प्रदेश
औचक निरीक्षण पर बालक आश्रम पहुंचे सांसद भोजराज नाग, नशे में धुत मिला प्रधान अध्यापक, किया गया निलंबित
कांकेर। जिले के दुर्गुकोंडल ब्लॉक अंतर्गत सुरंगदोह बालक आश्रम में बुधवार को सांसद भोजराज नाग के औचक निरीक्षण के दौरान एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया। आश्रम के अधीक्षक ओकेश्वर चुरेंद्र को नशे की हालत में पाया गया। अधीक्षक ने शर्ट भी उलटी पहन रखी थी और जब टोका गया, तब भी बटन तक ठीक से नहीं लगा सका। यह दृश्य देखकर सांसद नाराज़ हो गए और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
नशे में धुत अधीक्षक — शर्मनाक लापरवाही का मामला
सांसद भोजराज नाग जब आश्रम पहुंचे, तो अधीक्षक ओकेश्वर चुरेंद्र नशे में झूमते हुए बच्चों के बीच घूमते मिले। उनकी शर्ट उलटी थी और व्यवहार पूरी तरह से असामान्य और असंवेदनशील था। सांसद ने जब पूछताछ की, तो अधीक्षक कुछ भी स्पष्ट नहीं बोल पाए।
तत्काल निलंबन, मुख्यालय किया गया कोयलीबेड़ा स्थानांतरित
घटना की गंभीरता को देखते हुए सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग कांकेर ने प्राथमिक जांच के बाद अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन आदेश में उल्लेख है कि अधीक्षक का आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 (1, 2, 3) के प्रतिकूल है। इसलिए उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम 1966 के तहत निलंबित किया गया है।निलंबन अवधि में चुरेंद्र का मुख्यालय खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, कोयलीबेड़ा नियत किया गया है।
जिला प्रशासन सख्त — सभी आश्रमों की होगी औचक जांच
कांकेर कलेक्टर नीलेश कुमार महादेव क्षीरसागर ने मीडिया से बातचीत में बताया कि,
“सांसद के निरीक्षण के दौरान अधीक्षक को नशे में पाया गया, यह अत्यंत गंभीर मामला है। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। साथ ही अब जिले के सभी आश्रम-छात्रावासों की औचक जांच के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई है।”
उद्देश्य: बच्चों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में बच्चों की देखभाल, सुरक्षा और सुविधा में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। इस घटना ने व्यवस्था की खामियों को उजागर किया है, और अब जिला प्रशासन इन्हें दुरुस्त करने के लिए सख्त और ठोस कदम उठा रहा है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 : आवेदन की अंतिम तिथि में बढ़ोतरी, अब 31 जुलाई तक कर सकेंगे अप्लाई
रायपुर। केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP) के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है. छत्तीसगढ़ शासन ने राज्यभर के नागरिकों, संस्थाओं, अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के 5 से 18 वर्ष की आयु वाले उन बच्चों को इस सम्मान के लिए 31 जुलाई 2025 तक आवेदन कराएं, जिन्होंने बहादुरी, सामाजिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण, खेल, कला-संस्कृति और विज्ञान-प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में असाधारण प्रदर्शन किया है. पहले आवेदन की अंतिम तिथि 15 मई थी.
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने जानकारी दी कि नामांकन राष्ट्रीय पुरस्कार के https://awards.gov.in पोर्टल के माध्यम से केवल ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे. पात्र बच्चों के लिए नामांकन की आयु सीमा 5 से 18 वर्ष तय की गई है. कोई भी व्यक्ति या संस्था ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों को नामांकित कर सकती है. इच्छुक बच्चे स्वयं भी आवेदन कर सकते हैं.
नामांकन के लिए पंजीकरण के दौरान आवेदकों को अपना नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, ईमेल, आधार संख्या सहित अन्य जानकारी देनी होगी. इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 श्रेणी का चयन कर आवेदन भरना होगा. आवेदन पत्र में उपलब्धियों का 500 शब्दों का संक्षिप्त विवरण, आवश्यक दस्तावेज (पीडीएफ, अधिकतम 10 फाइलें) और हालिया फोटो (जेपीजी/पीएनजी) अपलोड करना अनिवार्य है.
आवेदन ड्राफ्ट के रूप में सेव कर अंतिम तिथि से पहले संपादित कर जमा किया जा सकता है. अधिक जानकारी और आवेदन के लिए https://awards.gov.in पर विजिट करें. सरकार का उद्देश्य इन पुरस्कारों के माध्यम से देशभर के युवाओं की प्रेरणादायक उपलब्धियों को पहचान देना और बच्चों के समग्र विकास के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करना है.
प्राचार्य पदोन्नति मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को
रायपुर। प्राचार्य पदोन्नति प्रकरण में सिंगल बैंच से नारायण प्रकाश तिवारी केश में स्टे की सुनवाई आज हाई कोर्ट जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल के कोर्ट में हुई, याचिकाकर्ता के वकील ने रिज्वाइंडर के लिए जस्टिस से प्रे किया जिसे मानते हुए एक सप्ताह का समय दिया गया, शासकीय पक्ष ने एक व्यक्ति कर लिए एक पद सुरक्षित रखते हुए स्टे हटाने आग्रह किया, किंतु उन्हें रिलीफ नही मिली.
कोर्ट में महाधिवक्ता यशवंत ठाकुर ने 14 को सुनवाई के लिए प्रे मेंशन किया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया था और 4 बजे 14 जुलाई का समय तय किया गया था, जिसमे याचिकाकर्ता के वकील शामिल नही हुए जिसके कारण 16 जुलाई का समय पुनः दिया गया था।
केश की सुनवाई में एजी ने कोर्ट को बताया गया कि नियम सहित अभी के आपत्ति के सभी विषय पर माननीय डबल बैंच में इस प्रकृति के सभी केश को निराकृत करते हुए स्टे हटा दिया गया है।
ज्ञात हो छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय डबल बैंच में जस्टिस माननीय रजनी दुबे एवं माननीय जस्टिस अमितेंद्र कुमार प्रसाद की बेंच में सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला 17 जून को सुरक्षित रखा गया था।
माननीय हाई कोर्ट में 9 जून से 17 जून तक लगातार सुनवाई हुआ, जिसमे याचिकाकर्ताओं ने अपने अपने विषय मे तथ्यों के साथ पक्ष रखा था, वहीं अतिरिक्त महाधिवक्ता के साथ साथ इंटरविनर ने भी लाभार्थी व शासकीय पक्ष को मजबूती से रखा था। ज्ञात हो शिक्षा विभाग ने 30 अप्रैल को प्राचार्य पदोन्नति की सूची जारी की थी, जिसे माननीय हाई कोर्ट ने 1 मई को स्थगित किया था, जिसमे सुनवाई चली।
प्राचार्य पदोन्नति विषय मे शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर ने सभी विषय पर विशेष पक्ष रखा था साथ ही छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के इंटरविनर अधिवक्ता अनूप मजूमदार, अमृतोदास, विनोद देशमुख, जमील अख्तर व अन्य ने भी विशेष रूप से लाभार्थियों के पक्ष में न्यायसंगत पक्ष मजबूती से रखे थे।
अंत मे हाई कोर्ट ने सभी को सुनने के बाद फैसला 17 जून को सुरक्षित रख लिया है, जिसमे सभी आपत्ति को खारिज करते हुए प्राचार्य पदोन्नति की जारी सूची से स्टे हटाते हुए हरी झंडी दिया गया, हाई कोर्ट ने शासन के पक्ष को सही माना है। नियम 15 को संशोधन करने कहा गया है।
आज जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल ने याचिकाकर्ता नारायण प्रसाद तिवारी की याचिका में रिज्वाइंडर के लिए 1 सप्ताह का पुनः समय दिया। एजी ने नए शिक्षा सत्र का हवाला भी दिया किंतु राहत नही मिली। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने सचिव स्कूल शिक्षा विभाग व संचालक लोक शिक्षण छत्तीसगढ़ से भेंटकर इस विषय मे चर्चा किया था, स्कूल में प्राचार्य के अधिसंख्य पद रिक्त है, शालाओ में शिक्षण सत्र की तैयारियों में प्राचार्य की शीघ्र पदोन्नति जरूरी है।
माननीय न्यायालय व सुनवाई के दौरान संजय शर्मा, मनोज सनाढ्य, मुकेश पांडेय, रामगोपाल साहू, राजेश शर्मा, चिंताराम कश्यप, चंद्रशेखर गुप्ता, तोषण गुप्ता, अनामिका तिवारी, मोहन तिवारी, पवन पटेल लगातार सक्रिय थे।
छत्तीसगढ़ व्यापम की परीक्षा में हाईटेक नकल मामला, कांग्रेस ने 10 सदस्यीय जांच समिति का किया गठन
रायपुर। छत्तीसगढ़ में व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) द्वारा आयोजित सब-इंजीनियर भर्ती परीक्षा के दौरान हाईटेक नकल कांड ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिया है। अब इस मामले में कांग्रेस ने 10 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है।
जांच समिति का संयोजक पूर्व संसदीय सचिव यू.डी. मिंज को बनाया गया है। वहीं सदस्य में पूर्व विधायक विनय भगत, पीसीसी महामंत्री आरती सिंह, एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय, ज़िला कांग्रेस अध्यक्ष मनोज सागर यादव, नगर पंचायत कुनकुरी अध्यक्ष विनयशील, एनएसयूआई उपाध्यक्ष अमित शर्मा, हिमांशु जायसवाल, एनएसयूआई महासचिव विकास सिंह ठाकुर और प्रदेश सचिव एनएसयूआई मयंक सिंह गौतम शामिल हैं। यह समिति नकल प्रकरण की गहराई से जांच कर संलिप्त छात्रों, उनके परिजनों से बातचीत कर वस्तुस्थिति की रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करेगी।
ऐसे हुआ हाईटेक नकल का खुलासा
बता दें कि यह घटना रविवार को बिलासपुर के शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सरकंडा (परीक्षा केंद्र क्रमांक 1309) की है, जहां परीक्षा केंद्र परिसर के बाहर मौजूद अनुराधा बाई नामक युवती वॉकी-टॉकी, टैबलेट, ब्लूटूथ डिवाइस और मोबाइल फोन की मदद से अंदर कक्ष क्रमांक 7 में बैठी परीक्षार्थी अन्नु सूर्या (रोल नंबर 13091014) को उत्तर भेज रही थी। यह पूरी चालबाजी तब उजागर हुई जब एक सतर्क ऑटो चालक को युवती की गतिविधियों पर शक हुआ। उसने तुरंत अपने परिचित एनएसयूआई नेता विकास ठाकुर को सूचना दी। इसके बाद विकास अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचा और पाया कि युवती के पास हाईटेक डिवाइसेस हैं, जिनके जरिए वह परीक्षा हॉल में बैठी परीक्षार्थी को उत्तर भेज रही थी। पूछताछ के दौरान युवती ने बताया कि परीक्षा में शामिल परीक्षार्थी उसकी सहेली है।
संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पर परीक्षा स्टाफ ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए परीक्षार्थी अन्नु की तलाशी ली। तलाशी के दौरान हिडन कैमरा और माइक्रो स्पीकर जैसी हाईटेक डिवाइसेस उसके अंतःवस्त्रों में छिपी हुई पाई गईं। यह सभी उपकरण नकल में उपयोग किए जा रहे थे। घटना का पूरा वीडियो मौके पर मौजूद युवकों द्वारा बनाया गया, जो अब सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ।
परीक्षा में हाईटेक नकल सामने आने के बाद व्यापम ने परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाते हुए आरोपी परीक्षार्थी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है।
पुरानी पेंशन योजना: CGPF राशि के अंतिम भुगतान की ऑनलाइन प्रक्रिया तय, जानिये क्या है प्रक्रिया
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल किए जाने के बाद, अब राज्य सरकार ने सी.जी.पी.एफ. (छत्तीसगढ़ सामान्य भविष्य निधि) खातों की अंतिम निकासी के लिए पूर्णतः ऑनलाइन प्रक्रिया निर्धारित कर दी है। यह व्यवस्था उन शासकीय सेवकों पर लागू होगी, जो सेवा समाप्ति, त्यागपत्र, सेवानिवृत्ति या मृत्यु के पश्चात CGPF राशि के आहरण के पात्र होंगे।इस नई प्रक्रिया से संबंधित तीनों स्तरों — कार्यालय प्रमुख, संचालनालय पेंशन एवं भविष्य निधि, तथा कोषालय — की जिम्मेदारियाँ और कार्यप्रणाली स्पष्ट की गई है।
ऑफिस स्तर पर क्या करना होगा?
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cps.cg.nic.in पोर्टल पर DDO/Employee ID लॉगिन से शासकीय सेवक का CGPF खाता विवरण देखा जा सकेगा।
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सेवा समाप्ति/सेवानिवृत्ति/मृत्यु के मामलों में संबंधित व्यक्ति या नॉमिनी के लिए “Online CGPF Final Payment System” पर प्रकरण तैयार किया जाएगा।
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जरूरी विवरण — जैसे व्यक्तिगत, विभागीय, गणना व दस्तावेज़ प्रविष्टियाँ — दर्ज की जाएंगी।
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अनुसूची-5 (सेवानिवृत्ति/त्यागपत्र) या अनुसूची-7 (मृत्यु) और डिजिटल हस्ताक्षरित CGPF पासबुक सहित सभी आवश्यक दस्तावेज स्कैन कर अपलोड किए जाएंगे।
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दस्तावेज़ों की चेकलिस्ट अनुसार पुष्टि कर संचालनालय को ऑनलाइन प्रेषित किया जाएगा।
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ई-प्राधिकार पत्र (e-CGPF Authority Letter) प्राप्त होने के बाद DDO द्वारा ई-बिल तैयार कर कोषालय भेजा जाएगा।
संचालनालय स्तर की प्रक्रिया:
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संचालनालय, पेंशन एवं भविष्य निधि अपने User ID/Password से लॉगिन कर प्रकरण की पुष्टि और परीक्षण करेगा।
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CGPF पासबुक व अन्य दस्तावेजों का मूल्यांकन किया जाएगा।
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कोई भिन्नता होने पर ऑनलाईन अभिलेखों के आधार पर राशि व ब्याज का पुनः निर्धारण किया जाएगा।
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जांच पूर्ण होने के बाद डिजिटल हस्ताक्षरित e-CGPF Authority Letter जारी कर DDO, कोषालय व अभिदाता को भेजा जाएगा।
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NIC के सहयोग से वेबसाइट का सुचारू संचालन व सुधार का कार्य संचालनालय द्वारा किया जाएगा।
कोषालय / उप-कोषालय स्तर पर:
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कोषालय स्तर पर प्राप्त e-CGPF Authority Letter के आधार पर ई-बिल सॉफ्टवेयर में देयक तैयार किया जाएगा।
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डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त प्राधिकार पत्र की पुष्टि के बाद संबंधित शासकीय सेवक/नॉमिनी के खाते में भुगतान किया जाएगा।
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भुगतान का लेखांकन लेखा शीर्ष 8009-राज्य भविष्य निधियों के अंतर्गत किया जाएगा।
इस प्रणाली के लाभ:
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प्रक्रिया पारदर्शी, ऑनलाइन व समयबद्ध है।
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शासकीय सेवकों एवं उनके परिजनों को अंतिम भुगतान के लिए क्लियर और ट्रैक करने योग्य व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है।
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राज्य शासन की यह पहल पुरानी पेंशन योजना की बहाली को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
सदन में कांग्रेस ने उठाया दिव्यांगजनों पर कार्रवाई का मामला, बर्बरता करने वालों पर कार्रवाई की मांग…
रायपुर। राजधानी में दिव्यांगजनों के प्रदर्शन और पुलिसिया कार्रवाई को कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने पुलिस-प्रशासन की बर्बरता करार देते हुए कहा कि सरकार दिव्यांगजन पर बर्बरता करने वालों पर कार्रवाई करे. उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों की मांगों को सुने और पूरा करे.
कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने सदन में भी दिव्यांगजनों का मुद्दा सदन में उठाया था. उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन अपनी मांगों को लेकर विधानसभा तक पहुंचे थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने बर्बरतापूर्वक मारपीट की. मुंगेली के एक दिव्यांग का हाथ टूट गए और कपड़े भी फट गए हैं. कई ऐसे दिव्यांगजन है जिनका मोबाइल छीनकर तोड़ दिया गया है.
इसके साथ उन्होंने सवाल किया कि पुलिस प्रशासन किसके आदेश पर यह कार्रवाई कर रही है? सुप्रीम कोर्ट का भी आदेश है पुलिस किसी पर हाथ नहीं उठा सकती. यह सुप्रीम कोर्ट और संविधान का उल्लंघन है. सरकार दिव्यांगजन पर बर्बरता करने वालों पर कार्रवाई करें. दिव्यांगजनों की की मांगों को सुने और पूरी करे
रेत के अवैध परिवहन पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 18 ट्रैक्टर जब्त
गरियाबंद। देवभोग तहसील में बहने वाले तेल नदी से अवैध रेत परिवहन में लगे 18 ट्रैक्टरों को आज माइनिंग विभाग की टीम ने जब्त किया. जिला खनिज अधिकारी रोहित साहू के नेतृत्व में यह कार्रवाई हुई. सभी जब्त वाहनों को देवभोग थाना के सुपुर्द किया गया है. इस कार्रवाई के बाद ट्रैक्टर वाहन मालिकों ने कार्रवाई का विरोध भी किया है. समाधान के लिए एसडीएम दफ्तर भी पहुंचे पर नियम का हवाला देकर अफसरों ने कार्रवाई को जायज ठहराया.

पीएम आवास के लिए मिली थी छूट
कार्रवाई रुकवाने एसडीएम दफ्तर पहुंचे ट्रैक्टर मालिक प्रह्लाद बीसी, सुशील पांडे ने कहा कि ट्रैक्टर मालिकों की दलील है कि सरकार ने खुद विधानसभा से पीएम आवास के लिए रेत परिवहन को छूट देने का ऐलान किया था, लेकिन कार्रवाई क्यों की जा रही है. सिनापली के विद्याधर ध्रुव समेत कुछ चालकों ने पंचायत का वह प्रमाण पत्र भी दिखाया, जिसमें आवास हितग्राहियों के लिए परिवहन का जिक्र किया गया था, लेकिन इनकी सुनवाई नहीं हुई.

एकतरफा कार्रवाई का आरोप, भंडारण पर उठा सवाल
10 जून को रेत परिवहन बंद होने के बावजूद यहां कुछ रेत गिरोह द्वारा प्रति ट्रैक्टर 300 रुपए की अवैध उगाही की जा रही थी. कुछ को 600 रुपए की भंडारण रॉयल्टी पर्ची दी गई, लेकिन परिवहन भंडारण स्थल के बजाए रेत घाट से हो रही थी. यहां तक कि पुरना पानी घाट में रात के अंधेरे में फोकलेन लगाकर हाइवा से बेधड़क सप्लाई हो रही थी. इसकी शिकायत ऊपर तक हुई. इस शिकायत के बाद एक गुट ने ट्रैक्टर में हो रहे परिवहन की शिकायत कर दी. आज माइनिंग की टीम दो शिकायतों के आधार पर कार्यवाही करने पहुंची पर भंडारण और अवैध उगाही की शिकायत पर कार्रवाई नहीं की.
जिला खनिज अधिकारी बोले – अवैध उगाही पर भी कार्रवाई करेंगे
मामले में जिला खनिज अधिकारी रोहित साहू ने दो प्रकार से हुई शिकायत की पुष्टि की है. रोहित साहू ने कहा कि फिलहाल कुम्हड़ाई घाट पर अवैध परिवहन करने वाले ट्रैक्टरों पर कार्रवाई की गई है. आगे पुरना पानी घाट में होने वाले अवैध उगाही की भी जांच कर उचित कार्रवाई करेंगे.
ट्रैक्टर के चलते बंद हो गया था हाईवा कारोबार
ट्रैक्टरों के दौड़ने से हाईवा वाले बड़े रसूखदारों का कारोबार पूरी तरह से बंद हो गया था. इन दिनों ज्यादातर निर्माण पीएम आवास का चल रहा है. ऐसे में गांव गांव में छोटे हितग्राही कम कीमतों पर आसानी से रेत हासिल कर रहे थे. अब ट्रैक्टरों पर लगी रोक के बाद रात के अंधेरे का बड़ा अवैध कारोबार फिर से शुरू हो जाएगा. प्रति हाईवा 10 से 15 हजार के बीच सप्लाई की जाएगी. देवभोग में जिस समय भंडारण की अनुमति दी गई उस समय तक वैध खदान शुरू नहीं हो सका था, लेकिन बंद होने से पहले महज 10 दिनों तक वैध खदान जारी रहा. नियम अनुसार विभाग ने भंडारण स्थल का पूर्व और खदान बंद होने के बाद का सत्यापन कैसे किया है. इस पर भी ट्रैक्टर मालिकों ने सवाल खड़ा कर दिया है.
शराब घोटाला मामला : पूर्व मंत्री लखमा की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, EOW में दर्ज मामले पर फैसला सुरक्षित
बिलासपुर। शराब घोटाला मामले में जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका लगाई है। ईओडब्ल्यू और ईडी में दर्ज मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने EOW में दर्ज मामले में जमानत याचिका की सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रखा है। वहीं ईडी में दर्ज केस में जमानत याचिका पर ईडी को नोटिस जारी कर तीन हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। दोनों ही मामले में अधिवक्ता हर्षवर्द्धन परगनिहा ने लखमा की तरफ से कोर्ट में अपना पक्ष रखा। जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई अगस्त के पहले सप्ताह में रखी है।
बता दें कि ईडी, एसीबी और ईओडब्ल्यू की कार्रवाई को लखमा ने चुनौती दी है। विशेष कोर्ट में प्रस्तुत 1100 पन्नों की चार्जशीट में पूर्व आबकारी मंत्री को शराब घोटाले से 64 करोड़ रुपये कमीशन मिलने की बात कही गई है। चार्जशीट में बताया है कि जांच में साक्ष्यों और वित्तीय विश्लेषण से यह निर्विवाद रूप से सिद्ध हुआ है कि कवासी लखमा, जो एक उत्तरदायित्वपूर्ण संवैधानिक पद पर आसीन थे, उन्होंने न केवल अपने कर्तव्यों की घोर उपेक्षा की, बल्कि मंत्री पद की शक्तियों का उपयोग कर नीतिगत निर्णयों में हस्तक्षेप, अधिकारियों की पदस्थापना में प्रभाव, टेंडर प्रक्रियाओं में विकृति और नगद लेन-देन की एक समानांतर व्यवस्था स्थापित कर पूरे विभागीय तंत्र को भ्रष्टाचार के माध्यम से संचालित किया।
चार्जशीट में कहा गया है कि मंत्री के संरक्षण में विभागीय अधिकारियों, सहयोगियों और ठेकेदारों के माध्यम से सुनियोजित घोटाले को अंजाम दिया गया। कमीशन राशि को मंत्री लखमा ने अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों के लिए उपयोग कर भारी मात्रा में लाभ अर्जित किया। एसीबी ने स्पेशल कोर्ट को बताया कि घोटाले में मिले 64 करोड़ में से 18 करोड़ रुपये के अवैध निवेश और खर्च संबंधी दस्तावेजी साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान पर आधारित पुस्तिका का किया विमोचन
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा परिसर स्थित अपने कक्ष में ‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पंचायती राज दिवस के अवसर पर प्रारंभ किए गए इस विशेष अभियान ने जल संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में अभूतपूर्व चेतना उत्पन्न की है। विमोचन कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, प्रमुख सचिव पंचायत निहारिका बारीक, आयुक्त मनरेगा और संचालक प्रधानमंत्री आवास योजना तारण प्रकाश सिन्हा सहित अनेक अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ग्राम पंचायतों की सक्रियता और जनता की स्वप्रेरित भागीदारी के चलते यह अभियान अब एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। लोग स्वेच्छा से जल संरक्षण जैसे पुनीत कार्यों से जुड़ रहे हैं, जो सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि पुस्तिका में राज्य की विभिन्न पंचायतों द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों और नवाचारों को संकलित किया गया है, जो अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अभियान के अंतर्गत सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियों के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रदेश की 11,000 से अधिक ग्राम पंचायत भवनों की दीवारों पर भूजल स्तर अंकित किया गया है, जिससे लोगों में जल के महत्व को लेकर व्यावहारिक चेतना जागृत हुई है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की भूमिका जल संरक्षण को जन-भागीदारी से जोड़ने में महत्वपूर्ण रही है, और यह चेतना आने वाले समय में और भी व्यापक स्वरूप लेगी।
उल्लेखनीय है कि ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत रैली, दीवार लेखन जैसे माध्यमों से व्यापक स्तर पर जनसामान्य को जल संरक्षण के प्रति संवेदनशील और जागरूक किया गया है। 626 क्लस्टर्स में आयोजित प्रशिक्षणों के माध्यम से 56,000 से अधिक प्रतिभागियों को जल प्रबंधन और संरक्षण के लिए तैयार किया गया है।
अभियान में GIS तकनीक का उपयोग कर जल संरक्षण कार्यों की प्रभावी योजना बनाई जा रही है, जबकि जलदूत ऐप के माध्यम से खुले कुओं का जल स्तर मापा जा रहा है। इसके अतिरिक्त, परकोलेशन टैंक, अर्दन डैम, डिफंक्ट बोरवेल रिचार्ज स्ट्रक्चर जैसे संरचनात्मक उपायों के माध्यम से जल पुनर्भरण और संरक्षण के स्थायी प्रयास किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों के यह प्रयास छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित करेंगे।
नेता प्रतिपक्ष ने CM साय को दिया धन्यवाद, बिजली दामों में बढ़ोतरी पर विपक्ष ने लाया था स्थगन, सरकार के जवाब से संतुष्ट हुआ विपक्ष
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के रजत जयंती वर्ष में इतिहास बन गया. बिजली दर में वृद्धि पर विपक्ष का स्थगन प्रस्ताव आसंदी ने अस्वीकार्य कर दिया. लेकिन प्रस्ताव अस्वीकार्य होने के बाद भी विपक्ष ने हंगामा नहीं किया. वहीं नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के द्वारा विषय को गंभीरता से लेने पर आभार जताया. इस पर सत्तापक्ष ने मेजें थपथपाई।
शून्यकाल में नेता-प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने बिजली दर में वृद्धि का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बिजली दर में वृद्धि से पूरा छत्तीसगढ़ परेशान है. गरीबों को बिजली दर में वृद्धि आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है. विपक्ष ने जो स्थगन दिया है, उस पर चर्चा होनी चाहिए.
इस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सदन में वक्तव्य देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2025-26 हेतु घोषित बिजली टैरिफ में मात्र 1.89 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जो कि विगत वर्षों में न्यूनतम वृद्धि में से एक है. यह निर्णय जनसुनवाई की प्रक्रिया के बाद पारदर्शी ढंग से लिया गया है और इसे घरेलू उपभोक्ताओं से लेकर स्टील और रोलिंग मिल उद्योगों तक ने सराहा है.
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि घरेलू विद्युत दरों में केवल 10 से 20 पैसे तक की मामूली वृद्धि की गई है, जबकि कृषि पंप उपभोक्ताओं के लिए 50 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है — जिसका सीधा असर किसानों पर नहीं पड़ेगा क्योंकि यह राशि शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में पहले से अग्रिम भुगतान की जा रही है. उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि छत्तीसगढ़ के कृषक वर्ग पर कोई अतिरिक्त आर्थिक भार न पड़े. सरकार किसानों के हितों की पूरी तरह से रक्षा कर रही है.
उद्योगों को बढ़ावा — स्टील इंडस्ट्री की दरों में कटौती
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बनाए रखने हेतु मिनी स्टील, रोलिंग मिल और फेरो एलॉय जैसे ऊर्जा-गहन उद्योगों की दरों में कटौती की है. यह निर्णय उद्योगों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में औसतन 23.55 घंटे/दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 23.45 घंटे/दिन बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है. विशेष रूप से कृषि फीडरों में 18 घंटे प्रतिदिन की आपूर्ति दी जा रही है, जो देश के सभी राज्यों में सर्वाधिक आंकड़ों में शामिल है. तकनीकी और वाणिज्यिक हानि (AT&C Loss) को 2020-21 में 23.14% से घटाकर 2024-25 में 13.79% किया गया है. यह उपलब्धि दक्ष संचालन, पारदर्शी व्यवस्था और तकनीकी सुधारों का प्रमाण है.
कोरबा में 1320 मेगावॉट का नया प्लांट
वर्तमान टैरिफ में केपिटल इन्वेस्टमेंट प्लान का भी समावेश है जिसके अंतर्गत ट्रांसमिशन कंपनी के लिए ₹2433 करोड़, डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के लिए ₹3977 करोड़ और जनरेशन कंपनी के लिए ₹2992 करोड़ का प्रावधान है. कोरबा में 1320 मेगावॉट के प्लांट की स्थापना का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है, जिसकी लागत ₹15,800 करोड़ है. इससे छत्तीसगढ़ भविष्य में ऊर्जा-सरप्लस राज्य बनेगा और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी.
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए डबल अनुदान योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 3 किलोवाट तक के संयंत्रों पर ₹78,000 तक केंद्र सरकार से अतिरिक्त 2 किलोवाट तक के संयंत्रों पर ₹30,000 तक राज्य शासन से अनुदान दिया जाएगा. यह योजना छत्तीसगढ़ के घरेलू उपभोक्ताओं को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में क्रांतिकारी पहल है.
ऊर्जा के क्षेत्र में 3 लाख करोड़ रुपए के करार
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि पॉवर कंपनी/शासन द्वारा 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के करार किए गए हैं, जिससे आने वाले समय में ऊर्जा उत्पादन और रोजगार दोनों के क्षेत्र में क्रांति आएगी.
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हमारी प्राथमिकता है कि बिजली उपभोक्ताओं को न केवल निर्बाध आपूर्ति मिले, बल्कि वह गुणवत्तापूर्ण, सस्ती और टिकाऊ हो. वर्तमान और भावी योजनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ ऊर्जा के क्षेत्र में राष्ट्रीय मानक स्थापित करेगा.
नेता प्रतिपक्ष ने सीएम को दिया धन्यवाद
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को धन्यवाद देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने काम करने की बात कही है. उन बातों से हमें लगा कि वह ध्यान दे रहे हैं. हमें लगा कि उन्होंने इसको सीरियस माना है. इसलिए हमने उनका धन्यवाद दिया.
विधानसभा में प्रधानमंत्री आवास योजना में घोटाले की गूंज, नेता प्रतिपक्ष ने की CBI जांच की मांग, सदन में हंगामा
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रश्नकाल में बुधवार को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में भ्रष्टाचार और लेनदेन के आरोपों को लेकर जोरदार बहस हुई। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आरोप लगाया कि कई जिलों में आवास स्वीकृति के बदले लाभार्थियों से पैसे लिए जा रहे हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की CBI जांच की मांग कर डाली।
डॉ. महंत ने कहा कि आवास मित्रो और ग्रामीणों से शिकायतें मिली हैं कि बैगा परिवारों समेत अन्य हितग्राहियों से पैसों की वसूली की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि तखतपुर, कोटा, महेंद्रगढ़ और जशपुर जैसे इलाकों में कई मकानों को अधूरा होने के बावजूद पूर्ण दिखा दिया गया है, और कई जगह मृत लोगों के नाम पर भी भुगतान हो चुका है।
डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा ने जवाब में कहा कि राज्य सरकार सुशासन और पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार में सुशासन है और सुदर्शन भी है, किसी भी गड़बड़ी को बख्शा नहीं जाएगा। कुकदूर (कबीरधाम) क्षेत्र की शिकायत पर जांच चल रही है, तखतपुर की जानकारी आप अभी दे रहे हैं, उस पर भी कार्रवाई होगी।”
डॉ. महंत ने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री स्वयं कह चुके हैं कि जहां-जहां गड़बड़ी मिलेगी, वहां कलेक्टरों पर कार्रवाई होगी, तो अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए? उन्होंने कहा कि “सुशासन तिहार” के दौरान भी दर्जनों शिकायतें सामने आई थीं लेकिन अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई।
मनरेगा भुगतान पर भी उठा सवाल
महंत ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर मनरेगा के अंतर्गत मजदूरी भुगतान नहीं हुआ है, जबकि सरकार का दावा है कि 30 जून तक सभी भुगतान पूरे हो चुके हैं। इस पर विजय शर्मा ने जवाब देते हुए कहा कि “लेबर पेमेंट का काम समय पर हो गया है, अगर कहीं गड़बड़ी है तो जानकारी दें, कार्रवाई होगी।”
एआई डाटा को लेकर भी बहस
महंत ने कहा कि मंत्री बार-बार AI के आंकड़ों को खारिज कर रहे हैं, जबकि रिपोर्टें वास्तविक स्थिति को दर्शा रही हैं। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि “AI की रिपोर्टें हमेशा 100% विश्वसनीय नहीं होतीं।”
सदन में हुआ हंगामा
विजय शर्मा के इस बयान पर कि “जिनकी सरकार ने पहले आवास योजना को ठुकराया, वे अब सवाल खड़े कर रहे हैं”, विपक्ष भड़क उठा और सदन में हंगामा हो गया। तीखी नोकझोंक के बीच डॉ. महंत ने दो टूक कहा कि राज्य सरकार या EOW इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती, इसलिए CBI जांच की जरूरत है।
चिंगरापगार, गजपल्ला वाटरफॉल पर पर्यटकों की आवाजाही प्रतिबंधित, हादसे के बाद प्रशासन ने लगाई रोक
गरियाबंद। दोस्तों के साथ घुमने आई रायपुर की युवती सोमवार शाम को गजपल्ला वाटरफॉल की गहराई में गिर गई थी. 24 घंटे बाद उनका शव 20 फीट गहराई में पत्थरों के सुरंग के बीच से निकाला गया. इस रेस्क्यू में वन विभाग, नगर सेना, पुलिस और स्थानीय गोताखोर के 60 से ज्यादा जवान जुटे थे. वहीं इस हादसे के बाद चिंगरापगार, गजपल्ला वाटरफॉल में पर्यटकों के आने पर प्रशासन ने पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है.
सोमवार को लगभग 4 बजे गजपल्ला वाटर फॉल के गहराई में रायपुर की 19 वर्षीय मेहवीस खान गिरी थी. एसडीआरएफ की टीम ने वाटर प्रूफ कैमरे लेकर गहरे पानी के नीचे तलाश की तो पता चला 20 फीट गहराई में मौजूद चट्टान में बने सुरंग नुमा स्थल पर मृतका का शव फंसा है. एसडीआरएफ के लांस नायक उमेश सिन्हा ने बताया कि 20 फीट नीचे पत्थरों के सुरंग में युवती का शव फंसा था, जिसे निकाल लिया गया है. रेस्क्यू में रायपुर के एसडीआरएफ की टीम समेत गरियाबंद प्रशासन के 60 से ज्यादा जवान जुटे थे.
मधुमक्खियों ने रेस्क्यू टीम पर किया हमला
गजपल्ला में मौजूद वृक्ष में दर्जनभर से ज्यादा मधुमक्खियों के छत्ते मौजूद हैं. रेस्क्यू ऑपरेशन के दरम्यान मधुमक्खियों ने रेस्क्यू टीम पर हमला भी कर दिया. स्थानीय तीन मददगारों पर मधुमक्खी ने हमला कर दिया था, जिससे एक घंटे तक आपरेशन बाधित हुआ. मौके पर पाण्डुका थाना प्रभारी, गरियाबंद रेंजर भी मौजूद हैं.




