कोई गंभीर चर्चा होती है तो विपक्ष के लोग बहिर्गमन, बहिष्कार करके जाते हैं. इसे पलायन कहा जाना चाहिए. उनको आदिवासी समाज की पीड़ा से मतलब नहीं है. ये पलायन है पलायन.
इसके साथ ही विपक्ष के खिलाफ सत्ता पक्ष के विधायकों ने नारे लगाने शुरू कर दिया. विपक्ष के विधायक भी नारेबाजी करते हुए बहिष्कार कर सदन से बाहर निकल गए.
वीरता पदक विजेताओं को 20 लाख सम्मान राशि और जीवनभर 20 हजार मासिक सहायता: विधानसभा में गृह मंत्री का जवाब
रायपुर। सशस्त्र बल वीरता पुरस्कार मिलने वाले जवानों-अधिकारियों को नियोक्ता, यानी जिस बल में वे भर्ती होते हैं, उन्हें 1 बार में 20 लाख की सम्मान राशि दी जाती है. उसके अलावा राज्य सरकार की तरफ से उन्हें 20 हजार प्रति माह जीवन भर के लिए दिया जाता है. इस बात की जानकारी गृह मंत्री विजय शर्मा ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को प्रश्नकाल में भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो के सवाल के जवाब में दी.
विधायक रामकुमार टोप्पो ने गृह मंत्री विजय शर्मा से पूछा कि क्या वीरता कार्य पर पदक प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ राज्य सशस्त्र बल के जवानों-अधिकारियों को कोई सम्मान राशि दी जाती है? 2024 से अब तक कितने जवानों को वीरता पदक प्राप्त हुए हैं?
गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस एवं छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के जवानों को राष्ट्रपति वीरता पदक एवं वीरता पदक प्राप्त होने पर भारत सरकार, गृह मंत्रालय द्वारा निर्धारित मौद्रिक भत्ता प्रदाय किया जाता है, तथा राज्य पुलिस बल कार्मिकों को छत्तीसगढ़ शौर्य पदक प्राप्त होने पर राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मौद्रिक भत्ता प्रदाय किया जाता है.
छत्तीसगढ़ शासन, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी परिपत्र अनुसार, छत्तीसगढ़ राज्य के स्थायी निवासी जो विभिन्न राज्य बलों, केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों एवं सेना में सेवारत् हैं, तथा छत्तीसगढ़ के आम नागरिक, पुलिस बल कार्मिक, जिन्हें वीरतापूर्ण कार्य के लिए शौर्य-युद्ध सेवा मेडल श्रृंखला अन्तर्गत प्राप्त चक्र-मेडल प्राप्त होने पर दिए जाने वाले अनुदान राशि-भूमि के एवज में नगद राशि दी जाती है.
सिलतरा-धरसींवा में ट्रांसपोर्ट हड़ताल: उद्योग ठप्प, संघ पर निजी हित साधने के आरोप
रायपुर। छत्तीसगढ़ औद्योगिक परिवहन कल्याण संघ अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर बुधवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गया है. राज्य के बाहर की ट्रांजिट पास वाली गाड़ियां और राज्य के भीतर की गाड़ियों को रोक दिया गया है. जिसके चलते औद्योगिक क्षेत्र धरसींवा, सिलतरा का काम काज पूरी तरह ठप्प पड़ गया है. परिवहन के रुकने से उद्योगों में काम रोकने की नौबत आ गई है.
सिलतरा के उद्योगपति दबी जुबान से कह रहे हैं कि इस तरह का दबाव बनाकर ट्रांसपोर्ट संघ को हम पर थोपा जा रहा है. ताकि कुछ लोगो को इसका पूरा लाभ पहुंच सके. छत्तीसगढ़ स्पंज आयरन मनुफ़ैक्चरेर्स एसोसिएशन (CGSIMA) के पदाधिकारी भी कुछ कहने से बचते हुए नजर आ रहे है. लेकिन ये बात साफ़ है की ऐसे प्रदर्शनों से उद्योगों के काम काज बंद होते जा रहे है.
संघ की आड़ में निजी हित का प्रयास का आरोप
सिलतरा के उद्योगपती दबी जुबान से कह रहे हैं कि परिवहन कल्याण संघ की आड़ में कुछ चुनिंदा ट्रांसपोर्टर्स अपने निजी हित को साधने का प्रयास कर रहे है. इस इलाके के चुनिंदा ट्रांसपोर्टर्स राजनैतिक संरक्षण प्राप्त कर उद्योगपतियों पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे है. इस औद्योगिक क्षेत्र में सालो से चले आ रहे व्यवस्था को ठप्प कर नई व्यवस्था शुरू करने की मांग की जा रही है. जिससे भविष्य में इनके निजी हितों को भरपूर लाभ मिल सके और हम कारोबारियों पर दबाव बनाया जा सके.
दरअसल, छत्तीसगढ़ औद्योगिक परिवहन कल्याण संघ अपनी पांच सूत्रीय मांगो को लेकर आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गया हैं. परिवहन कल्याण संघ के अध्यक्ष लखविंदर सिंह (लक्की) ने कहा कि इंडस्ट्रीज और उद्योगपति, वाहन चालकों और ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों पर दबाव बनाते आ रहे है. पिछले लगभग 25 साल से सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र CSIDC द्वारा डेवलप हुआ है. किसानों की जमीनों को अधिग्रहित कर उद्योगों का निर्माण किया गया है. इन उद्योगों के निर्मांण के बाद रोजी रोटी का एक ही माध्यम बच गया. हमारे साथियों ने जमीन बेंचकर ट्रक, गाड़ियां खरीदी ताकि जीवन यापन किया जा सके. लेकिन उद्योगपति षड्यंत्र पूर्वक अपनी परिचितों को लाभ पहुंचाने के लिए अपने ही परिवार को काम दे देते हैं. जिससे वे बिचौलिया भूमिका को निभाते हुए 20 से 25 रुपया कमाने के बाद कार्य दिया जाता है. उद्योगपति दबाव बनाकर 140 रुपए प्रति टन पर कार्य कराते हैं. जबकि इससे पहले साल 2014 में स्टील एसोसिएशन ने 170 रुपए में कार्य करने की अनुमति दी थी. इसके बाद महंगाई बढ़ती चली गई, लेकिन किराया कम होते चला गया.
उन्होंने कहा कि इन सब पर अंकुश लगाने के लिए संघ का निर्माण का किया गया है. इसके माध्यम से जो भी परिवहन हो, वो संघ के ही बैनर तले हो. ताकि कोई भी उद्योगपति अपनी मनमानी न कर सके. इन उद्योगपति ड्राइवरों से कांटे के नाम पर अवैध वसूली की जाती है. आज हमारे साथी आत्महत्या पर मजबूर हैं. सिलतरा क्षेत्र का वायु प्रदूषण पूरे विश्व में सबसे अधिक है. इसके बावजूद एनजीटी गाइड लाइन को किनारे रख मनमाने ढंग से उद्योगों का निर्माण कर रहे हैं. इन्हीं सबके विरोध में प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतर आए हैं. उनकी मांगों को पूरा नहीं किए जाने तक प्रदर्शन जारी रहेगा. इस बार हम आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं. स्थानीय होने के नाते कार्य में प्राथमिकता मिलनी चाहिए.
जानिए संघ की पांच सूत्रीय प्रमुख मांगे ?
1- प्लांट से अवैध रूप से कांटा के पैसों की वसूली पूरी तरह बंद होनी चाहिए.
2- गाड़ियो की लोडिंग और खाली कराने की समय सीमा तय होनी चाहिए.
3- विचोलिया प्रथा पूरी तरह से बंद होनी चाहिए.
4- प्लांटों के औद्योगिक कार्यों में स्थानीय लोगो को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.
5- सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र में एनजीटी के गाइड लाइन के दायरे में रहकर कार्य करना चाहिए.
हाईकोर्ट का हस्तक्षेप: कुम्हार की आजीविका पर रोक लगाने वाले आदेश पर स्टे, अधिकारियों को नोटिस
बिलासपुर। आजीविका रोके जाने के मामले में सुनवाई कर हाईकोर्ट ने नायब तहसीलदार के आदेश पर स्थगन दिया है. साथ ही कलेक्टर दुर्ग समेत प्रतिवादी अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. बता दें कि कुम्हार का परम्परागत काम करने वाले याचिकाकर्ता को नायब तहसीलदार ने अपने एक आदेश से रोक दिया.
ग्राम कौही, तहसील पाटन जिला दुर्ग निवासी कुमोद प्रजापति ने नायब तहसीलदार पाटन जिला दुर्ग द्वारा दिए स्थगन आदेश 26 फरवरी 2026 के विरुद्ध हाईकोर्ट याचिका लगाई थी. मामले में सुनवाई करते हुए उच्च न्यायलय ने नायब तहसीलदार के आदेश को स्थगित करते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में स्थगन प्रदान किया है. याचिकाकर्ता कुम्हार जाति के होने के कारण अपने परिवार के सदस्य के साथ मिलकर कई पीढ़ियों से की जा रही मिट्टी के बर्तन, सुराही, मटका इत्यादि बनाने का कार्य करते चले आ रहा था, लेकिन गांव के उपसरपंच हेमलाल सोनकर और पूर्व माध्यमिक शाला कौही, पाटन के हेडमास्टर ने मोहन लाल देवांगन ने झूठी शिकायत कर दी. इससे याचिकाकर्ता के पीढ़ी दर पीढ़ी चल रहे इस काम पर नायब तहसीलदार ने रोक लगा दी. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने उच्च न्यायलय को बताया कि नायब तहसीलदार, पाटन, दुर्ग की कार्यवाही विधि विरुद्ध है क्योंकि बिना नोटिस दिए, याचिकाकर्ता को बिना सुनवाई का मौका दिए सीधा स्थगन दिया था. जबकि 22 अगस्त 2015 को माटीकला बोर्ड अध्यक्ष द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष मांग करने पर यह आदेश दिया गया कि कुम्हार जाति द्वारा पारिवारिक पेशा ईट मिट्टी के बर्तन बनाये जाने के लिए उन्हें किसी भी प्रकार की दस लाख तक रोयल्टी से मुक्त रखा गया है. सार्वजनिक स्थान से सभी दिशाओं से 50 मीटर तक निर्माण नहीं किया जायेगा, 50 मीटर को छोड़कर निर्माण के अनुमति दी गई है.
याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने बताया कि, 26 सितंबर 2006 को अवर सचिव ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिया कि भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 237 के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत क्षेत्र में कुम्हारों के लिए 5 एकड़ भूमि आरक्षित की जाए लेकिन आज तक अवर सचिव के आदेश का पालन नहीं किया गया. हाईकोर्ट ने भी इस पर खनिज विभाग के अधिकारी एवं नायब तहसीलदार पाटन पर नाराजगी व्यक्त की. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के बाद उच्च न्यायलय ने कलेक्टर दुर्ग, तहसीलदार, पाटन खनिज विभाग, उप सरपंच एवं अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई तक जवाब मांगा है. पाटन तहसील के नायब तहसीलदार के स्थगन पर याचिकाकर्ता के पक्ष में रोक लगा दी है.
रायपुर सीवरेज हादसा: राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने लिया संज्ञान, जांच के लिए रायपुर पहुंचे उपाध्यक्ष
रायपुर। राजधानी में रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल के गटर सीवरेज टैंक से में सफाई के दौरान तीन सफाई कर्मचारियों की दर्दनाक मौत का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है. राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने इस दर्दनाक मुद्दों पर संज्ञान लिया है. आयोग के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल बुधवार को रायपुर पहुंचे.
उपाध्यक्ष हरदीप सिंह घटनास्थल पहुचकर करेंगे जांच
जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल कल यानी गुरवार को भाटागांव बीएसयूपी कालोनी सुबह 9 बजे मृतकों के परिजनों से मुलाकात करेंगे. इस दौरान घटना पर परिजनों के साथ चर्चा करेंगे. पूरी स्थिति को विस्तार से जानने का प्रयास करेंगे. इसके बाद वह रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में घटनास्थल पर जाएंगे और जांच करेंगे. यह जांच सुरक्षा मानकों की पालना, जहरीली गैस से सुरक्षा उपायों की कमी और लापरवाही के पहलुओं पर फोकस रह सकती है.
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे में वह राज्य प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों के साथ बैठक भी करेंगे. इस दौरान सफाई कर्मचारियों के कामकाज, सुरक्षा उपाय और उनके अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाएगी.
आरक्षक भर्ती मामला: हाईकोर्ट का निर्देश—खाली पद वेटिंग लिस्ट से भरें
बिलासपुर। पुलिस आरक्षक भर्ती मामले में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि चयनित अभ्यर्थियों की जॉइनिंग के बाद खाली रह जाने वाले पदों को वेटिंग लिस्ट से भरा जाए. कोर्ट ने साफ कहा कि सभी विज्ञापित पद केवल जारी चयन सूची से भर पाना संभव नहीं है.
दरअसल, वर्ष 2024 में पुलिस विभाग द्वारा करीब 5967 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था. याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया कि कई अभ्यर्थियों ने एक से अधिक जिलों से आवेदन किया और मेरिट में आने पर उन्हें कई जिलों की चयन सूची में शामिल कर लिया गया. इससे वास्तविक रूप से पद खाली रह जाने की स्थिति बन रही है. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि चयन सूची में 5948 अभ्यर्थियों के नाम प्रकाशित किए गए हैं, लेकिन यह संभव है कि एक ही अभ्यर्थी एक से अधिक जिलों में चयनित हो. ऐसे में जब वह किसी एक जिले में जॉइन करेगा, तो बाकी जिलों के पद रिक्त हो जाएंगे. इन रिक्त पदों को बाद में वेटिंग लिस्ट से भरा जाएगा.
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की सिंगल बेंच ने कहा कि वर्तमान स्थिति में यह स्पष्ट है कि सभी पद चयन सूची से नहीं भर पाएंगे. इसलिए राज्य सरकार को निर्देशित किया जाता है कि चयनित उम्मीदवारों की जॉइनिंग के बाद बचे हुए पदों को नियमों के तहत वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थियों से भरे. कोर्ट ने याचिका का निराकरण करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखते हुए रिक्त पदों को जल्द भरने की कार्रवाई की जाए.
हाईकोर्ट का आदेश: किसान का बकाया 84 क्विंटल धान 30 दिन में खरीदा जाए
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने स्टॉक जांच में धान नहीं होने की बात कहते हुए किसान का पूरा धान नहीं लेने के खिलाफ पेश याचिका में कलेक्टर सक्ती, हसौद मंडी सहित अन्य को याचिकाकर्ता का बकाया 84 क्विंटल धान 30 दिवस के अंदर लेने का आदेश दिया है. कोर्ट ने इसके साथ याचिका को निराकृत किया है. मामले की सुनवाई जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की सिंगल बेंच में हुई.
याचिकाकर्ता लक्ष्मण कुमार चंद्रा निवासी ग्राम हसौद, जिला सक्ती ने अधिया के आधार पर खेती की. कटाई के बाद, शेष 84 क्विंटल धान बटाईदार के घर भंडार में रखा गया था. भंडार के भौतिक सत्यापन की तारीख 20.01.2026 को, 84 क्विंटल धान याचिकाकर्ता के सीधे कब्जे में नहीं पाया गया, जिसके कारण समिति प्रबंधक/अध्यक्ष, कृषक सेवा सहकारी समिति अध्यक्ष, कृषक सेवा सहकारी समिति मर्यादित, हसौद ने उक्त धान की खरीद से इनकार कर दिया. इसके खिलाफ किसान ने अधिवक्ता योगेश कुमार चंद्रा के जरिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई. जिसमें कहा गया, कि याचिकाकर्ता एक किसान है, जिसने खरीफ साल 2025-26 के लिए उसकी 3.7800 हेक्टेयर खेती की ज़मीन किसान पोर्टल पर रजिस्टर्ड थी. 196 क्विंटल धान की खरीद के लिए सहकारी समिति हसौद ने याचिकाकर्ता को 196 क्विंटल का टोकन भी जारी किया था. किसान ने 111.20 क्विंटल धान बेचा है. याचिकाकर्ता का शेष 84 क्विंटल धान लिए जाने का निर्देश दिए जाने की मांग की गई.
जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी ने याचिकाकर्ता एवं प्रतिवादियों का पक्ष सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड के अवलोकन से पता चलता है कि याचिकाकर्ता की खरीफ वर्ष 2025-26 के लिए उनकी 3.7800 हेक्टेयर कृषि भूमि किसान पोर्टल पर किसान के तहत पंजीकृत की गई थी. इसके अलावा, पिटीशनर के 196 क्विंटल धान की खरीद के लिए टोकन जारी किया गया था. हालांकि 196 क्विंटल धान की बिक्री की एंट्री किसान पोर्टल पर रजिस्टर्ड है और इसके लिए टोकन भी जारी किया गया था, लेकिन सिर्फ़ 111.20 क्विंटल ही बेचा गया है. पिटीशनर के अनुसार, एक किसान के तौर पर, उसने एक बटाईदार (बटाईदार) के साथ एक अधिया के ज़रिए 84 क्विंटल धान की कटाई की, और यह हिस्सा बटाईदार के स्टोरेज एरिया में स्टोर किया गया था. रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे पता चले कि पिटीशनर ने उस धान की कटाई गैर-कानूनी तरीके से की थी. कोर्ट ने कलेक्टर सक्ती, सहकारी समिति सहित अन्य को याचिकाकर्ता की बाकी 84 क्विंटल धान बेचने और उठाने की इजाज़त देने का निर्देश दिया है. इसके लिए सही प्रोसेस कर 30 दिनों के अंदर धान लेने का निर्देश दिया है. इसके साथ कोर्ट ने याचिका को निराकृत किया है.
मीडिया के मुद्दों पर मंथन: विजयवाड़ा में होगा आईजेयू का राष्ट्रीय अधिवेशन
हैदराबाद/चंडीगढ़। इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन (आईजेयू) का 11वां राष्ट्रीय सम्मेलन 28-29 मार्च को आंध्र प्रदेश की राजधानी विजयवाड़ा (अमरावती) में आयोजित किया जाएगा। आज जारी एक वक्तव्य में, आईजेयू अध्यक्ष के. श्रीनिवास रेड्डी, महासचिव बलविंदर सिंह जम्मू और सचिव डी. सोमसुंदर ने यह घोषणा की। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू मुख्य अतिथि के रूप में सत्र का उद्घाटन करेंगे। कई केंद्रीय मंत्री और आंध्र प्रदेश के केबिनेट मंत्री भी अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। आंध्र प्रदेश वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन (एपीयूडब्ल्यूजे) 34 वर्षों के अंतराल के बाद आईजेयू के राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है. स्थापना के बाद दूसरा आईजेयू सम्मेलन 1992 में विजयवाड़ा में आयोजित किया गया था। इसमें देश के 25 राज्यों से आईजेयू से संबद्ध पत्रकार संघों के निर्वाचित प्रतिनिधि, अध्यक्ष और महासचिव भाग लेंगे। इस पूर्ण सत्र में भारत में मीडिया से जुड़े पेशेवर मुद्दों और वर्तमान स्थिति, मीडिया की स्वतंत्रता पर हालिया खतरों और संगठनात्मक मामलों पर चर्चा होगी। सत्र में लगभग 10 प्रस्ताव पारित किए जाएंगे और पेशेवर एवं कल्याणकारी उपायों सहित कार्यरत पत्रकारों की मांगों को आगे बढ़ाने के लिए एक कार्य योजना की रूपरेखा तैयार की जाएगी। अगले दो वर्षों के लिए एक नई राष्ट्रीय कार्यकारी समिति का चुनाव भी इसी सत्र में किया जाएगा।

राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजन के लिए स्वागत समिति का गठन सांसद केसिनैनी शिवनाध (चिन्नी) को मुख्य संरक्षक, आंध्र प्रदेश प्रेस अकादमी के अध्यक्ष सी. राघवा चारी को अध्यक्ष और आई.वी. सुब्बाराव को महासचिव बनाकर किया गया है जो सम्मेलन की व्यवस्थाओं की पूरी देखरेख कर रही है। 
छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य दिलीप साहू, राज्य सचिव सुधीर आज़ाद तंबोली तथा प्रदेश अध्यक्ष पी. सी. रथ ने बताया कि प्रदेश से राष्ट्रीय सम्मेलन में पत्रकारों की भागीदारी की तैयारियां चल रही है। प्रदेश के पत्रकारों के ताजातरीन मुद्दों को राष्ट्रीय सम्मेलन में देश भर से आए वरिष्ठ पत्रकारों के समक्ष रखा जाएगा।
नववर्ष, नव ऊर्जा और नव संकल्प का संदेश: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी चैत्र नवरात्रि, नव संवत्सर और गुड़ी पड़वा की शुभकामनाएं
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को चैत्र नवरात्रि, हिंदू नववर्ष (नव संवत्सर) एवं गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी है। उन्होंने इस मंगल अवसर पर प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और शांति की कामना की है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि चैत्र मास के प्रथम दिन से प्रारंभ होने वाला हिंदू नववर्ष नव ऊर्जा, नव संकल्प और नव चेतना का प्रतीक है। इसी पावन अवसर से शक्ति उपासना के महापर्व चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होता है, जो श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक आस्था के साथ पूरे देश में मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि गुड़ी पड़वा विशेष रूप से महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों में नववर्ष के स्वागत का उत्सव है, जो आशा, उत्साह और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है। यह पर्व समाज में सकारात्मक ऊर्जा, नव शुरुआत और उत्सवधर्मिता का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध देवी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि मां शीतला, मां दंतेश्वरी, महामाया, बम्लेश्वरी, कंकाली, बिलईमाता और चंद्रहासिनी देवी जैसे विविध स्वरूपों में प्रदेश की आस्था और संस्कृति गहराई से रची-बसी है। यह आध्यात्मिक विरासत प्रदेश की पहचान को सशक्त बनाती है।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि के इन पावन दिनों में छत्तीसगढ़ की धरती भक्ति, साधना और शक्ति आराधना से आलोकित हो उठती है। देवी उपासना केवल आध्यात्मिक ऊर्जा ही नहीं देती, बल्कि सामाजिक समरसता, सकारात्मक सोच और आंतरिक चेतना का भी संचार करती है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन सरकार प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए विकास और विश्वास के नए आयाम स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने मां भगवती से प्रार्थना करते हुए कहा कि उनकी कृपा से छत्तीसगढ़ निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर रहे और प्रदेश के प्रत्येक परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास बना रहे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में राज्य पिछड़ा वर्ग सलाहकार परिषद की बैठक संपन्न
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज विधानसभा स्थित समिति कक्ष में राज्य पिछड़ा वर्ग सलाहकार परिषद की बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण के लिए प्रदेश में अलग से संचालनालय गठन,नवीन हॉस्टल भवन निर्माण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विकास संबंधित अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा हमारी सरकार पिछड़ा वर्ग समाज के विकास लिए प्रतिबद्ध है। हम उनकी चिंता कर नये विकास का कार्य कर रही है। राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग की बड़ी संख्या निवास करती है, जिनमें लगभग 95 जातियां एवं उनके उपसमूह निवासरत है। हमारी सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग के शैक्षणिक एवं सामाजिक आर्थिक विकास की चुनौतियों के प्रति संवेदनशील है।
हमारी सरकार समाज के महत्वपूर्ण किन्तु विकास में पीछे रह गये इन वर्गों के सामाजिक सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करते हुए उनके सर्वांगीण विकास पर विशेष बल देते हुए समग्र विकास के लिए कृत संकल्पित है।
संकल्प को पूर्ण करने हेतु हमारी सरकार ने पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग,मंत्रालय गठित किया है, जिससे इन वर्गों के विकास के लिए गति प्रदान की जा सके तथा इनके लिए नवाचार योजनाओं को लागू किया जा सके। इसके अतिरिक्त इन वर्गों के समस्याओं पर सम्यक रुप से विचार कर समस्या का समाधान किया जा सके, जिससे यह समाज भी विकास की मुख्य धारा में शामिल हो सके।
पिछड़ा वर्ग के विकास हेतु अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया है तथा पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग भी गठित किया गया है। इसके लिए लौहशिल्प विकास बोर्ड, रजककार विकास बोर्ड तथा तेलघानी विकास बोर्ड भी गठित किया गया है।
इन उद्देश्यों की पूर्ति हेतु विभाग ने नवीन मुख्य बजट में इन वर्गों के शैक्षणिक विकास हेतु छात्रावास, आश्रम, प्रयास आवासीय विद्यालय संस्थान स्थापित किये गये है। इसके अतिरिक्त पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति को ऑनलाईन पोर्टल के माध्यम से छात्रवृत्ति विद्यार्थी के खाते में सीधे भुगतान किया जा रहा है। इस हेतु रुपये 150 करोड़ का प्रावधान किया गया है। भुगतान की व्यवस्था को समय-सीमा में पूर्ण करने हेतु नवाचार करते हुए निरंतर मॉनिटरिंग के माध्यम से छात्रवृत्ति की स्वीकृति एवं भुगतान चालू वर्ष में ही किये जाने की व्यवस्था की गई है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों के प्रशिक्षण हेतु आर्थिक सहायता की योजना मुख्य बजट में लाई गई है, जिसके माध्यम से इंजीनियरिंग, मेडिकल, यूपीएससी, सीजीपीएससी, एसएससी, रेल्वे, बैंकिंग आदि का प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों के छ.ग. राज्य के भौगोलिक एवं प्राकृतिक संरचनाओं के अध्ययन तथा सांस्कृतिक धरोहरों के संबंध में अभिरुचि के विकास हेतु शैक्षणिक भ्रमण के लिए प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि हमने मुख्य बजट में नवीन योजना मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना लाई गई है, जिसके माध्यम से जिन विद्यार्थियों को छात्रावास में प्रवेश नहीं मिल पाता है, उनको अध्ययन के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी। अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए वर्तमान में 55 विभागीय छात्रावास स्वीकृत है। वर्तमान में नवीन बजट में 06 जिलों (रायगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी भरतपुर, धमतरी, रायपुर, जशपुर) में अन्य पिछड़ा वर्ग पो. मैट्रिक छात्रावास स्वीकृत किये गये है।
इस दौरान राज्य पिछड़ा वर्ग सलाहकार परिषद के अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
उक्त बैठक में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि गण एवं अधिकारीगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
विपक्ष के विरोध के बीच भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक पारित, वित्तीय पत्रक पर उठा विवाद
रायपुर। विधानसभा में आज छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक पारित हुआ। इस विधेयक पर विपक्ष ने आपत्ति की। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने कहा, बिना वित्तीय पत्रक के विधेयक को पारित करना ठीक नहीं है। संशोधक विधेयक के प्रावधान से वित्तीय हानि की संभावना है। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने विपक्ष की आपत्ति को खारिज करते हुए कहा, वित्तीय हानि नहीं होगी। विधेयक के लिए वित्तीय पत्रक की आवश्यकता नहीं है।
विधेयक के दूरगामी परिणाम को लेकर विधायक उमेश पटेल ने कहा, अगर यह परंपरा बनी तो आगे किसी भी तरह का लॉस हुआ तो किसी भी विधायक को बताया नहीं जाएगा। उन्हें जानकारी नहीं होगी तो इस पर कैसे चर्चा की जाएगी। वित्तीय पत्रक प्रस्तुत न करें तो यह गलत परंपरा की शुरुआत है और आगे इसमें खतरनाक परिणाम आ सकते हैं। विपक्ष के विरोध के बीच सत्ता पक्ष के बहुमत के साथ छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक पारित हो गया।