प्रदेश
सड़क निर्माण में गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ताहीन कार्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कहीं भी निर्माण कार्य में कमी पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी और दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने यह निर्देश आज मंत्रालय महानदी भवन में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कार्यों और गतिविधियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिए। बैठक में उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री अरुण साव उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों से कहा कि सड़क निर्माण के बाद निरीक्षण करने के बजाय निर्माण के दौरान ही नियमित रूप से फील्ड में जाकर गुणवत्ता की निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि सड़कों का निर्माण केवल तकनीकी कार्य नहीं बल्कि आमजन की सुविधा से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण अधोसंरचनात्मक कार्य है और इससे सरकार की छवि भी बनती है। यदि सड़क बनने के कुछ वर्षों के भीतर ही खराब हो जाए तो इससे सरकार की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
बैठक में बागबहार–कोतबा सड़क की खराब स्थिति पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह सड़क कुछ वर्ष पहले ही बनी थी, लेकिन उसकी स्थिति तेजी से खराब हो गई है। यदि सड़क चार वर्ष भी नहीं चले तो इसका कोई औचित्य नहीं रह जाता। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस सड़क के निर्माण में हुई कमियों की गंभीरता से जांच की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो इसके लिए निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता की सख्त निगरानी की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण कार्य हो रहे हैं, लेकिन आमजन को इन कार्यों की जानकारी नहीं मिल पाती जिससे सकारात्मक नैरेटिव नहीं बनता। उन्होंने निर्देश दिए कि बड़ी सड़क परियोजनाओं के शिलान्यास और भूमिपूजन मुख्यमंत्री और मंत्रियों के हाथों से कराए जाएं तथा उन्हें व्यापक रूप से आमजन के सामने प्रस्तुत किया जाए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सड़क निर्माण के टेंडर जारी होने से लेकर कार्य आवंटन (अवॉर्ड) तक की पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए। उन्होंने कहा कि कई ठेकेदार बहुत कम दर यानी बिलो रेट पर टेंडर प्राप्त कर लेते हैं, जिसके कारण कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। यदि ठेकेदार बिलो रेट पर टेंडर लेता है तो यह उसकी जिम्मेदारी होगी कि वह कार्य को निर्धारित गुणवत्ता और समय-सीमा में पूरा करे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियमावली तैयार करने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अन्य राज्यों में लागू बेहतर व्यवस्थाओं का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में भी उपयुक्त प्रावधान लागू किए जाएं। साथ ही टेंडर और डीपीआर जैसे तकनीकी कार्यों के लिए एक अलग इकाई बनाने पर भी गंभीरता से विचार किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगभग 300 ऐसे गांव चिन्हित किए गए हैं, जहां बरसात के दौरान संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। ऐसे गांवों तक पहुंचने के लिए लोगों को कई बार बीमार मरीजों को खाट में उठाकर ले जाना पड़ता है, जो अत्यंत चिंता का विषय है। खाद्य विभाग से प्राप्त सूची के आधार पर चिन्हित इन गांवों को सड़कों और पुल-पुलियों के माध्यम से जोड़ने का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जाए।
मुख्यमंत्री श्री साय ने लैलूंगा–कुंजारा–तोलगेपहाड़–मिलूपारा–तमनार मार्ग के निर्माण की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बड़ी आबादी निवास करती है और यहां सड़क का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। इस मार्ग के कुछ हिस्से में वन स्वीकृति की आवश्यकता होगी, लेकिन शेष हिस्सों में निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए।
बैठक में मनेंद्रगढ़–सूरजपुर–अंबिकापुर–पत्थलगांव–कुनकुरी–जशपुर–झारखंड सीमा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-43 की प्रगति की भी समीक्षा की गई। लगभग 353 किलोमीटर लंबाई वाली इस सड़क परियोजना की स्थिति पर चर्चा की गई।पत्थलगांव-कुनकुरी खंड में भू-अर्जन का मुआवजा दिए जाने की जानकारी भी बैठक में साझा की गई। इसके अलावा अंबिकापुर–सेमरसोत–रामानुजगंज–गढ़वा मार्ग, गीदम–दंतेवाड़ा मार्ग, चांपा–सक्ती–रायगढ़–ओडिशा सीमा मार्ग, रायपुर–दुर्ग मार्ग तथा चिल्फी क्षेत्र की सड़कों सहित कई अन्य परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
बैठक में बस्तर में पुल-पुलिया निर्माण सहित 17 सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही राज्य द्रुतगामी सड़क संपर्क मार्ग की आगामी कार्ययोजना की विस्तृत रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई।
मुख्यमंत्री ने भवन निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में शासकीय भवनों के डिजाइन बहुत पुराने और एक जैसे दिखाई देते हैं। अब समय आ गया है कि शासकीय भवनों का निर्माण आधुनिक डिजाइन और तकनीक के आधार पर किया जाए। उन्होंने कहा कि भवनों का डिजाइन उनकी उपयोगिता के अनुरूप होना चाहिए और भूमि के बेहतर उपयोग के लिए हॉरिजॉन्टल की जगह वर्टिकल संरचना को बढ़ावा दिया जाए। मुख्यमंत्री ने राजभवन में बन रहे गेस्ट हाउस को भी आधुनिक और गरिमामय स्वरूप में तैयार करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें आमजन के जीवन से सीधे जुड़ी होती हैं और लोग सड़क की गुणवत्ता को बहुत महत्व देते हैं। अन्य कई विकास कार्य भले दिखाई न दें, लेकिन सड़कें सीधे लोगों को दिखाई देती हैं और सरकार की छवि भी उसी के आधार पर बनती है। इसलिए लोक निर्माण विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है और इसमें होने वाले कार्यों को समयबद्धता और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाना अनिवार्य है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसा तंत्र विकसित किया जाए जिससे सड़कों में बनने वाले गड्ढों की जानकारी समय पर मिल सके और उन्हें तुरंत ठीक किया जा सके।
बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत तथा लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
जनकपुर की दर्शना सिंह का UPSC में चयन, 383वीं रैंक के साथ बनी IPS
मनेंद्रगढ़। आज घोषित हुए यूपीएससी के परिणाम में छत्तीसगढ़ के एक किसान की बेटी ने चयनित होकर अपने माता-पिता के साथ ही प्रदेश का नाम रोशन किया है। गांव से ही अपने पूरे स्कूल की पढ़ाई करने वाली दर्शना सिंह ने 383वां रैंक के साथ IPS के लिए अपना स्थान चयन सूची में बनाया है। दर्शना सिंह ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद यह सफलता हासिल की है।
दर्शना सिंह मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिले के जनकपुर की रहने वाली है। जनकपुर पहले ग्राम पंचायत था, जो अब नगर पंचायत में तब्दील हो गया है। दर्शना सिंह की माता सीमा सिंह नगर पंचायत जनकपुर की पार्षद हैं, जबकि उनके पिता अरुण सिंह किसान हैं। दर्शना सिंह ने बारहवीं तक की पढ़ाई अपने गांव के स्कूल से की है। उन्होंने गणित विषय लेकर 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की फिर जेईई एग्जाम निकालकर आईआईटी कानपुर में एडमिशन लिया। आईआईटी कानपुर से दर्शना सिंह ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
पांचवीं से थी अफसर बनने की तमन्ना, दूसरे प्रयास में मिली सफलता
दर्शना सिंह जब पांचवीं कक्षा में पढ़ती थी तभी से उन्होंने अपने मन में प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना पाल लिया था। अपने सपने को पूरा करने के लिए दर्शना सिंह ने बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली चली गई। दिल्ली से उन्होंने 1 साल तक के यूपीएससी के लिए कोचिंग किया। सालभर बाद वह कोचिंग के नोट्स को दोहराती रहीं। मुख्य परीक्षा के लिए उन्होंने वैकल्पिक विषय में समाजशास्त्र विषय रखा था। इस संबंध में उन्होंने बताया कि समाजशास्त्र विषय को उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान भी पढ़ा था। वैकल्पिक विषय चयन को लेकर दर्शना सिंह ने कहा कि विषय अपने रुचि के अनुसार वही चयन करना चाहिए जिसमें आपको पूरी रुचि हो और जिसे आप बिना बोर हुए 8 से 10 घंटे तक के लगातार पढ़ सके।
पहले प्रयास में दर्शना सिंह प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा निकालकर साक्षात्कार तक पहुंची पर उनका अंतिम चयन नहीं हो पाया। उन्होंने हार नहीं मानी और फिर से दूसरा प्रयास किया। दूसरे प्रयास में दर्शना 383वां रैंक के साथ आईपीएस के लिए चयनित हो गईं।
साक्षात्कार के लिए रहे सामाजिक
दर्शना सिंह ने बताया कि मुख्य परीक्षा तक की तैयारी के लिए किताबों से पढ़ाई करनी पड़ती है पर साक्षात्कार के लिए उन्होंने माता-पिता, शिक्षकों और दोस्तों से बात की। ज्यादा से ज्यादा अपने गांव, जिले, प्रदेश और प्रदेश के विषय में जानने का प्रयास किया। दर्शना सिंह ने कहा कि यूपीएससी का इंटरव्यू एक ऐसा पड़ाव है, जिसमें पूरी जिंदगी की पढ़ाई, ज्ञान और तजुर्बे का सिर्फ आधे घंटे में निचोड़ निकलता है।
आईएएस के लिए देंगी तीसरा अटेम्प्ट
दर्शना सिंह के अनुसार वह फिलहाल आईपीएस तो ज्वाइन करेंगी, पर आईपीएस की ट्रेनिंग लेने के साथ ही आईएएस बनने के लिए एक और प्रयास करते हुए तीसरा अटेम्प्ट देंगी। यदि किसी वजह से आईएएस में चयनित नहीं हो पाई तो एक ईमानदार और बेहतर पुलिस अधिकारी बनने का प्रयास करेंगी। दर्शना सिंह के अनुसार रिजल्ट की चिंता किए बिना निरंतर मेहनत करने से एक न एक दिन सफलता जरूर मिल जाती है।
रायपुर में होली का रंग ‘शराब’ के संग, चार दिन में 58 करोड़ की बिक्री
रायपुर। होली त्योहार का हुआ मानों शौकिनों के लिए मस्ती-मजा का मौका हो गया. होली के दौरान महज चार दिनों में रायपुर के शराब प्रेमी 58 करोड़ 10 लाख रुपए की शराब गटक गए. पिछले साल की तुलना में इस बार 91 लाख रुपए की शराब लोगों ने ज्यादा पी है.
होली खत्म होने के बाद आबकारी विभाग ने रायपुर जिले में हुई शराब बिक्री का आंकड़ा जारी किया है. यह आंकड़ा होली के दौरान शराब दुकान बंद होने से तीन दिन पहले और एक दिन बाद का है. कुल मिलाकर चार दिनों का यह आंकड़ा बेहद दिलचस्प है, जो शराब के अर्थशास्त्र को बताता है.
होली के दिन याने 4 मार्च को शराब दुकान बंद थी, लेकिन होली की खुमारी अगले दिन भी छाई रही, नतीजतन शौकिनों ने 5 मार्च को महज 8 करोड़ 31 लाख रुपए की ही शराब पी. लेकिन असली खरीदारी तो होली के पहले हुई. होली के एक दिन पहले लोगों ने 21 करोड़ 73 लाख रुपए की शराब पी. इसके एक दिन पहले याने 2 मार्च को शराब खरीदी का आंकड़ा 15 करोड़ 94 लाख रुपए का रहा, और उसके एक दिन पहले होली के तीन दिन पहले 1 मार्च को लोगों ने 12 करोड़ 11 लाख रुपए की शराब पी.
आंकड़े बताते हैं कि इस साल शराब प्रेमी होली के दौरान कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे, इसलिए तीन दिन पहले ही शराब का स्टॉक कर लिया. तीन दिन पहले बिक्री का आंकड़ा बीते साल की तुलना में 30.3 प्रतिशत ज्यादा शराब पी, क्या करें कि शराब खरीदी. वहीं अगले दो दिन और होली के बाद अगले दिन लोगों ने बीते साल की तुलना में कम शराब पी. हालांकि, यह अंतर अधिकतम 5.6 प्रतिशत का ही है.
‘देशी’ के शौकिन घटे, तो ‘विदेशी’ के बढ़े
आबकारी विभाग के आंकड़े बताते हैं कि देशी की बजाए विदेशी शराब की मांग बढ़ती जा रही है. चार दिन के आंकड़ों में 1 मार्च को छोड़कर बाकी के तीनों दिन बीते साल की तुलना में देशी शराब की बिक्री कम रही. जिस दिन बीते साल की तुलना में बिक्री बढ़ी भी तो महज 7.7 प्रतिशत. वहीं बिक्री के हिसाब से भले ही विदेशी स्प्रिट और देशी शराब की तुलना में तीसरे पायदान पर हो, लेकिन सबसे ज्यादा वृद्धि यहीं देखने को मिली है. 60 प्रतिशत तक! इसकी तुलना में विदेशी स्प्रिट बिक्री के मामले में देशी और विदेशी माल्ट की तुलना में सर्वाधिक रही.

छत्तीसगढ़ के डायमंड सिंह ध्रुव ने क्रैक किया UPSC, मिला 623वां रैंक
धमतरी। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 का परिणाम घोषित कर दिया है। UPSC परीक्षा में छत्तीसगढ़ से धमतरी जिले के डीएसपी डायमंड सिंह ध्रुव ने सफलता हासिल करते हुए 623वां रैंक लाया है। अनुसूचित जनजाति कोटे से उन्हें आईपीएस, आईएएस मिल सकता है। रिजल्ट आने के बाद डायमंड को बधाई देने उनके घर में लोगों की भीड़ लगनी शुरू हो गई है।
CGPSC में पहले ही प्रयास में डीएसपी पद पर हुआ चयन
डायमंड सिंह ध्रुव छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस सेवा के 2024 बैच के अधिकारी हैं। पुलिस सेवा ज्वाईन करने के बाद भी यूपीएससी की तैयारी करते रहे। आज उनके दोस्तों ने फोन कर जब बधाई दी तो वे आवाक रह गए। धमतरी जिले के ग्राम परसवानी के होनहार युवा डायमंड सिंह ध्रुव का 2024 में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में प्रथम प्रयास में ही डीएसपी पद पर चयन हुआ। डायमंड सिंह ध्रुव स्वर्गीय बलराम सिंह सूर्यवंशी व शिक्षिका अंबिका सूर्यवंशी के बेटे हैं।
डायमंड ने जेएनयू से की है पढ़ाई
डायमंड बचपन से ही मेधावी छात्र रहे हैं। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा शिशु मंदिर मगरलोड से पूरी की और फिर हाई स्कूल की पढ़ाई रेडियंट पब्लिक स्कूल माना रायपुर से की। केवल 25 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली बार के प्रयास में CGPSC परीक्षा में 13वीं श्रेणी रैंक हासिल किया। डायमंड ने जेएनयू से पढ़ाई की है। दिल्ली में रहकर बिना किसी एकेडमी को जॉइन किए अपनी पढ़ाई जारी रखी। वह पिछले ढाई वर्षों से यूपीएससी की तैयारी भी कर रहे थे।
स्वास्थ्य विभाग में कसावट लाने कलेक्टर सख्त, तीन BMO को नोटिस
बलौदाबाजार। कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर विभागीय कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए अस्पतालों में सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होने तथा मरीजों के साथ व्यवहार सकारात्मक रखने के निर्देश दिए। इस दौरान संस्थागत प्रसव में कमजोर प्रदर्शन पर सिमगा, पलारी और कसडोल के बीएमओ को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए।
कलेक्टर ने कहा कि बीएमओ लगातार फील्ड विजिट करें और अस्पतालों में कमियों को दूर करने का प्रयास करें। कमियों को दूर करने के लिए विशेष रणनीति बनाएं। इसके साथ ही किसी योजना के क्रियान्वयन में किसी विकासखंड में अच्छा काम हो रहा हो तो उनसे समन्वय करें और प्रशिक्षण भी लें। उन्होंने कहा कि अस्पताल रिफरल केंद्र न बने, केवल अत्यावश्यक स्थिति में ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और वहां से जिला अस्पताल को रिफर किया जाए। इसी तरह जिला अस्पताल से राजधानी रायपुर या अन्य अस्पताल में रिफर हो। उन्होंने कहा कि सिस्टम को दुरुस्त रखें, कहीं कोई लापरवाही न हो। आगामी बारिश के पहले अस्पतालों में एंटीवेनम अवश्य हो, ताकि सर्पदंश का इलाज शीघ्र उपलब्ध हो सके।
कलेक्टर ने कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम, एनीमिया उन्मूलन कार्यक्रम, टीबी मुक्त भारत, संस्थागत प्रसव, स्कूली बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण, आयुष्मान कार्ड, वय वंदन कार्ड, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल आदि की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि हर माह विभागीय समीक्षा बैठक ली जाएगी, जिसमें पिछली बार की कमियों की पुनरावृत्ति न हो। इस बैठक में सीएमएचओ डॉ. राजेश कुमार अवस्थी, सिविल सर्जन डॉ. अशोक वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
दुबई में फंसे छत्तीसगढ़ के 3 युवकों की सुरक्षित वापसी, सरकार से लगाई थी मदद की गुहार
बिलासपुर। पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष के बीच दुबई में पिछले 9 दिनों से फंसे छत्तीसगढ़ के तीन युवकों की शुक्रवार तड़के भारत में सुरक्षित वापसी हो गई. तीनों युवक आपस में दोस्त हैं और दुबई घूमने के लिए गए थे, लेकिन वहां युद्ध जैसे हालातों के कारण फंस गए. भारत लौटने के लिए उनकी पहली फ्लाइट 28 फरवरी और दूसरी 3 मार्च को तय थी, लेकिन दोनों बार टिकट कैंसिल हो गई. इसके बाद उन्हें 5 मार्च की अगली फ्लाइट में टिकट मिली. शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे तीनों सुरक्षित रूप से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंच गए.
सरकार से मदद की लगाई थी गुहार
दुबई में फंसे युवकों में से एक शिवम ने वीडियो जारी कर हालात स्पष्ट करते हुए भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से मदद की अपील की थी. वहीं परिजनों ने भी चिंता जताते हुए सुरक्षित वापसी को लेकर हरसंभव प्रयाय में जुटे हुए थे. तीनों युवकों के परिजनों ने लौटने के बाद राहत की सांस ली है.
वीडियो कॉल पर परिजनों से संपर्क
कोटा में रहने वाले शिवम मिश्रा ने फोन पर बताया था कि वे अपने दोस्तों आकाश और आयुष के साथ घुमने के लिए दुबई आए थे. यहां से लौटने के दौरान ईरान-इजराइल तनाव जैसे स्थिति बढ़ गई, जिससे वापसी के लिए फ्लाइट लगातार कैंसिल हो रही थी. उनके परिजनों में चिंता का माहौल था. हालांकि वीडियो कॉल के जरिए संपर्क बना हुआ था. युवक अपने-अपने परिजनों हालातों की जानकारी भी दे रहे थे.
यात्रियों की फिर बढ़ी मुश्किलें, यह दस पैसेंजर ट्रेनें हुई रद्द, चौथी लाइन पर चल रहे कार्य का असर…
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के भीतर चलने वाली 10 पैसेंजर ट्रेनों को रेलवे ने रद्द कर दिया है। हावड़ा–मुंबई मुख्य लाइन पर स्थित दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर मंडल के बिलासपुर-झारसुगुड़ा सेक्शन में चौथी लाइन के निर्माण कार्य की वजह से रेलवे प्रबंधन ने यह कदम उठाया है.
दरअसल, बिलासपुर– चांपा सेक्शन के मध्य अकलतरा स्टेशन में चौथी लाइन कनेक्टिविटी हेतु नॉन इंटरलॉकिंग का कार्य किया जाएगा. इसकी वजह से यात्री गाड़ियों का परिचालन प्रभावित रहेगा. इस दौरान रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए कोरबा– रायपुर–कोरबा हसदेव एक्सप्रेस को पैसेंजर के रूप में चलने का निर्णय लिया है.
प्रभावित होने वाले ट्रेनें
31 मार्च 2026 से 11 अप्रैल 2026 तक बिलासपुर व रायगढ़ से चलने वाली 68738/68737 बिलासपुर–रायगढ़-बिलासपुर मेमू रद्द रहेगी।
31 मार्च 2026 से 11 अप्रैल 2026 तक रायगढ़ से चलने वाली 68735 रायगढ़-बिलासपुर मेमू पैसेंजर रद्द रहेगी।
30 मार्च 2026 से 10 अप्रैल 2026 तक बिलासपुर से चलने वाली 68736 बिलासपुर-रायगढ़ मेमू पैसेंजर रद्द रहेगी।
30 मार्च 2026 से 10 अप्रैल 2026 तक रायपुर से चलने वाली 68746 रायपुर–गेवरा रोड मेमू पैसेंजर रद्द रहेगी।
31 मार्च 2026 से 11 अप्रैल 2026 तक गेवरा रोड से चलने वाली 68745 गेवरा रोड-रायपुर मेमू पैसेंजर रद्द रहेगी।
30 मार्च 2026 से 10 अप्रैल 2026 तक रायपुर से चलने वाली 58204 रायपुर-कोरबा पैसेंजर रद्द रहेगी।
31 मार्च 2026 से 11 अप्रैल 2026 तक कोरबा से चलने वाली 58203 कोरबा-रायपुर पैसेंजर रद्द रहेगी।
31 मार्च 2026 से 11 अप्रैल 2026 तक बिलासपुर व गेवरा रोड से चलने वाली 68734/68733 बिलासपुर-गेवरा रोड-बिलासपुर मेमू पैसेंजर रद्द रहेगी।
31 मार्च 2026 से 11 अप्रैल 2026 तक बिलासपुर व कोरबा से चलने वाली 68732/68731 बिलासपुर-कोरबा-बिलासपुर मेमू पैसेंजर रद्द रहेगी।
05 अप्रैल 2026 से 11 अप्रैल 2026 तक बिलासपुर से चलने वाली 58210 बिलासपुर-गेवरा रोड पैसेंजर रद्द रहेगी।
गंतव्य से पहले समाप्त व प्रारम्भ होने वाली गाड़ियां
31 मार्च 2026 से 11 अप्रैल 2026 तक गोंदिया से चलने वाली 68861 गोंदिया-झारसुगुड़ा पैसेंजर बिलासपुर स्टेशन में समाप्त होगी तथा बिलासपुर-झारसुगुड़ा के मध्य रद्द रहेगी।
31 मार्च 2026 से 11 अप्रैल 2026 तक झारसुगुड़ा से चलने वाली 68862 झारसुगुड़ा-गोंदिया पैसेंजर बिलासपुर स्टेशन से प्रारम्भ होगी तथा झारसुगुड़ा-बिलासपुर के मध्य रद्द रहेगी।
जशपुर जिले में बस दुर्घटना पर मुख्यमंत्री ने जताया गहरा दुःख, घायलों के समुचित उपचार के दिए निर्देश
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड अंतर्गत ग्राम गोडा अंबा के पास हुई बस दुर्घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने इस दुर्घटना में लोगों के असामयिक निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा है कि यह समाचार अत्यंत दुखद और हृदय विदारक है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें तथा शोक संतप्त परिजनों को इस कठिन घड़ी को सहन करने की शक्ति दें। उन्होंने दुर्घटना में घायल सभी लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि दुर्घटना में घायल सभी व्यक्तियों के उपचार में किसी भी प्रकार की कमी न रहने दी जाए तथा उन्हें हर संभव चिकित्सा सुविधा और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों की सतत निगरानी करते हुए प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
जशपुर में बस पलटने से 6 यात्रियों की मौत, कई घायल, मचा हड़कंप
जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से बड़ी खबर सामने आई है। करडेगा से कुनकुरी आ रही एक यात्री बस अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। इस भीषण हादसे में 6 यात्रियों की मौत हो गई है, जिसमें एक बच्चा भी शामिल है। वहीं 9 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। दुर्घटनाग्रस्त बस अनमोल बस एजेंसी का बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार बस में दो दर्जन से अधिक यात्री सवार थे। दुर्घटना करडेगा चौकी क्षेत्र के गोड़ाअंबा के पास हुई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों की मदद से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।

हादसे में कई यात्री घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए कुनकुरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया जा रहा है। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो गया और घटनास्थल पर एम्बुलेंस भेजी गई।

वहीं मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की ओर से सभी घायलों के बेहतर इलाज के लिए तत्काल निर्देश जारी किए गए हैं। पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।
किसानों के धान से छेड़छाड़ की शिकायत, कलेक्टर ने तत्काल जांच के दिए आदेश
रायपुर। आरंग विकासखंड के भलेरा सहकारी समिति के धान खरीदी केंद्र में धान के स्टैक को पानी से भिगोने संबंधी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने तत्काल संज्ञान लिया है। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया, जिसे तत्काल मौके पर पहुंचकर पूरे प्रकरण की जांच करने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर डॉ. सिंह ने कहा है कि धान खरीदी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जांच टीम मौके पर पहुंचकर वस्तुस्थिति की जांच करे तथा यदि किसी भी कर्मचारी या अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है तो उनके विरुद्ध तत्काल कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सहायक आयुक्त विनय शुक्ला के नेतृत्व में सुमित डडसेना (सहकारिता विस्तार अधिकारी) एवं अशोक साहू (सहकारिता निरीक्षक) का संयुक्त जांच दल घटनास्थल पर पहुँच कर खरीदी केंद्र में रखे धान के स्टैक, भंडारण व्यवस्था तथा संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की विस्तृत जांच कर रहा है। साथ ही ग्रामीणों से भी जानकारी लेकर पूरे प्रकरण की तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी में पारदर्शिता और किसानों के हितों की रक्षा शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
एक साल से बंद रायपुर-जगदलपुर-हैदराबाद हवाई सेवा, फिर शुरू होने की उम्मीद
जगदलपुर। रायपुर-जगदलपुर-हैदराबाद फ्लाइट पिछले एक साल से बंद पड़ी है, इस हवाई सेवा के बंद होने से बस्तरवासियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. बस्तर का बड़ा व्यापारी वर्ग इस फ्लाइट सेवा के बंद होने से नाराज है. अब एक बार फिर बंद पड़ी इस फ्लाइट को पुनः शुरू करने की कवायद तेज हो गई है.
जिला प्रशासन ने एलायंस एयर कंपनी से रायपुर- जगदलपुर- हैदराबाद फ्लाइट को पुनः शुरू करने के लिए बातचीत जारी है प्रशासन ने मार्च के पहले हफ्ते तक सकारात्म खबर सामने आने की उम्मीद जताई. इस फ्लाइट के शुरू होने से बस्तर के लोगों को फायदा तो होगा ही साथ ही हैदराबाद और रायपुर से बस्तर आने वाले पर्यटकों की सुविधा में भी इजाफा होगा. बता दें कि एलायंस एयर द्वारा इस रूट पर हवाई सेवा संचालित थी, कम यात्रियों और आर्थिक नुकसान के कारण 2024 के मध्य से फ्लाइट बंद हो गई थी. अब उम्मीद जताई जा रही है कि समर सेशन में पुनः यह फ्लाइट शुरू हो जाएगी.
छत्तीसगढ़ में चढ़ा पारा, राजनांदगांव 38°C के साथ सबसे गर्म
रायपुर। होली खत्म होते ही छत्तीसगढ़ में गर्मी बढ़ने लगी है। मौसम विभाग के मुताबिक फिलहाल प्रदेश में मौसम शुष्क बना हुआ है और अगले सात दिनों तक अधिकतम तापमान में कोई विशेष बदलाव होने की संभावना नहीं है। फिलहाल प्रदेशवासियों को गर्मी की तपिश से राहत नहीं मिलने वाली है।
मौसम विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार को प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क रहा। प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 38.0 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 12.0 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश में कहीं भी वर्षा दर्ज नहीं की गई।
सिनोप्टिक सिस्टम
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तरी ओडिशा और उससे सटे गंगा क्षेत्रीय पश्चिम बंगाल के ऊपर समुद्र तल से करीब 0.9 किमी की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके साथ ही उत्तरी उत्तर प्रदेश से उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश, उत्तरी छत्तीसगढ़ और दक्षिणी झारखंड होते हुए उत्तरी ओडिशा तक द्रोणिका भी बनी हुई है।
हालांकि इन सिस्टमों का प्रदेश के मौसम पर फिलहाल कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ रहा है और मौसम शुष्क बना हुआ है।
तहसील कार्यालय में लगी भीषण आग, दमकल की कई गाड़ियां मौके पर
बलौदाबाजार। शहर के तहसील कार्यालय में शुक्रवार सुबह अचानक भीषण आग लग गई, जिससे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। आग तहसील परिसर में स्थित डीएसपी कार्यालय की पुरानी बिल्डिंग की ओर से लगी बताई जा रही है, जो देखते ही देखते तहसीलदार कार्यालय की ओर फैलने लगी।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। प्रशासन ने सबसे पहले तहसील कार्यालय के महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और दस्तावेजों को सुरक्षित बाहर निकलवाया। इसके बाद आग पर काबू पाने के लिए दमकल वाहन के साथ-साथ आसपास के सीमेंट संयंत्रों से भी दमकल गाड़ियों को बुलाया गया।

बताया जा रहा है कि सुबह करीब 5 बजे बलौदाबाजार की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक तहसील भवन में आग लगी। आग लगने से तहसीलदार कार्यालय और रिकॉर्ड रूम के कुछ हिस्से जले हैं।
वहीं मौके पर मौजूद एसडीएम प्रकाश कोरी ने बताया कि रिकॉर्ड रूम पूरी तरह सुरक्षित है और सभी दस्तावेजों को समय रहते सुरक्षित निकाल लिया गया है। वहीं दमकल विभाग की टीम कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा ली है।
फिलहाल, आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुट गया है।
ATR की वादियों में राज्यपाल रमेन डेका : जंगल सफारी का लिया आनंद, वन्यजीव संरक्षण को दिया बढ़ावा
मुंगेली। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने गुरुवार को मुंगेली जिले के विश्वप्रसिद्ध अचनाकमार टाईगर रिजर्व का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जंगल सफारी का आनंद लेते हुए अचानकमार टाइगर रिजर्व की प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और समृद्ध जैव विविधता को करीब से निहारा। राज्यपाल ने प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों के संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। दौरे के दौरान राज्यपाल ने रिजर्व क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्थान सिहावल का भी भ्रमण किया।
यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसे मनियारी नदी का उद्गम स्थल माना जाता है। सिहावल क्षेत्र घने जंगलों, शांत प्राकृतिक वातावरण और वन्यजीवों की मौजूदगी के कारण विशेष पहचान रखता है। यहां हिरण, जंगली हाथी, बाघ सहित कई दुर्लभ वन्य प्राणी अक्सर देखे जाते हैं। राज्यपाल ने अधिकारियों से चर्चा करते हुए वन्यजीव संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से जंगली हाथियों के प्रशिक्षण और उनके बेहतर प्रबंधन के लिए भी जरूरी दिशा-निर्देश प्रदान किए।

अधिकारियों ने उन्हें जानकारी दी कि अचानकमार टाइगर रिजर्व मध्य भारत के महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में से एक है, जहां बाघ, तेंदुआ, भालू, गौर, हिरण और हाथियों की बड़ी संख्या पाई जाती है। गौरतलब है कि अचानकमार टाईगर रिजर्व छत्तीसगढ़ का प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य है और यह युनेस्को के अधीन घोषित अचानकमार – अमरकंटक बायोंस्फीयर रिजर्व का हिस्सा भी है। अपनी समृद्ध जैव विविधता, घने साल वनों, दुर्लभ वन्यजीवों और मनमोहक प्राकृतिक दृश्यों के कारण यह देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

राज्यपाल ने महिलाओं की कलाकृतियों को सराहा
इस अवसर पर राज्यपाल ने आदिवासी अंचल की महिलाओं द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों की भी प्रशंसा की। उन्होंने बैगा और गोंड जनजाति की पारंपरिक ट्राइबल पेंटिंग्स तथा स्थानीय हस्तशिल्प को बेहद आकर्षक बताते हुए आदिवासी संस्कृति की समृद्ध परंपरा को सराहा। दौरे के अंत में कलेक्टर कुंदन कुमार ने राज्यपाल को जनजातीय कला पर आधारित स्मृति चिन्ह तथा प्राकृतिक कोसे से निर्मित शॉल भेंट कर सम्मानित किया।
होली के बाद भी नहीं खुले स्कूल के ताले, धूप में घंटों इंतजार करते रहे बच्चे
रायपुर। सूरजपुर जिले में सरकारी शिक्षकों की लापरवाही और कर्तव्य के प्रति उदासीनता का मामला सामने आया है। होली का अवकाश खत्म होने के बाद आज गुरुवार को शिक्षक स्कूल नहीं पहुंचे और न ही बच्चों को भी किसी शिक्षक के स्कूल आने की जानकारी नहीं दी, जिसके चलते स्कूल के गेट में ताला लटकता रहा और बच्चे बाहर इंतजार करते रहे। चार घंटों तक इंतजार कर बच्चे घर वापस चले गए। शिक्षकों द्वारा स्कूल में अघोषित छुट्टी किए जाने के मामले की अब चर्चा हो रही है।
पूरा मामला भैय्याथान ब्लॉक के बैजनाथपुर संकुल केंद्र अंतर्गत सांरासांव शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला का है। यहां होली के दूसरे दिन आज बच्चे स्कूल पहुंचे। आज स्कूल में छुट्टी नहीं थी लिहाजा बच्चे पढ़ाई करने स्कूल आए थे। सुबह 10 से शाम 4 बजे तक के स्कूल लगना था। पर स्कूल के गेट में ताला लटका हुआ था और शिक्षक स्कूल नहीं पहुंचे थे। बच्चे स्कूल के बाहर बस्ता लेकर शिक्षकों के पहुंचने का इंतजार कर रहे थे, पर दोपहर दो बजे तक शिक्षक नहीं पहुंचे और बच्चे धूप में शिक्षकों का इंतजार करते रहे। मिली जानकारी के अनुसार कुल 15 बच्चे स्कूल पहुंचे थे।
शिक्षकों के स्कूल नहीं आने और स्कूल बंद होने की जानकारी स्थानीय निवासी नेहा सिंह ने जिला शिक्षा अधिकारी और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को दी। इसके अलावा उन्होंने कलेक्टर एस जयवर्धने से भी शिकायत की। वही स्कूल का रिकॉर्ड खंगालने पर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पोस्टिंग के हिसाब से देखे तो स्कूल में पांच शिक्षक पदस्थ है। वहीं सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि शिक्षकों ने एक साथ आकस्मिक अवकाश के लिए आवेदन दे दिया था। खास बात यह है कि किसी भी शिक्षक का आवेदन स्वीकृत नहीं हुआ, बावजूद इसके शिक्षक नदारत रहे।
जानकारी यह भी मिली है कि स्कूल के प्रधान पाठक लगातार पांच सालों से अनियमित तौर पर अनुपस्थित रहते हैं। इसकी शिकायत जब उच्च अधिकारियों तक पहुंची तब प्राचार्य एक से दो महीने तक नियमित तौर पर स्कूल आए,उसके बाद फिर से छुट्टियां मारने लगे। वहीं स्कूल में पदस्थ दूसरे शिक्षकों में शिक्षिका प्रीति टोप्पो और ईशा खलको ने मुख्यालय से बाहर जाने की अनुमति मांग 1 दिन का ऐक्छिक अवकाश मांगा है। शिक्षक रमेश कुमार चेस्कर ने घरेलू आवश्यक कार्य के लिए दो दिनों के अवकाश का आवेदन दिया था।
शिक्षक अजीत कुमार चंद्रा ने बच्चे को टीका लगवाने के लिए अंबिकापुर जाने के लिए एक दिन का अवकाश मांगा था। वहीं प्रधान पाठक संजय गुप्ता ने बुखार आने का हवाला देकर एक दिन का अवकाश मांगा है। दोपहर दो बजे तक इंतजार करने के बाद बच्चे होली खेल कर घर वापस चले गए। घटना के संज्ञान में आने पर कलेक्टर एस जयवर्धने ने मामले में जांच कर तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
छत्तीसगढ़ के फिल्म निर्माता-निर्देशक एस अंशु धुरंधर को मिला इंटरनेशनल फिल्म अवार्ड
बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के युवा फिल्मकार एस अंशु धुरंधर को कोलकाता में आयोजित इंटरनेशनल स्टार फिल्म फेस्टिवल अवॉर्ड्स (ISFFA) 2026 में भारतीय फिल्म श्रेणी के अंतर्गत द्वितीय सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें छत्तीसगढ़ के जननायक दाऊ चिंताराम टिकरिहा पर आधारित नौ वर्षों के गहन शोध से निर्मित डॉक्यूमेंट्री के लिए प्रदान किया गया।
इस अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में विश्व के 70 देशों से सैकड़ों फिल्मों की प्रविष्टियां प्राप्त हुईं। चयन प्रक्रिया के अंतर्गत स्टोरी टेलिंग, रचनात्मकता, तकनीकी गुणवत्ता और सांस्कृतिक प्रभाव जैसे विभिन्न मानकों पर फिल्मों का मूल्यांकन किया गया। 27 फरवरी को कोलकाता स्थित राज्य युवा केंद्र परिसर के विवेकानंद ऑडिटोरियम में नामांकित फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई तथा 28 फरवरी को आयोजित समारोह में विजेताओं को अवार्ड प्रदान किए गए।
फेस्टिवल निदेशक सैकत दास ने बताया कि बड़ी संख्या में प्राप्त प्रविष्टियों में से केवल कुछ ही फिल्मों को अंतिम चरण तक पहुंचने का अवसर मिला। उन्होंने शोध आधारित ऐतिहासिक विषय पर बनी इस डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तुति और तकनीकी संतुलन की सराहना की। मार्च माह में इसी फिल्म का चयन बंगाल फिल्म एंड टेलीविजन चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित 11वें बंगाल इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल (BISFF) के लिए भी किया गया है।
16 साल की उम्र से फिल्म निर्माण से जुड़े हैं धुरंधर
एस अंशु धुरंधर 9 वर्ष की आयु से लेखन तथा 16 वर्ष की आयु से फिल्म निर्माण से जुड़े हुए हैं। अब तक वे पांच फिल्मों का निर्देशन और चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। वर्तमान में दो पुस्तकें और तीन फिल्में निर्माणाधीन हैं। देश-विदेश के 10 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में उनके कार्यों का चयन एवं सम्मान हो चुका है।
बांदे क्षेत्र में अघोषित बिजली कटौती से हाहाकार, ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश
कांकेर। बांदे के ग्रामीण क्षेत्रों की विद्युत व्यवस्था चरमरा गई है। पिछले सप्ताह भर से बांदे के मरोड़ा फीडर में अघोषित रूप से बिजली आपूर्ति बंद कर दी जा रही है। विभाग द्वारा मेंटनेंस का हवाला देकर घंटों बिजली आपूर्ति ठप कर दी जाती है, जिसके चलते ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार हो रही बिजली की आंख मिचौली से ग्रामीण परेशान हैं। यहां बिजली के आने जाने का कोई समय निर्धारित नहीं है। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ने लगा है।
बिजली कटौती ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। कभी-कभी सुबह से शाम तक बिजली गुल रहने से पानी की विकट समस्या खड़ी हो जाती है। गुरुवार को भी बिना किसी सूचना के सुबह 11 बजे से शाम 4:30 बजे तक बिजली पूरी तरह से बंद रही। दूसरी और किसानों की भी चिंता बढ़ रही है।
सूखने लगी है मक्के की फसल, फोन नहीं उठाते अफसर
परलकोट क्षेत्र में इन दिनों हर किसान के खेत में मक्के की फसल है। गर्मी बढ़ने से खेत में पानी की भी जरूरत बढ़ गई है।पिछले एक हफ्ते से मरोड़ा फीडर की बिजली व्यवस्था चरमरा जाने से मक्के की फसल सूखने लगी है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। ग्रामीणों ने मांग की है कि बिजली की समस्या का समाधान कर ग्रामीणों को राहत पहुंचाई जाए। वहीं बांदे बिजली विभाग के अधिकारी ढोमेंद्र ठाकुर से संपर्क करने पर उन्होंने फोन रिसीव करने तक मुनासिफ नहीं समझा।
बिजली दफ्तार का घेराव करने की दी चेतावनी
मरोड़ा सरपंच गायत्री मंडावी ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर जल्द बिजली व्यवस्था की सुधार नहीं की जाती है तो हम अपने क्षेत्र के किसानों के साथ बांदे बिजली विभाग के दफ्तर का घेराव करने मजबूर होंगे, जिसका जिम्मेदार बिजली विभाग के लापरवाह अधिकारी होंगे।