रायपुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और भारतीय ज्ञान प्रणाली के एकीकरण पर केंद्रित “एक समग्र शैक्षिक परिकल्पना” विषयक दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ आज शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, रायपुर में किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा एवं कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहब ने संयुक्त रूप से किया।
*भारतीय ज्ञान परम्परा अतीत नहीं, भविष्य की राह दिखाने वाली – टंकराम वर्मा*
उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय सभ्यता और संस्कृति की महान विरासत को सुदृढ़ करने वाली नीति है। यह केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन जीने की समग्र एवं संतुलित शैली प्रस्तुत करती है।उन्होंने कहा कि वेद, उपनिषद, महाभारत, आयुर्वेद, योग, गणित, दर्शन, ज्योतिष और खगोल शास्त्र जैसी भारतीय ज्ञान विधाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। गुरुकुल परम्परा में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नैतिकता और समाज सेवा था।
मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि आधुनिक समय में भारतीय ज्ञान परम्परा को पुनः शिक्षा व्यवस्था में आत्मसात करने की आवश्यकता है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 इसी दिशा में सशक्त कदम है। यह नीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 विकसित भारत के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी।
आधुनिकता और संस्कृति का संतुलन ही नई पीढ़ी का मार्ग – गुरु खुशवंत साहेब
कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 आने वाली पीढ़ी को आधुनिक तकनीकी ज्ञान के साथ भारतीय इतिहास, संस्कृति और परम्पराओं से जोड़ने का कार्य करती है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, ताकि शिक्षा व्यवस्था को व्यवहारिक, रोजगारोन्मुख और संस्कारयुक्त बनाया जा सके। यह नीति भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का गहन अध्ययन और सामूहिक प्रयास आवश्यक – डॉ. अतुल कोठारी
विशिष्ट अतिथि एवं राष्ट्रीय सचिव, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (नई दिल्ली) डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का गहन अध्ययन कर उसका प्रभावी क्रियान्वयन समय की मांग है। सभी शिक्षाविदों को मिलकर इस नीति को धरातल पर उतारने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।
शिक्षाविदों और कुलपतियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल, आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग डॉ. संतोष कुमार देवांगन, शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर के कुलपति प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति प्रो. ए.डी.एन. वाजपेई, पंडित सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति प्रो. वीरेंद्र कुमार सारस्वत, छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई के कुलपति डॉ. अरुण अरोरा सहित राष्ट्रीय शिक्षा नीति के नोडल अधिकारी, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के प्रतिनिधि एवं प्रदेशभर के महाविद्यालयों के प्राचार्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
रायपुर। नए साल में विशाखापट्टनम जाने की तैयारी कर रहे यात्रियों को बड़ा झटका लगा है। ईस्ट कोस्ट रेलवे के वाल्टेयर मंडल अंतर्गत रायगड़ा–विजयनगरम सेक्शन में प्रस्तावित अपग्रेडेशन और मेंटेनेंस कार्य के चलते रेल परिचालन प्रभावित रहेगा। इस दौरान यात्रियों की सुरक्षा और कार्य को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए कुछ कोचिंग ट्रेनों को रद्द करने, कुछ ट्रेनों को गंतव्य से पहले समाप्त और शुरु करने का निर्णय लिया गया है।
ये ट्रेनें रहेंगी रद्द
(1) 58528 विशाखापत्तनम – रायपुर पैसेंजर दिनांक 05,12 एवं 19 जनवरी, 2026 को रद्द रहेगी।
(2) 58527 रायपुर- विशाखापत्तनम पैसेंजर दिनांक 05,12 एवं 19 जनवरी,2026 को रद्द रहेगी।
गंतव्य से पहले समाप्त / प्रारंभ होने वाली ट्रेन
(1) 20829 दुर्ग- विशाखापट्टनम वंदे भारत एक्सप्रेस दिनांक 05,12 एवं 19 जनवरी, 2026 को दुर्ग से चलकर रायगड़ा में समाप्त होगी।
(2)20830 विशाखापट्टनम- दुर्ग वंदे भारत एक्सप्रेस दिनांक 05,12 एवं 19 जनवरी, 2026 को विशाखापट्टनम के स्थान पर रायगड़ा से दुर्ग के लिए रवाना होगी।
रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चतैन्य बघेल को बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. ईडी और ईओडब्ल्यू के मामलों में सुनवाई के बाद चैतन्य की जमानत याचिका स्वीकार कर ली गई है. लगभग 168 दिनों के बाद वे जेल से बाहर आएंगे.
ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन पर 18 जुलाई को भिलाई निवास से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया था. शराब घोटाले की जांच ईडी ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के कारण प्रदेश के खजाने को भारी नुकसान हुआ और करीब 2,500 करोड़ रुपए की अवैध कमाई (पीओसी) घोटाले से जुड़े लाभार्थियों की जेब में पहुंचाई गई.
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के कारण प्रदेश के खजाने को भारी नुकसान हुआ और करीब 2,500 करोड़ रुपए की अवैध कमाई (पीओसी) घोटाले से जुड़े लाभार्थियों की जेब में पहुंचाई गई.
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने एक दिवसीय दंतेवाड़ा प्रवास के दौरान आज बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के पावन मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने मां दंतेश्वरी के चरणों में नमन करते हुए समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और सर्वांगीण कल्याण की मंगलकामनाएँ कीं।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, सांसद महेश कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, राज्य महिला आयोग की सदस्य ओजस्वी मंडावी, संस्कृति सचिव रोहित यादव, आईजी बस्तर सुंदरराज पी., डीआईजी कमलोचन कश्यप, कलेक्टर देवेश ध्रुव, पुलिस अधीक्षक गौरव राय सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।
रायपुर। रायपुर जिले के अभनपुर में स्थित श्री कृष्णा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल पर गंभीर अनियमितताओं के आरोपों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। जांच में फर्जी लैब रिपोर्ट तैयार करने और नर्सिंग होम एक्ट के उल्लंघन की पुष्टि होने पर अस्पताल के अंतर्गत संचालित लैबोरेटरी को तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं। इसके साथ ही अस्पताल प्रबंधन पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
बता दें कि यह कार्रवाई केंद्रीय लोक शिकायत पोर्टल (CPGRAMS) पर दर्ज एक शिकायत के आधार पर की गई। शिकायतकर्ता गोपेश्वर कुमार सिन्हा ने आरोप लगाया था कि अस्पताल में बिना किसी वास्तविक टेस्ट या सैंपल जांच के ही मरीजों की लैब रिपोर्ट तैयार कर इलाज किया जा रहा है। शिकायत में यह भी कहा गया कि जब इस गड़बड़ी का पता चलता था, तो पुरानी फर्जी रिपोर्ट हटाकर नई रिपोर्ट लगा दी जाती थी, जिससे मरीजों को गुमराह किया जा सके।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मिथलेश चौधरी के निर्देश पर एक जांच दल गठित किया गया। जांच के दौरान अस्पताल की लैब प्रबंधन व्यवस्था में गंभीर लापरवाही और नियमों की अनदेखी सामने आई। जांच दल की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि अस्पताल द्वारा नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा था।
जांच रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने नर्सिंग होम एक्ट के अध्याय 3, कंडिका 12 (क) (1) के तहत कार्रवाई करते हुए लैब संचालन पर तत्काल रोक लगा दी। साथ ही अस्पताल पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसे ‘Supervisory Authority Raipur’ के नाम से डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया कि मरीजों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पारदर्शी और नियमों के अनुरूप चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है और भविष्य में भी इस तरह की अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
हालांकि, इस पूरे मामले पर श्री कृष्णा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिले के अन्य निजी अस्पतालों और लैबों की भी समय-समय पर जांच की जाएगी, ताकि मरीजों के हितों की रक्षा की जा सके और स्वास्थ्य सेवाओं में भरोसा बना रहे।
कांकेर। जिले में कार्यरत मितानिनों को समय पर प्रोत्साहन राशि नहीं मिलने से वे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रही हैं। इस संबंध में छत्तीसगढ़ मितानिन नागरिक जागरूक संस्था, जिला कांकेर ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल भुगतान की मांग की है। संस्था ने चेतावनी दी है कि यदि 3 जनवरी तक लंबित राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो मितानिनें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगी।
ज्ञापन में बताया गया है कि पिछले एक वर्ष से मितानिनों को प्रोत्साहन राशि नियमित रूप से नहीं मिल रही है। कई मितानिनों से बिना भुगतान के कार्य कराया जा रहा है, जबकि वही कार्य अन्य विभागों के कर्मचारियों से कराया जाए तो उन्हें भुगतान किया जा रहा है। बीते चार महीनों से राज्यांश और केंद्रांश दोनों ही प्रोत्साहन राशि लंबित हैं, जिन्हें सिस्टम अपडेट का हवाला देकर टाला जा रहा है।
संस्था ने आरोप लगाया कि भुगतान की कोई निश्चित तिथि तय नहीं होने के कारण मितानिनों को लगातार आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसका असर उनके पारिवारिक जीवन पर भी पड़ रहा है। छत्तीसगढ़ मितानिन नागरिक जागरूक संस्था ने मांग की है कि 3 जनवरी 2026 तक सभी लंबित प्रोत्साहन राशि (राज्यांश एवं केंद्रांश) का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। तय समय-सीमा में भुगतान नहीं होने की स्थिति में मितानिनों द्वारा सड़क पर उतरकर आंदोलन किए जाने की चेतावनी दी गई है, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
रायपुर। प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को लेकर कांग्रेस ने गंभीर आपत्ति जताई है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक स्थिति है। कांग्रेस ने प्रभावित पंचायतों की सूची भी जारी की है।
शहर कांग्रेस जिला अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन के नेतृत्व में कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी यशवंत कुमार से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि कई स्थानों पर नए मतदाताओं को फॉर्म तक उपलब्ध नहीं कराए गए, नए बूथों पर बीएलओ की नियुक्ति नहीं है, जिसके कारण पात्र मतदाता नाम जुड़वाने से वंचित रह गए। कांग्रेस नेताओं ने ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निर्देश जारी कर ग्राम पंचायत, वार्ड और बूथ स्तर पर शिविर लगाकर छूटे हुए पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाएं।
कांग्रेस ने अपने पत्र में कहा कि निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान अनेक पात्र नागरिकों को दस्तावेजों की कमी, पर्याप्त जानकारी के अभाव और तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिसके चलते वे मतदाता सूची से बाहर रह गए।
इसके अलावा कांग्रेस ने यह भी उल्लेख किया कि खेती का मौसम समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों की ओर पलायन कर जाते हैं, जिससे वे एसआईआर प्रक्रिया में भाग नहीं ले सके। वहीं बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सलवा-जुड़ूम के दौरान विस्थापित हुए आदिवासी परिवारों के नाम भी बड़ी संख्या में छूटने का आरोप लगाया गया है।
रायपुर। सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने अंग्रेजी नववर्ष के अवसर पर प्रदेशवासियों एवं देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी। उन्होंने नववर्ष को नई ऊर्जा, सकारात्मक सोच और संकल्पों का प्रतीक बताते हुए सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना की।
इस अवसर पर श्री अग्रवाल ने आज प्रदेश अधिकारी कर्मचारी संघ एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश कोषालयीन शासकीय कर्मचारी संघ द्वारा प्रकाशित वार्षिक कैलेंडर का विधिवत विमोचन किया। उन्होंने कहा कि शासकीय कर्मचारी प्रशासन की रीढ़ होते हैं और प्रदेश के विकास में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कर्मचारी संगठनों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कैलेंडर न केवल कार्य योजना को सुव्यवस्थित करने में सहायक होते हैं, बल्कि संगठनात्मक एकता और अनुशासन को भी सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि नववर्ष में सभी कर्मचारी पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ जनसेवा के संकल्प को और मजबूत करेंगे।
कार्यक्रम में कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी, सदस्यगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास की गति नई ऊंचाइयों पर पहुंची है। दशकों से लंबित महत्वपूर्ण अधोसंरचना एवं ऊर्जा परियोजनाएं अब “प्रगति” प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से समयबद्ध ढंग से पूरी हो रही हैं। यह केंद्र सरकार की परिणामोन्मुख, जवाबदेह तथा निर्णायक कार्यशैली का सशक्त प्रमाण है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में “प्रगति” प्लेटफ़ॉर्म का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण से न केवल देश में रेल उत्पादन को नई गति मिली है, बल्कि इससे हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं। इससे आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूती मिली है और औद्योगिक विकास को नई दिशा प्राप्त हुई है।
इसी प्रकार एनटीपीसी की लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना (1600 मेगावाट) से छत्तीसगढ़ सहित छह राज्यों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है तथा औद्योगिक और कृषि गतिविधियों को नई ऊर्जा प्राप्त हुई है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “प्रगति” प्लेटफ़ॉर्म ने परियोजनाओं की निगरानी, निरंतर समीक्षा और बाधाओं के त्वरित समाधान की एक सशक्त प्रणाली विकसित की है। स्पष्ट लक्ष्य, तेज़ क्रियान्वयन और ठोस परिणाम—यही नए भारत की कार्यसंस्कृति है और यही “विकसित भारत @ 2047” के लक्ष्य को साकार करने का मार्ग है।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित प्रगति (PRAGATI) की 50वीं बैठक ने न केवल राष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को भी नई गति प्रदान की है। प्रगति सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए विकसित एक आईसीटी आधारित प्लेटफॉर्म है, जिसने परियोजनाओं की निगरानी और समाधान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया है। पिछले दशक में प्रगति प्लेटफॉर्म के माध्यम से 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की परियोजनाओं की रफ्तार तेज हुई है। इससे देशभर में अवसंरचना, ऊर्जा, रेल, सड़क, कोयला और अन्य क्षेत्रों से जुड़े अनेक कार्यों को समयबद्ध प्रगति मिली है। इन परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ से संबंधित कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी शामिल हैं।
बैठक में भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण और विस्तार कार्य का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। इस परियोजना को वर्ष 2007 में स्वीकृति मिली थी। प्रगति बैठकों में नियमित समीक्षा और अंतर-एजेंसी समन्वय के कारण इस परियोजना को नई गति मिली, जिसके परिणामस्वरूप इसका कार्य तेज़ी से आगे बढ़ा और लक्षित प्रगति सुनिश्चित हुई।
भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण से उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, सहायक उद्योगों के विस्तार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्राप्त हुई है। इससे राज्य को देश के प्रमुख इस्पात उत्पादन केंद्र के रूप में और अधिक मजबूती मिली है।
इसी प्रकार रायगढ़ में वर्ष 2009 में स्वीकृत लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना की प्रगति प्लेटफॉर्म के अंतर्गत उच्च स्तरीय समीक्षाओं, समय-समय पर दिए गए आवश्यक दिशा-निर्देशों और निरंतर मॉनिटरिंग से तेज गति मिली और इसके क्रियान्वयन में ठोस प्रगति दर्ज की गई।
आज लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने वाली प्रमुख परियोजनाओं में से एक बन चुकी है। इस परियोजना ने न केवल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाई है, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान को “पावर हब ऑफ इंडिया” के रूप में और अधिक मजबूत किया है। इससे राज्य और देश दोनों के ऊर्जा तंत्र को नई स्थिरता प्राप्त हुई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह रेखांकित किया कि प्रगति प्लेटफॉर्म ने सहयोगी संघवाद को नई शक्ति दी है और केंद्र तथा राज्यों के संयुक्त प्रयासों से विकास कार्यों में गति और विश्वास दोनों बढ़ा है।
प्रगति से तेज़ होती छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रगति की 50वीं बैठक को देश और छत्तीसगढ़ के लिए दूरगामी महत्व का बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूरा करने की जो व्यवस्था स्थापित की गई है, उसका सीधा लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिला है। उन्होंने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण तथा लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना जैसी बड़ी परियोजनाओं को नई गति मिलना इस बात का प्रमाण है कि प्रगति प्लेटफॉर्म ने वास्तविक अर्थों में समाधान-उन्मुख शासन का मॉडल प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से प्रदेश के औद्योगिक विकास, ऊर्जा क्षमता, निवेश, रोज़गार और सहायक अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रगति के माध्यम से परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही सुनिश्चित होने से छत्तीसगढ़ विकसित भारत @ 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य में अपनी निर्णायक भूमिका और मजबूती के साथ निभाता रहेगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता विकास तिवारी को पार्टी ने प्रवक्ता के पद से हटा दिया है। जेपी नड्डा के बयान के बाद विकास तिवारी ने झीरम घाटी जांच आयोग कमेटी से अपने ही सीनियर लीडर्स के नार्को टेस्ट कराने की मांग कर दी थी। तिवारी के इस बयान के बाद पीसीसी चीफ दीपक बैज के निर्देश पर उन्हे प्रवक्ता के पद से हटाते हुए नोटिस जारी कर 3 दिन में जवाब मांगा है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों छत्तीसगढ़ प्रवास पर आये बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने झीरम घाटी नक्सली नरसंहार पर कांग्रेस नेताओं पर सवाल उठाये थे। उन्होने इस नक्सली हमले में कांग्रेस नेताओं की संलिप्तता का दावा किया था। जेपी नड्डा के इस बयान के बाद जहां पूर्व सीएम भूपेश बघेल सहित पीसीसी चीफ दीपक बैज ने नड्डा के इस बयान पर आपत्ति दर्ज कराते हुए बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाये थे।
वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता विकास तिवारी ने जेपी नड्डा के बयान के बाद झीरम जांच के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग से बीजेपी नेताओं के अलावा पूर्व सीएम भूपेश बघेल और कांग्रेस नेता कवासी लखमा के नार्को टेस्ट कराने की बात कह दी थी। विकास तिवारी के इस बयान के बाद पार्टी में बवाल मच गया।
लिहाजा उनके इस बयान का पार्टी के अंदर विरोध हुआ और कुछ नेताओं ने उनके खिलाफ अनुशासन भंग की कार्रवाई की मांग की। विवाद बढ़ते देख पीसीसी चीफ दीपक बैज के निर्देश पर कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैंदू ने विकास तिवारी को प्रवक्ता के पद से हटाने का आदेश जारी करते हुए नोटिस भेजा है। इस नोटिस में विकास तिवारी से आगामी तीन दिनों के भीतर पूरे मामले में लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है।
रायपुर। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ में चार सड़क खंडों के मजबूतीकरण, चौड़ीकरण और उन्नयन के लिए 664 करोड़ 67 लाख रुपए मंजूर किए हैं। सीआरआईएफ (Central Road & Infrastructure Fund) से प्राप्त होने वाली इस राशि से राज्य के पांच जिलों में करीब 174 किलोमीटर सड़कों के विकास और उन्नयन के कार्य किए जाएंगे। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने आज राशि स्वीकृति का आदेश राज्य शासन के लोक निर्माण विभाग के सचिव को भेजा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने राज्य में सड़कों के विकास के लिए इतनी बड़ी राशि देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को धन्यवाद दिया है।
उल्लेखनीय है कि उप मुख्यमंत्री अरुण साव के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग द्वारा भारत सरकार को चार सड़क खंडों के मजबूतीकरण और चौड़ीकरण के प्रस्ताव भेजे गए थे। इन्हें मंजूर करते हुए केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मुंगेली जिले के कोटा-लोरमी-पंडरिया मार्ग के 21 किमी भाग में फोरलेन के निर्माण और मजबूतीकरण के लिए 156 करोड़ 33 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। कांकेर जिले में कांकेर-भानुप्रतापपुर-संबलपुर मार्ग की 48.4 किमी टू-लेन विद्यमान सतह के मजबूतीकरण और चौड़ीकरण के लिए 130 करोड़ 63 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं।
केंद्र सरकार द्वारा सीआरआईएफ से सुकमा से दंतेवाड़ा मार्ग के 68 किमी लंबाई में टू-लेन सड़क के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण के लिए 230 करोड़ 85 लाख रुपए तथा गरियाबंद जिले में राजिम-फिंगेश्वर-महासमुंद मार्ग में 35.5 किमी लंबाई में सड़क की मजबूती और उन्नयन के लिए 146 करोड़ 86 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। इन महत्वपूर्ण मार्गों के विकास एवं उन्नयन से इन जिलों में राज्यीय राजमार्ग तथा मुख्य जिला मार्ग अच्छी होंगी और आवागमन बेहतर होगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सीआरआईएफ से मंजूर की गई इस राशि के लिए भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में सड़कों के निर्माण में केंद्र सरकार का लगातार सहयोग मिल रहा है। इस राशि से मुंगेली, कांकेर, सुकमा, दंतेवाड़ा और गरियाबंद जैसे दूरवर्ती जिलों में सड़कों का चौड़ीकरण, मजबूतीकरण और उन्नयन होगा। इससे राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और मैदानी इलाकों में परिवहन बेहतर होगा।
केंद्रीय सड़क अधोसंरचना निधि (CRIF) के अंतर्गत मुंगेली, कांकेर, सुकमा/दंतेवाड़ा एवं गरियाबंद जिलों में ₹664.67 करोड़ की लागत से 173.70 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ को सड़क अधोसंरचना के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण स्वीकृति प्राप्त हुई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा प्रदेश के लिए स्वीकृत इन परियोजनाओं से राज्य के सर्वांगीण विकास को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि ये सड़कें बेहतर कनेक्टिविटी, सुरक्षित परिवहन व्यवस्था और क्षेत्रीय आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएँगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इन परियोजनाओं से बस्तर संभाग के दुर्गम और आंतरिक क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी और अधिक सुदृढ़ होगी, जिससे स्थानीय जनता, किसानों, विद्यार्थियों, व्यापारियों तथा आपातकालीन सेवाओं को सीधा लाभ मिलेगा। सड़क नेटवर्क मजबूत होने से पर्यटन, औद्योगिक गतिविधियों और स्थानीय बाजारों तक पहुँच और सरल होगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा लगातार किए जा रहे सहयोग और स्वीकृतियों के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के विशेष प्रयासों से छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों तथा अन्य महत्वपूर्ण सड़कों का तेज़ी से विस्तार हो रहा है। डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ आज प्रगति पथ पर मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। राज्य में अधोसंरचना विकास, कनेक्टिविटी, निवेश और रोजगार के अवसर निरंतर बढ़ रहे हैं, जिसका सीधा लाभ आम नागरिकों तक पहुँच रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई स्वीकृत सड़क परियोजनाएँ शीघ्र क्रियान्वित होकर प्रदेश के सामाजिक-आर्थिक विकास को और अधिक गति देंगी।
वहीं उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने विभाग के प्रस्ताव पर सड़कों के विकास एवं उन्नयन के लिए राज्य को मिली राशि के लिए केंद्र सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि राज्य में कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करना हमारी प्राथमिकता है। राज्य में नई सड़कों के निर्माण और विद्यमान सड़कों की मजबूती व उन्नयन के लिए विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों में 8092 करोड़ रुपए की नवीन स्वीकृति जारी की गई है। लोक निर्माण विभाग इन सभी कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व ने गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में देशभर के लिए एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। मध्य भारत के सबसे स्वच्छ नदी-वन पारिस्थितिकी तंत्रों में शामिल यह रिजर्व अब केवल बाघों और जंगली भैंसों का ही नहीं, बल्कि विलुप्तप्राय गिद्धों के संरक्षण का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।
गिद्ध पर्यावरण के 'सफाईकर्मी' हैं और इनके बिना बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार इंद्रावती के टाइगर रिजर्व क्षेत्र में गिद्धों सुरक्षित क्षेत्रों (Vulture Safe Zones) का निर्माण कर इनकी घटती आबादी को बचाना और बढ़ाना है, क्योंकि गिद्ध पर्यावरण के 'सफाईकर्मी' हैं और इनके बिना बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. गिद्धों के अस्तित्व पर जहरीली दवाओं (NSAID), असुरक्षित शव निपटान और मानव हस्तक्षेप जैसे गंभीर खतरे मंडरा रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए इंद्रावती टाइगर रिजर्व में उपग्रह (सैटेलाइट) टेलीमेट्री आधारित निगरानी कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।
गिद्ध लगभग 10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में रहते हैं सक्रिय
छत्तीसगढ़ में यह अपनी तरह का पहला प्रयास है, जिसमें उच्च-रिज़ॉल्यूशन गिद्ध गतिविधि डेटा का उपयोग संरक्षण कार्यों की दिशा तय करने के लिए किया जा रहा है। अब तक के आंकड़ों से पता चला है कि गिद्ध लगभग 10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं और घने जंगलों व मानव बस्तियों के बीच लगातार आवाजाही करते हैं।
वन्यजीव प्रबंधन को मिली नई वैज्ञानिक दिशा
गौरतलब है कि वर्ष 2022 से 2025 के बीच गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गई हैं। राज्य में पहली बार दो गिद्धों की सैटेलाइट ट्रैकिंग के माध्यम से 18,000 से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले GPS डेटा पॉइंट्स प्राप्त किए गए हैं, जिससे वन्यजीव प्रबंधन को नई वैज्ञानिक दिशा मिली है। इस सफलता में क्षेत्रीय जीवविज्ञानी सूरज कुमार के नेतृत्व में “गिद्ध मित्र दल” (गिद्ध संरक्षण स्वयंसेवक दल) की अहम भूमिका रही है। यह दल घोंसलों की निगरानी, शवों के सुरक्षित प्रबंधन और स्थानीय समुदायों को संरक्षण से जोड़ने का कार्य कर रहा है। इसी सामुदायिक सहयोग का परिणाम है कि “गुड्डा सारी गुट्टा” जैसे दुर्गम क्षेत्रों में पहली बार निर्बाध प्रजनन सुनिश्चित हो सका है।
“वुल्चर रेस्टोरेंट” की स्थापना
संरक्षण प्रयासों के तहत उप-निदेशक संदीप बलागा के पर्यवेक्षण में “वुल्चर रेस्टोरेंट” की स्थापना भी की गई है। यह नियंत्रित भोजन स्थल हैं, जहां केवल पशु चिकित्सा परीक्षण के बाद NSAID-मुक्त शव ही रखे जाते हैं। इससे गिद्धों को सुरक्षित भोजन मिल रहा है। साथ ही ये केंद्र सामुदायिक शिक्षा के केंद्र के रूप में भी कार्य कर रहे हैं, जहां स्कूलों और स्थानीय युवाओं को पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्धों के महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है।
“गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र” (Vulture Safe Zone) की स्थापना
भविष्य की रणनीति के तहत कार्यक्रम के तीसरे चरण का नेतृत्व भी उप-निदेशक संदीप बलागा करेंगे। इस चरण में तीन अतिरिक्त गिद्धों की सैटेलाइट टैगिंग, 50 से अधिक जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन, पंचायतों की भागीदारी से 100 किलोमीटर क्षेत्र में “गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र” (Vulture Safe Zone) की स्थापना तथा छत्तीसगढ़ की पहली गिद्ध पुनर्वास कार्ययोजना के प्रकाशन का लक्ष्य रखा गया है. तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक सहभागिता को एक सूत्र में पिरोते हुए इंद्रावती टाइगर रिजर्व यह संदेश दे रहा है कि दूरदर्शी नेतृत्व में जंगल और लोग साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।
रायपुर। वित्त विभाग ने साय सरकार के तीसरे बजट (वर्ष 2026-27) के लिए नवीन मदों के प्रस्तावों पर मंत्री स्तरीय बैठकों का कार्यक्रम तय कर दिया है। इन बैठकों की अध्यक्षता वित्त मंत्री ओपी चौधरी करेंगे। बैठकें 6 से 9 जनवरी तक मंत्रालय में मंत्री चौधरी के कक्ष में आयोजित होंगी।
6 जनवरी को सुबह 11 बजे उद्योग, आबकारी एवं श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन, दोपहर 12 बजे स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं ओबीसी कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, दोपहर 2 बजे पर्यटन, संस्कृति एवं धार्मिक न्यास मंत्री राजेश अग्रवाल तथा दोपहर 3 बजे कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं एससी कल्याण मंत्री गुरु खुशवंत के नए प्रस्तावों पर चर्चा कर मंजूरी दी जाएगी।
7 जनवरी को सुबह 11 बजे वन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप, दोपहर 12 बजे राजस्व, स्कूल शिक्षा एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा, दोपहर 2.30 बजे अजाक कल्याण, कृषि एवं मछली-पशुधन पालन मंत्री रामविचार नेताम तथा अपराह्न 4 बजे वित्त मंत्री ओपी चौधरी अपने विभागों के प्रस्तावों पर निर्णय लेंगे।
8 जनवरी को सुबह 11 बजे उप मुख्यमंत्री अरुण साव के लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, खेल एवं युवा कल्याण तथा नगरीय प्रशासन विभागों के प्रस्तावों पर चर्चा होगी। दोपहर 2.30 बजे स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग एवं विधि-विधायी विभागों के प्रस्ताव रखे जाएंगे।
9 जनवरी को दोपहर 12 बजे महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और दोपहर 2 बजे उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के गृह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा आईटी विभाग के नए प्रस्तावों को मंजूरी दी जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विभागों से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा अलग से तय की जाएगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव की निजी स्थापना में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर विपुल कुमार गुप्ता को उपमुख्यमंत्री साव के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) के पद से हटा दिया है। उन्हें उनके मूल विभाग/कार्यालय में वापस भेजा गया है।
वहीं जिला पंचायत कबीरधाम के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अजय कुमार त्रिपाठी को उपमुख्यमंत्री अरुण साव की निजी स्थापना में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) नियुक्त किया गया है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नूतन वर्ष 2026 के अवसर पर प्रदेशवासियों के नाम जारी अपने ऑडियो संदेश में सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वर्ष 2026 को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है, जो मातृशक्ति के सम्मान, स्वाभिमान और सशक्तिकरण को समर्पित रहेगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में “महतारी” का स्थान सर्वोच्च है। नारी शक्ति त्याग, संस्कार, श्रम और नेतृत्व की प्रतीक है। महतारी गौरव वर्ष के माध्यम से समाज के सभी क्षेत्रों में मातृशक्ति के योगदान को राष्ट्रीय और वैश्विक पटल पर नई पहचान दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य ने नक्सल उन्मूलन, औद्योगिक प्रगति, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि तथा बुनियादी ढांचा विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलताएँ प्राप्त की हैं। इस विकास यात्रा में मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महतारी गौरव वर्ष के माध्यम से महिलाएँ आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में और अधिक सशक्त होकर आगे आएँगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृशक्ति के सहयोग से छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा और अधिक गति और सुदृढ़ता के साथ आगे बढ़ेगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे नारी सम्मान, नारी सुरक्षा और नारी सशक्तिकरण को अपने आचरण और जीवन का मूल मंत्र बनाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी मिलकर वर्ष 2026 को नारी सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता और समावेशी विकास का सशक्त प्रतीक बनाएं। यही नया छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का साझा संकल्प है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी प्रदेशवासियों को नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए समृद्धि, शांति और उन्नति की मंगलकामनाएँ व्यक्त कीं।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कबीरधाम ज़िले के भोरमदेव धाम में आयोजित कार्यक्रम में भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने नववर्ष 2026 की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि नए वर्ष की शुरुआत ऐसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कार्य से होना छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य की बात है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज का दिन छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है। भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना राज्य की प्राचीन धरोहर को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का प्रतीक है। कबीरधाम जिले के इस भोरमदेव धाम में महादेव शिव की आराधना, अतुलनीय प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एक साथ दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया जा रहा है। यह परियोजना लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे बेहतर शुरुआत नए वर्ष की नहीं हो सकती थी और इस परियोजना के लिए उन्होंने समस्त छत्तीसगढ़वासियों को बधाई दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भोरमदेव की महत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस पहल के लिए केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया।
भोरमदेव मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरे-भरे वनांचल के बीच स्थित इस मंदिर को “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” कहा जाता है। यह केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि हजार वर्षों की साधना, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। यहाँ भगवान शिव की पूजा भोरमदेव के रूप में की जाती है, जहाँ शैव दर्शन, लोक आस्था और आदिवासी परंपराएँ एक साथ मिलकर भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
उन्होंने कहा कि सावन के महीने में निकलने वाली कांवड़ यात्रा यहाँ की एक महत्वपूर्ण परंपरा है और उन्हें स्वयं कांवड़ियों का स्वागत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य के मध्य स्थित भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल और छेरकी महल ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। मंदिर की दीवारों पर उत्कीर्ण भव्य शिल्पाकृतियाँ खजुराहो की कला से तुलना योग्य हैं। नागवंशी शासनकाल में निर्मित नागर शैली की यह अद्वितीय वास्तुकला अपने आप में अद्भुत है। यह स्थल न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्रीय इतिहास, कला और सामाजिक जीवन का सशक्त साक्ष्य भी है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महाशिवरात्रि पर यह स्थान प्रमुख तीर्थ के रूप में हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, जहाँ आदिवासी परंपराओं और शैव प्रथाओं का अनोखा संगम दिखाई देता है। मड़वा महल, जिसका संबंध विवाह मंडप से माना जाता है, तथा छेरकी महल की दीवारों पर अंकित वन और नदी से जुड़ी आकृतियाँ प्रकृति-निष्ठ जीवनदर्शन को दर्शाती हैं।
उन्होंने कहा कि भोरमदेव का यह संपूर्ण क्षेत्र धर्म और अध्यात्म के साथ-साथ पर्यटन का भी बड़ा केंद्र है, जिसे वर्तमान सरकार व्यापक रूप से विकसित करने जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान किया है, जिससे पर्यटन क्षेत्र को संरचनात्मक मजबूती मिली है। नई पर्यटन नीति एवं होम-स्टे पॉलिसी के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा सहित छत्तीसगढ़ के अनेक स्थानीय उत्सवों ने प्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। हमारी सांस्कृतिक परंपराएँ केवल मंदिरों और स्थापत्य तक सीमित नहीं हैं; बल्कि नाचा परंपरा, 13 पारंपरिक वाद्ययंत्र, लोकनृत्य और गीत हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के दर्पण हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि धार्मिक आस्थाओं में यहाँ भगवान राम को ‘भाँचा राम’ या ‘वनवासी राम’ के रूप में पूजा जाता है क्योंकि उनके वनवास के लगभग 10 वर्ष दंडकारण्य क्षेत्र में व्यतीत हुए थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा युवाओं को पर्यटन क्षेत्र में प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पूरे छत्तीसगढ़ में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है तथा रेल और हवाई सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचना सरल होगा और पर्यटन को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मज़बूत होगी। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 7.83 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों को नई दिशा मिलेगी।
केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भोरमदेव महोत्सव स्थल पर काॅरिडोर के भूमिपूजन के बाद सभा को संबोधित करते हुए कबीरधाम जिले सहित पूरे प्रदेश के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। उन्होंने नववर्ष की बधाई देते हुए कहा कि बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को धरातल पर उतारते हुए विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा थी, जिसे समाप्त करने का बीड़ा राज्य सरकार ने उठाया है और आज प्रदेश नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के नागरिकों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि भारत को कमजोर करने वाली किसी भी ताकत या षड्यंत्र को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध लिए गए कठोर निर्णयों ने देश की सुरक्षा नीति को नई मजबूती प्रदान की है।
केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत ने कहा कि सुशासन का प्रभाव आज देश-दुनिया में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भारत तेजी से विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर है। सड़कों, पुल-पुलियों एवं अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जल, बिजली, बैंक खाता और रोजगार जैसी सुविधाएं गरीबों के घर-घर तक पहुंच रही हैं।
केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि भोरमदेव मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर है और इस कॉरिडोर निर्माण के माध्यम से आने वाले हजार वर्षों तक इसे संरक्षित रखने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भोरमदेव मंदिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भी विशेष आस्था का केंद्र रहा है और यह परियोजना उनके कार्यकाल की स्मृति के रूप में कबीरधाम जिले को एक नई पहचान देगी। केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत ने कहा कि यह वर्ष परिवर्तन का वर्ष है और भारत को विश्व का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री श्री मोदी के संकल्प में 140 करोड़ देशवासी सहभागी बनें।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा लगातार क्षेत्र का दौरा कर यहां के विकास के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। चैत्र माह के तेरहवीं तिथि को भोरमदेव महोत्सव का आयोजन किया जाता है, पिछले वर्ष जब स्वदेश दर्शन योजना में शामिल करने के लिए हमने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से निवेदन किया था और भोरमदेव महोत्सव के दिन हमें स्वीकृति प्राप्त हो गयी थी और आज भूमिपूजन भी सम्पन्न हो गया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में भोरमदेव की तरह ही आस्था का केंद्र माने जाने वाले पंचमुखी श्री बूढ़ा महादेव मंदिर का भी अब विकास किया जा रहा है।
कार्यक्रम मे उपमुख्यमंत्री अरुण साव, केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्यमंत्री तोखन साहू, सांसद संतोष पाण्डेय, पंडरिया विधायक भावना बोहरा, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर पटेल, राज्य कृषक कल्याण परिषद् के अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में रायपुर साहित्य उत्सव की वेबसाइट का लोकार्पण किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, कौशल विकास मंत्री खुशवंत साहेब तथा छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा उपस्थित थे।
उल्लखेनीय है कि रायपुर साहित्य उत्सव 23 से 25 जनवरी तक आयोजित किया जाएगा। साहित्य उत्सव में देशभर के प्रख्यात साहित्यकारों, लेखकों, कवियों, पत्रकारों, समीक्षकों एवं पाठकों की सहभागिता होगी। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति, सृजनात्मक लेखन, प्रकाशन जगत, युवा साहित्य तथा नई पीढ़ी के रचनाकारों से जुड़े विषयों पर विविध सत्र आयोजित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने वेबसाइट लॉन्च करते हुए कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव छत्तीसगढ़ की साहित्यिक और सांस्कृतिक पहचान को नई ऊँचाई प्रदान करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह उत्सव लेखक और पाठक के बीच नए संवाद का सशक्त मंच बनेगा तथा युवा पीढ़ी में पढ़ने और लिखने की प्रेरणा जागृत करेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती लोकसाहित्य, लोककथाओं और समृद्ध मौखिक परंपराओं की धरोहर रही है। ऐसे में रायपुर साहित्य उत्सव राज्य की इस सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने का सुअवसर बनेगा।
रायपुर। नववर्ष के प्रथम दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कबीरधाम जिले के ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना की । उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में विधिवत पूजा-अर्चना एवं आरती कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और जनकल्याण की कामना की।
इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री अरुण साव एवं विजय शर्मा, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, विधायक भावना बोहरा सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।