भारतीय डाक विभाग ने अपने ग्राहकों को दी जाने वाली एक महत्वपूर्ण सेवा में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। अब रजिस्टर्ड डाक सेवा (Registered Post Service) को बंद किया जा रहा है और इसकी जगह एक नई और आधुनिक सेवा ‘ई-पोस्ट’ (e-Post) शुरू की जाएगी। डाक विभाग ने 18 अगस्त को इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी है।
यह बदलाव भारतीय डाक को और भी तेज और आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। रजिस्टर्ड डाक सेवा अब तक पत्र भेजने का एक विश्वसनीय माध्यम रही है, लेकिन अब इसे नई तकनीक से लैस किया जाएगा। माना जा रहा है कि ‘ई-पोस्ट’ सेवा से दस्तावेजों और पत्रों की डिलीवरी पहले से ज्यादा तेज और सुरक्षित हो जाएगी। हालांकि, इस नई सेवा के नियम और इसकी कार्यप्रणाली को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
डाक विभाग के इस फैसले से यह साफ है कि वह समय के साथ खुद को अपडेट कर रहा है ताकि ग्राहकों को बेहतर और सुविधाजनक सेवाएं मिल सकें। ‘ई-पोस्ट’ के जरिए लोग डिजिटल माध्यम से भी अपने पत्र भेज पाएंगे, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी। आने वाले दिनों में डाक विभाग इस नई सेवा के बारे में और जानकारी साझा कर सकता है, जिसके बाद लोगों को इस सेवा का उपयोग करने का तरीका भी पता चलेगा।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के डॉग लवर्स को बड़ी राहत देते हुए अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि आवारा कुत्तों को मारने या कहीं और विस्थापित करने की जगह उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ा जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
-कुत्तों को किसी दूसरी जगह शिफ्ट करने या खत्म करने पर रोक।
-संबंधित नगर निगम और स्थानीय निकायों को आदेश कि सभी आवारा कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी अनिवार्य रूप से कराई जाए।
-टीका लगने और नसबंदी पूरी होने के बाद कुत्तों को वापस उसी इलाके में छोड़ा जाएगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
-देशभर में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
-अक्सर कुत्तों के काटने की घटनाओं के बाद उन्हें हटाने या मारने की मांग उठती रही है।
-डॉग लवर्स और एनिमल वेलफेयर संगठनों ने कोर्ट से अपील की थी कि यह अमानवीय है और कुत्तों के बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन करता है।
-कोर्ट ने कहा कि जानवरों का भी जीने का अधिकार है और इंसानों की सुरक्षा व जानवरों के अधिकारों में संतुलन ज़रूरी है।
आम जनता के लिए इसका मतलब
-अब किसी इलाके से आवारा कुत्तों को हटाया नहीं जा सकेगा।
-लोगों की सुरक्षा के लिए कुत्तों का वैक्सिनेशन और नसबंदी अनिवार्य होगी।
-इससे रेबीज़ जैसी बीमारियों पर नियंत्रण मिलेगा।
-स्थानीय निकायों को अब इस प्रक्रिया को तेजी से लागू करना होगा।
नई दिल्ली। भारतीय प्रेस परिषद के पूर्व सदस्य और वरिष्ठ पत्रकार बलविंदर सिंह जम्मू सोमवार को इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन (आईजेयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए, जबकि आंध्र प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार डी श्याम सुंदर महासचिव चुने गए। संघ के केंद्रीय निर्वाचन अधिकारी महेश कुमार सिन्हा (पटना) ने यह जानकारी दी। देश में पत्रकारों के सबसे बड़े इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन आई जे यू के पूर्व में राष्ट्रीय महासचिव रहे चंडीगढ़ निवासी बलविंदर सिंह जम्मू का पत्रकारिता का लंबा इतिहास रहा है। पंजाब के लिए यह गर्व की बात है कि पहली बार पंजाब के किसी पत्रकार को देश में पत्रकारों के सबसे बड़े संघ के राष्ट्रीय स्तर पर अध्यक्ष बनने का अवसर मिला है।
आईजेयू से संबद्ध स्टेट वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष पी सी रथ उपाध्यक्ष घनश्याम गुप्ता एवं आनंदराम पत्रकार, महासचिव विरेंद्र कुमार शर्मा, संगठन सचिव सुधीर आज़ाद तंबोली, प्रदेश संयुक्त सचिव दिलीप कुमार साहू, समीर सेन, संजय चंदेल कार्यकारिणी सदस्यों मयूरमल्हार बक्शी, कुणाल मिश्रा, मोहम्मद शाह, चिंतामणि साहू आदि ने बलविंदर जम्मू की नियुक्ति पर प्रसन्नता व्यक्त की है। बलविंदर सिंह जम्मू का जन्म गाँव गरौला (पटियाला) में हुआ था। वे कॉलेज के दिनों से ही छात्र राजनीति में सक्रिय थे। वे वर्ष 1977-78 में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन में शामिल हुए और पटियाला से अध्यक्ष चुने गए।
हिमाचल प्रदेश में पर्यटन को एक नई दिशा देते हुए राज्य सरकार ने महत्वाकांक्षी ईको-टूरिज्म नीति लागू की है। इस नीति का उद्देश्य प्रकृति के संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देना है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को हरित विकास की ओर ले जाया जा सके। इस पहल के तहत राज्य के विभिन्न वन वृत्तों में 77 नए ईको-टूरिज्म स्थलों को विकसित किया जा रहा है, जिनसे अगले पांच वर्षों में 200 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित करने का लक्ष्य रखा गया है।
चरणबद्ध तरीके से होगा स्थलों का विकास
नई नीति के अंतर्गत शिमला, कुल्लू, मंडी, धर्मशाला, चंबा और रिकांगपिओ जैसे प्रमुख क्षेत्रों में 77 स्थलों का चयन किया गया है। विकास के पहले चरण में सात प्रमुख स्थलों के लिए ईको-टूरिज्म ऑपरेटरों का चयन भी कर लिया गया है, जिनमें शिमला में पाटर हिल और शोघी, कुल्लू में सोलंग नाला और पार्वती घाटी में कसोल शामिल हैं। बाकी स्थलों का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। इन स्थलों पर पर्यटक ट्रैकिंग, बर्ड वॉचिंग, फॉरेस्ट कैंपिंग, नेचर वॉक और होम स्टे जैसी पर्यावरण-अनुकूल गतिविधियों का आनंद ले सकेंगे।
पर्यटकों के लिए खास सुविधाएं और मोबाइल ऐप
पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए एक विशेष मोबाइल ऐप भी तैयार किया जा रहा है। यह ऐप पर्यटकों को स्थलों की जानकारी, बुकिंग और मार्गदर्शन प्रदान करेगा। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश ईको-टूरिज्म सोसाइटी की वेबसाइट के माध्यम से 100 से अधिक फॉरेस्ट रेस्ट हाउस और कैंपिंग साइट्स की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा पहले से ही उपलब्ध है, जिसे पर्यटकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है।
स्थानीय युवाओं को रोजगार और प्रशिक्षण
इस नीति का एक प्रमुख उद्देश्य स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है। इसके तहत स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड और मल्टीपर्पज वर्कर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। अब तक 70 से अधिक गाइड और 135 मल्टी-पर्पज वर्कर्स को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इससे न केवल युवाओं को आजीविका मिल रही है, बल्कि वे प्रकृति संरक्षण के प्रति भी जागरूक हो रहे हैं।
अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
पर्यटन हिमाचल प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GDP) में 7.78 प्रतिशत का योगदान देता है। वर्ष 2024 में प्रदेश में लगभग दो लाख पर्यटक आए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13.24 प्रतिशत अधिक है। नई ईको-टूरिज्म नीति से न केवल पर्यटकों की संख्या में वृद्धि की उम्मीद है, बल्कि यह राज्य की अर्थव्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्रदेश के वन क्षेत्र को 30 प्रतिशत तक बढ़ाना भी है, जो इस हरित पहल को और मजबूती देगा।
हैदराबाद। मानव सेवा और दिव्यांग सशक्तिकरण के लिए समर्पित नारायण सेवा संस्थान द्वारा हैदराबाद के मिनर्वा गार्डन्स, चंपापेट में नारायण लिम्ब एवं कैलिपर्स फिटमेंट शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में तेलंगाना, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 783 दिव्यांगजनों को 851 कृत्रिम हाथ-पैर और कैलिपर्स निशुल्क प्रदान किए गए।
शिविर का शुभारंभ राष्ट्र संत पूज्य ललितप्रभ सागर महाराज सा एवं पूज्य आचार्य भक्तिरत्न सुरिश्वर महाराज सा के मंगल आशीर्वाद से हुआ। आचार्यों ने अपने आशीर्वचन में कहा कि “नारायण सेवा संस्थान न केवल दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग प्रदान कर रहा है, बल्कि उनके खोए आत्मविश्वास को भी पुनर्जीवित कर रहा है।” हम संतजन संस्थापक कैलाश मानव और अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल के साथ समस्त सेवाभावियों की मुक्त कंठ से प्रसंशा करते है।
दीप प्रज्वलन समारोह में जेसीआई ज़ोन प्रेसिडेंट चतुर्वेदी वुतुकूरु, जेसीआई बंजारा प्रेसिडेंट सुरेश मलानी, मुंबई शाखा प्रेसिडेंट महेश अग्रवाल, पिरामिड संस्थान से माधवी दंतरिका, भास्कर एवं वेणुगोपाल, संरक्षक अलका- अभय चौधरी, खुशी की अध्यक्ष मंजुला कल्याण सहित संस्थान की निदेशक वंदना अग्रवाल, ट्रस्टी देवेंद्र चौबिसा, भगवान प्रसाद गौड़, रोहित तिवारी और आश्रम प्रभारी महेंद्र सिंह रावत उपस्थित रहे।
सभी अतिथियों ने लाभांवित दिव्यांगजनों से संवाद किया, उनकी आपबीती सुनी और कृत्रिम अंगों की उपयोगिता पर संतोष व्यक्त किया। दिव्यांगजन ट्रेनिंग के बाद बैडमिंटन और फुटबॉल जैसे खेलों में भी शामिल हुए।
संस्थान की निदेशक वंदना अग्रवाल ने बताया कि “पिछले अप्रैल माह में आयोजित चयन शिविर में आए 1100 रोगियों में से 783 दिव्यांगजनों को चयनित किया गया था। आज वे सभी जर्मन टेक्नोलॉजी से बने नारायण लिम्ब और कैलिपर्स पाकर आत्मनिर्भर जीवन की नई शुरुआत कर रहे हैं।”
कार्यक्रम में दिव्यांगों ने कृत्रिम अंग पहनकर परेड की और डॉक्टर्स ने उन्हें चलने की ट्रेनिंग एवं रखरखाव संबंधी जानकारी दी। शिविर में संस्थान की 70 सदस्यीय टीम व कॉग्निजेंट कंपनी सहित 70 स्वयंसेवकों ने सेवा दी। दिनभर रोगियों व परिजनों के लिए निशुल्क भोजन की व्यवस्था रही। आभार देवेंद्र चौबिसा ने तथा संयोजन महिम जैन ने किया।
संस्थान की सेवाएँ-1985 से स्थापित नारायण सेवा संस्थान अब तक 40,000 से अधिक कृत्रिम अंग निशुल्क प्रदान कर चुका है। संस्थापक कैलाश मानव को मानव सेवा कार्यों हेतु पद्मश्री अलंकरण प्राप्त हो चुका है, वहीं हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उन्हें सामुदायिक सेवा एवं सामाजिक उत्थान सम्मान प्रदान किया। संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल को भी 2023 में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
संस्थान मेडिकल, शिक्षा, कौशल विकास एवं खेल अकादमी के माध्यम से लाखों दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ रहा है। हैदराबाद शिविर के माध्यम से संस्थान ने तेलंगाना के दिव्यांगों के जीवन को नई दिशा देने का संकल्प लिया है।
हाईवे पर टोल टैक्स चुकाने का सबसे सुविधाजनक तरीका बन चुके फास्टैग से आजकल धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर अपराधी नकली एसएमएस, फर्जी कॉल और फिशिंग लिंक भेजकर लोगों के फास्टैग वॉलेट से पैसे निकाल रहे हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने हाल ही में फास्टैग का वार्षिक पास भी शुरू किया है, लेकिन इसके साथ ही धोखाधड़ी के मामले भी बढ़ गए हैं।
अगर आप भी फास्टैग का इस्तेमाल करते हैं, तो सावधान हो जाएं, क्योंकि केवाईसी अपडेट या फास्टैग बंद होने के नाम पर ठगी की जा रही है। ऐसे में, अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए ये 5 उपाय अपनाएं:
अनाधिकारिक लिंक पर क्लिक न करें: अगर आपको कोई ऐसा मैसेज मिलता है जिसमें फास्टैग केवाईसी अपडेट के लिए लिंक दिया गया हो, तो उस पर क्लिक न करें। बैंक या भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) कभी भी एसएमएस या ईमेल के जरिए केवाईसी अपडेट का लिंक नहीं भेजते। हमेशा आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का ही उपयोग करें।
व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें: किसी भी अनजान व्यक्ति या कॉल करने वाले को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, जैसे फास्टैग नंबर, बैंक खाता संख्या, ओटीपी (OTP), या यूपीआई पिन न बताएं। बैंक या NHAI कभी भी आपसे इस तरह की जानकारी नहीं मांगते।
स्पेलिंग और डोमेन की जांच करें: अगर आपको कोई ईमेल या मैसेज मिलता है, तो उसमें स्पेलिंग की गलतियों और डोमेन नाम की जांच करें। फर्जी संदेशों में अक्सर स्पेलिंग की गलतियां होती हैं और वे दिखने में भी अनाधिकारिक लगते हैं।
फर्जी QR कोड से सावधान रहें: धोखेबाज क्यूआर कोड (QR code) के जरिए भी पैसे मांगते हैं। अगर कोई आपको क्यूआर कोड भेजकर पैसे मांगता है तो उस पर भरोसा न करें। क्यूआर कोड का इस्तेमाल सिर्फ पैसे भेजने के लिए होता है, प्राप्त करने के लिए नहीं।
शिकायत दर्ज करें: अगर आपको किसी भी तरह की धोखाधड़ी का शक होता है, तो तुरंत अपने बैंक या संबंधित टोल प्लाजा के अधिकारियों से संपर्क करें। आप साइबर अपराध पुलिस में भी इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
इन सावधानियों को अपनाकर आप फास्टैग से जुड़ी धोखाधड़ी से बच सकते हैं और अपने पैसे को सुरक्षित रख सकते हैं।
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर आज बीजेपी की संसदीय बोर्ड की बैठक हुई थी, जिसके बाद सीपी राधाकृष्णन का नाम उपराष्ट्रपति चुनाव के प्रत्याशी के तौर पर तय हुआ है।
उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए 21 अगस्त तक नामांकन होना है और उससे पहले आज संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद बीजेपी ने एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के प्रत्याशी के नाम का ऐलान कर दिया है। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया है कि एनडीए की तरफ से सीपी राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति उम्मीदवार होंगे।
नई दिल्ली। भारत शुक्रवार को अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस खास मौके पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को बधाई देते हुए दोनों देशों की दोस्ती को "विशेष और गौरवशाली रणनीतिक साझेदारी" बताया है।
पुतिन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शुभकामनाएं भेजते हुए कहा कि भारत ने सामाजिक-आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी सफलताएं हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक मंच पर जो सम्मान प्राप्त कर रहा है, वह उसका पूरा हकदार है और वैश्विक मुद्दों के समाधान में भी वह सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है।
भारत स्थित रूसी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में पुतिन के संदेश की जानकारी दी। पुतिन ने अपने संदेश में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की भी सराहना की।
पुतिन ने कहा, "हम भारत के साथ अपनी विशेष और गौरवशाली रणनीतिक साझेदारी को अत्यधिक महत्व देते हैं।" उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के साझा प्रयासों से विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग का लगातार विस्तार होता रहेगा। उन्होंने आगे कहा कि यह साझेदारी दोनों देशों के लोगों के हितों पर आधारित है और क्षेत्रीय व वैश्विक सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची और चुनाव आयोग पर लगाए गए सभी आरोप निराधार और झूठे हैं। यदि राहुल गांधी के पास अपने दावों का सबूत है, तो उन्हें सात दिनों के भीतर शपथपत्र दाखिल करना होगा, अन्यथा उन्हें पूरे देश से माफी मांगनी होगी।
CEC का कड़ा रुख
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने रविवार को प्रेस से बातचीत में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयानों पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने राहुल गांधी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग और मतदाता सूची को लेकर लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे और भ्रामक हैं।ज्ञानेश कुमार ने कहा, “अगर किसी के पास सबूत है तो वह सात दिन के भीतर शपथपत्र (हलफनामा) के साथ चुनाव आयोग को प्रस्तुत करे। अन्यथा, पूरे देश से माफी मांगनी होगी। तीसरा कोई विकल्प नहीं है।”
बिना सबूत गंभीर आरोप नहीं मान्य
CEC ने राहुल गांधी द्वारा हाल ही में दिए गए बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि एक पीपीटी (PPT) दिखाकर और चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के बिना विश्लेषण करना, तथा यह कहना कि किसी महिला ने दो बार मतदान किया है, एक बेहद गंभीर आरोप है।उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे आरोपों की पुष्टि बिना शपथपत्र के नहीं की जा सकती। संविधान और चुनाव आयोग दोनों का सम्मान करते हुए आवश्यक है कि जो भी व्यक्ति इस तरह का दावा कर रहा है, वह अपने दावे को प्रमाणित करे।
‘वोटरों को अपराधी बताना गलत’
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि देशभर के वोटरों पर फर्जीवाड़े का आरोप लगाना बेहद अनुचित है। उन्होंने कहा, “मेरे सारे वोटरों को अपराधी बना देना और चुनाव आयोग चुप रहे, यह संभव नहीं है। या तो सबूत के साथ हलफनामा दें या पूरे देश से माफी मांगे। सात दिनों के भीतर यदि हलफनामा नहीं आता तो इसका सीधा अर्थ यह होगा कि सारे आरोप निराधार हैं।”
बिहार का उदाहरण दिया
सीईसी ने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बूथ लेवल अधिकारियों ने बूथ लेवल एजेंटों और राजनीतिक दलों के साथ मिलकर मतदाता सूची को शुद्ध करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को सटीक बनाना एक साझा जिम्मेदारी है, और इसमें सभी राजनीतिक दलों की भी भूमिका है।
चुनाव आयोग की सख्ती
ज्ञानेश कुमार का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में गड़बड़ी और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगा रहा है। लेकिन CEC ने साफ किया कि ऐसे आरोप सिर्फ जनभावनाओं को भड़काने और भ्रम फैलाने के उद्देश्य से लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग हमेशा निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से काम करता है, और यदि कोई भी व्यक्ति या दल इस पर संदेह करता है तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत सबूत प्रस्तुत करने होंगे।
FASTag : देश के 78वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने वाहन चालकों को एक बड़ा तोहफा दिया है। मंत्रालय ने आज यानी 15 अगस्त से FASTag वार्षिक पास की शुरुआत कर दी है, जिसका ऐलान कुछ महीने पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया था।
यह वार्षिक पास मुख्य रूप से गैर-व्यावसायिक (Non-commercial) और निजी वाहनों जैसे कार, जीप और वैन के लिए है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य वाहन चालकों पर पड़ने वाले टोल शुल्क के औसत बोझ को कम करना और यात्रियों को एक सुविधाजनक यात्रा का अनुभव प्रदान करना है।
वार्षिक पास से क्या होगा फायदा?
इस वार्षिक पास के लागू होने से उन लोगों को सबसे ज़्यादा फायदा होगा, जिन्हें रोज़ाना या नियमित रूप से टोल प्लाजा से गुजरना पड़ता है। अब उन्हें बार-बार टोल का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। एक बार वार्षिक पास लेने के बाद, वे सालभर तक निर्धारित टोल प्लाजा पर बिना रुके यात्रा कर पाएंगे।
ऐसे लें वार्षिक पास और जानें बचत
कैसे मिलेगा?: FASTag वार्षिक पास को खरीदने के लिए, यूज़र्स को अपने बैंक के FASTag पोर्टल या भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहाँ से वे अपने वाहन के लिए यह पास खरीद पाएंगे।
कितनी होगी बचत?: इस पास का उद्देश्य मासिक और दैनिक टोल खर्च को कम करना है। हालांकि, पास की कीमत और इससे होने वाली बचत हर टोल प्लाजा के लिए अलग-अलग हो सकती है, लेकिन यह मासिक पास से ज़्यादा किफायती होगा।
कहां-कहां करेगा काम?: यह पास उन टोल प्लाजा पर मान्य होगा जिन्हें इस योजना के तहत शामिल किया गया है। यात्रा करने से पहले यूज़र्स को यह जांच लेना चाहिए कि उनका रूट इस वार्षिक पास के अंतर्गत आता है या नहीं।
सरकार का यह कदम डिजिटल टोल भुगतान को बढ़ावा देने और देशभर में सड़क यात्रा को और भी आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
नई दिल्ली। 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से एक महत्वाकांक्षी और ऐतिहासिक योजना की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारत 2035 तक ‘सुदर्शन चक्र’ नामक एक उन्नत राष्ट्रीय सुरक्षा कवच तैयार करेगा, जो भविष्य की तकनीक-आधारित चुनौतियों और दुश्मनों के हमलों से देश की रक्षा करेगा।
प्रधानमंत्री ने बताया कि यह मिशन भगवान श्रीकृष्ण के पौराणिक ‘सुदर्शन चक्र’ से प्रेरित है। महाभारत का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से सूर्य को ढककर अर्जुन को अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने का अवसर दिया, उसी तरह भारत का यह सुरक्षा कवच भी किसी भी दुश्मन के हमले को निष्क्रिय कर उससे कई गुना ताकत के साथ पलटवार करने में सक्षम होगा।
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि इस मिशन से जुड़ी पूरी रिसर्च, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग भारत में ही होगी, और इसे देश के युवाओं और वैज्ञानिकों के हाथों से तैयार किया जाएगा। उनका कहना था कि यह न केवल भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करेगा बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्यों को भी नई गति देगा।
प्रधानमंत्री ने बताया कि ‘सुदर्शन चक्र’ मिशन एक अत्याधुनिक हथियार प्रणाली होगी, जो दोहरी क्षमता से लैस होगी — पहला, दुश्मन के किसी भी हमले को रोकना; और दूसरा, निर्णायक एवं प्रभावी प्रहार करना। इसके डिजाइन और विकास में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, उन्नत राडार तकनीक, मिसाइल डिफेंस और स्पेस-आधारित निगरानी प्रणालियों का एकीकरण किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस मिशन के लिए कुछ मूलभूत सिद्धांत तय किए जाएंगे ताकि आने वाले 10 वर्षों में इसे पूर्ण क्षमता के साथ लागू किया जा सके। यह परियोजना भारत को न केवल रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगी बल्कि वैश्विक स्तर पर एक तकनीकी महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगी।
प्रधानमंत्री की इस घोषणा का देशभर में स्वागत किया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ‘सुदर्शन चक्र’ मिशन भारत की सामरिक क्षमता में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है और आने वाले दशकों तक देश की सीमाओं को अजेय बनाए रखने में मदद करेगा।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने युवाओं से भी आह्वान किया कि वे इस परियोजना में अपनी भूमिका निभाएं और आने वाले भारत के सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने में योगदान दें। उनका कहना था कि जब विज्ञान, तकनीक और राष्ट्रीय संकल्प एक साथ आते हैं, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता।
नई दिल्ली। भारतीय संसद में मंगलवार को पेश हुई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट में भारतीय रेलवे की वित्तीय स्थिति से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 में भारतीय रेलवे ने यात्री और माल ढुलाई से अपनी आय में ज़बरदस्त वृद्धि दर्ज की है।
आय में 25.51% का उछाल
कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2022-23 में भारतीय रेलवे की कुल कमाई 2,39,982.56 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वित्त वर्ष (2021-22) की तुलना में 25.51 प्रतिशत ज़्यादा है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से यात्री और माल ढुलाई दोनों से होने वाली आय में सुधार को दर्शाती है, जो कोविड-19 के बाद अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने का संकेत है।
खर्च में भी हुई 11.34% की बढ़ोतरी
हालांकि, रेलवे की आय में वृद्धि के साथ-साथ उसके खर्च में भी इज़ाफ़ा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022-23 में रेल मंत्रालय का कुल व्यय 4,41,642.66 करोड़ रुपये रहा। यह खर्च पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 11.34 प्रतिशत अधिक है। इस कुल खर्च में 2,03,983.08 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) और 2,37,659.58 करोड़ रुपये का राजस्व व्यय (Revenue Expenditure) शामिल है।
कैग की यह रिपोर्ट रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण विश्लेषण है, जो यह दर्शाता है कि रेलवे अपनी आय बढ़ाने में सफल रही है, लेकिन साथ ही बुनियादी ढांचे के विकास और परिचालन के लिए उसका खर्च भी बढ़ा है।
दिल्ली। एअर इंडिया ने ऐलान किया है कि अगले महीने से दिल्ली से वाशिंगटन डीसी के बीच सीधी फ्लाइट का संचालन बंद कर दिया जाएगा। कंपनी का कहना है कि यह फैसला कई परिचालन कारणों और बेड़े में कमी के चलते लिया गया है। यह रोक 1 सितंबर से लागू होगी।
एअर इंडिया ने बताया कि उसके कई बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान उपलब्ध नहीं होंगे, क्योंकि कंपनी 26 विमानों में रेट्रोफिट का काम कर रही है। यह कार्यक्रम जुलाई से शुरू हुआ है और 2026 के अंत तक चलेगा। इस दौरान कई विमान लंबे समय तक उड़ान के लिए उपलब्ध नहीं रहेंगे।
एअर इंडिया ने बताया कि पाकिस्तान के एयरस्पेस के बंद होने से उसकी लंबी दूरी की उड़ानों पर असर पड़ा है। इससे फ्लाइट रूट लंबे हो गए हैं और संचालन मुश्किल हो गया है। कंपनी ने कहा कि जिन यात्रियों की वाशिंगटन उड़ानें 1 सितंबर के बाद बुक हैं उनसे संपर्क कर उन्हें दूसरे विकल्प दिए जाएंगे, जैसे दूसरी फ्लाइट पर रीबुकिंग या पूरा रिफंड मिलेगा।
हालांकि, यात्रियों के पास अभी भी एक-स्टॉप फ्लाइट का विकल्प रहेगा जिसमें वे न्यूयॉर्क, नेवार्क, शिकागो या सैन फ्रांसिस्को के जरिए वाशिंगटन जा सकेंगे। इसके लिए एअर इंडिया ने अलास्का एयरलाइंस, यूनाइटेड एयरलाइंस और डेल्टा एयरलाइंस से साझेदारी की है।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत प्रति LPG सिलेंडर पर ₹300 की सब्सिडी को वित्त वर्ष 2025-26 तक जारी रखने के केंद्रीय मंत्रिमंडल के निर्णय का स्वागत करते हुए इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद दिया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर देश की करोड़ों बहनों के लिए यह एक सच्चे मायनों में मंगलकारी उपहार है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने माताओं-बहनों की रसोई की चिंता समझते हुए, उनके स्वास्थ्य और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। यह निर्णय मातृशक्ति के सम्मान की भावना का जीवंत उदाहरण है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ₹12,000 करोड़ की लागत की इस पहल से 10.33 करोड़ उज्ज्वला लाभार्थी परिवारों को सीधे राहत देगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी माताएँ और बहनें परिवार की रीढ़ हैं। उनके श्रम को सम्मान देना, उनकी चिंता को समझना और उन्हें सुविधा देना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्र सरकार के इस फैसले को गरीबों, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की भी लाखों बहनें इस निर्णय से लाभान्वित होंगी जिससे उनके रसोई के खर्च का बोझ कम होगा, और धुएँ से मुक्त, सुरक्षित व स्वास्थ्यप्रद जीवन प्राप्त होगा।
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां आज चलती बस के ऊपर पेड़ गिर गया। इस दर्दनाक हादसे में बस में सवार 5 लोगों की मौत हो गयी। मृतकों में 4 महिला और ड्राइवर शामिल हैं। वहीं हादसे में कई यात्री गंभीर रूप से घायल हुए है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंचकर राहत-बचाव कार्य शुरू की। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
जानकारी के मुताबिक 60 लोगों से भरी बस बाराबंकी से हैदरगढ़ के लिए रवाना हुई थी। बताया जा रहा है कि हरख चौराहे के पास बस के सामने एक जानवर आ गया। जिसे बचाने के चक्कर में बस पहले बिजली के पोल से टकराई, सड़क किनारे पेड़ से जा भिड़ी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पेड़ बस के ऊपर ही गिर गया। इस हादसे के बाद बस में फंसे लोगों के बीच चीख-पुकार मच गयी। यात्रियों की चीख सुनकर राहगीर और आसपास के मौके पर पहुंचे और मदद का प्रयास शुरू किया गया।
इस हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंच गई। जेसीबी की मदद से पेड़ को हटवाया गया। करीब 1 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला। हादसे में मृतकों की पहचान बाराबंकी निवासी शिक्षा मल्होत्रा (टीचर), मीना श्रीवास्तव (ADO), जूही सक्सेना (ADO), रकीबुल निशा (55) और बस चालक संतोष सोनी के रूप में हुई है। जूही सक्सेना हरख ब्लॉक में सहायक विकास अधिकारी (सांख्यिकी) थीं, जबकि मीना श्रीवास्तव हरख ब्लॉक में ही सहायक विकास अधिकारी (वेलफेयर) तैनात थीं।
नई दिल्ली। देश में खेलों के संचालन को लेकर तैयार किए गए नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल 2025 में एक बड़ा बदलाव करते हुए BCCI (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) को RTI (सूचना का अधिकार अधिनियम) के दायरे से बाहर रखा गया है। खेल मंत्रालय ने इस बिल में स्पष्ट किया है कि सिर्फ वही खेल संगठन RTI के अंतर्गत आएंगे, जो सरकारी अनुदान या सहायता लेते हैं।
BCCI पर नहीं होगा RTI का असर
BCCI किसी भी प्रकार का सरकारी फंड नहीं लेता, इसी कारण वह RTI के दायरे में नहीं आएगा। हालांकि, पिछले कई वर्षों से सामाजिक कार्यकर्ता और खेल जगत से जुड़े संगठन BCCI को RTI के तहत लाने की मांग करते रहे हैं, ताकि उसकी कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
संसद में पेश हुआ था बिल
खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने 23 जुलाई को लोकसभा में नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस बिल, 2025 पेश किया था। इस बिल का उद्देश्य देश में खेल संघों की जवाबदेही तय करना और खेलों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना है।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली क्षेत्र में सोमवार रात को भीषण बादल फटा की घटना सामने आई है। इस हादसे में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 50 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। पहाड़ों से आए मलबे और पानी के सैलाब ने कई घरों को पूरी तरह तबाह कर दिया है।
घटनास्थल की स्थिति:
धराली गांव में देर रात अचानक तेज गर्जना के साथ भारी बारिश हुई और कुछ ही मिनटों में पहाड़ों से मलबे और बोल्डरों का भयानक सैलाब नीचे गांव की ओर बहने लगा। मलबे में कई मकान, दुकानें और वाहन बह गए हैं। गांव में बिजली और संचार सेवा भी पूरी तरह ठप हो गई है।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी:
राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), पुलिस और प्रशासन की टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है।
अब तक 10 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।
सेना और ITBP की मदद भी ली जा रही है।
लापता लोगों की तलाश के लिए ड्रोन और स्निफर डॉग्स की मदद ली जा रही है।
घायलों की हालत:
करीब एक दर्जन लोग घायल हैं, जिनमें से कुछ को गंभीर हालत में उत्तरकाशी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सरकार की प्रतिक्रिया:
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने इस घटना पर शोक जताया है और राहत कार्यों की निगरानी के निर्देश दिए हैं। प्रभावितों को तत्काल अस्थायी शरण और राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
CM का बयान: “धराली में बादल फटने की घटना दुखद है। मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख की राहत राशि दी जाएगी और लापता लोगों की खोज में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।”
अगर आप भी घरेलू गैस सिलेंडर उपभोक्ता हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। सरकार ने एलपीजी गैस सिलेंडर वितरण से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए निर्देशों के अनुसार, 15 अगस्त 2025 तक सभी उपभोक्ताओं को अपने गैस कनेक्शन की ई-केवाईसी पूरी करना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसा नहीं करने पर 15 अगस्त के बाद गैस सिलेंडर की आपूर्ति रोक दी जाएगी।
सलूणी उपमंडल के अंतर्गत आने वाले गैस एजेंसी क्षेत्रों में अब तक 6000 से अधिक उपभोक्ताओं ने ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी नहीं की है। गैस एजेंसी प्रबंधन ने कई बार उपभोक्ताओं से आग्रह किया, गैस कार्ड पर रिमार्क भी डाले, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग एजेंसी नहीं पहुंचे हैं।
सुरक्षा के लिहाज से पाइप बदलवाना भी जरूरी
नियमों के तहत उपभोक्ताओं को हर 5 वर्ष में अपने गैस कनेक्शन के पाइप की जांच और बदलाव कराना भी अनिवार्य है। गैस एजेंसियों ने अब इस नियम को लेकर भी सख्ती दिखाने का निर्णय लिया है।
मोबाइल नंबर का पंजीकरण भी जरूरी
ई-केवाईसी के साथ-साथ उपभोक्ताओं को अपने मोबाइल नंबर को गैस एजेंसी में पंजीकृत कराना होगा। इससे उन्हें बुकिंग, डिलीवरी और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां समय पर मिलती रहेंगी।
क्या करें उपभोक्ता
15 अगस्त 2025 से पहले नजदीकी गैस एजेंसी जाकर ई-केवाईसी पूरी करें।
अपना मोबाइल नंबर पंजीकृत कराएं।
गैस पाइप की समय-समय पर जांच कराएं और जरूरत अनुसार उसे बदलवाएं।