प्रदेश
स्कूल बैग हल्का करने शिक्षा विभाग का सख्त आदेश जारी
रायपुर। स्कूली बच्चों की सेहत को लेकर अब शिक्षा विभाग गंभीर हो गया है। इस सबंध में आदेश जारी किया गया है। आदेश में साफ कहा गया है कि बैग का वजन बच्चों की उम्र और क्षमता से अधिक नहीं होना चाहिए। धरसींवा विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने विद्यार्थियों के भारी बस्ते को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। आदेश के मुताबिक स्कूलों को तत्काल प्रभाव से टाइम टेबल में बदलाव कर केवल चार प्रमुख विषयों की किताबें ही मंगाने को कहा गया है।
बस्ते के बोझ से स्वास्थ्य पर असर
जारी आदेश में कहा गया है कि अत्यधिक बस्ते का बोझ विद्यार्थियों के शारीरिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल रहा है। बच्चों की रीढ़ और कंधों में दर्द, थकावट और तनाव जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं, जिसे देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
अब स्कूलों में लागू होंगे ये बदलाव:
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प्रति दिन सिर्फ 4 विषयों की किताबें लानी होंगी, अभ्यास पुस्तिकाएं वर्जित रहेंगी। यदि किसी कक्षा में चार से अधिक विषय पढ़ाए जाते हैं, तो अतिरिक्त किताबें स्कूल में ही रखने की व्यवस्था करनी होगी।
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पानी की बोतल 500 एमएल से अधिक नहीं होनी चाहिए।
स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि साफ पीने का पानी हर समय उपलब्ध रहे ताकि बच्चे बोतल रिफिल कर सकें और भारी बोतल ना लाएं। -
निरीक्षण दलों का गठन किया गया है जो समय-समय पर स्कूलों में पहुंचकर बैग की मॉनिटरिंग करेंगे और रिपोर्ट उच्च कार्यालय को भेजेंगे।
शिक्षा विभाग का स्पष्ट संदेश – अब बच्चों की पीठ पर नहीं लादे जाएंगे अनावश्यक भार
शिक्षा विभाग ने सभी प्राचार्यों से अपील की है कि वे इस दिशा-निर्देश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ स्वास्थ्य की भी सुरक्षा मिल सके। इस निर्णय से अभिभावकों ने भी राहत की सांस ली है, क्योंकि बच्चों की रोजाना की जद्दोजहद और बढ़ते कंधे के बोझ को लेकर अक्सर शिकायतें सामने आती रही हैं।

मोदी की गारंटी लागू करो: 11 सूत्रीय मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन
रायपुर। “मोदी की गारंटी” को लागू कराने और 11 सूत्रीय मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आवाहन पर आज प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन देखने को मिला। राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित इंद्रावती भवन के सामने कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इसी तरह राज्य के सभी जिला, विकासखंड और तहसील मुख्यालयों में रैली और प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया।
प्रमुख मांगें क्या हैं?
फेडरेशन की प्रमुख मांगों में केंद्र के समान महंगाई भत्ता (DA/DR), लंबित DA एरियर को GPF/CPF खाते में समायोजित करना, निस्वार्थ अनुकंपा नियुक्ति, पंचायत सचिवों का शासकीयकरण, भवनभाटा की पुनर्संरचना, स्थानांतरण नीति में पारदर्शिता और वेतन विसंगति दूर करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
गारंटी अगर दी है तो निभानी भी होगी
प्रदर्शन में जुटे कर्मचारियों का कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्मचारियों को सुविधाएं और समानता की गारंटी दी है, लेकिन राज्य सरकार इन्हें लागू करने में विलंब कर रही है।“यदि केंद्र के कर्मचारियों को DA और सुविधाएं मिल रही हैं, तो राज्य के कर्मचारियों के साथ भेदभाव क्यों?” – यही सवाल प्रदर्शनकारियों के नारों में गूंजता रहा।
टोकन स्ट्राइक की चेतावनी
फेडरेशन ने साफ किया है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो 22 अगस्त को प्रदेशभर के कर्मचारी अधिकारी टोकन स्ट्राइक करेंगे। इसके बाद चरणबद्ध आंदोलन की भी चेतावनी दी गई है।
बच्चों को सक्षम बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद प्रतिबद्ध: सांसद बृजमोहन अग्रवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद के अध्यक्ष एवं रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता में बुधवार को परिषद की कार्यकारिणी समिति की बैठक सप्रे शाला स्थित सभागार में सम्पन्न हुई। बैठक में बाल अधिकारों की सुरक्षा, दिव्यांग बच्चों के सर्वांगीण विकास और संसाधनों के विस्तार पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में श्री अग्रवाल ने कहा कि परिषद द्वारा संचालित स्पीच थेरेपी सेंटर में राज्य के कोने कोने से माता पिता अपने बच्चों के इलाज के लिए आते है इसको मध्य भारत का सबसे बड़ा और श्रेष्ठ केंद्र बनाने का संकल्प लिया गया है। उन्होंने इसके लिए 1 करोड़ रुपये की राशि जुटाने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए समाज के दानदाताओं, कॉरपोरेट्स और उद्योगपतियों से CSR मद से सहयोग की अपील की।








उन्होंने कहा कि यह सेंटर सिर्फ चिकित्सा नहीं, बल्कि विशेष बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सशक्त मंच है। इसके लिए स्मार्ट क्लास रूम की व्यवस्था, दिव्यांग विद्यार्थियों के अनुकूल फर्नीचर और वेल-इक्विप्ड इंफ्रास्ट्रक्चर आवश्यक है।
श्री अग्रवाल ने परिषद के माना स्थित बालक और बालिका बाल आश्रम में आवासीय सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण के लिए 15 लाख रुपये सांसद निधि से देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सुरक्षा, ये चारों स्तंभ बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक हैं, और परिषद इसी दिशा में कार्य कर रही है।
परिषद द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और सेवाओं जैसे बाल संरक्षण, पोषण, खेल, मानसिक और भाषिक विकास हेतु विशेष प्रयासों का भी इस बैठक में समीक्षा की गई और आगे की कार्ययोजना तैयार की गई। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि समाज के सभी वर्गों की सहभागिता से ही हम हर बच्चे को एक गरिमापूर्ण और सुरक्षित बचपन दे सकते हैं।
बैठक में उपाध्यक्ष डॉ अशोक त्रिपाठी, डॉ कमल वर्मा, महासचिव चंद्रेश शाह, संयुक्त सचिव राजेंद्र निगम, प्रकाश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष इंदिरा जैन समेत कार्यकारिणी के सदस्य उपस्थित रहे।
भारतमाला प्रोजेक्ट मुआवजा घोटाले में EOW की बड़ी कार्रवाई, 6 आरोपियों को लिया हिरासत में
रायपुर। भारतमाला प्रोजेक्ट में मुआवजा राशि घोटाले में EOW ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जल संसाधन विभाग में अमीन के पद पर पदस्थ लोकसेवक गोपाल राम वर्मा (से.नि.), नरेन्द्र कुमार नायक समेत 4 अन्य व्यक्ति खेमराज कोसले, पुनुराम देशलहरे, भोजराम साहू एवं कुंदन बघेल को आज गिरफ्तार कर रायपुर विशेष न्यायालय में पेश कर अग्रिम कार्रवाई की जा रही है.
जानकारी के मुताबिक, आरोपी खेमराज कोसले पूर्व जिला पंचायत सदस्य और अभनपुर जनपद अध्यक्ष रह चुका है. आरोपी कुंदल बघेल दस सालों तक नगर पंचायत अभनपुर के अध्यक्ष थे. आरोपी पुनुराम देशलहरे नायकबांधा का पूर्व सरपंच है.
जांच में पाया गया कि जल संसाधन विभाग के दो अधिकारियों ने पूर्व में अधिग्रहित की गई भूमि के बारे में गलत रिपोर्ट प्रस्तुत किया था. 4 अन्य व्यक्तियों ने फरार चल रहे राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर खाता विभाजन (बटांकन) प्रकिया एवं अन्य राजस्व प्रक्रियाओं में फर्जीवाड़ा किया था और किसानों से उसकी एवज में भारी मात्रा में कमीशन लिया था. इस मामले में जांच जारी है.
क्या है भारतमाला परियोजना का मुआवजा घोटाला?
छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत राजधानी रायपुर से विशाखपट्टनम तक 546 किमी सड़क निर्माण किया जा रहा है. इस परियोजना में रायपुर से विशाखापटनम तक फोरलेन सड़क और दुर्ग से आरंग तक सिक्सलेन सड़क बनना प्रस्तावित है. इस सड़क के निर्माण के लिए सरकार ने कई किसानों की जमीनें अधिग्रहित की है. इसके एवज में उन्हें मुआवजा दिया जाना है, लेकिन कई किसानों को अब भी मुआवजा नहीं मिल सका है.
भारतमाला परियोजना के तहत विशाखापट्टनम रायपुर तक बन रही कॉरिडोर में एसडीएम निर्भय साहू एवं अन्य राजस्व विभाग के अधिकारियों ने भूमाफियों को कई गुना ज्यादा मुआवजा राशि दिलवाया है. इससे सरकार को 600 करोड़ की हानि हुई है. मामला संज्ञान में आने पर मार्च में तत्कालीन एसडीएम निर्भय कुमार साहू एवं दो तहसीलदार और तीन पटवारी को निलंबित कर दिया गया था. निलंबन के समय निर्भय कुमार साहू जगदलपुर नगर निगम आयुक्त थे. सरकार ने घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू को सौंपा है. ईओडब्ल्यू आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच कर रही है.
भारतमाला परियोजना में गड़बड़ी को लेकर आरोपी निर्भय कुमार साहू एसडीएम, शशिकांत कुर्रे तहसीलदार, लखेश्वर किरण नायब तहसीलदार, जितेंद्र साहू, बसंती धृतलहरें, लेखराम देवांगन तीनों पटवारियों के विरुद्ध राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं एंटी करप्शन ब्यूरो में अपराध दर्ज किया गया है. सभी आरोपी फरार चल रहे हैं. इनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है. इस घोटाले में शामिल 6 आरोपियों को ईओडब्ल्यू ने आज गिरफ्तार किया है.
पीएम मोदी से संवाद ऐतिहासिक अवसर, जनता को समर्पित योजनाओं पर होगा मंथन: सांसद बृजमोहन अग्रवाल
रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 जुलाई को छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेताओं से संवाद करेंगे। इस महत्वपूर्ण संवाद को लेकर रायपुर सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि यह अवसर न केवल गौरवपूर्ण है बल्कि आगामी विकास की दिशा तय करने वाला भी है।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 11 वर्षों के नेतृत्व में देश को सेवा, सुशासन और जनकल्याण की दिशा में अभूतपूर्व परिवर्तन मिला है। इस संवाद में वे सभी वरिष्ठ नेता शामिल होंगे जिन्होंने मोदी के साथ संगठन और सरकार में विभिन्न स्तरों पर कार्य किया है।
उन्होंने बताया कि इस संवाद के दौरान प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा संचालित जन-कल्याणकारी योजनाओं जैसे उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, पीएम आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, पीएम किसान सम्मान निधि और अमृत मिशन जैसे अनेक कार्यक्रमों की जमीनी स्थिति की समीक्षा की जाएगी। साथ ही यह भी विचार होगा कि इन योजनाओं से जनता को जो लाभ मिल रहा है, उसमें और क्या सुधार किए जा सकते हैं ताकि अंतिम व्यक्ति तक उसका प्रभावी लाभ पहुंच सके।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मोदी सरकार की नीति “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” को और प्रभावी बनाने के लिए यह संवाद मील का पत्थर साबित होगा।
छत्तीसगढ़ में मलेरिया की रफ्तार थमी, 61.8% बिना लक्षण वाले मरीज समय पर पहचाने गए, सक्रिय निगरानी, घर-घर स्क्रीनिंग और सामुदायिक भागीदारी से गढ़ा नया स्वास्थ्य मॉडल
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान (12वां चरण) की अब तक की प्रगति से स्पष्ट है कि राज्य शासन की घर-घर स्क्रीनिंग रणनीति और सक्रिय जनसंपर्क के माध्यम से मलेरिया की जड़ पर प्रहार किया जा रहा है। 25 जून से 14 जुलाई 2025 तक हुए सर्वेक्षण में 1884 मलेरिया पॉजिटिव मरीजों की पहचान की गई, जिनमें से 1165 मरीज (61.8%) बिना लक्षण (Asymptomatic) वाले थे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार की नीति स्पष्ट है—बीमारी की प्रतीक्षा मत करो, बीमारी से पहले पहुँचो। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और कहा कि यह अभियान राज्य को मलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगा।
कुल 1,39,638 लोगों की मलेरिया जांच की गई। 1884 लोग पॉजिटिव पाए गए, जिनमें से 1165 (61.8%) बिना किसी लक्षण के थे — यानी यदि ये स्क्रीनिंग नहीं होती, तो संक्रमण आगे बढ़ता। कुल मामलों में से 75% से अधिक बच्चे हैं, जो विशेष रूप से संवेदनशील वर्ग हैं। 92% से अधिक मलेरिया केस Plasmodium falciparum (Pf) प्रकार के हैं — जिसकी त्वरित पहचान से गंभीर जटिलताओं को टाला गया।
दंतेवाड़ा जैसे दूरस्थ और भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण जिले में 12.06% लक्ष्य प्राप्ति दर और 706 मलेरिया पॉजिटिव मामलों की पहचान एक बड़ी सफलता है। खास बात यह है कि इनमें से 574 मरीज बिना लक्षण वाले (Asymptomatic) थे, जिन्हें शासन की सक्रिय रणनीति के कारण समय रहते उपचार उपलब्ध कराया गया। यह दिखाता है कि जंगल क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य तंत्र की पहुँच, निगरानी, और सेवा वितरण प्रभावशाली तरीके से हो रहा है।
सुकमा में 15,249 व्यक्तियों की जांच के दौरान 372 मलेरिया पॉजिटिव केस मिले, जिनमें से 276 मरीज बिना लक्षण वाले थे। यह आँकड़ा स्पष्ट रूप से बताता है कि शासन की प्रो-एक्टिव स्क्रीनिंग के चलते साइलेंट संक्रमण के चक्र को तोड़ा जा रहा है। जनजातीय क्षेत्रों में भी मेडिकल एक्सेस और सामुदायिक भागीदारी के चलते संक्रमण पर नियंत्रण पाया जा रहा है — यह प्रशासन की रणनीतिक सफलता है।
मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के 12वें चरण अंतर्गत 27266 घरों में स्क्रीनिंग टीमों की पहुँच हुई। 1247 गर्भवती महिलाओं की जाँच की गई, जिनमें से मात्र 10 पॉजिटिव पाई गईं – यानी केवल 0.08%। LLIN (लार्ज लास्टिंग मच्छरदानी) का उपयोग 92% घरों में सुनिश्चित हुआ। Indoor Residual Spray कवरेज 68.73% तक पहुँचा। 614 घरों में मच्छर लार्वा मिलने पर त्वरित कार्रवाई की गई।
यह अभियान दर्शाता है कि स्वास्थ्य सेवा सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि जागरूकता, समयबद्धता और पहुँच का नाम है। शासन द्वारा वैज्ञानिक पद्धति से स्क्रीनिंग, मच्छर नियंत्रण, जागरूकता और फॉलोअप व्यवस्था के संयुक्त प्रयास से ही संभव हो सका है कि 61.8% बिना लक्षण वाले मरीजों को इलाज मिला और संक्रमण की कड़ी टूट सकी।
छत्तीसगढ़ सरकार आने वाले समय में इस मॉडल को और विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि राज्य को मलेरिया मुक्त बनाना सिर्फ लक्ष्य नहीं, बल्कि वास्तविकता बने।
कोण्डागांव की बालिका ने ताईवान में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतकर रचा इतिहास, मुख्यमंत्री साय ने दी बधाई
रायपुर। छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिले की बालिका रंजीता कोरेटी ने ताइपे (ताईवान) में आयोजित एशियन कैडेट जूडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद बालगृह बालिका कोण्डागांव की रंजीता ने कई देशों के खिलाड़ियों को पराजित करते हुए यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस गौरवशाली उपलब्धि पर रंजीता को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह न केवल कोण्डागांव जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि रंजीता जैसी बेटियाँ राज्य की उम्मीद और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं, जो यह सिद्ध कर रही हैं कि छत्तीसगढ़ की बेटियाँ अब वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बना रही हैं।
रंजीता की इस उपलब्धि के पीछे जिला बाल संरक्षण इकाई, महिला एवं बाल विकास विभाग एवं बालगृह संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सतत मार्गदर्शन और सहयोग से रंजीता मानसिक और शारीरिक रूप से निरंतर सशक्त होती गई। खेलों में विशेष रुचि और विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए उसे आईटीबीपी के सहयोग से जूडो का प्रशिक्षण दिलवाया गया। रंजीता ने वर्ष 2021 में चंडीगढ़ में आयोजित ओपन नेशनल जूडो टूर्नामेंट में 40 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी खेल यात्रा की प्रभावशाली शुरुआत की।
इसके पश्चात् वर्ष 2022 में भोपाल में आयोजित ओपन नेशनल जूडो प्रतियोगिता में रंजीता ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। वर्ष 2024 में केरल में आयोजित खेलो इंडिया नेशनल जूडो टूर्नामेंट में 52 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल प्राप्त किया। इसी वर्ष महाराष्ट्र के नासिक में आयोजित खेलो इंडिया रीजनल जूडो प्रतियोगिता में उसने गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके साथ ही त्रिशूर (केरल) में 52 किलोग्राम वर्ग में पुनः स्वर्ण पदक प्राप्त कर अपनी श्रेष्ठता को दोहराया। पुणे में आयोजित राष्ट्रीय ओपन नेशनल जूडो चैंपियनशिप में रंजीता ने असम, तेलंगाना, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे प्रमुख राज्यों की खिलाड़ियों को पराजित करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, पटना (बिहार) में भी उसने जूडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक प्राप्त कर जिले और राज्य को गौरवान्वित किया।
राष्ट्रीय स्तर पर निरंतर उपलब्धियों के पश्चात रंजीता ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। अप्रैल 2025 में जॉर्जिया में आयोजित कैडेट यूरोपियन कप 2025 में रंजीता ने 52 किलोग्राम वर्ग में 5वाँ स्थान प्राप्त किया। इसके बाद ताशकंद (उज़्बेकिस्तान) में वर्ष 2025 में आयोजित एशियन कैडेट चैंपियनशिप में भी उसने अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन जारी रखा। अंततः 12 जुलाई से 15 जुलाई 2025 तक ताइपे (ताईवान) में आयोजित एशियन कैडेट जूडो चैंपियनशिप में रंजीता ने स्वर्ण पदक जीतकर भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल हासिल किया।
रंजीता की इस प्रेरणादायक यात्रा को देखते हुए जनवरी 2023 में उसका चयन भोपाल स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) में हुआ, जहाँ वह वर्तमान में शिक्षा के साथ-साथ जूडो का उच्चस्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह सफलता यह दर्शाती है कि यदि बेटियों को अवसर, संसाधन और सही मार्गदर्शन मिले, तो वे किसी भी ऊँचाई को छू सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार बेटियों को सशक्त बनाने के लिए हर स्तर पर प्रतिबद्ध है, और रंजीता कोरेटी जैसे उदाहरण छत्तीसगढ़ की शक्ति और संभावना का प्रतीक हैं।
औचक निरीक्षण पर बालक आश्रम पहुंचे सांसद भोजराज नाग, नशे में धुत मिला प्रधान अध्यापक, किया गया निलंबित
कांकेर। जिले के दुर्गुकोंडल ब्लॉक अंतर्गत सुरंगदोह बालक आश्रम में बुधवार को सांसद भोजराज नाग के औचक निरीक्षण के दौरान एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया। आश्रम के अधीक्षक ओकेश्वर चुरेंद्र को नशे की हालत में पाया गया। अधीक्षक ने शर्ट भी उलटी पहन रखी थी और जब टोका गया, तब भी बटन तक ठीक से नहीं लगा सका। यह दृश्य देखकर सांसद नाराज़ हो गए और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
नशे में धुत अधीक्षक — शर्मनाक लापरवाही का मामला
सांसद भोजराज नाग जब आश्रम पहुंचे, तो अधीक्षक ओकेश्वर चुरेंद्र नशे में झूमते हुए बच्चों के बीच घूमते मिले। उनकी शर्ट उलटी थी और व्यवहार पूरी तरह से असामान्य और असंवेदनशील था। सांसद ने जब पूछताछ की, तो अधीक्षक कुछ भी स्पष्ट नहीं बोल पाए।
तत्काल निलंबन, मुख्यालय किया गया कोयलीबेड़ा स्थानांतरित
घटना की गंभीरता को देखते हुए सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग कांकेर ने प्राथमिक जांच के बाद अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन आदेश में उल्लेख है कि अधीक्षक का आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 (1, 2, 3) के प्रतिकूल है। इसलिए उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम 1966 के तहत निलंबित किया गया है।निलंबन अवधि में चुरेंद्र का मुख्यालय खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, कोयलीबेड़ा नियत किया गया है।
जिला प्रशासन सख्त — सभी आश्रमों की होगी औचक जांच
कांकेर कलेक्टर नीलेश कुमार महादेव क्षीरसागर ने मीडिया से बातचीत में बताया कि,
“सांसद के निरीक्षण के दौरान अधीक्षक को नशे में पाया गया, यह अत्यंत गंभीर मामला है। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। साथ ही अब जिले के सभी आश्रम-छात्रावासों की औचक जांच के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई है।”
उद्देश्य: बच्चों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में बच्चों की देखभाल, सुरक्षा और सुविधा में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। इस घटना ने व्यवस्था की खामियों को उजागर किया है, और अब जिला प्रशासन इन्हें दुरुस्त करने के लिए सख्त और ठोस कदम उठा रहा है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 : आवेदन की अंतिम तिथि में बढ़ोतरी, अब 31 जुलाई तक कर सकेंगे अप्लाई
रायपुर। केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP) के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है. छत्तीसगढ़ शासन ने राज्यभर के नागरिकों, संस्थाओं, अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के 5 से 18 वर्ष की आयु वाले उन बच्चों को इस सम्मान के लिए 31 जुलाई 2025 तक आवेदन कराएं, जिन्होंने बहादुरी, सामाजिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण, खेल, कला-संस्कृति और विज्ञान-प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में असाधारण प्रदर्शन किया है. पहले आवेदन की अंतिम तिथि 15 मई थी.
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने जानकारी दी कि नामांकन राष्ट्रीय पुरस्कार के https://awards.gov.in पोर्टल के माध्यम से केवल ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे. पात्र बच्चों के लिए नामांकन की आयु सीमा 5 से 18 वर्ष तय की गई है. कोई भी व्यक्ति या संस्था ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों को नामांकित कर सकती है. इच्छुक बच्चे स्वयं भी आवेदन कर सकते हैं.
नामांकन के लिए पंजीकरण के दौरान आवेदकों को अपना नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, ईमेल, आधार संख्या सहित अन्य जानकारी देनी होगी. इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 श्रेणी का चयन कर आवेदन भरना होगा. आवेदन पत्र में उपलब्धियों का 500 शब्दों का संक्षिप्त विवरण, आवश्यक दस्तावेज (पीडीएफ, अधिकतम 10 फाइलें) और हालिया फोटो (जेपीजी/पीएनजी) अपलोड करना अनिवार्य है.
आवेदन ड्राफ्ट के रूप में सेव कर अंतिम तिथि से पहले संपादित कर जमा किया जा सकता है. अधिक जानकारी और आवेदन के लिए https://awards.gov.in पर विजिट करें. सरकार का उद्देश्य इन पुरस्कारों के माध्यम से देशभर के युवाओं की प्रेरणादायक उपलब्धियों को पहचान देना और बच्चों के समग्र विकास के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करना है.
प्राचार्य पदोन्नति मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को
रायपुर। प्राचार्य पदोन्नति प्रकरण में सिंगल बैंच से नारायण प्रकाश तिवारी केश में स्टे की सुनवाई आज हाई कोर्ट जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल के कोर्ट में हुई, याचिकाकर्ता के वकील ने रिज्वाइंडर के लिए जस्टिस से प्रे किया जिसे मानते हुए एक सप्ताह का समय दिया गया, शासकीय पक्ष ने एक व्यक्ति कर लिए एक पद सुरक्षित रखते हुए स्टे हटाने आग्रह किया, किंतु उन्हें रिलीफ नही मिली.
कोर्ट में महाधिवक्ता यशवंत ठाकुर ने 14 को सुनवाई के लिए प्रे मेंशन किया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया था और 4 बजे 14 जुलाई का समय तय किया गया था, जिसमे याचिकाकर्ता के वकील शामिल नही हुए जिसके कारण 16 जुलाई का समय पुनः दिया गया था।
केश की सुनवाई में एजी ने कोर्ट को बताया गया कि नियम सहित अभी के आपत्ति के सभी विषय पर माननीय डबल बैंच में इस प्रकृति के सभी केश को निराकृत करते हुए स्टे हटा दिया गया है।
ज्ञात हो छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय डबल बैंच में जस्टिस माननीय रजनी दुबे एवं माननीय जस्टिस अमितेंद्र कुमार प्रसाद की बेंच में सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला 17 जून को सुरक्षित रखा गया था।
माननीय हाई कोर्ट में 9 जून से 17 जून तक लगातार सुनवाई हुआ, जिसमे याचिकाकर्ताओं ने अपने अपने विषय मे तथ्यों के साथ पक्ष रखा था, वहीं अतिरिक्त महाधिवक्ता के साथ साथ इंटरविनर ने भी लाभार्थी व शासकीय पक्ष को मजबूती से रखा था। ज्ञात हो शिक्षा विभाग ने 30 अप्रैल को प्राचार्य पदोन्नति की सूची जारी की थी, जिसे माननीय हाई कोर्ट ने 1 मई को स्थगित किया था, जिसमे सुनवाई चली।
प्राचार्य पदोन्नति विषय मे शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर ने सभी विषय पर विशेष पक्ष रखा था साथ ही छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के इंटरविनर अधिवक्ता अनूप मजूमदार, अमृतोदास, विनोद देशमुख, जमील अख्तर व अन्य ने भी विशेष रूप से लाभार्थियों के पक्ष में न्यायसंगत पक्ष मजबूती से रखे थे।
अंत मे हाई कोर्ट ने सभी को सुनने के बाद फैसला 17 जून को सुरक्षित रख लिया है, जिसमे सभी आपत्ति को खारिज करते हुए प्राचार्य पदोन्नति की जारी सूची से स्टे हटाते हुए हरी झंडी दिया गया, हाई कोर्ट ने शासन के पक्ष को सही माना है। नियम 15 को संशोधन करने कहा गया है।
आज जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल ने याचिकाकर्ता नारायण प्रसाद तिवारी की याचिका में रिज्वाइंडर के लिए 1 सप्ताह का पुनः समय दिया। एजी ने नए शिक्षा सत्र का हवाला भी दिया किंतु राहत नही मिली। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने सचिव स्कूल शिक्षा विभाग व संचालक लोक शिक्षण छत्तीसगढ़ से भेंटकर इस विषय मे चर्चा किया था, स्कूल में प्राचार्य के अधिसंख्य पद रिक्त है, शालाओ में शिक्षण सत्र की तैयारियों में प्राचार्य की शीघ्र पदोन्नति जरूरी है।
माननीय न्यायालय व सुनवाई के दौरान संजय शर्मा, मनोज सनाढ्य, मुकेश पांडेय, रामगोपाल साहू, राजेश शर्मा, चिंताराम कश्यप, चंद्रशेखर गुप्ता, तोषण गुप्ता, अनामिका तिवारी, मोहन तिवारी, पवन पटेल लगातार सक्रिय थे।
छत्तीसगढ़ व्यापम की परीक्षा में हाईटेक नकल मामला, कांग्रेस ने 10 सदस्यीय जांच समिति का किया गठन
रायपुर। छत्तीसगढ़ में व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) द्वारा आयोजित सब-इंजीनियर भर्ती परीक्षा के दौरान हाईटेक नकल कांड ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिया है। अब इस मामले में कांग्रेस ने 10 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है।
जांच समिति का संयोजक पूर्व संसदीय सचिव यू.डी. मिंज को बनाया गया है। वहीं सदस्य में पूर्व विधायक विनय भगत, पीसीसी महामंत्री आरती सिंह, एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय, ज़िला कांग्रेस अध्यक्ष मनोज सागर यादव, नगर पंचायत कुनकुरी अध्यक्ष विनयशील, एनएसयूआई उपाध्यक्ष अमित शर्मा, हिमांशु जायसवाल, एनएसयूआई महासचिव विकास सिंह ठाकुर और प्रदेश सचिव एनएसयूआई मयंक सिंह गौतम शामिल हैं। यह समिति नकल प्रकरण की गहराई से जांच कर संलिप्त छात्रों, उनके परिजनों से बातचीत कर वस्तुस्थिति की रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करेगी।
ऐसे हुआ हाईटेक नकल का खुलासा
बता दें कि यह घटना रविवार को बिलासपुर के शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सरकंडा (परीक्षा केंद्र क्रमांक 1309) की है, जहां परीक्षा केंद्र परिसर के बाहर मौजूद अनुराधा बाई नामक युवती वॉकी-टॉकी, टैबलेट, ब्लूटूथ डिवाइस और मोबाइल फोन की मदद से अंदर कक्ष क्रमांक 7 में बैठी परीक्षार्थी अन्नु सूर्या (रोल नंबर 13091014) को उत्तर भेज रही थी। यह पूरी चालबाजी तब उजागर हुई जब एक सतर्क ऑटो चालक को युवती की गतिविधियों पर शक हुआ। उसने तुरंत अपने परिचित एनएसयूआई नेता विकास ठाकुर को सूचना दी। इसके बाद विकास अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचा और पाया कि युवती के पास हाईटेक डिवाइसेस हैं, जिनके जरिए वह परीक्षा हॉल में बैठी परीक्षार्थी को उत्तर भेज रही थी। पूछताछ के दौरान युवती ने बताया कि परीक्षा में शामिल परीक्षार्थी उसकी सहेली है।
संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पर परीक्षा स्टाफ ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए परीक्षार्थी अन्नु की तलाशी ली। तलाशी के दौरान हिडन कैमरा और माइक्रो स्पीकर जैसी हाईटेक डिवाइसेस उसके अंतःवस्त्रों में छिपी हुई पाई गईं। यह सभी उपकरण नकल में उपयोग किए जा रहे थे। घटना का पूरा वीडियो मौके पर मौजूद युवकों द्वारा बनाया गया, जो अब सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ।
परीक्षा में हाईटेक नकल सामने आने के बाद व्यापम ने परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाते हुए आरोपी परीक्षार्थी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है।
पुरानी पेंशन योजना: CGPF राशि के अंतिम भुगतान की ऑनलाइन प्रक्रिया तय, जानिये क्या है प्रक्रिया
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल किए जाने के बाद, अब राज्य सरकार ने सी.जी.पी.एफ. (छत्तीसगढ़ सामान्य भविष्य निधि) खातों की अंतिम निकासी के लिए पूर्णतः ऑनलाइन प्रक्रिया निर्धारित कर दी है। यह व्यवस्था उन शासकीय सेवकों पर लागू होगी, जो सेवा समाप्ति, त्यागपत्र, सेवानिवृत्ति या मृत्यु के पश्चात CGPF राशि के आहरण के पात्र होंगे।इस नई प्रक्रिया से संबंधित तीनों स्तरों — कार्यालय प्रमुख, संचालनालय पेंशन एवं भविष्य निधि, तथा कोषालय — की जिम्मेदारियाँ और कार्यप्रणाली स्पष्ट की गई है।
ऑफिस स्तर पर क्या करना होगा?
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cps.cg.nic.in पोर्टल पर DDO/Employee ID लॉगिन से शासकीय सेवक का CGPF खाता विवरण देखा जा सकेगा।
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सेवा समाप्ति/सेवानिवृत्ति/मृत्यु के मामलों में संबंधित व्यक्ति या नॉमिनी के लिए “Online CGPF Final Payment System” पर प्रकरण तैयार किया जाएगा।
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जरूरी विवरण — जैसे व्यक्तिगत, विभागीय, गणना व दस्तावेज़ प्रविष्टियाँ — दर्ज की जाएंगी।
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अनुसूची-5 (सेवानिवृत्ति/त्यागपत्र) या अनुसूची-7 (मृत्यु) और डिजिटल हस्ताक्षरित CGPF पासबुक सहित सभी आवश्यक दस्तावेज स्कैन कर अपलोड किए जाएंगे।
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दस्तावेज़ों की चेकलिस्ट अनुसार पुष्टि कर संचालनालय को ऑनलाइन प्रेषित किया जाएगा।
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ई-प्राधिकार पत्र (e-CGPF Authority Letter) प्राप्त होने के बाद DDO द्वारा ई-बिल तैयार कर कोषालय भेजा जाएगा।
संचालनालय स्तर की प्रक्रिया:
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संचालनालय, पेंशन एवं भविष्य निधि अपने User ID/Password से लॉगिन कर प्रकरण की पुष्टि और परीक्षण करेगा।
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CGPF पासबुक व अन्य दस्तावेजों का मूल्यांकन किया जाएगा।
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कोई भिन्नता होने पर ऑनलाईन अभिलेखों के आधार पर राशि व ब्याज का पुनः निर्धारण किया जाएगा।
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जांच पूर्ण होने के बाद डिजिटल हस्ताक्षरित e-CGPF Authority Letter जारी कर DDO, कोषालय व अभिदाता को भेजा जाएगा।
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NIC के सहयोग से वेबसाइट का सुचारू संचालन व सुधार का कार्य संचालनालय द्वारा किया जाएगा।
कोषालय / उप-कोषालय स्तर पर:
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कोषालय स्तर पर प्राप्त e-CGPF Authority Letter के आधार पर ई-बिल सॉफ्टवेयर में देयक तैयार किया जाएगा।
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डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त प्राधिकार पत्र की पुष्टि के बाद संबंधित शासकीय सेवक/नॉमिनी के खाते में भुगतान किया जाएगा।
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भुगतान का लेखांकन लेखा शीर्ष 8009-राज्य भविष्य निधियों के अंतर्गत किया जाएगा।
इस प्रणाली के लाभ:
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प्रक्रिया पारदर्शी, ऑनलाइन व समयबद्ध है।
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शासकीय सेवकों एवं उनके परिजनों को अंतिम भुगतान के लिए क्लियर और ट्रैक करने योग्य व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है।
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राज्य शासन की यह पहल पुरानी पेंशन योजना की बहाली को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
सदन में कांग्रेस ने उठाया दिव्यांगजनों पर कार्रवाई का मामला, बर्बरता करने वालों पर कार्रवाई की मांग…
रायपुर। राजधानी में दिव्यांगजनों के प्रदर्शन और पुलिसिया कार्रवाई को कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने पुलिस-प्रशासन की बर्बरता करार देते हुए कहा कि सरकार दिव्यांगजन पर बर्बरता करने वालों पर कार्रवाई करे. उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों की मांगों को सुने और पूरा करे.
कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने सदन में भी दिव्यांगजनों का मुद्दा सदन में उठाया था. उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन अपनी मांगों को लेकर विधानसभा तक पहुंचे थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने बर्बरतापूर्वक मारपीट की. मुंगेली के एक दिव्यांग का हाथ टूट गए और कपड़े भी फट गए हैं. कई ऐसे दिव्यांगजन है जिनका मोबाइल छीनकर तोड़ दिया गया है.
इसके साथ उन्होंने सवाल किया कि पुलिस प्रशासन किसके आदेश पर यह कार्रवाई कर रही है? सुप्रीम कोर्ट का भी आदेश है पुलिस किसी पर हाथ नहीं उठा सकती. यह सुप्रीम कोर्ट और संविधान का उल्लंघन है. सरकार दिव्यांगजन पर बर्बरता करने वालों पर कार्रवाई करें. दिव्यांगजनों की की मांगों को सुने और पूरी करे
रेत के अवैध परिवहन पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 18 ट्रैक्टर जब्त
गरियाबंद। देवभोग तहसील में बहने वाले तेल नदी से अवैध रेत परिवहन में लगे 18 ट्रैक्टरों को आज माइनिंग विभाग की टीम ने जब्त किया. जिला खनिज अधिकारी रोहित साहू के नेतृत्व में यह कार्रवाई हुई. सभी जब्त वाहनों को देवभोग थाना के सुपुर्द किया गया है. इस कार्रवाई के बाद ट्रैक्टर वाहन मालिकों ने कार्रवाई का विरोध भी किया है. समाधान के लिए एसडीएम दफ्तर भी पहुंचे पर नियम का हवाला देकर अफसरों ने कार्रवाई को जायज ठहराया.

पीएम आवास के लिए मिली थी छूट
कार्रवाई रुकवाने एसडीएम दफ्तर पहुंचे ट्रैक्टर मालिक प्रह्लाद बीसी, सुशील पांडे ने कहा कि ट्रैक्टर मालिकों की दलील है कि सरकार ने खुद विधानसभा से पीएम आवास के लिए रेत परिवहन को छूट देने का ऐलान किया था, लेकिन कार्रवाई क्यों की जा रही है. सिनापली के विद्याधर ध्रुव समेत कुछ चालकों ने पंचायत का वह प्रमाण पत्र भी दिखाया, जिसमें आवास हितग्राहियों के लिए परिवहन का जिक्र किया गया था, लेकिन इनकी सुनवाई नहीं हुई.




