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“बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026” का आयोजन 22 मार्च को जगदलपुर में
रायपुर। छत्तीसगढ़ में खेलों को बढ़ावा देने और बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर लाने के उद्देश्य से “बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026” का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह आयोजन राज्य के लिए एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। 22 मार्च को आयोजित होने वाली यह मैराथन जगदलपुर के लालबाग मैदान से प्रारंभ होकर चित्रकोट जलप्रपात तक पहुंचेगी। यह रूट प्रतिभागियों को बस्तर के प्राकृतिक और ऐतिहासिक सौंदर्य से रूबरू कराएगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह आयोजन ‘रन फॉर नेचर-रन फॉर कल्चर‘ की थीम के साथ राज्य की पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करेगा।
मैराथन में 42 किलोमीटर, 21 किलोमीटर, 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर जैसी अलग-अलग श्रेणियां रखी गई हैं, जिसमें देशभर से धावकों के शामिल होने की उम्मीद है। विजेता प्रतिभागियों के लिए कुल 25 लाख रूपए तक का आकर्षक पुरस्कार रखा गया है। साथ ही प्रतिभागियों को फिनिशर मेडल, ई-सर्टिफिकेट और रनिंग फोटोज़ दिए जाएंगे। कार्यक्रम में ज़ुम्बा सेशन और लाइव डीजे जैसी गतिविधियां भी होंगी। प्रतिभागी इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए वेबसाईट https://www.bastarheritage.run/registration एवं https://www.bastarheritage.run/registration का अवलोकन कर सकते हैं।
नेशनल ट्राइबल गेम्स : रायपुर में होंगे हॉकी, फुटबॉल, तैराकी, तीरंदाजी और वेट-लिफ्टिंग के आयोजन
रायपुर। छत्तीसगढ़ में आयोजित हो रहे खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स में देशभर के जनजातीय खिलाड़ी सात खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। इसमें देश के 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के करीब 3000 खिलाड़ी भागीदारी करेंगे। आयोजन के दौरान पुरूष एवं महिला वर्गों में राजधानी रायपुर में पांच खेलों तथा बस्तर संभागीय मुख्यालय जगदलपुर और सरगुजा संभागीय मुख्यालय अंबिकापुर में एक-एक खेल होंगे। इसमें छत्तीसगढ़ के कुल 164 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें 86 पुरूष और 78 महिला खिलाड़ी शामिल हैं।
तीनों शहरों में नेशनल ट्राइबल गेम्स के लिए चिन्हांकित खेल स्थलों व मैदानों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार तैयार करने का काम जोरों पर है। रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय फुटबॉल मैदान और स्वामी विवेकानंद एथलेटिक्स स्टेडियम कोटा में फुटबॉल की प्रतियोगिताएं होंगी। रायपुर के सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में हॉकी की स्पर्धाएं होंगी। वहीं रायपुर के अंतरराष्ट्रीय स्वीमिग पूल में तैराकी, खेल एवं युवा कल्याण विभाग संचालनालय के ओपन मैदान में तीरंदाजी तथा पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ओपन ग्राउंड में वेट-लिफ्टिंग की प्रतियोगिताएं संपन्न होंगी।
जगदलपुर के धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में एथलेटिक्स और अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में कुश्ती की प्रतियोगिताएं होंगी। खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स में देश के दो परंपरागत खेलों कबड्डी और मलखंब को भी डेमो गेम्स के रूप में शामिल किया गया है। कबड्डी की स्पर्धाएं रायपुर के सरदार बलबीर सिंह इंडोर स्टेडियम और मलखंब का प्रदर्शन अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में होगा।
भिलाई यस बैंक घोटाला: हाईकोर्ट ने CBI जांच के दिए आदेश
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने 165 करोड़ रुपये के भिलाई यस बैंक घोटाले की जांच के लिए सीबीआई को निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार की जांच प्रक्रिया पर नाराजगी जताते हुए यह आदेश जारी किया है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की जांच प्रक्रिया पर असंतोष जताते हुए कहा, घोटाले में तथ्यों को छुपाने और जांच के नाम पर लीपापोती की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यस बैंक द्वारा जांच में अपेक्षित सहयोग ना करने को लेकर भी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने दो टूक में कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी CBI जांच एकमात्र विकल्प है। लिहाजा पूरे घोटाले की सीबीआई से जांच कराई जाए।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डीबी ने दुर्ग भिलाई एसपी को निर्देशित किया है कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज, एफआईआर और काउंटर एफआईआर सहित पूरी जानकारी सीबीआई को सौंप दी जाए। कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई को नई एफआईआर दर्ज करने के भी निर्देश दिए हैं।
बता दें कि अनिमेष सिंह द्वारा की गई एफआईआर और हितेश चौबे द्वारा किए गए काउंटर प्रथम सूचना रिपोर्ट की संपूर्ण जानकारी सीबीआई को देने कहा गया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्वाभिमान पार्टी का उल्लेख किया है। याचिकाकर्ता प्रभुनाथ मिश्रा द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और कार्यवाहियों का भी विस्तृत जिक्र कोर्ट ने किया है।
रायपुर में भारी वाहनों की एंट्री पर समयबद्ध रोक, ट्रैफिक सुधार के लिए पुलिस का बड़ा फैसला
रायपुर। शहर में यातायात व्यवस्था को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। भारी एवं मध्यम मालवाहक वाहनों के शहर में प्रवेश पर समयबद्ध प्रतिबंध लागू कर दिया गया है।
जारी आदेश के अनुसार, रिंग रोड-01 और रिंग रोड-02 से शहर में आने वाले 18 प्रमुख मार्गों पर सुबह 5:00 बजे से रात 12:00 बजे तक भारी वाहनों की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। यह नियम आदेश जारी होने की तिथि से अगले एक महीने तक प्रभावी रहेगा।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला लोक सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि शहर में जाम की समस्या कम हो और आम नागरिकों को राहत मिल सके।
इन प्रमुख मार्गों पर रहेगा प्रतिबंध
प्रतिबंध जिन प्रमुख चौक-चौराहों और मार्गों पर लागू किया गया है, उनमें शामिल हैं—
तेलीबांधा चौक
केनाल रोड
महावीर नगर चौक
राजेंद्र नगर चौक
पचपेड़ीनाका चौक
संतोषीनगर चौक
भाठागांव चौक
कुशालपुर चौक
रायपुरा चौक
डीडी नगर
अरिहंत नगर
टाटीबंध
हीरापुर टर्निंग
गोगांव तिराहा
गोंदवारा तिराहा
भनपुरी पाटीदार भवन के सामने तक
विधानसभा रोड (व्हीआईपी तिराहा)
एक्सप्रेस-वे ब्रिज के नीचे रिंग रोड-01
प्रशासन की अपील
पुलिस प्रशासन ने ट्रांसपोर्टरों और वाहन चालकों से अपील की है कि वे निर्धारित समय का पालन करें और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें, ताकि शहर में यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रहे।
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 पारित, अवैध धर्मांतरण पर सख्त सजा का प्रावधान
रायपुर। छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 विधानसभा में चर्चा के बाद सर्वसम्मति से पारित हो गया. विधेयक में 6 अध्याय और 31 बिंदु शामिल हैं, जिसमें कड़े प्रावधानों के साथ इसे कानून का रूप दिया जाएगा.
विधेयक पर बोलते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने विधेयक पर विपक्ष के चर्चा में हिस्सा नहीं लेने पर कहा कि कांग्रेस वोट बैंक राजनीति ही करती रही है. उन्हें फर्क नहीं पड़ता देश टूट जाए. और अक्सर भारतीय संस्कृति-परंपरा के मुद्दें पर चर्चा करने से भाग जाती है, पलायन कर जाती है. आज इस ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण बिल पर कांग्रेस सदन से पलायन कर गई.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को सुकमा के एसपी और बस्तर कमिश्नर ने पत्र लिखा था. तात्कालीन सरकार को बस्तर में धर्मांतरण की स्थिति की जानकारी दी थी, लेकिन कांग्रेस की सरकार ने तब कोई संज्ञान नहीं लिया था और आज बस्तर में मौजूदा स्थिति यह है कि समाज का विवाद प्रशासन तक पहुंच गया है. ऐसे में विधिक प्रावधानों की आवश्यकता पड़ती है. कड़े कानून की जरूरत पड़ती है. हम इस पर सदन में चर्चा करने बैठे हैं कि छत्तीसगढ़ में कैसे धर्मांतरण रोका जाए तो कांग्रेस चर्चा करने की बजाए पलायन कर जाती है. मैं इस विधेयक के साथ यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि संविधान में धर्म की स्वतंत्रता तो है, परंतु पब्लिक ऑर्डर उससे ऊपर है और पब्लिक ऑर्डर संभालने के लिए कोई भी राज्य कानून बना सकता है.
विजय शर्मा ने कहा, हमारा देश किसी कानून से सेक्युलर नहीं है, परंतु हमारा देश प्रारंभ से ही सेकुलर है. चर्चा में बहुत सी बातें निकलकर सामने आई है. साथी सदस्यों ने बताया कि धर्मांतरण करने वाले लोग घात लगाकर बैठे हैं कि अगर कोई परेशानी में आए तो उसके मदद के बहाने उसका धर्म परिवर्तन कर देते हैं, लेकिन हम ऐसा अब होने नहीं देंगे.
उन्होंने कहा, एक और बात 1968 में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार में धर्म स्वतंत्रता से संबंधित प्रावधान लाए थे. वर्तमान में यही प्रावधान छत्तीसगढ़ में लागू है और अब नया कानून जो बनेगा यह उसी का विस्तारीकरण है. बस यह विस्तारीकरण तात्कालिक परिस्थितियों के अनुसार प्रावधान का स्पष्टीकरण है. यहां एक जानकारी और देना चाहूंगा कि जो चकित करता है. आश्चर्य होता है कि बस्तर के कई जिले जैसे कोंडागांव, बीजापुर, कांकेर में 2004 से 2021 तक धर्मांतरण को लेकर एक भी सूचना नहीं है, जबकि वहां बड़ी संख्या में धर्मांतरण हो गए हैं. इस बिगड़ी स्थिति में नया कानून नहीं लेंगे तो समाज को हम क्या मुंह दिखाएंगे ?
गृहमंत्री शर्मा ने कहा, आज बस्तर में धर्मांतरण करने वालों ने वर्ग संघर्ष उत्पन्न कर दिया है. यह नक्सलवाद से भी बड़ी समस्या है. कांग्रेस को कभी छत्तीसगढ़ की संस्कृति की चिंता नहीं थी न उन्हें बस्तर से मतलब है न सरगुजा की समस्या से, उन्हें सिर्फ अपने वोट बैंक से मतलब है, जो घुसपैठ और धर्मांतरण में खोजते हैं. वास्तव में यह कानून किसी भी धर्म में कोई परिवर्तन ना हो इसके लिए लाया गया है. इस प्रावधान में यह प्रवधान भी है कि अगर नियमानुसार धर्म परिवर्तन नहीं हुआ है तो वे धार्मिक अनुष्ठान नहीं कर पाएंगे.
उन्होंने कहा, भारत की जहां-जहां ताकत बढ़ती है कांग्रेसियों को दिक्कत होती है वह विरोध करते हैं. छत्तीसगढ़ का समाज कांग्रेस को कभी माफ नहीं करेगी, क्योंकि कांग्रेस आज बोलने की स्थिति में नहीं है. बस्तर में जो वर्ग संघर्ष की स्थिति में है उसके पीछे कांग्रेस दिखाई पड़ती है. नक्सलवाद से बड़ी इस समस्या का समाधान जरूरी था और इसका हल अब यब विधेयक बनने जा रहा है. शर्मा ने कहा, माओवाद तो बस्तर में वर्ग या सामाजिक संघर्ष खड़ा नहीं कर सका, लेकिन धर्मांतरण ने सामाजिक-वर्ग संघर्ष को बढ़ा दिया है. यह एक नई बड़ी समस्या है. इस समस्या को खत्म करना जरूरी है.
गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा, आदिवासी संस्कृति को नष्ट करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. यह विधेयक भारत-छत्तीसगढ़ की आदिम संस्कृति-परंपरा की रक्षा करेगी. मुझे खुशी है कि आज चैत्र नवरात्रि और नव वर्ष के मौके पर यह ऐतिहासिक विधेयक सदन में पास हुआ. यह हम सबके लिए गौरव की बात है. मैं इस अवसर पर सभी को बहुत-बहुत बधाई और धन्यवाद देता हूं.
जानिए धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 में क्या है प्रावधान?
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक- 2026 में छह अध्यायों में 31 बिंदुओं में वैध-अवैध धर्मांतरण को परिभाषित करते हुए निहित सजा और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है. विधेयक में अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है.
यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है.
सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और कठोर होगी, जिसमें 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान किया गया है. विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे, मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी.
विधेयक के मुताबिक, महिमामंडन कर, झूठ बोलकर, बल, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन, दबाव, मिथ्या जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराना अवैध माना जाएगा और प्रतिबंधित होगा.
यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पहले सूचना देनी होगी. प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी, और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान होगा.
विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा.
एक धर्म का व्यक्ति अगर दूसरे धर्म में शादी करता है, तो ऐसे विवाह को सम्पन्न करवाने वाले फादर, प्रीस्ट, मौलवी या ऐसे विवाह को करवाने वाला जिम्मेदार व्यक्ति विवाह की तारीख से आठ दिन पहले घोषणापत्र सक्षम प्राधिकारी के सामने प्रस्तुत करेगा. सक्षम प्राधिकारी ये तय करेगा कि विवाह कहीं धर्मांतरण के उद्देश्य से तो नहीं किया जा रहा है, ऐसा हुआ तो अवैध घोषित किया जा सकेगा.
रामकृष्ण अस्पताल हादसे पर सख्ती: दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश, पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद का भरोसा
रायपुर। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल ने रेडक्रॉस सभाकक्ष में बैठक ली, जिसमें जिला प्रशासन, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। गिल ने कहा कि रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में हुए हादसे में मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता दिलाई जाएगी एवं न्याय मिलेगा। घटना के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक के दौरान मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए 2 मिनट का मौन भी रखा गया।
हरदीप गिल ने कहा, सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्रथमिकता होनी चाहिए। उनके कल्याण के लिए भारत सरकार और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग प्रतिबद्ध है। उन्होंने रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में हुई घटना के बारे में प्रत्यक्षदर्शी, परिजन, हॉस्पिटल प्रबंधन एवं प्रशासन से जानकारी ली और कहा कि सर्वोच्च न्यायालय और भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार मैनुअल स्कैवेजिंग पूर्ण रूप से प्रतिबंध है। ऐसा कराए जाने पर जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी संस्था में सीवरेज सफाई कराई जानी है तो नगर निगम प्रशासन को सूचित करें और सुरक्षा के सभी मानकों का अनिवार्य रूप से पालन करें।
सफाईकर्मियों को जागरूक करने लगाया जाएगा कैंप
गिल ने कहा, न्यूनतम वेतन से कम किसी भी सफाईकर्मी को मजदूरी राशि प्रदान नहीं की जानी चाहिए, इसे कड़ाई से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि जागरूकता कैंप का आयोजन किया जाए और सफाईकर्मियों को सुरक्षा के मानकों के प्रति जागरूक किया जाए। पर्याप्त संख्या में पीपीई किट हो एवं जिला और सब डिवीजन स्तर पर सतर्कता समिति की बैठक की जाए। समय-समय पर सफाईकर्मियों के स्वाथ्य की जांच की जाए और हर 6 महीने में मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट प्रदान करें। यदि कोई अनफिट या बीमार हो तो उनके स्थान पर संबंधित की सहमति लेकर परिजनों में से किसी व्यक्ति को नौकरी पर रखा जाए। सभी सफाईकर्मियों का परिचय पत्र अनिवार्य रूप से बनाया जाए और ब्लड ग्रुप अंकित किया जाए।
जिनके पास घर नहीं उन्हें पीएम आवास के तहत मकान देने के निर्देश
उन्होंने परिजनों से बातचीत की और जिनके पास मकान नहीं है उन्हें प्रधानमंत्री आवास के तहत मकान देने का भी निर्देश दिया। उन्होंने पुलिस प्रशासन को एफआईआर में एट्रोसिटी एक्ट के प्रावधानों को शामिल करने के लिए कहा। गिल ने कहा कि रामकृष्ण अस्पताल प्रबंधन ने जो मुआवजा देने सहित राहत का आश्वासन दिया है उसे लिखित में आयोग एवं प्रशासन को प्रदान करें। यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में रात में इस प्रकार के सफाई कार्य न हों, हॉस्पिटल में गैस निकलने के लिए इंतजाम किया जाए। गिल ने नगर निगम रायपुर को निर्देशित किया कि शहर के अन्य अस्पताल सहित सभी संस्थानों में सीवेज का एनओसी लिया जाए।
सभी संस्थाओं को एमएस एक्ट का पालन कराया जाएगा : आयुक्त
बैठक में नगर निगम कमिश्नर विश्वदीप ने कहा कि नगर निगम क्षेत्र के सभी संस्थाओं को एमएस एक्ट का पालन कराया जाएगा। इसके लिए हेल्थ ऑफिसर को नोडल अधिकारी बनाकर जिम्मेदारी दी जाएगी। निगम द्वारा सभी सफाई कर्मचारियों का आयुष्मान कार्ड बनाया जा रहा है, इसे जल्द ही पूर्ण किया जाएगा। इस अवसर पर डीसीपी सिटी अमित तुकाराम काम्बले, पुलिस उपायुक्त रायपुर पश्चिम संदीप पटेल, एडीएम उमाशंकर बंदे, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त पश्चिम राहुल देव शर्मा, सहायक पुलिस उपायुक्त देवांश सिंह राठौर, निगम उपायुक्त विनोद पाण्डेय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान तीन लोगों की हुई थी मौत
बता दें कि राजधानी रायपुर के रामकृष्ण हॉस्पिटल के सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान तीन लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों की पहचान गोविंद सेंद्रे, अनमोल मांझी और प्रशांत कुमार के रूप में हुई थी। तीनों रायपुर के सिमरन सिटी क्षेत्र के निवासी थे।जानकारी के मुताबिक, रामकृष्ण हॉस्पिटल के सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए तीनों मजदूरों को अंदर उतारा गया था। इसी दौरान टैंक में मौजूद जहरीली गैस की वजह से एक-एक कर तीनों की हालत बिगड़ गई और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
गढ़चिरौली में 11 इनामी नक्सलियों का सरेंडर, 68 लाख का था इनाम
पखांजूर। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। यहां 11 वरिष्ठ नक्सलियों ने पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सामने आत्मसमर्पण किया है। इन सभी पर कुल 68 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
पुलिस के मुताबिक आत्मसमर्पण करने वालों में संगठन के कई अहम पदों पर सक्रिय नक्सली शामिल हैं, जिनमें 1 डिवीजनल कमेटी सदस्य (DVCM), 1 एरिया कमेटी सचिव, 1 PPCM, 1 कमांडर, 1 असिस्टेंट कमेटी सदस्य (ACM) समेत अन्य 6 सदस्य शामिल हैं। ये सभी लंबे समय से नक्सल गतिविधियों में सक्रिय थे और सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए थे।

नक्सल अभियान को लगातार मिल रही सफलता
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 से अब तक 123 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जबकि साल 2005 से अब तक कुल 794 नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं। इससे स्पष्ट है कि नक्सल विरोधी अभियान को लगातार सफलता मिल रही है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार गढ़चिरौली जिले में नक्सल गतिविधियां अब सीमित होकर मुख्य रूप से भामरागढ़ क्षेत्र तक रह गई है, जो पहले की तुलना में बड़ी गिरावट को दर्शाता है।
पहले भी लगा था बड़ा झटका
इससे पहले 15 अक्टूबर 2025 को शीर्ष माओवादी नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव (भूपति उर्फ सोनू) समेत 61 नक्सलियों ने 54 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया था। इस बड़ी घटना ने दंडकारण्य क्षेत्र में नक्सल आंदोलन को गंभीर झटका दिया था।
आत्मसमर्पण करने वाले प्रमुख नक्सली
सरेंडर करने वालों में सोनी उर्फ बाली मट्टामी, बुदरी उर्फ रामबत्ती मट्टामी, सुखलाल कोक्सा, शांति तेलामी, यमुनक्का पोट्टी पेंदाम सहित कुल 11 नक्सली शामिल हैं। इनमें कई लंबे समय से वांछित और सक्रिय सदस्य रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सहायता दी जाएगी। इसमें श्रेणी के अनुसार 4 लाख से 8.5 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद, समूह में सरेंडर करने पर 10 लाख रुपये अतिरिक्त और पति-पत्नी नक्सलियों को 1.5 लाख रुपये अतिरिक्त सहायता दी जाएगी।
धर्मांतरण विधेयक के विरोध में अमित जोगी का प्रदर्शन, राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर बिल वापस लेने की मांग
रायपुर। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने लोक भवन पहुंचकर छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित धर्मांतरण कानून का कड़ा विरोध करते हुए राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान उन्होंने विधेयक की प्रति जलाकर अपना विरोध भी दर्ज कराया।
अमित जोगी ने इस विधेयक को लोगों की आस्था पर सीधा प्रहार बताते हुए कहा कि यह कानून नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन करता है। विधानसभा का सत्र पिछले एक माह से चल रहा है, ऐसे में यदि सरकार को कानून लाना ही था तो शुरुआत में लाना चाहिए था, ताकि विधायकों को उस पर अध्ययन और विस्तृत चर्चा का पर्याप्त समय मिल पाता। अंतिम दिन इस प्रकार विधेयक लाना सरकार की घबराहट और डर को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून विशेष रूप से अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के अधिकारों का उल्लंघन करता है। उनके अनुसार, यह केवल धर्मांतरण को नियंत्रित करने का कानून नहीं, बल्कि आस्था पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि प्रलोभन की परिभाषा को अत्यधिक व्यापक कर दिया गया है, जिसमें सेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को भी शामिल कर दिया गया है।
अमित जोगी ने आगे कहा कि इस विधेयक में धार्मिक प्रचार को अपराध की श्रेणी में लाया गया है और कलेक्टर को धर्म से जुड़े मामलों का “द्वारपाल” बना दिया गया है। अब किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म से जुड़े कार्यों के लिए प्रशासनिक अनुमति लेनी पड़ेगी, जो कि संविधानिक अधिकारों के विरुद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के कानून देश के लगभग 12 राज्यों में लाए गए हैं और इस विषय पर Supreme Court of India में मामला लंबित है तथा सुनवाई जारी है। ऐसे में विष्णु देव साय सरकार द्वारा जल्दबाजी में यह विधेयक लाना समझ से परे है।
अमित जोगी ने राज्यपाल से अपील करते हुए कहा कि उन्हें भारतीय संविधान का अनुच्छेद 200 के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए इस विधेयक को विधानसभा में वापस भेजना चाहिए और इसे लागू होने से रोकना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि इस कानून के दुष्परिणाम भारतीय जनता पार्टी को सड़क, सदन, न्यायालय और आगामी चुनावों में देखने को मिलेंगे। ज्ञापन सौंपने के बाद अंत में अमित जोगी ने धर्मांतरण विधेयक की प्रति जलाकर अपना विरोध प्रकट किया।
PMGSY में 140 करोड़ के नियम विरुद्ध भुगतान का मुद्दा गरमाया, विधानसभा में जांच को लेकर घमासान
रायपुर। विधानसभा में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान पीएम ग्राम सड़क योजना में 140 करोड़ रुपए के नियम विरुद्ध भुगतान का मामला उठा. वर्ष 2023 में बिना बजट प्रावधान के 228 करोड़ के दो काम कराए जाने और नई सरकार में ठेकेदार को 139 करोड़ से ज्यादा का भुगतान किए जाने की विपक्ष ने सीबीआई या विधानसभा की समिति से जांच की मांग की, लेकिन मंत्री विजय शर्मा ने विभागीय जांच कराने की घोषणा की.
विधायक जनक ध्रुव ने प्रश्नकाल में उठाया जीएसटी परफॉर्मेंस सिक्योरिटी सुरक्षा निधि की भुगतान का मामला उठाते हुए सवाल किया कि किन किन ठेकेदारों को कितनी-कितनी राशि कब-कब दी गई? किन-किन मदों से भुगतान किया गया? किसकी अनुमति से किया गया? उन्होंने बताया कि मानसून सत्र में भी इसकी जानकारी चाही थी, लेकिन केवल गुमराह किया गया.
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि विगत सरकार में 228 करोड़ रुपए, जो जीएसटी का पैसा था, सिक्योरिटी डिपॉजिट कई विषयों को लेकर अनुरक्षण मद में जो राशि मिलती है वह दो बातों के लिए मिलती है जिसमें मेंटेनेंस और नवीनीकरण दोनों किए जाते है. जो प्रश्न किया गए है वह इसी मद में मिला है.
उन्होंने कहा कि लेकिन बजट में प्रावधान नहीं था, फिर भी 2023 में टेंडर लगाकर काम शुरू किया गया, जिसमें एसडी, पीजी, एजीएस, रॉयल्टी, जो 228 करोड़ था, का भुगतान कर दिया. यह बजट नहीं बल्कि ठेकेदारों का पैसा था, जिसे भुगतान कर दिया गया. फिर नई सरकार बनने के बाद हमने वित्त विभाग से आग्रह किया कि हमें ठेकेदारों के पैसे देने की अनुमति दें, अनुमति मिली भी और कुछ काम हुए भी.
विधायक ने इस पर कहा कि जब-जब मेरा प्रश्न लगता है, तब यही जवाब आता है. संबंधित अधिकारी गलत जानकारी देते हैं. पूर्व वर्ष की राशि को बजट में देने के लिए कोई प्रावधान रखा गया है? उपमुख्यमंत्री ने बताया कि अनुरक्षण अनुदान मद है, जिसमें तीनों ही राशि दी जाती हैं, लेकिन अभी दोनों मद अलग कर दिए गए है. दोनों मद अलग-अलग हैं, अलग प्रावधान है, इसलिए हम इसकी अनुमति लेकर भुगतान करेंगे.
विधायक द्वारकाधीश ने इस पर कहा कि वित्त विभाग ने जब राशि रिलीज की है, तब उल्लेख है कि दोषी अधिकारियों पर क्या कार्यवाही की गई है? मामला गंभीर है. 200 करोड़ का मामला है. इसमें सीबीआई जांच की घोषणा कीजिए. उपमुख्यमंत्री में कहा कि नई सरकार बनने के बाद इसमें विभागीय जांच तो होगी और सजा भी होगी.
विधायक ने इस पर कहा कि निष्पक्ष जांच हो. सीबीआई जांच का भरोसा दिला दीजिए. किस तरह से अधिकारी जांच करेंगे? इस पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विशेष अधिकारी से जांच करवाएंगे. इस पर विधायक देवेंद्र यादव ने कहा कि क्या जांच का समय निर्धारण करेंगे? इस पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कि इसकी विभागीय जांच करवाकर प्रतिवेदन आने दीजिए, उसके बाद इस पर कार्यवाही करेंगे.
धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 से अवैध धर्मांतरण पर सख्त नियंत्रण के साथ ही आस्था और सामाजिक समरसता को मिलेगा बल: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पारित किए जाने को राज्य की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक संतुलन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को हिंदू नववर्ष एवं चैत्र नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए माँ दुर्गा से प्रदेश की समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पिछले कुछ समय से समाज के कमजोर वर्गों को निशाना बनाकर प्रलोभन, दबाव अथवा भ्रम फैलाकर धर्मांतरण कराने की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे सामाजिक ताने-बाने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि नए विधेयक के लागू होने से ऐसी प्रवृत्तियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा और समाज में संतुलन तथा विश्वास कायम रहेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब धर्म परिवर्तन से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया को विधिसम्मत और पारदर्शी बनाना अनिवार्य होगा। इसके तहत संबंधित पक्षों को पूर्व में ही प्राधिकृत अधिकारी को सूचित करना होगा, जिसके बाद आवेदन की सार्वजनिक सूचना जारी कर निर्धारित समयसीमा में उसका परीक्षण किया जाएगा। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि धर्मांतरण किसी भी प्रकार के प्रलोभन, दबाव या अनुचित प्रभाव के बिना ही किया जाए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पूर्व में लागू कानून अपेक्षाकृत कम प्रभावी था, जिसके कारण अवैध गतिविधियों को रोकने में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। नए प्रावधानों में कठोर दंडात्मक व्यवस्थाएं जोड़ी गई हैं, जिससे ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई संभव होगी।
उन्होंने कहा कि अनियंत्रित धर्मांतरण से कई बार सामाजिक असंतुलन और अशांति की स्थिति उत्पन्न होती है। इस विधेयक के माध्यम से राज्य में शांति, सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा को और सुदृढ़ किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने धर्मांतरण के विरुद्ध जनजागरण का जो अभियान चलाया, वह आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि समाज की जागरूकता और सहभागिता से ही इस दिशा में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह विधेयक प्रदेश में पारदर्शिता, न्याय और सामाजिक एकता को मजबूती देगा तथा छत्तीसगढ़ को एक सशक्त, संतुलित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य के रूप में स्थापित करेगा।
गृह निर्माण मंडल का दायरा बढ़ा: संशोधन विधेयक 2026 पारित, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को मिलेगा नया आयाम
रायपुर। राज्य में आवासीय और शहरी अधोसंरचना विकास को व्यापक स्वरूप देने के उद्देश्य से वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अधिनियम, 1972 (संशोधन) विधेयक 2026 को विधानसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। अब यह छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल के नाम से जाना जाएगा, यह संशोधन मंडल की भूमिका को विस्तार देते हुए उसे एक आधुनिक और बहुआयामी इंफ्रास्ट्रक्चर एजेंसी के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सदन में जानकारी देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का गठन मूलतः मध्यप्रदेश गृह निर्माण मंडल अधिनियम, 1972 के तहत किया गया था। राज्य गठन के बाद यह संस्था प्रदेश में आवासीय योजनाओं, नगरीय अधोसंरचना और किफायती आवास उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में मंडल द्वारा लगभग 3,050 करोड़ रुपये की लागत से 78 नई परियोजनाएं शुरू की गई हैं। राज्य शासन द्वारा 735 करोड़ रुपये का ऋण भुगतान कर मंडल को ऋणमुक्त किया गया है। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY 2.0) के अंतर्गत 2,000 ईडब्ल्यूएस आवासों के निर्माण को स्वीकृति मिली है।
650 करोड़ रुपये से अधिक की 6 रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की डीपीआर तैयार
मंत्री चौधरी ने बताया कि 650 करोड़ रुपये से अधिक की 6 रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की डीपीआर तैयार हो चुकी है। नवंबर 2025 में आयोजित राज्य स्तरीय आवास मेले में 2,060 करोड़ रुपये की 56 नई परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया, जिसमें 2,517 संपत्तियों की बुकिंग और 1,477 का आवंटन किया जा चुका है। वर्तमान में मंडल छत्तीसगढ़ के 33 में से 27 जिलों में सक्रिय है और प्रक्रियात्मक सुधारों के माध्यम से रजिस्ट्री के साथ भौतिक कब्जा सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके अलावा, 858 करोड़ रुपये की लागत से 146 विकासखंडों में शासकीय आवासों का निर्माण कर मंडल ने अपनी तकनीकी क्षमता भी सिद्ध की है। उन्होंने कहा कि रायपुर, नवा रायपुर, भिलाई-दुर्ग और राजनांदगांव को एकीकृत कर एक शहरी कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें गृह निर्माण मंडल की भूमिका अहम होगी।
संशोधन के तहत मंडल को केवल आवास निर्माण तक सीमित न रखते हुए टाउन प्लानिंग स्कीम, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP), जॉइंट वेंचर, रिडेवलपमेंट, स्लम पुनर्विकास और मिश्रित भूमि उपयोग जैसी आधुनिक विकास अवधारणाओं को लागू करने की अनुमति दी गई है।
राज्य में सुनियोजित, टिकाऊ और समावेशी शहरी विकास को मिलेगा बढ़ावा
अंत में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि यह संशोधन गृह निर्माण मंडल को एक सशक्त, सक्षम और बहुआयामी संस्था के रूप में स्थापित करेगा। इससे राज्य में सुनियोजित, टिकाऊ और समावेशी शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा तथा आम नागरिकों को बेहतर आवास और आधुनिक अधोसंरचना सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
छत्तीसगढ़ नगर-ग्राम निवेश संशोधन विधेयक 2026 पारित: अवैध प्लॉटिंग पर लगाम, सुनियोजित शहरी विकास को मिलेगा बढ़ावा
रायपुर। छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और सुव्यवस्थित विकास की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक 2026 को विधानसभा ने ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस संशोधन का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में अनियंत्रित विस्तार और अवैध प्लॉटिंग पर नियंत्रण स्थापित करते हुए योजनाबद्ध विकास को गति देना है।
सदन में चर्चा के दौरान वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि वर्तमान में नगर विकास योजनाएं तैयार करने और उनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी मुख्यतः रायपुर विकास प्राधिकरण और नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण जैसे प्राधिकरणों पर निर्भर है। हालांकि, राज्य गठन के बाद विभिन्न कारणों से ऐसी योजनाओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, जिससे कई शहरों में अव्यवस्थित विकास और अवैध प्लॉटिंग की समस्या बढ़ी है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में विभिन्न एजेंसियों की भागीदारी से नगर विकास योजनाओं के बेहतर परिणाम सामने आए हैं। विशेष रूप से अहमदाबाद में रिंग रोड जैसी प्रमुख परियोजनाएं योजनाबद्ध तरीके से विकसित की गई हैं।
वित्त मंत्री चौधरी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में भी रायपुर मास्टर प्लान के अंतर्गत एम.आर.-43 मार्ग का निर्माण नगर विकास योजना के माध्यम से किया जा रहा है, जो इस प्रणाली की उपयोगिता को दर्शाता है। संशोधन के तहत छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा-38 में बदलाव किया गया है। इसके अनुसार अब नगर विकास योजनाएं तैयार करने के लिए अधिकृत एजेंसियों के दायरे का विस्तार किया जाएगा। नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकरणों के अलावा राज्य शासन के अभिकरणों और सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों को भी इस कार्य के लिए अधिकृत किया जा सकेगा।
मंत्री ने कहा, इस बदलाव के बाद छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल और छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम जैसे संस्थान भी नगर विकास योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में भागीदारी निभा सकेंगे। इससे योजनाओं की संख्या में वृद्धि होने के साथ-साथ औद्योगिक और आवासीय विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि इस विधेयक का मूल उद्देश्य राज्य में सुनियोजित शहरी विकास को बढ़ावा देना, अवैध प्लॉटिंग पर अंकुश लगाना और उद्योग व आवास के लिए व्यवस्थित भूखंडों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह संशोधन छत्तीसगढ़ के शहरी परिदृश्य को अधिक सुव्यवस्थित और विकासोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।
दिल्ली दौरे से लौटे दीपक बैज का हमला: आदिवासी हित, कानून व्यवस्था और परीक्षा घोटालों पर सरकार को घेरा
रायपुर। दिल्ली दौरे से लौटे छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने रायपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए कई अहम मुद्दों पर बयान दिया। उन्होंने दिल्ली में हुई बैठकों की जानकारी देते हुए आदिवासी हित, कानून व्यवस्था, धर्म स्वातंत्र्य विधेयक और परीक्षा घोटालों को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा।
दीपक बैज ने बताया कि दिल्ली में आदिवासी कांग्रेस राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की बैठक आयोजित की गई, जिसमें देशभर के आदिवासी नेता शामिल हुए। बैठक में आदिवासियों के हितों के संरक्षण, लीडरशिप डेवलपमेंट और उन्हें मुख्यधारा में आगे बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आदिवासी सलाहकार परिषद का गठन किया गया है और इसी तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी राज्य स्तरीय परिषद बनाई जाएगी। यह परिषद आदिवासी मुद्दों का अध्ययन कर पीसीसी को रिपोर्ट सौंपेगी। बैज ने यह भी बताया कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे इस पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग करेंगे। साथ ही फॉरेस्ट राइट एक्ट और पेसा कानून को मजबूत करने पर भी गहन चर्चा हुई।
धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को लेकर बैज ने सवाल उठाते हुए कहा कि यह बिल बीजेपी की सरकार ने 2006 में लाया था और 2006 से 2018 तक बीजेपी की सरकार रही। उन्होंने पूछा कि “20 साल तक बिल लंबित क्यों रखा गया और अब राज्यपाल द्वारा वापस भेजे जाने का क्या कारण है? सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।”
चरमरा गई है कानून व्यवस्था
प्रदेश में बढ़ती चाकूबाजी की घटनाओं को लेकर दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस शुरू से ही कमिश्नरी प्रणाली का विरोध करती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां-जहां यह प्रणाली लागू हुई, वहां यह पूरी तरह फेल साबित हुई है। बैज ने कहा, छत्तीसगढ़ में फेल सिस्टम लागू करने का क्या मतलब है? कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। नशे का कारोबार बढ़ रहा है और अफीम की खेती तक होने लगी है।
परीक्षा प्रणाली पर भ्रष्टाचार के आरोप
व्यावसायिक परीक्षा से जुड़े विधेयक पर भी बैज ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार में हर परीक्षा में भ्रष्टाचार हो रहा है। पुलिस, फॉरेस्ट समेत कई भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। बैज ने सवाल उठाया कि 12वीं की परीक्षा से एक दिन पहले पेपर लीक हो जाता है, इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? अब तक सरकार ने क्या कार्रवाई की?” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और अपने लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लोकतंत्र सेनानी स्वर्गीय महावीर प्रसाद जैन को दी श्रद्धांजलि
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जशपुरनगर के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं लोकतंत्र सेनानी स्वर्गीय महावीर प्रसाद जैन के निवास पहुंचकर उनके छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने शोक संतप्त परिजनों से भेंट कर उन्हें ढांढस बंधाया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय महावीर प्रसाद जैन का जीवन समाज सेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण रहा है। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा और समाज को प्रेरणा देता रहेगा।
इस अवसर पर विधायक गोमती साय, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सरहुल उत्सव जनजातीय संस्कृति की विशिष्ट धरोहर, इसे संजोकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जशपुर के दीपू बगीचा में आयोजित पारंपरिक सरहुल महोत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने धरती माता, सूर्य देव एवं साल वृक्ष की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, उत्तम वर्षा और समृद्ध फसल की कामना की। सरहुल की पारंपरिक रस्म के तहत पूजा कराने वाले बैगा द्वारा मुख्यमंत्री के कान में सरई (साल) फूल खोंचकर शुभ आशीष प्रदान किया गया।


- मुख्यमंत्री श्री साय ने जिलेवासियों को सरहुल उत्सव एवं हिंदू नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरहुल महोत्सव सदियों से प्रकृति, धरती और जीवन के संतुलन का प्रतीक रहा है। बैगा, पाहन एवं पुजारी द्वारा की जाने वाली पूजा-अर्चना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामूहिक जीवन मूल्यों की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि यह पर्व जनजातीय समाज की समृद्ध सभ्यता और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है, जिसे सहेजकर रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की जनता से किए गए वादों को तेजी से पूरा कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाखों परिवारों को आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं। महतारी वंदन योजना के तहत अब तक 25 किश्तों में 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी किए जा चुके हैं, जिससे महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। वहीं 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी कर किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा में प्रस्तुत धर्म स्वातंत्र्य विधेयक भी सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करेगा।
उल्लेखनीय है कि सरहुल परब चैत्र माह में मनाया जाने वाला उरांव समुदाय का प्रमुख पर्व है, जो प्रकृति के नवजीवन और ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है। इस पर्व में धरती माता और सूर्य देव के प्रतीकात्मक विवाह के साथ सामूहिक पूजा की जाती है। सरना स्थल पर पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना, प्रसाद वितरण और लोकनृत्य-गीतों के माध्यम से सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ किया जाता है। घर-घर सरई फूल और पवित्र जल का वितरण कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक वेशभूषा में सजी 100 से अधिक महिलाओं एवं युवतियों की टोली ने मनमोहक सरहुल नृत्य प्रस्तुत किया। मांदर की गूंजती थाप और उत्साह से भरे वातावरण ने पूरे परिसर को जनजातीय संस्कृति के रंग में रंग दिया, जहां जनसैलाब उमड़ पड़ा और उत्सव का उल्लास चरम पर रहा।
इस अवसर पर अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह, राष्ट्रीय महामंत्री योगेश बापट, विधायक गोमती साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव सहित अनेक जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।
जशपुर को विकास की नई सौगात: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 19.51 करोड़ के 6 विकास कार्यों का किया भूमिपूजन
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जशपुरनगर में पुलिस लाइन हेलीपैड के समीप कुल 19 करोड़ 51 लाख 78 हजार रुपए की लागत से 6 महत्वपूर्ण विकास कार्यों का भूमिपूजन कर क्षेत्र को विकास की नई सौगात दी। इस अवसर पर उन्होंने शहरी एवं ग्रामीण बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने नगर पालिका जशपुर के वार्ड क्रमांक 18 भागलपुर में 35.46 लाख रुपए की लागत से मुक्तिधाम निर्माण कार्य तथा वार्ड क्रमांक 16 में 6.76 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक ऑडिटोरियम निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। इन परियोजनाओं से शहरवासियों को बेहतर सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने जशपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को सुगम एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से चार प्रमुख सड़कों के निर्माण कार्यों का भी भूमिपूजन किया। इनमें 2.89 करोड़ रुपए लागत से चटकपुर-रेंगारबहार मार्ग, 3.01 करोड़ रुपए लागत से कुनकुरी-औंरीजोर-मतलूटोली-पटेल पारा मार्ग, 3.29 करोड़ रुपए लागत से रानीबंध-चिड़ाटांगर-उपरकछार मार्ग तथा 3.18 करोड़ रुपए लागत से धुरीअम्बा-कटुखोसा मार्ग का निर्माण शामिल है। इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के समग्र और संतुलित विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार और ग्रामीण अंचलों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को नई दिशा और गति मिलेगी।
इस अवसर पर विधायक गोमती साय, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
IAS रवि मित्तल की PMO में डिप्टी सेक्रेटरी पद पर नियुक्ति, ACC ने दी मंजूरी
रायपुर। छत्तीसगढ़ कैडर के 2016 बैच के आईएएस अधिकारी रवि मित्तल को केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर तैनात किया है। यह नियुक्ति कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) की स्वीकृति के बाद की गई है।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मित्तल का कार्यकाल पदभार संभालने की तिथि से चार वर्ष तक रहेगा या फिर अगली अधिसूचना तक प्रभावी रहेगा।
प्रशासनिक दृष्टि से इस नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि PMO में डिप्टी सेक्रेटरी का पद नीतियों के समन्वय और उच्चस्तरीय निर्णय प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है। वर्तमान में रवि मित्तल जनसंपर्क आयुक्त के रूप में कार्यरत हैं और इससे पहले वे जशपुर जिले के कलेक्टर रह चुके हैं।
